Vrishchik Varsik Rashifal - जाने वृश्चिक राशि वार्षिक राशिफल के बारे में

वार्षिक राशिफल (वृश्चिक राशि)

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इस वर्ष शनि मकर राशि में तृतीय भाव में और राहु वृष राशि में सप्तम भाव में रहेंगे। 6 अप्रैल को गुरू कुम्भ राशि में चतुर्थ भाव में प्रवेश करेंगे और वक्री होकर 14 सितम्बर को मकर राशि में तृतीय भाव में गोचर करेंगे और मार्गी होकर फिर से 20 नवम्बर को कुम्भ राशि में चतुर्थ भाव में आजाएंगे। मंगल अपनी सरल गति से गोचर करेंगे। 17 फरवरी से 19 अप्रैल तक शुक्र अस्त रहेंगे।

कार्य व्यवसाय़

इस अवधि में आप अपने परिश्रम के बल पर व्यापार व कार्य क्षेत्र में सफलता प्राप्त करेंगे। 6 अप्रैल के बाद दशम स्थान पर गुरु की दृष्टि प्रभाव से व्यावसायिक उन्नति तथा उच्चाधिकारियों से लाभ प्राप्ति की सम्भावना रहेगी। आपके कार्य क्षेत्र में गुप्त शत्रुओं द्वारा रुकावट डाली जा सकती है। इसलिए बिना किसी पर विश्वास किये आप अपने बौद्धिक शक्ति के अनुसार कार्य करते रहें। व्यावसायिक क्षेत्र में अचानक उन्नति के योग बन रहे हैं। नौकरी वाले व्यक्तियों को अपने स्थान पर ही मान सम्मान प्राप्त होगा।

धन सम्पत्ति

वर्षारंभ में एकादश स्थान पर गुरू ग्रह की दृष्टि प्रभाव से धनागम मे निरन्तरता बनी रहेगी।घर परिवार में मांगलिक कार्य सम्पन्न होंगे। जिसमॆं आपका धन खर्च हो सकता है। 6 अप्रैल के बाद गुरू ग्रह का गोचर चतुर्थ स्थान में होगा। उस समय आपको भूमि, भवन, वाहन इत्यादिकी प्राप्ति हो सकती है।

परिवार एवं समाज

पारिवारिक दृष्टि से यह वर्ष अनुकूल रहेगा। तृतीय स्थान पर गुरू एवं शनि की संयुक्त गोचरीय प्रभाव से आपके पराक्रम तथा कार्य क्षमताओं का विकास होगा। समाज में आपका मान सम्मान बढ़ेगा। आपको शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी।सप्तम स्थान का राहु जीवनसाथी के स्वास्थ्य में कुछ चिन्ताकारक है। अपने जीवनसंगी से वैचारिक मतभेद तथा अनावश्यक मन-मुटाव या वाद-विवाद वाली स्थिति में पड़ने से बचें। 6 अप्रैल के बाद चतुर्थस्थ गुरू के प्रभाव से आपका घरेलू वातावरण अनुकूल रहेगा। माता पिता का सहयोग प्राप्त होगा। आपके परिवार में मांगलिक कार्य संपन्न होंगे। 14 सितम्बर के बाद सामाजिक कार्य के प्रति आपका आर्कषण बढे़गा।

संतान

यह वर्ष सन्तान की शिक्षा, माता-पिता से उनके लगाव तथा पारिवारिक समृद्धि में उनके भाग्य के प्रभाव को दिखाने वाला होगा। पिछले कुछ समय से जो कार्य अटक रहे थे वे सन्तान के योगदान अथवा सौभाग्य से बनने लगेंगे। आपकी सन्तान की आय सम्बन्धी समस्याओं का निराकरण होगा तथा उनके पराक्रम, प्रभाव तथा आय में निरन्तर वृद्धि होगी।

स्वास्थ्य

सामाजिक गतिविधियों की व्यस्तताओं के चलते आपको अपने स्वास्थ्य पर समुचित ध्यान देने का पर्याप्त समय नहीं मिल पायेगा। बेहतर होगा कि आप अपने दैनिक जीवन व भोजन में अनुशासन बनाये रखें व लापरवाही ना बरतें। इस वर्ष स्वास्थ्य सम्बन्धी कोर्इ विशेष परेशानी होने के संकेत नहीं हैं। वर्ष भर आपका स्वास्थ्य व आरोग्यता दुरुस्त रहेगी तथा कार्य क्षमताओं व आत्म विश्वास में वृद्धि होगी।

