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वास्तु : इन यंत्रों के उपयोग से जीवन में आएंगी अधिक खुशियां

हमारी संपूर्ण प्रकृति पंच तत्व अर्थात जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि और आकाश पर आधारित हैं। इन्हीं पंचतत्वों में संतुलन का कार्य वास्तु शास्त्र करता हैं। जिस भी स्थान पर पंचतत्व एक दूसरे के साथ मिलकर कार्य नहीं करते हैं। उस स्थान का वास्तु बिगड़ा हुआ होता हैं। वास्तव में पंचतत्वों से संबंधित एक शास्त्र सम्मत विज्ञान हैं। इस शास्त्र में दिशाओं और तत्वों के द्वारा शुभता प्राप्त की जाती हैं। वास्तुशास्त्र यह कहता हैं कि यदि वास्तु सम्मत स्थान पर रहा जाए तो निश्चित रुप से परिणाम सुखद प्राप्त होते हैं।

फ्यूचर पाॅइन्ट | 09-Jun-2018

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वास्तु शास्त्र में ग्रहों की भूमिका का महत्व

सामान्य तौर पर हम देखते हैं, मकान का निर्माण कराना भी स्वयं के अनुकूल ग्रह-स्थिति के कारण ही संभव हो पाता है। समान आय-व्यय वाले दो व्यक्तियों में केवल एक ही स्वयं का मकान बना पाता है, दूसरा नहीं, क्यों? कुछ व्यक्ति पुश्तैनी मकान-जमीन भी बेच डालते हैं। कुछ का जीवन, किराये के मकानों में ही व्यतीत हो जाता है। कुछ व्यक्तियों को बना-बनाया मकान धनादि मिल जाता है। कुछ व्यक्ति दूसरों के सहयोग या कर्ज से मकान बना पाते हैं। स्पष्ट है कि यह सब हमारे ग्रहों एवं उनकी अनुकूलता और प्रतिकूलता पर शत प्रतिशत निर्भर करता है।

फ्यूचर पाॅइन्ट | 14-Jun-2018

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