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वक्री गुरु का कुम्भ राशि में गोचर (20 जून, 2021), कैसा रहेगा आपकी राशि के लिए

By: Future Point | 20-Jun-2021
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वक्री गुरु का कुम्भ राशि में गोचर (20 जून, 2021), कैसा रहेगा आपकी राशि के लिए

हिन्दू धर्म के पौराणिक मान्य ग्रन्थों में बृहस्पति को देवों के गुरु के रूप में स्थान प्राप्त है। वैदिक ज्योतिष में गुरु को ज्ञान और बुद्धि का कारक माना गया है। इनकी दृष्टि अमृत के समान मानी जाती है। गुरु अन्य सभी ग्रहों में सबसे विशाल और विस्तृत हैं। उन्हें सूर्य की एक परिक्रमा पूर्ण करने में लगभग ग्यारह साल और नौ महीने का समय लगता है। वहीं एक राशि का भ्रमण पूरा करने में इन्हें लगभग तेरह महीनों का समय लगता है। ज्योतिष शास्त्र में गुरु गोचर को विशेष अहमियत दी गयी है।

सभी प्रमुख नौ ग्रहों में गुरु यानि की बृहस्पति को बेहद शुभ माना जाता है। ये मुख्यतः धर्म, दर्शन, ज्ञान और संतान का कारक है एवं सभी ग्रहों में सबसे ज्यादा शुभ फल देने वाला है। ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह को धनु एवं मीन राशि का स्वामी माना जाता है। इसके अलावा गुरु कर्क राशि में उच्च एवं मकर राशि में नीच का होता है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति बलवान अवस्था में रहता है तो इसका प्रभाव जातक के परिवार और समाज के साथ ही जीवन के हर क्षेत्र में दिखाई देता है।

जिस जातक के ऊपर बृहस्पति ग्रह का प्रभाव पड़ता है, उसकी रुचि आध्यात्मिक और धार्मिक कार्यों में ज्यादा होती है। साथ ही साथ गुरु के प्रभाव से कार्यक्षेत्र में तरक्की, आर्थिक लाभ, बेहतर स्वास्थ्य और विवाह एवं संतान सुख प्राप्त होता है।

जब बृहस्पति ग्रह वक्री होता है, तो इसकी गति धीमी हो जाती है जिससे व्यक्ति निराशा की तुलना में ज्ञान अधिक प्राप्त करता है। सौभाग्य, शिक्षा, दर्शन और अभ्यास को दर्शाने वाला यह ग्रह जब वक्री होता है तो व्यक्ति आंतरिक विकास की ओर बढ़ता है। बृहस्पति ग्रह जिन लग्नों में कारक होता है। उन लग्नो में वक्री होकर शुभ फल प्रदान करते है।

जब गुरु कुंभ राशि में वक्री होता है, तो हम जिन कामों को करना चाहते हैं या जिन क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहते हैं उनकी समीक्षा करने का हमें समय मिलता है, बृहस्पति का वक्र होना आपके निर्णय लेने की क्षमता, बड़े बुजूर्ग अथवा वरिष्ठ कर्मियों, सहयोगियों या अधिकारियों के सहयोग को प्रभावित कर सकता है।

बृहस्पति ग्रह 20 जून, 2021 को कुंभ राशि में वक्री होंगे और 14 सितंबर, 2021 को यह मार्गी गति शुरु करेंगे। इसके बाद यह मकर राशि में प्रवेश करेंगे। आईये अब जानते हैं गुरु वक्री गोचर 2021 का सभी बारह राशि के जातकों पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है।

आपकी कुंडली के अनुसार बृहस्पति ग्रह आपके लिये किस तरह लाभकारी हो सकते हैं जानने के लिये फ्यूचर पॉइंट पर देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से परामर्श करें। अभी बात करने के लिये यहां क्लिक करें।

मेष राशि (Aries)

