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नवजात बालक की जन्म राशि कैसे जानें

नवजात बालक की जन्म राशि कैसे जानें

By: Rekha Kalpdev | 14-Mar-2018
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घर में किसी बच्चे का जन्म होना, किसी उत्सव से कम उत्साह और खुशी नहीं देता। बालक के जन्म के साथ ही घर में खुशियों की माहौल सजने लगता है् चारों ओर हंसी उल्लास की चहक सुनाई देने लगती है। सब बच्चे के माता-पिता को गले मिलकर बधाई दे रहें होते हैं। नवजात बच्चे को देखने और मिलने के लिए सभी रिश्तेदार आतूर रहते हैं। कोई उसके रंग, नैन नक्श की तुलना माता-पिता के रंग, नैन-नक्श से करता है तो कोई उस नवजात बालक पर अपने आशीर्वाद के फूलों की वर्षा करता है। एक बालक का जन्म होने के बाद जो परम्परा सबसे पहले निभाई जाती है वह बालक के जन्म का प्रथम अक्षर किसी योग्य पंडित से जाना जाता है। फिर पंडित जी अपनी कुछ जमा-घटा कर यह बताते है कि बालक के लिए यह नामाक्षर शुभ रहेगा और बालक की जन्म राशि अमुक है।

भारतीय संस्कृति में बालक के जन्म के साथ 16 संस्कारों की क्रिया शुरु हो जाती है। सबसे पहले नामकरण संस्कार में बालक का नाम रखा जाता है। फिर उसकी जन्म राशि देखी जाती है। बालक के नामाक्षर और जन्मराशि दोनों में गहरा संबंध होता है। कहा जाता है कि नाम का पहला अक्षर हर किसी के लिए बहुत अधिक महत्वपूर्ण होता है। ऐसी मान्यता है कि व्यक्ति के जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में होता है उसी राशि के अनुसार नाम का पहला अक्षर रखा जाता हैं। चंद्र की स्थिति के अनुसार ही राशि निर्धारित कि जाती है। 12 राशियों के लिए अलग-अलग अक्षर निर्धारित किये गए है। किसी व्यक्ति के नाम के पहले अक्षर से उस व्यक्ति की राशि जानकार उसके स्वभाव और भविष्य के बारे में जाना जा सकता है।


Naam Rashi

आईये सबसे पहले 12 राशियों के नाम जान लेते हैं - इन 12 राशियों के नाम मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन है। जब यह कहा जाता हैं कि बालक या जातक की जन्म राशि अमुक है तो इसके दो आशय हो सकते हैं। एक तो चंद्र स्थिति राशि और दूसरे सूर्य स्थिति राशि।

चंद्र राशि कैसे जानें-

जन्म कुंडली में चंद्रमा जिस राशि में स्थिति होता है उस राशि को जन्म राशि या चंद्र राशि के नाम से जाना जाता है। इस राशि के नक्षत्र वर्ण के अनुसार बालक का जन्माक्षर निर्धारित किया जाता है।

सूर्य राशि कैसे जानें-

जन्म कुंडली में सूर्य जिस राशि में स्थिति होता है। उस राशि को जन्म राशि या सूर्य राशि के नाम से जाना जाता है। सूर्य प्रत्येक माह में एक राशि में रहता है। इस प्रकार सूर्य १२ माह में १२ राशियों में भ्रमण करता है। सौरमास का आरम्भ सूर्य की संक्रांति से होता है। सूर्य की एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति का समय सौरमास कहलाता है। यह मास प्राय: तीस, इकतीस दिन का होता है। कभी-कभी अट्ठाईस और उन्तीस दिन का भी होता है। मूलत: सौरमास (सौर-वर्ष) 365 दिन का होता है।

12 राशियों को बारह सौरमास माना जाता है। जिस दिन सूर्य जिस राशि में प्रवेश करता है उसी दिन की संक्रांति होती है। इस राशि प्रवेश से ही सौरमास का नया महीना शुरू माना गया है। सौर-वर्ष के दो भाग हैं- उत्तरायण छह माह का और दक्षिणायन भी छह मास का। जब सूर्य उत्तरायण होता है तब हिंदू धर्म अनुसार यह तीर्थ यात्रा व उत्सवों का समय होता है। पुराणों अनुसार अश्विन, कार्तिक मास में तीर्थ का महत्व बताया गया है। उत्तरायण के समय पौष-माघ मास चल रहा होता है। जन्म कुंडली में सूर्य के अंशों को देखकर तिथि का अनुमान लगाया जा सकता है। चंद्रमा जिस राशि में स्थिति होता है, उस राशि के नक्षत्र के वर्ण के आधार पर नाम का पहला अक्षर जाना जाता है।

