Kanya Varsik Rashifal - जाने कन्या राशि वार्षिक राशिफल के बारे में

वार्षिक राशिफल (कन्या राशि)

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इस वर्ष मीन राशि के शनि सप्तम भाव में रहेंगे। 25 नवम्बर तक कुम्भ राशि के राहु षष्ठ भाव में रहेंगे और उसके बाद मकर राशि में पंचम भाव में गोचर करॆंगे। वर्ष के पूर्वार्द्ध में मिथुन राशि के गुरु दशम भाव में रहेंगे और 2 जून को कर्क राशि में एकादश भाव में गोचर करेंगे और फिर से अतिचारी होकर 31 अक्टूबर को सिंह राशि में द्वादश भाव में प्रवेश कर जाएंगे। इस वर्ष मंगल ग्रह अपनी सरल गति से गोचर करेंगे। वर्षारम्भ से 1 फरवरी तक शुक्र अस्त रहेंगे और अक्टूबर में भी 14 दिन के लिए अस्त होंगे।

कार्य व्यवसाय़

कार्य व्यवसाय की दृष्टि से यह वर्ष अच्छा परिणाम देने वाला रहेगा। इस वर्ष आप अपने कार्य क्षेत्र में सफलता प्राप्त करेंगे। किसी अनुभवी व्यक्ति से मिलकर व्यापार में उन्नति के लिए कोर्इ नर्इ योजना बनाएंगे। दशमस्थ गुरु के प्रभाव से नौकरी करने वाले व्यक्तियों की पदोन्नति हो सकती है या इच्छित स्थान पर स्थानान्तरण भी हो सकता है। 02 जून के बाद सप्तम स्थान पर शनि एवं गुरु ग्रह के गोचरीय प्रभाव से आपको कार्य व्यवसाय में बहुत अच्छा लाभ प्राप्त होगा। उच्च अधिकारियों व वरिष्ठ लोगों का सहयोग प्राप्त होगा, जिससे आप अपने व्यापार में अधिक सफलता प्राप्त करेंगे। आपको जीवनसाथी का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा। यदि आप साझेदारी में कोर्इ कार्य कर रहे हैं, तो उसमें इच्छित लाभ प्राप्त होगा और अपने साझेदार से संतुष्ट रहेंगे।

धन सम्पत्ति

आर्थिक दृष्टि से वर्ष का प्रारम्भ अनुकूल रहेगा। दि्वतीय एवं चतुर्थ स्थान पर गुरु ग्रह के दृष्टि प्रभाव से भूमि, भवन, वाहन, रत्न, आभूषण इत्यादि वस्तुओं की प्राप्ति होगी। धनागम तो होता रहेगा। आप अपने भौतिक सुख सुबिधाओं पर अधिक खर्च करेंगे। 02 जून के बाद एकादश स्थान में गुरु ग्रह के गोचरीय प्रभाव से आपका रुका हुआ धन मिल सकता है साथ ही आपके धनागम में वृद्धि होगी जिससे आप इच्छित बचत करने में सफल रहेंगे। आप अपनी संचित पूंजी बढ़ाने के लिए निवेश भी करेंगे। भार्इ-बहन या पुत्र के विवाह के अवसर पर धन खर्च हो सकता है।

परिवार एवं समाज

पारिवारिक दृष्टि से वर्ष का पूर्वार्द्ध अनुकूल रहेगा। चतुर्थ स्थान पर गुरु एवं शनि ग्रह के संयुक्त दृष्टि प्रभाव से आपके परिवार में सुख शान्ति का वातावरण बना रहेगा। आपको माता पिता सहित पूरे परिवार का सहयोग प्राप्त होगा। 02 जून के बाद आपको प्रेम प्रसंगो में भी सफलता प्राप्त होगी। यदि आप अविवाहित हैं तो विवाह हो जाएगा। यदि आप विवाहित हैं तो आपके जीवनसाथी के साथ सम्बन्ध मधुर होंगे। तृतीय स्थान में गुरु ग्रह के दृष्टि प्रभाव से आप सामाजिक कल्याण के लिए कुछ विशेष कार्य संपन्न करेंगे।