वक्री गुरु का परिवर्तन मेष राशि से ग्यारहवें भाव में हो रहा है। गुरु ग्रह का इस भाव में स्थापित होना आपके लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है। इस दौरान भाग्य आपका भरपूर साथ देगा जिससे आप नयी सफलता और उपलब्धि को प्राप्त कर सकते हैं। गोचर की इस अवधि के दौरान आपको आर्थिक मजबूती मिलेगी और हर दिशा से धन लाभ होगा। आर्थिक मजबूती मिलने से मानसिक तनाव दूर होगा और परिवार में भी उत्साह बरक़रार रहेगा। काफी समय से अटका कार्य इस समय पूरा हो सकता है। लेकिन इसके आपको परिश्रम करना होगा। व्यापारी जातकों के लिए समय अच्छा है व्यापार में आपको लाभ हो सकता है। इसके साथ ही जो जातक नौकरीपेशा हैं उन्हें भी करियर में सफलता मिलेगी। गोचर की इस अवधि के दौरान आपका स्वास्थ्य काफी बेहतर रहेगा। यदि आप काफी लंबे समय से बीमार थे तो गोचर की इस अवधि के दौरान आपको स्वास्थ्य लाभ हो सकता है।

उपाय :- भगवान् शिव का रुद्राभिषेक करवाना आपके लिए फलदायी रहेगा।

वृषभ राशि (Taurus)

इस गोचर के दौरान बृहस्पति आपकी राशि से दसवें भाव में स्थापित होंगें। इस भाव में गुरु का होना नौकरी में तरक्की और बदलाव दिखा रहा है। यह परिवर्तन आपको और अधिक कार्य उन्मुख बनाएगा, अब आपका ध्यान टारगेट अर्थात सिर्फ काम को सुचारू रूप से, नवीनता और सृजनात्मकता से कैसे किया जाए इस तरफ रहेगा, जिससे सफलता के साथ -साथ उच्च अधिकारियों का सम्मान और प्रोत्साहन भी आपको प्राप्त होगा। बिज़नेस या काम के सिलसिले में कहीं बाहर जाना पड़ सकता है और संभव है कि आपको घर भी बदलना पड़ें। परिवार में माता की ख़राब तबीयत में सुधार देखने को मिल सकता है, लेकिन इस दौरान आपको अपनी सेहत का भी विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होगी। गुरु गोचर के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानी आपको हो सकती है। आर्थिक दृष्टिकोण से गुरु गोचर आपके लिए फलदायी साबित होगा।

उपाय :- विशेष लाभ के लिए प्रतिदिन अपने घर में कपूर का दीपक जलाएं।

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मिथुन राशि (Gemini)

मिथुन राशि से वक्री गुरु का परिवर्तन नवमें भाव में हो रहा है। इस दौरान जो जातक प्रोफेशनल फील्ड में हैं उन्हें नए अवसरों की प्राप्ति होगी, साथ ही आप की प्रबंधन क्षमता में भी इज़ाफा होगा। सीनियर्स के साथ जो भी आप के गतिरोध हैं वो समाप्ति की ओर अग्रसर होंगे। आप का खुद पर विश्वास मजबूत होगा जिससे आप स्वयं निर्णय लेने में सक्षम होंगे। इस समय में आपको अपने आध्यात्मिक पहलुओं पर ध्यान देना होगा। इसके साथ ही जो जातक इस समय प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं वो अपने पढ़ाई पर विशेष ध्यान दें। परिवार के लिए भी समय कुछ परेशानी वाला हो सकता है।

उपाय- विष्णु सहत्रनाम का पाठ करना आपके लिए बहुत शुभ रहेगा।

कर्क राशि (Cancer)

