कोरोना: एस्ट्रोलॉजिकल एनालिसिस

By: Vinay Garg | 27-Mar-2020
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कोरोना: एस्ट्रोलॉजिकल एनालिसिस

वर्तमान में सूर्य भी भाद्रपदा नक्षत्र से गुजर रहे हैं। वह इस सौरमंडल में ऊर्जा का स्रोत हैं। इसी वजह से बड़ी संख्या में मरीज ठीक भी हो रहे हैं। सूर्य की इस स्थिति की वजह से 28 व 29 मार्च को चिकित्सा के क्षेत्र में कुछ बड़ी उपलब्धियां हो सकती हैं। मगर 31 मार्च से 13 अप्रैल तक सूर्य रेवती नक्षत्र में होंगे। यह मोक्ष का नक्षत्र है। यहां सूर्य कमजोर होंगे और संकट बड़ा रूप ले सकता है। मगर 14 अप्रैल से 27 अप्रैल तक वह अपनी उच्च राशि मेष के नक्षत्र अश्विनी से गोचर करेंगे। इस समय में कोई बड़ी उपलब्धि मिल सकती है।

वर्तमान में जो गोचर चल रहा है, उसके अनुसार 13 अप्रैल तक समय दुनिया के लिए ज्यादा सावधानी का है। उसके बाद सूर्य दो हफ्ते के लिए स्थिति में काफी सुधार करेंगे। सूर्य की आभा को भी उसका कोरोना कहा जाता है। इस कोरोना के चक्र की शुरुआत 26 दिसंम्बर के सूर्यग्रहण से होती है। जब सूर्य, चंद्र और बृहस्पति ये तीनों ग्रह बुध के साथ मूल नक्षत्र में राहु, केतु और शनि ग्रसित थे। मूल का अर्थ जड़ होता है।


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इसे गंडातंका नक्षत्र कहा जाता है जो प्रलय दर्शाता है। इस पर देवी निरति का अधिपत्य है। इनकी दिशा दक्षिण-पश्चिम है। भारत के भी दक्षिण-पश्चिमी राज्यों में इनका प्रकोप दिख रहा है। उक्त सूर्य ग्रहण के ठीक 14 दिन बाद चंद्रग्रहण भी पड़ा। ये सभी ग्रह फिर से राहु, केतु और शनि से पीड़ित हुए। जैसे ही 15 जनवरी को केतु अपने मूल नक्षत्र में पहुंचे कोरोना वायरस ने रंग पकडऩा शुरू कर दिया। यह वुहान से बाहर अन्य स्थानों पर भी फैलना शुरू हुआ। केतु 23 सितम्बर तक इसमें गोचर करेंगे और यह समय एहतियात वाला है। राहु सूर्य और चंद्र को नुकसान पहुंचाता है तो केतु नक्षत्रों को।

इस पूरे समय में राहु प्रलय के नक्षत्र आद्रा में चल रहे हैं। 20 मई तक वह इसी नक्षत्र में रहेंगे। आद्रा से गुजरकर राहु भाद्रपद की ऊर्जा को खराब करते हैं। यह अस्पताल के बेड और मरीज की शैया का प्रतीक है। गुरु का उत्तरषाढ़ा नक्षत्र में गोचर करना भी भाद्रपद को परेशानी में डालता है। इससे मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। सूर्य भी भाद्रपदा नक्षत्र से गुजर रहे हैं। वह इस सौरमंडल में ऊर्जा का स्रोत हैं। इसी वजह से बड़ी संख्या में मरीज ठीक भी हो रहे हैं। सूर्य की इस स्थिति की वजह से 28 व 29 मार्च को चिकित्सा के क्षेत्र में कुछ बड़ी उपलब्धियां हो सकती हैं। मगर 31 मार्च से 13 अप्रैल तक सूर्य रेवती नक्षत्र में होंगे। यह मोक्ष का नक्षत्र है। यहां सूर्य कमजोर होंगे और संकट बड़ा रूप ले सकता है। मगर 14 अप्रैल से 27 अप्रैल तक वह अपनी उच्च राशि मेष के नक्षत्र अश्विनी से गोचर करेंगे। इस समय में कोई बड़ी उपलब्धि मिल सकती है।

Between 22 March and 29 March due to transit of Mars into Capricorn sign over Saturn which is in its own sign and Mars will be in their exalted sign and there will be no benefic effect on the planet, the condition of Coronavirus will be worst and on peak. But after the transit of Jupiter over Capricorn sign after 29th March the situation will start under control. After that that situation will start towards improvement.

जानिए आपकी कुंडली पर ग्रहों के गोचर की स्तिथि और उनका प्रभाव, अभी फ्यूचर पॉइंट के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यो से परामर्श करें।

कुछ ज्योतिषीय उपाय

  • अश्विनी नक्षत्र मंत्र, गायत्री मंत्र, सूर्य मंत्र का पाठ करें
  • हवन में कर्पूर, लौंग और गाय के गोबर से बने उपले इस्तेमाल करें इस अग्रि को घर के प्रत्येक स्थान में लेजाकर शुद्ध करें
  • भगवान कार्तिकेय की पूजा अर्चना, रुद्राभिषेक करें
  • कुलदेवता व स्थान देवता की पूजा करें
  • ौंग खाएं और इसके तेल लगाएं
  • अश्विनी कुमार से संबंधित पौधा कोचलु घर में लगाओ
  • घर में आम और नीम का पौधा लगाओ, नीम की पत्तियों का सेवन कर सकते हैं

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