करियर एवं प्रतियोगी परीक्षा

विद्याथियोंर् के लिए यह वर्ष सामान्य अनुकूल रहेगा। यदि आप नौकरी पाने के लिए या किसी बडे़ संस्थान में प्रवेश पाने के लिए किसी प्रतियोगिता परीक्षा में बैठने जा रहे हैं तो सफलता की पूरी उम्मीद रख सकते हैं। प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता प्राप्ति हेतु आपको दृढ़ प्रतिज्ञ होकर तैयारी करनी चाहिए। पंचम स्थान पर शनि की दृष्टि के कारण अध्ययन के प्रिंत आपकी रूचि बढे़गी और तकनीकि क्षेत्र में अधिक सफलता प्राप्त होगी।

यात्रा

यात्रा की दृष्टि कोण यह वर्ष बहुत अच्छा रहेगा। वर्षारम्भ में तृतीय स्थान पर शनि एवं गुरू की संयुक्त गोचरी प्रभाव से छोटी मोटी यात्राओं के साथ साथ आपकीलम्बी यात्राएं भी होंगी। 6 अप्रैल से 14 सितम्बर के अंतराल में आपकी जन्म स्थान की यात्रा के योग हैं। उसके बाद आप धार्मिक यात्रा कर पुण्यार्जन करेंगे। नौकरी करने वालों का मनोनुकूल स्थान पर स्थानान्तरण हो जायेगा।

धर्म कार्य एवं ग्रह शान्ति

धार्मिक कार्य के लिए यह वर्ष अनुकूल है। वर्षारम्भ में नवम स्थान पर गुरू एवं शनि की संयुक्त दृष्टि प्रभाव से आप कोर्इ विशेष पूजा पाठ संपन्न करेंगे। • प्रत्येक दिन सूर्य को जल दें। • अपने घर में श्रीयन्त्र की स्थापना कर उसके सामने घी का दीपक जलाएं और ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यैनमः मन्त्र का जप करें। • राहु ग्रह की वस्तु का दान करें ।

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वृश्चिक राशि के सामान्य गुण

भौतिक लक्षण वृश्चिक राशि

मध्यम कद, सुडौल शरीर और अंग, चौड़ा चेहरा, घुंघराले बाल, श्याम वर्ण, उन्नत ठोड़ी।

अन्य गुण :

स्पष्टवादी, निडर, रूखा व्यवहार। उत्तम मस्तिष्क, बुद्धिमान, इच्छाशक्ति से युक्त। शब्दों का उत्तम चुनाव करते हैं। अन्य लोगों के मामलों में दखल नहीं देते हैं। अक्सर तानाशाह होते हैं, कभी थकान नहीं होती। जब तक आश्वस्त न हो जाएं कि उनका विषय का ज्ञान सर्वोच्च कोटि का है, मुह नहीं खोलते। वार्तालाप और लेखन में दक्ष होते हैं, अपने बुद्धिबल के सहारे रहते हैं। उच्चकोटि की प्रशासनिक क्षमता और आत्मविश्वास से युक्त होते हैं। गुप्त रूप से अपराध करने में सक्षम होते हैं। परिश्रम और साहस के बल पर धनार्जन करते हैं। स्वयं के बल पर सफल होते हैं। सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय होते हैं। समाज में सलाहकार/नेता बनते हैं। सेना और पुलिस में सफलतापूर्वक कार्य करते हैं, इनके बहुत से शत्रु होते हैं। मौलिक अनुसंधान में चतुर होते हैं। अकेले रहकर बेहतर कार्य करते हैं। मैदान के खेलों के शौकीन होते हैं। संगीत, कला, नृत्य आदि में प्रवीण होते हैं। पराविद्या में रूचि होती है। काम-वासना अधिक होती है, साथी को पशु की तरह प्रयोग करते हैं।

संभाव्य रोग वृश्चिक राशि :

गुप्त रोग, प्रोस्टेंट ग्रंथि, पित्ताशय आदि के रोग आयु के 29 से 45 वर्ष सौभाग्यशाली होते हैं। 62 से 71 वर्ष की आयु में गंभीर व्याधि होती है या ऑपरेशन होता है।

अशुभ वर्ष वृश्चिक राशि :

11, 28, 38, 52, 62

छेद या बिल वाला स्थान, विष, शीर्षोदय राशि, चौड़ी, फैली हुई आंखें तथा छाती। बाल्यावस्था में बीमार, क्रूर कामों में रुचि, साहसी, सहनशक्ति, प्रबन्धक, स्त्री राशि होती है।

वृश्चिक राशि के उपयुक्त व्यवसाय

सेना, रक्षा, रेलवे, दूरसंचार, नौसेना, बीमा, चिकित्सा, मैकेनिकल और मशीनरी

वृश्चिक राशि की मित्र राशि

कर्क, सिंह, धनु, मीन, मेष राशि

वृश्चिक राशि का तत्व

पानी

वृश्चिक राशि का संबद्ध चक्र

मणिपुर

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