कर्क राशि से वक्री गुरु का परिवर्तन आठवें भाव में हो रहा है। इस समय अवधि में नौकरी पेशा और व्यवसायी जातकों के लिए अड़चनें पैदा हो सकती है। यूँ तो आप सामान्य रूप से ही कार्य करेंगे लेकिन कोई भी काम आपके अनुकूल होने में कठिनाई आ सकती है। गुरु गोचर के दौरान आपको यही सलाह दी जाती है कि, मेहनत और लगन से काम करें। इस समय कर्क जातकों को अपने कार्य के साथ ही सेहत पर भी ध्यान देना होगा। किसी भी तरह की लापरवाही आपको भारी पड़ सकती है। गुरु गोचर का प्रभाव आपके जीवन पर नकारात्मक रूप से देखने को मिल सकता है। इसके परिणामस्वरुप आपको स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से दो चार होना पड़ सकता है। आर्थिक पक्ष कुछ कमजोर हो सकता है। ऐसे में आपको पहले से अधिक मेहनत करने की आवश्यकता होगी।

उपाय :- बृहस्पतिवार के दिन ब्राह्मणों व जरूरतमंदों को भोजन कराएं।

सिंह राशि (Leo)

गुरु गोचर के दौरान बृहस्पति आपकी राशि से सातवें भाव में विराजमान होंगें। इस समय सिंह जातक अपना कोई भी नया कार्य शुरू करने का  विचार कर सकते हैं। लेकिन निवेश से पहले पूरी जानकारी हासिल कर लें। इसके पूर्व आपको अपने सहयोगी व शुभचिंतकों से सलाह जरूर ले लेनी चाहिए। व्यापार में भी जातकों को इस अवधि में लाभ मिल सकता है। आर्थिक रूप से देखें तो गुरु गोचर के परिणाम स्वरुप आपके धन में वृद्धि होगी, और अनायास ही किसी अज्ञात स्रोत से विशेष धन लाभ होने की भी संभावना है। इस गोचर का प्रभाव आपके वैवाहिक जीवन पर सकारात्मक रूप से पड़ने वाला है। गुरु गोचर के परिणामस्वरूप आप अपने जीवनसाथी के साथ आनंदमय पल व्यतीत कर पाएंगे। साथ ही यदि आप दोनों के बीच काफी समय से कोई मतभेद चला आ रहा है तो, गुरु के मंगलमय प्रभाव से वो भी दूर हो सकता है। इस दौरान आप वैवाहिक जीवन का असीम सुख प्राप्त करने में सफल रहेंगे।

उपाय- सूर्य को अर्घ्य देना, सूर्याष्टकम का पाठ करना आपके लिए बहुत शुभ रहेगा।

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कन्या राशि (Virgo)

कन्या राशि से वक्री गुरु का परिवर्तन छठे भाव में हो रहा है। जो जातक प्रबंधन क्षेत्र , टीचिंग या कंसल्टेंसी के प्रोफेशन और अपने कौशल से संबंधित किसी काम में हैं, उनके लिए यह गुरु का वक्री गोचर अनुकूल रहेगा, उन्हें अच्छी सफलता मिलेगी। जो जातक अपना व्यवसाय कर रहे हैं, उन्हें अपने संसाधनों के अनुरूप ही निर्णय लेने होंगे, किसी भी प्रकार के लोन या कर्ज लेने से बचना चाहिए, अन्यथा परेशानिओं का सामना करना पढ़ सकता है। आपकी राशि में गुरु के छठें भाव में विराजमान होने से इसका प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर विपरीत रूप से पड़ सकता है। किसी प्रकार का मानसिक तनाव इस दौरान आपको परेशान कर सकता है, लिहाजा आपको सलाह दी जाती है कि किसी भी कठिन परिस्थिति में धैर्य और संयम बरक़रार रखें। इस दौरान आपका शत्रु पक्ष प्रबल रहेगा, लिहाजा इस समय आपको ऐसे लोगों से दूर रहने में ही भलाई है जिनसे आपकी बनती ना हो।

उपाय :- गुरुवार के दिन गौमाता को गुड़ और गेहूं खिलाएं।

तुला राशि (Libra)