संतान

संतान की दृष्टि से वर्ष का पूर्वार्द्ध सामान्य रहेगा। आपके बच्चे अपने परिश्रम के बल पर आगे बढे़गे। वे अपनी बौद्धिक शक्ति एवं कर्म के बल पर अपने लक्ष्य को प्राप्त करेंगे। 02 जून के बाद पंचम स्थान पर गुरु के दृष्टि प्रभाव से नवविवाहित व्यक्तियों को संतान रत्न की प्राप्ति हो सकती है। प्रथम संतान के विषय में शुभ समाचार प्राप्त होंगे। शिक्षा के क्षेत्र में भी अच्छी प्रगति होने के शुभ योग बने है। यदि आपका बच्चा विवाह योग्य है तो उसका विवाह भी हो सकता है। यदि आप दूसरे बच्चे की इच्छा रखते हैं तो गर्भधान के लिए उत्तम समय है। 31 अक्टूबर के बाद समय कुछ प्रभावित हो सकता है। उस समय उनके स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत होगी।

स्वास्थ्य

स्वास्थ्य की दृष्टि से यह वर्ष सामान्य रहेगा। मानसिक रूप से आप सन्तुष्ट नहीं रहेंगे। वर्ष के पुर्वार्द्ध में लग्न स्थान पर शनि के दृष्टि प्रभाव से मौसम जनित बीमारियों से परेशानी हो सकती है। आलस्य, मानसिक चिंता इत्यादि छोटी-मोटी परेशानियां होती रहेंगी परन्तु गुरु के गोचरोपरान्त सब कुछ अनुकूल हो जाएगा। 02 जून के बाद गुरु का गोचर शुभ स्थान में होने से आपके स्वास्थ्य में सुधार होना शुरू हो जाएगा। आप अपने स्वास्थ्य को अनुकूल रखने के लिए शुद्ध एवं शाकाहारी भोजन ही करेंगे। संतुलित आहार के साथ साथ नियमित व्यायाम भी करते रहेंगे। 31 अक्टूबर के बाद आपको अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी।

करियर एवं प्रतियोगी परीक्षा

प्रतियोगिता परीक्षा के लिए यह वर्ष बहुत अच्छा रहेगा। छठे स्थान के राहु आपको प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता दिलाएंगे। जो व्यक्ति नौकरी की तालाश में हैं उनको इस वर्ष नौकरी मिल जाएगी। 02 जून के बाद पंचम स्थान पर गुरु ग्रह के दृष्टि प्रभाव से विद्यार्थियों कीे शिक्षा के प्रति रूचि बढ़ेगी और वे अपने लक्ष्य को प्राप्त करेंगे। व्यवसायिक शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियो के लिए समय अच्छा है। तकनीकि शिक्षा के लिए भी वर्ष का पूर्वार्द्ध उत्तम रहेगा।

यात्रा

यात्रा की दृष्टि से यह वर्ष सामान्य रहेगा। नवम स्थान पर शनि ग्रह के दृष्टि प्रभाव से आप लम्बी यात्राएं करेंगे। वर्ष के पूर्वार्द्ध में आपकी जन्म स्थल की यात्रा होगी। परिजनों साथ दर्शनीय स्थलों की यात्रा का भी आनन्द प्राप्त करेंगे। मर्इ के बाद छोटी-मोटी यात्राएं होती रहेंगी। द्वादश स्थान पर राहु एवं केतु ग्रह के प्रभाव से आपकी विदेश यात्रा भी होगी।

