वास्तु के अनुसार कैसे बनायें अपना घर

By: Future Point | 25-Feb-2020
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वास्तु के अनुसार कैसे बनायें अपना घर

Vastu Shastra भारत की प्राचीन वास्तु विद्या है| प्राचीन भारतीय शास्त्रों में वास्तु पुरुष की तुलना एक देवता के रूप में की गई है| प्राचीन मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक वास्तु की अपनी ऊर्जा होती है, जब कोई इंसान घर में रहने लग जाता है, तो उस घर का वास्तु उसे प्रभावित करने लग जाता है| यदि उस घर का वास्तु सकारात्मक हो तो प्रभाव भी सकारात्मक ही पड़ते है, परन्तु यदि वास्तु नकारात्मक हो तो प्रभाव भी नकारातमक ही होंगे| वास्तुशास्त्र ऐसी विधा है जो दिशाओं के स्वभाव के अनुसार घर बनाने का सुझाव देती है ताकि आपके घर का हर एक कोना दिशाओं के अनुकूल बनें जिससे हर कोने में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे, लेकिन जब वास्तु के अनुसार घर नहीं बनवाया जाता है तो घर का जो क्षेत्र दिशा के अनुकूल नहीं होता है वहां नकारात्मकता बढ़ती जाती है, जो परिवार और घर की सुख-समृद्धि में अड़चन पैदा करने लगती है। ऐसे में बेहतर तो यही होगा कि घर बनाते समय ही वास्तु का ध्यान रखा जाएँ और हर कोना दिशा को ध्यान में रखकर ही घर का निर्माण किया जाए| घर वास्तु सिद्धांतों के अनुसार नहीं बनाया गया हो तो नकारात्मक ऊर्जा घर में रहती है, जिससे घर में कलह का वातावरण और मालिक को आर्थिक नुकसान होता हैं|

वास्तु शास्त्र में मुख्य आठ दिशाएं मानी गई हैं, इसके अलावा वास्तुशास्त्र के अनुसार घर या ऑफिस के बिलकुल मध्य का स्थान उसमे रहने वाले व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है इसलिए इस केंद्र यानी मध्य स्थान को विशेष महत्व दिया जाता है। घर की दक्षिण दिशा का सम्बन्ध कैरियर से होता है और दक्षिण-पश्चिम दिशा व्यक्ति की कुशलता, बुद्धिमत्ता और ज्ञान से सम्बंधित होती है। पश्चिम दिशा का सम्बन्ध व्यक्ति के पारिवारिक संबंधों से होता है। उत्तर-पश्चिम दिशा धन और समृद्धि से जुड़ी होती है। और उत्तर दिशा का सम्बन्ध सामाजिक सम्मान से होता है, जबकि उत्तर-पूर्व दिशा प्यार और पति-पत्नी के संबंधों को प्रभावित करती है। घर की पूर्व दिशा बच्चों से सम्बंधित होती है। उनके विकास, सोच और स्वास्थ्य को ये दिशा प्रभावित करती है। जबकि दक्षिण-पूर्व दिशा उन करीबी लोगों से जुड़ी होती है जो हर परिस्थिति में आपकी सहायता करने के लिए तैयार रहते हैं। घर के सामने तिराहा या चौराहा भी नहीं होना चाहिए क्योंकि ये भी नकारात्मकता को बढ़ाने वाला होता है।

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Vastu के अनुसार कैसा होना चाहिए मकान का नक्शा-

घर बनाते समय हमें बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए| जैसे- वास्तु के अनुसार पहले हमें घर का नक्शा त्यार करवा लेना चाहिए| घर का नक्शे में कौन सा स्थान कहाँ होना चाहिए यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए| घर बनाने से पहले नक्शा बनाना बहुत अनिवार्य है| क्योंकि वास्तु के अनुसार नक्शा बनाने से वास्तु दोषों से बचा जा सकता है, और घर में सुख समृद्धि लाई जा सकती है|

मकान चौकोर तथा आयताकार होना चाहिए, आयताकार मकान में चौड़ाई की दुगुनी से अधिक लंबाई नहीं होनी चाहिए, कछुए के आकार वाला घर पीड़ादायक है, तीन तथा छ: कोन वाला घर आयु का क्षयकारक है, और आठ कोन वाला घर रोग उत्पन्न करता है|

घर का मुख्य द्वार (Vastu for Entrance Gate) -

घर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा में होना चाहिए, ऐसा होने पर घर में सुख समृद्धि के मार्ग खुलते है जबकि दक्षिण दिशा में घर का मुख्य द्वार होना मुश्किलों को बढ़ावा देता है, और घर के मुख्य द्वार के सामने कोई बिजली का खम्भा या पेड़ नहीं होना चाहिए, इन्हें अवरोधक माना गया है,

रसोई का सही स्थान (Vastu for Kitchen) -

रसोई का सम्बन्ध अग्नि देवता से होता है इसीलिए आग्नेय कोण में रसोई घर बनाना चाहिए, आग्नेय कोण दक्षिण-पूर्व के मध्य वाली दिशा में होता है,

पूजा घर (Pooja Ghar) -

घर में पूजा के स्थान ईशान कोण में होना चहिये, जो उत्तर-पूर्व के मध्य वाली दिशा में होता है ऐसा करने से देवताओं की कृपा सदैव घर के लोगो पर बनी रहती है,

पानी के टैंक का स्थान (Water Tank Vastu) -

घर में पानी जमा करने का कोण ईशान कोण होता है जो उत्तर-पूर्वी दिशा में होता है। इसलिए पानी जमा करने का स्थान इसी दिशा में बनाना चाहिए।

शौचालय का सही स्थान (Vastu for Toilet) -

शौचालय घर के उत्तर-पश्चिम में स्थित हो तो ज्यादा बेहतर रहता है, शौचालय, रसोई और पूजा का कमरा एक दूसरे के निकट नहीं होना चाहिए|

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उत्तर दिशा में खुली जगह रखें-

जब आप घर बनवा रहे हैं तब ध्यान रखें कि पश्चिम की तुलना में पूर्व दिशा में और दक्षिण की तुलना में उत्तर दिशा में ज्यादा खुली जगह होनी चाहिए।

सीढ़ियों की संख्या विषम-

वास्तु शास्त्र में माना गया है कि सीढ़ी के पायदानों की संख्या विषम 21, 23, 25 होनी चाहिए।

खिड़कियां उत्तर या पूर्व में हो-

घर के ज्यादातर कमरों की खिड़कियां और दरवाजे उत्तर या पूर्व दिशा में खुलने चाहिए।

घऱ में कबाड़ न रखें-

घऱ में कबाड़ का होना शनि की निशानी होती है। इसलिए कहते हैं कि घऱ में कबाड़ नहीं होना चाहिए। यदि घर में कबाड़ अधिक होता है तो कोई ना कोई समस्या घर में आती रहती है।

बेडरूम दक्षिण और पश्चिम दिशा के बिच में होना चाहिए|

दक्षिण और पश्चिम की दीवार दर्पण के लिए शुभ मानी जाती है,

रसोई, चक्की, फ्रिज, अलमारी और अन्य भारी सामान दक्षिण और पश्चिम दीवार की ओर होना चाहिए,

दीवार में अलमारी घर के दक्षिणी या पश्चिमी दिशा में होनी चाहिए,

शौचालय की सीट केवल उत्तर-दक्षिण में होनी चाहिए, यह पूर्व-पश्चिम में नहीं होनी चाहिए,

बड़े पेड़ उत्तर या पूर्व में नहीं उगाने चाहिए, वे घर के दक्षिण या पश्चिम की ओर होने चाहिए,

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