गुरु गोचर के दौरान बृहस्पति आपकी राशि से पांचवें भाव में विराजमान होंगें। गुरु गोचर के दौरान आप नए लोगों के संपर्क में आएँगे जिससे आपको विशेष लाभ प्राप्त होगा। कार्यक्षेत्र और व्यापार में किये गए प्रयासों का आपको विशेष लाभ मिलेगा, जिससे जीवन में समृद्धि आएगी। गोचर के इस काल में आप सेवा और परोपकार के कार्यों में विशेष रुचि ले सकते हैं। संभव है कि किसी धार्मिक संस्था से जुड़कर समाज कल्याण में अपना सहयोग दें। नए शादीशुदा जोड़ों को संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है। गुरु गोचर के इस प्रभाव से आपके सोचने समझने की क्षमता में बढ़ोत्तरी होगी। यह समय विद्यार्थियों के लिए भी शुभ समाचार ले कर आएगा, उच्च शिक्षा में आ रही दिक्कतें दूर होंगी, जो विद्यार्थी शोध कार्य से जुड़े हुए हैं, उन्हें बहुत अच्छी सफलता की प्राप्ति होगी। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह समय बहुत अच्छा रहेगा, वक्री गुरु की लग्न पर दृष्टि एक रक्षा कवच का काम करेगी।

उपाय :- बृहस्पतिवार के दिन जरूरतमंद विद्यार्थियों को शिक्षा की सामग्री भेंट करें।

वृश्चिक राशि (Scorpio)

वृश्चिक राशि से वक्री गुरु का परिवर्तन चौथे भाव में हो रहा है जो कि आपके सुख का घर है। गुरु का आपकी राशि के चौथे भाव में विराजमान होना आपके लिए कुछ ख़ास शुभ संकेत नहीं दे रहा है। लिहाजा इस दौरान निजी जीवन में कठिनाईयों का समाना करना पड़ सकता है। विवाहित जातकों की जीवनसाथी के साथ मतभेद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। आपको सलाह दी जाती है कि इस तरह की स्थिति उत्पन्न होने पर धैर्य से काम लें वर्ना बात बिगड़ सकती है। आर्थिक रूप से यह समय आपके लिए भाग्यशाली रहेगा और अपने कड़े प्रयासों से आप सफलता भी अर्जित करेंगे। माता के साथ आपके संबंधों में कुछ उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। आपकी मानसिक शांति बिगड़ सकती है, वहीं जिन जातकों के पास वाहन है उनके वाहन में भी कोई खराबी आने की संभावना है। आप परिवार की मदद से किसी प्रॉपर्टी को खरीदने पर विचार करेंगे। हालांकि आपके घरेलू खर्च में वृद्धि होगी, क्योंकि आप घर पर अपना अच्छा-खासा धन खर्च करते दिखाई देंगे।

उपाय :- बृहस्पतिवार के दिन उत्तम गुणवत्ता वाला पुखराज रत्न अपनी तर्जनी उंगली में धारण करें।

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धनु राशि (Sagittarius)

धनु राशि से गुरु का परिवर्तन तीसरे भाव में हो रहा है। इसे पराक्रम, साहस, अभिलाषा और रुचि का स्थान माना जाता है। यह समय कौशल को और निखारने का समय है, क्योंकि यह समय आपको आपके कौशल के अनुरूप अवसर प्रदान करेगा। यह समय आपके लिए स्वयं को खोजने का भी समय है, जो भी चीज़ें आपको प्रिय हैं उनको करें क्योंकि जितना आप अपने पसंद की चीजें करेंगे उतना खुद को आप उन्मुक्त पाएंगे जिससे आपकी निर्णय क्षमता काफी अच्छी होगी। कार्यक्षेत्र में परिवर्तन की वजह से या किसी अन्य कारण से दूसरी जगह शिफ्ट होना पड़ सकता है। इस गोचर काल के दौरान आपके ऊपर आलस और सुस्ती मंडरा सकती है, सफलता प्राप्ति के लिए इन दोनों चीजों का त्याग करना आवश्यक है। इस दौरान काम के सिलसिले में यात्रा का अवसर प्राप्त हो सकता है। कार्यक्षेत्र और बिज़नेस से जुड़े जातकों के लिए ये समय कुछ ख़ास रहने वाला है।