मेष राशि

चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ, इन अक्षरों से आने वाले नाम मेष राशि में आते हैं। चंद्रमा जब मेष राशि में हो और उस समय किसी बालक का जन्म हुआ हो तो उपरोक्त अक्षरों में से बालक के नाम का पहला अक्षर लिया जाता है।

वृष राशि

ई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू , वे, वो, इन अक्षरों से आने वाले नाम वृष राशि में आते हैं। चंद्रमा जब वृष राशि में हो और उस समय किसी बालक का जन्म हुआ हो तो उपरोक्त अक्षरों में से बालक के नाम का पहला अक्षर लिया जाता है।

मिथुन राशि

का, की, कू, घ, ड़, छ, के, को, हा, इन अक्षरों से आने वाले नाम मिथुन राशि में आते हैं। चंद्रमा जब मिथुन राशि में हो और उस समय किसी बालक का जन्म हुआ हो तो उपरोक्त अक्षरों में से बालक के नाम का पहला अक्षर लिया जाता है।


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कर्क राशि

ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो, इन अक्षरों से आने वाले नाम कर्क राशि में आते हैं। चंद्रमा जब कर्क राशि में हो और उस समय किसी बालक का जन्म हुआ हो तो उपरोक्त अक्षरों में से बालक के नाम का पहला अक्षर लिया जाता है।

सिंह राशि

मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू , टे, इन अक्षरों से आने वाले नाम सिंह राशि में आते है। चंद्रमा जब सिंह राशि में हो और उस समय किसी बालक का जन्म हुआ हो तो उपरोक्त अक्षरों में से बालक के नाम का पहला अक्षर लिया जाता है।

कन्या राशि

टो, पा, पी, पू , ष, ण, ठ, पे, पो, इन अक्षरों से आने वाले नाम कन्या राशि में आते हैं। चंद्रमा जब कन्या राशि में हो और उस समय किसी बालक का जन्म हुआ हो तो उपरोक्त अक्षरों में से बालक के नाम का पहला अक्षर लिया जाता है।

तुला राशि

रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू , ते, इन अक्षरों से आने वाले नाम तुला राशि में आते हैं। चंद्रमा जब तुला राशि में हो और उस समय किसी बालक का जन्म हुआ हो तो उपरोक्त अक्षरों में से बालक के नाम का पहला अक्षर लिया जाता है।

वृश्चिक राशि

तो, ना, नी, नू , ने, नो, या, यी, यू, इन अक्षरों से आने वाले नाम वृश्चिक राशि में आते हैं। चंद्रमा जब वृश्चिक राशि में हो और उस समय किसी बालक का जन्म हुआ हो तो उपरोक्त अक्षरों में से बालक के नाम का पहला अक्षर लिया जाता है।

धनु राशि

ये, यो, भा, भी, भू , धा, फा, ड़ा, भे, इन अक्षरों से आने वाले नाम धनु राशि में आते है। चंद्रमा जब धनु राशि में हो और उस समय किसी बालक का जन्म हुआ हो तो उपरोक्त अक्षरों में से बालक के नाम का पहला अक्षर लिया जाता है।

मकर राशि

भो, जा, जी, खी, खू , खे, खो, गा, गी, इन अक्षरों से आने वाले नाम मकर राशि में आते हैं। चंद्रमा जब मकर राशि में हो और उस समय किसी बालक का जन्म हुआ हो तो उपरोक्त अक्षरों में से बालक के नाम का पहला अक्षर लिया जाता है।

कुंभ राशि

गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा, इन अक्षरों से आने वाले नाम कुंभ राशि में आते हैं। चंद्रमा जब कुम्भ राशि में हो और उस समय किसी बालक का जन्म हुआ हो तो उपरोक्त अक्षरों में से बालक के नाम का पहला अक्षर लिया जाता है।

मीन राशि

दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची इन अक्षरों से आने वाले नाम मीन राशि में आते हैं। चंद्रमा जब मीन राशि में हो और उस समय किसी बालक का जन्म हुआ हो तो उपरोक्त अक्षरों में से बालक के नाम का पहला अक्षर लिया जाता है।

जन्मराशि का दैनिक जीवन में उपयोग

किसी देश या ग्राम में निवास करते समय, भूमि या भवन की रजिस्ट्रीकरण के समय, नौकर रखते समय, कोर्ट कचहरी, न्यायाधीन मामलों में, व्यवहार अर्थात् किसी से व्यवसायिक या मित्रता का सम्बन्ध बनाते समय नाम राशि से विचार किया जाता है।

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