Kumbh Varsik Rashifal - जाने कुंभ राशि वार्षिक राशिफल के बारे में

वार्षिक राशिफल (कुंभ राशि)

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इस वर्ष शनि मकर राशि में द्वादश भाव में और राहु वृष राशि में चतुर्थ भाव में रहेंगे। 6 अप्रैल को गुरू कुम्भ राशि में प्रथम भाव में प्रवेश करेंगे और वक्री होकर 14 सितम्बर को मकर राशि में द्वादश भाव में गोचर करेंगे और मार्गी होकर फिर से 20 नवम्बर को कुम्भ राशि में प्रथम भाव में आजाएंगे। मंगल अपनी सरल गति से गोचर करेंगे। 17 फरवरी से 19 अप्रैल तक शुक्र अस्त रहेंगे।

कार्य व्यवसाय़

व्यापारिक दृष्टि से वर्ष का प्रारम्भ अनुकूल नहीं रहेगा। आपको अपने व्यापार में सफलता प्राप्ति के लिए लगातार अथक प्रयास करना पड़ेगा। इस समय के अन्तराल में कोर्इ नया कार्य प्रारम्भ न करें। पहले से चले आ रहे व्यापार को ही समुचित और व्यवस्थित ढंग से चलाएं तथा अनावश्यक और जोखिम वाले निवेश से बचें। नौकरी करने वाले व्यक्तियों का स्थानान्तरण होगा। यह परिवर्तन आप के प्रतिकूल स्थान पर भी हो सकता है। 6 अप्रैल से 14 सितम्बर तक सप्तम स्थान पर गुरू ग्रह की दृष्टि प्रभाव से आप अपने व्यापार में कुछ लाभ उठा सकते हैे। लग्न स्थान स्थित गुरू नयी विचारधारा एवंनयी योजनाओं को जन्म देंगे जिसका लाभ आप अपने व्यापार में उठा सकते है।

धन सम्पत्ति

आर्थिक दृष्टि से यह वर्ष अनुकूल नहीं रहेगा। धनागम के मार्ग प्रभावित हो सकते हैं जिसके कारण आप इच्छित बचत नहीं कर पाएंगे। निवेश के मामलों में सावधान रहना जरुरी होगा। जोखिम भरे कार्यों में धन निवेश न करें। शीघ्र पैसा कमाने के तरीकों पर अच्छी तरह सोच विचार कर निर्णय लें। जोखिम उठाने के लिए यह समय अनुकूल नहीं है। अचानक नुकसान होने की सम्भावना है। शारीरिक बीमारी में भी आपका धन व्यय हो सकता है। 6 अप्रैल से 14 सितम्बर तक आपका समय अनुकूल हो सकता है। इस वर्ष आपको अचानक सम्पत्ति प्राप्ति के योग हैं।

परिवार एवं समाज

पारिवारिक दृष्टि से यह वर्ष मिला-जुला रहेगा। वर्षारम्भ में अधिक व्यस्तता के कारण परिजनों को अधिक समय नहीं दे पाएंगे। दि्वतीय स्थान पर शनि की दृष्टि पारिवारिक माहौल में थोड़ी कटुता का बातावरण बना सकती है जिसके कारण किसी के साथ आपका वैचारिक मतभेद हो सकता है। चतुर्थ स्थान का राहु आपकी माता का स्वास्थ्य खराब कर सकता है। अतः उनके स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। 6 अप्रैल से 14 सितम्बर तक समय ज्यादा प्रभावित रहेगा। सितम्बर के बाद आपको मामा मामी का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा।

संतान

संतान की दृष्टि से वर्ष अनुकूल है। 6 अप्रैल को गुरू ग्रह का गोचर लग्न स्थान में होगा। उस समय आपके वच्चे उन्नति के शिखर पर होंगे। आपके दूसरे बच्चे के लिए भी समय बहुत अच्छा है। यदि वह विवाह के योग्य है तो विवाह के पूर्ण योग बने हुए हैं। 14 सितम्बर के बाद समय थोड़ा प्रतिकूल होगा। उस समय उनका स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।उनके स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें।

स्वास्थ्य

स्वास्थ्य की दृष्टि से वर्ष का प्रारम्भ अनुकूल नहीं रहेगा। द्वादश स्थान में गुरू एवं शनि का गोचर आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहींहै। यदि पहले से किसी बीमारी से ग्रस्त हैं तो यह समय अधिक कष्ट कारक हो सकता है। 6 अप्रैल के बाद लग्न स्थान का गुरु मन में अच्छे विचारों को जन्म देगा।अच्छे स्वास्थ्य के लिए आप शुद्ध शाकाहारी भोजन ही ग्रहण करेंगे। 14 सितम्बर के बाद आपका स्वास्थ्य फिर से प्रभावित हो सकता है। दोनों ग्रह वायु तत्व की राशि में होने के कारण श्वास सम्बन्धित परेशानी दे सकते हैं।

करियर एवं प्रतियोगी परीक्षा

प्रतियोगिता परीक्षा के लिए यह वर्ष उत्तम रहेगा, षष्ठ स्थान पर शनि एवं गुरू की संयुक्त दृष्टि प्रभाव से आप प्रिंतयोगिता परीक्षा में सबसे आगे रहेंगे। कुछ अनुभवी व्यक्तियों से मिलकर आप अपनी कार्यशैली में सुधार लाएंगे। बेरोजगार लोगों को नौकरी मिलने की संभावना है। 14 सितम्बर के बाद का समय विद्यार्थियों के लिए शुभ है। उच्च शिक्षा प्राप्ति के योग बनेंगे।