उपाय :- रोजाना देव गुरु बृहस्पति के बीज मंत्र 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवे नम:' का एक माला जप करें।

मकर राशि (Capricorn)

बृहस्पति के इस गोचर के दौरान गुरु आपकी राशि से दूसरे भाव में स्थापित होंगें। इस भाव से आपके परिवार, वाणी, संचार आदि के बारे में विचार किया जाता है। इस गोचर के दौरान आपको कुछ अनचाहे खर्च करने पड़ सकते हैं, वित्तीय असंतुलन के कारण आपकी जीवनशैली में भी बदलाव आ सकते हैं। जो जातक काफी समय से अपने व्यवसाय में जाना चाहते थे, उनके लिए भी गुरु का वक्री होना अनुकूल है और जो पहले से अपना व्यवसाय कर रहे हैं, वह अपने संसाधनों का उपयोग सही से कर पाएंगे जिससे अच्छा मुनाफ़ा होने की उम्मीद है। इस समय में आपका सारा ध्यान धन संचय पर होना चाहिए। परिवार में छोटे भाई-बहनों का प्रेम मिलेगा और आप उन्हें अपना हरसंभव सहयोग भी करेंगे। माता का स्वास्थ्य कुछ कमजोर रह सकता है, ऐसे में उनका ध्यान रखें।

उपाय :- प्रत्येक बृहस्पतिवार के दिन पीपल के वृक्ष को बिना छुए जल अर्पित करें।

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कुंभ राशि (Aquarius)

कुंभ राशि वालों के लिए वक्री गुरु का परिवर्तन आपकी ही राशि में हो रहा है। इस राशि के जातकों को इस समय अपने कार्य को पूरा करने में अपना शत प्रतिशत देना होगा। ऐसा न करने पर आपका काम अटक सकता है। व्यापारियों के लिए भी समय समान रहेगा। हर कार्य को गंभीरता से लें। लेकिन यह गोचर उन जातकों के लिए बहुत शुभ रहेगा, जिनका इम्पोर्ट / एक्सपोर्ट का काम है और जो लोग विदेश की किसी कंपनी में काम करते हैं। आपकी आध्यात्मिक, धार्मिक क्रियाकलापों में रुचि बढ़ेगी, इसमें खूब बढ़ चढ़कर भाग लेंगे। परन्तु स्वास्थ्य की दृष्टि से यह समय थोड़ा कमज़ोर रह सकता है, थोड़ा अवांछित परिस्थियों का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए खान पान का ध्यान रखना जरूरी होगा।

 उपाय- शनि के मंत्र का जाप करना कुम्भ राशि वाले जातकों के लिए बहुत शुभ रहेगा।

मीन राशि (Pisces)

आपकी राशि से वक्री गुरु बारहवें भाव में परिवर्तन कर रहा है। इस भाव में गुरु की स्थिति होने से आपको मिलेजुले परिणाम प्राप्त होंगें। गोचर के इस काल में आप अपने निजी और कामकाज के सिलसिले में लंबी यात्रा पर जा सकते हैं। गुरु गोचर की इस अवधि में आपका धन धार्मिक प्रयोजनों पर ज्यादा खर्च हो सकता है। इस राशि के जातक अपने दुश्मनों पर इस दौरान विजय प्राप्त करेंगे। बावजूद इसके आप इस समय किसी विदेशी माध्यम से लाभ अर्जित करने में सफल रहेंगे। लेकिन आपके शत्रु आपको हर समय परेशान करते रहेंगे। यदि कोर्ट-कचहरी में कोई मामला चल रहा था तो इस समय उसका फैसला आपके विरोधी के पक्ष में आ सकता है।

उपाय :- रोजाना घर से निकलते समय मस्तक पर केसर का तिलक जरूर लगाएं।



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