धर्म कार्य एवं ग्रह शान्ति

धार्मिक कार्यो के लिए यह वर्ष अनुकूल रहेगा। वर्ष के पूर्वार्द्ध में अधिक व्यस्तता के कारण आप पूजा पाठ के लिए अधिक समय नहीं निकाल पाएंगे। 02 जून के बाद पंचम स्थान पर गुरु ग्रह के दृष्टि प्रभाव से आपके अंदर र्इश्वर के प्रति श्राद्धा एवं विश्वास बढे़गा। आप निःस्वार्थ भाव से भगवान की पूजा व सत्कर्म करेंगे। 31 अक्टूबर के बाद दान पुण्य अधिक करेंगे। • श्रीयन्त्र घर में स्थापित करें और नित्य उसके सामने देशी घी का दीपक जलाएं। जिससे आपकी आर्थिक उन्नति व समाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। • सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य दें। • प्रत्येक दिन प्राणायाम करें।

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कन्या राशि के सामान्य गुण

भौतिक लक्षण कन्या राशि

मध्यम कद, काले बाल और आंख, त्वरित चुस्त चाल, वास्तविक आयु से कम के प्रतीत होते हैं, विकसित छाती, सीधी नाक, पतली और तीखी आवाज, धनुषाकार धनी भौंहें, गर्दन या जांधों पर निशान।

अन्य गुण :

बहुत बुद्धिमान, विश्लेषक, विलक्षण बुद्धि वाला अन्य की भावनाओं और त्रुटियों का निंदक। भाषाओं के ज्ञानी होते हैं और किसी प्रक्रिया को समझने में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का उपयोग करते हैं। भावनाओं में बह जाते हैं। सोच समझ कर निर्णय लेते हैं। आत्मविश्वास की कमी, घबराये से रहते हैं। सुव्यवस्थित अपने विचार की बारीकियों को समझने में सक्षम होते हैं। स्वयं के स्वार्थ के प्रति जागरूक, मितव्ययी, कूटनीतिज्ञ, चतुर होते हैं। गृहसज्जा में निपुण, गणितज्ञ, परविद्या में रुचि होती है।

संभावित रोग कन्या राशि :

उदर रोगों से सावधान रहना चाहिए। पेचिश, टायफायड, पथरी आदि संभाव्य रोग है। विवाह में विलंब, वैवाहिक जीवन सुखी, संतान कम होती है। आय उत्तम, कार्य-व्यवसाय में सफलता, संपत्ति के मालिक होते हैं। नाममात्र की व्याधि होने पर भी डॉक्टर के पास चले जाते हैं। पृथ्वी तत्व की राशि होने के कारण बागवानी और खेती में रुचि लेते हैं। धन संचय में रुचि होती है।

20 से 25 वर्ष की आयु में सफल और साहसी होते हैं। 25 से 35 वर्ष की आयु में स्वयं का मकान होता है। 36 से 48 वर्ष कष्टप्रद होते हैं। 49 से 62 वर्ष सौभाग्यशाली होते हैं, अचानक लाभ होता है। 23 और 24वें वर्ष बहुत उत्तम रहते हैं जबकि 4, 16, 22, 36 और 55 वें वर्ष कष्टप्रद होते हैं। जीवन के अंतिम चरण में टी. बी. हो सकती है।

स्त्री राशि, मनोरंजन के स्थान, चारागाह, शुभ राशि, मध्यम कद शीर्षोदय राशि, पौधों वाली भूमि, कन्धों तथा भुजाओं का झुकना, सच्चा दयालुता, काले बाल, अच्छी मानसिक योग्यता, विधि अनुसार कार्य करने वाली तर्कशील होती है।

कन्या राशि के उपयुक्त व्यवसाय

लेखाकार, मनोचिकित्सक, क्लर्क, डॉक्टर, पायलट, संपादक और लेखक, स्टेशनरी की दुकान

कन्या राशि की मित्र राशि

मिथुन, वृषभ, तुला, मकर, कुंभ राशि

कन्या राशि का तत्व

पृथ्वी

कन्या राशि का संबद्ध चक्र

विशुद्ध