यात्रा

यात्रा के लिए वर्ष का प्रारम्भ अनुकूल है। द्वादश स्थान पर गुरू एवं शनि ग्रह की युति प्रभाव से विदेश यात्रा के प्रबल योग बन रहे हैं। 6 अप्रैल के बाद नवम स्थान पर गुरू ग्रह की दृष्टि सुदूर यात्रा के योग बना रही है। द्वादश स्थान मॆं शनि के प्रभाव से यात्रा के दौरान आपको शारीरिक कष्ट का सामना भी करना पड़ सकता है। यात्रा के समय या वाहनादि चलाते समय आपको सावधान रहने की जरूरत है।

धर्म कार्य एवं ग्रह शान्ति

धार्मिक कार्यों के लिए वर्ष का प्रारम्भ बहुत अनुकूल नहीं रहेगा। वर्षारम्भ में द्वादश स्थान पर गुरू एवं शनि ग्रह की युति प्रभाव से आपका मन धार्मिक कार्यों में नहीं लगेगा। मन एकाग्र नहीं रहने के कारण आप पूजा पाठ के लिए अधिक समय नहीं निकाल पाएंगे। 6 अप्रैल के बाद गुरू ग्रह का गोचर लग्न स्थान में होगा। उस समय नवम एवं पंचम स्थान पर गुरू ग्रह की दृष्टि प्रभाव से आपका आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ेगा। • शनिवार के दिन लोहे का तवा दान करें एवं शनि मन्त्र का जप करें। • मंगलवार के दिन हनुमानजी को चोला चढ़ाएं एवं नित्य प्रति प्रातःकाल हनुमान चालीसा का पाठ करें। • अपनों से बड़े लोगों का आशीर्वाद प्राप्त करें।

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कुंभ राशि के सामान्य गुण

भौतिक लक्षण कुंभ राशि

मध्यम कद, हष्ट-पुष्ट, चेहरा सुंदर और गोल, गाल भरे हुए, कनपटियां और जांघें विकसित होती हैं। गोरा रंग, भूरे बाल, असुंदर दांत, पिंडलियों में मस्सा, शरीर पर घने बाल हाथ और पैर मोटे, नसें विकसित होती हैं।

अन्य गुण धर्म :

मानवीय दृष्टिकोण और प्रगतिशील जीवन और उसकी समस्याओं के प्रति स्वस्थ दृष्टिकोण रखते हैं। संकोची होते हैं, निर्णय लेने से पूर्व पूर्ण नापतोल करते हैं या अन्य लोगों द्वारा कार्यारंभ करने तक प्रतीक्षा करते हैं। सदा सतर्कता, धैर्य, एकाग्रता, अध्ययनशीलता से युक्त रहते हैं। वार्तालाप रुचिकर होता है। स्पष्टवादी, सबके प्रिय होते हैं। दयालु, अध्ययन प्रेमी और सज्जन होते हैं। प्रकृतिप्रेमी होते हैं। मित्रता निभाते हैं, रुचि-अरुचि तीव्र होती है। एकांतप्रिय होते हैं। अतीन्द्रिय शक्ति से युक्त होते हैं, ध्यान-साधना में रुचि होती है। स्मरणशक्ति तीव्र, दृष्टिकोण वैज्ञानिक होता है।

गरीबों के सेवक होते हैं। नवीन तकनीक और मशीनरी, अनुसंधान, निवेश आदि द्वारा धनार्जन करते हैं। तकनीकी शिक्षा में रुचि होती है। परिवार से लगाव होता है। जीवनसाथी के चुनाव में आयु को अनदेखी कर बुद्धि और शिक्षा में समानता पर जोर देते हैं। गृह सुसज्जित होता है जिसमें आधुनिक ढंग से पुरातत्विक सामग्री एकत्रित रहती है। अपने प्रेम को अभिव्यक्त नहीं करते। अगर इनका प्रेमी वासनप्रिय हो तो वह असंतुष्ट होता है क्योंकि कुंभ राशि के व्यक्ति शीतल होते हैं।

संभाव्य रोग कुंभ राशि :

संक्रामक रोग, दंत व्याधि, टॉन्सिल आदि 22 से 40 वर्ष की आयु में संपन्नता रहती है। 41 से 43 वर्ष में हथियार, लोहे या काष्ठ से चोट की आशंका रहती है। 44 से 67 वर्ष भाग्यशाली होते हैं। 68 वर्ष से बाद का समय अशुभ होता है।

अशुभ वर्ष कुंभ राशि :

33, 48, 64

वे स्थान जहां पानी सूख जाता है, जहां शराब बनती है, जहां पक्षी रहते हैं और जहां घड़े रखे जाते हैं। पाप राशि, दिनबली, शीर्षोदय, देखने में सुंदर, प्रतिभावान, क्षमाशील स्वभाव का होता है। पुरुष राशि है।

कुंभ राशि के उपयुक्त व्यवसाय

सलाहकार, इंजीनियर, डॉक्टर, ज्योतिषी, तकनीकी और मैकेनिकल नौकरियां

कुंभ राशि की मित्र राशि

मिथुन, वृषभ, कन्या, तुला, मकर राशि

कुंभ राशि का तत्व

हवा

कुंभ राशि का संबद्ध चक्र

मूलाधार

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