जानिए क्‍या हैं कछुए वाली अंगूठी पहनने के लाभ, नियम और विधि | Future Point

जानिए क्‍या हैं कछुए वाली अंगूठी पहनने के लाभ, नियम और विधि

By: Future Point | 03-Oct-2018
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जानिए क्‍या हैं कछुए वाली अंगूठी पहनने के लाभ, नियम और विधि

ज्‍योतिषशास्‍त्र के आधार पर मनुष्‍य के जीवन को सरल और सुखी बनाया जा सकता है। ज्‍योतिष में इतनी शक्‍ति है कि आप इसकी मदद से अपने जीवन की हर समस्‍या और परेशानी को हल कर सकते हैं। ज्‍योतिष में मनुष्‍य के जीवन को सुख और समृद्धि से परिपूर्ण बनाने के लिए कई उपाय बताए गए हैं।

इन उपायों में रत्‍नों से जडित अंगूठी धारण करना भी शामिल है। आपने भी ज्‍योतिषी की सलाह पर कोई ना कोई रत्‍न अवश्‍य धारण किया होगा जिससे आपको अपने जीवन में लाभ भी मिला होगा। रत्‍नों को विशेष उपाय के रूप मे जाना जाता है। इन चमत्‍कारिक रत्‍नों में ऐसी शक्‍तियां समाहित होती हैं जो अपनी ऊर्जा से हमारे जीवन के सभी दुखों को दूर कर देती हैं।


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वर्तमान समय में रत्‍नों के अलावा कछुए वाली अंगूठी पहनने का भी चलन बढ़ गया है। आपने कई लोगों को उंगली में कछुए वाली अंगूठी पहने हुए देखा होगा और उन्‍हें देखकर आपका मन भी इसे पहनने के लिए किया होगा लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि इस अंगूठी को क्‍यों पहना जाता है और इसके क्‍या लाभ हैं।

तो चलिए जानते हैं कछुए वाली अंगूठी के लाभ और इसे पहनने के कारण के बारे में...

अशुभ ग्रहों से छुटकारा

ज्‍योतिष की मानें तो कछुए वाली अंगूठी को धारण करने से कुंडली में बैठे अशुभ ग्रहों से छुटकारा मिल जाता है। इस अंगूठी को ज्‍योतिष में अत्‍यंत शुभ बताया गया है। इसे धारण करने वाले व्‍यक्‍ति के आत्‍मविश्‍वास में भी वृद्धि होती है।

समुद्र मंथन से है संबंध

मान्‍यता है कि कछुआ समुद्र मंथन से उत्‍पन्‍न हुआ था और इस कारण इसे उन्‍नति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। धन की देवी मां लक्ष्‍मी की इस पर कृपा बरसती है इसलिए इसे धारण करने वाले व्‍यक्‍ति को मां लक्ष्‍मी का आशीर्वाद भी प्राप्‍त होता है।


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वास्‍तुशास्‍त्र में भी है महत्‍व

आपको बता दें कि कछुए वाली अंगूठी का वास्‍तुशास्‍त्र में भी अत्‍यंत महत्‍व माना गया है। वास्‍तु में इसे सकारात्‍मक ऊर्जा का प्रतीक बताया गया है। माना जाता है कि इस अंगूठी को पहनने से शरीर में सकारात्‍मक ऊर्जा का संचार होने लगता है।

इन राशि के लोगों के लिए है अशुभ

आजकल हर कोई कछुए की अंगूठइी पहन रहा है और अब ये चलन काफी बढ़ गया है लेकिन अगर आपकी राशि कन्‍या, वृश्चिक या मीन है तो आपको कछुए वाली अंगूठी धारण नहीं करनी चाहिए। इन तीन राशियों के जातकों को कछुए वाली अंगूठी धारण करने से लाभ की जगह हानि हो सकती है।

चांदी में बनवाना होता है शुभ

शुभता और संपन्‍नता का प्रतीक कछुए वाली अंगूठी को चांदी की धातु में बनवाना अत्‍यंत मंगलकारी रहता है। इस अंगूठी को इस तरह बनवाना और पहनना चाहिए कि कछुए के सिर वाला हिस्‍सा धारणकर्ता की ओर हो।


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किस अंगुली में करते हैं धारण

इस अंगूठी को सीधे हाथ की मध्‍यमा या तजर्नी अंगुली में धारण किया जाता है। मां लक्ष्‍मी का दिन शुक्रवार होता है और इसलिए ये दिन इस अंगूठी को धारण करने के लिए शुभ रहता है।

सावधानी

अगर आपने कछुए की अंगूठी धारण की है तो इसे पहनने के बाद बार-बार घुमाएं नहीं। घुमाने से कछुए के सिर की दिशा बदल जाती है और इस वजह से आपको इसके लाभ नहीं मिल पाते हैं। कभी-कभी तो ये आपको हानि भी देने लगती है।

अगर आप भी अपने जीवन को सुखी और समृद्ध बनाना चाहते हैं तो कछुए वाली अंगूठी को धारण कर सकते हैं। इस अंगूठी की सबसे खास बात ये है कि इसे धारण करने से पूर्व किसी ज्‍योतिषीय परामर्श की आवश्‍यकता नहीं पड़ती है। कोई भी इसे बेझिझक धारण कर सकता है।

आमतौर पर रत्‍न जडित अंगूठी धारण करने से पूर्व ज्‍योतिषीय परामर्श लेना पड़ता है क्‍योंकि रत्‍न अगर आपको सूट ना करें तो ये फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकते हैं लेकिन कछुए की अंगूठी में ऐसा कुछ नहीं है। ये अंगूठी शुभता और उन्‍नति का प्रतीक और इसे धारण करने वाले हर व्‍यक्‍ति को इससे सकारात्‍मक लाभ ही मिलता है।

शास्‍त्रों में कछुए की अंगूठी को भगवान विष्‍णु का स्‍वरूप बताया गया है और इसी वजह से कछुए की अंगूठी पर विष्‍णु जी की पत्‍नी मां लक्ष्‍मी की कृपा रहती है। इस अंगूठी को धारण कर आप एकसाथ मां लक्ष्‍मी और भगवान विष्‍णु की कृपा प्राप्‍त कर सकते हैं।


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