भारत से पहले पाकिस्तान के लिए खेले थे सचिन तेंदुलकर

By: Future Point | 05-Jul-2019
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भारत से पहले पाकिस्तान के लिए खेले थे सचिन तेंदुलकर

भारत में रहना और क्रिकेट की प्रेम-लहर से प्रभावित नहीं होना असंभव है। मेरा मतलब है, जैसा कि हमने एक बार चर्चा की थी, अगर हम अपने राष्ट्र को दो हिस्सों में विभाजित करते हैं, तो यह क्रिकेट को पसंद करने वालों और क्रिकेट की पूजा करने वालों के आधार पर किया जाएगा। यहां तक कि मेरे जैसे गैर-इच्छुक लोग, जो किसी भी खेल के बारे में लानत नहीं देते हैं, हर भारत-पाकिस्तान या विश्व कप के दौरान टीवी स्क्रीन से चिपके रहेंगे जहां भारत भाग ले रहा है। तो यहाँ यह है, क्रिकेट के बारे में कुछ ताज़ा तथ्य जो सभी क्रिकेट प्रेमियों को पता होना चाहिए।

भारत में क्रिकेट का आगमन

इतिहास यह कहता है कि भारत में क्रिकेट का आगमन अंग्रेजों के साथ ही हुआ। अंग्रेजी अफसरों में यह खेल खासा लोकप्रिय था। अधिकारी हो या कोई बड़ा आफिसर फुर्सत के पलों में क्रिकेट का आनंद लेना नहीं भूलता था। जबकि भारत में कुछ शहरों तथा कस्बों तक ही यह खेल पसंद किया जाता था, कुछ राजा-महाराजा जरुर इस खेल का आनंद लेते। अंग्रेजों को खेलते देख भारतीयों में इस खेल के प्रति रुचि बढ़ी। आमिर खान अभिनीत फिल्म लगान आजादी से पूर्व भारत में क्रिकेट की स्थिति का वास्तविक चित्रण करती है। उस समय महाराजें क्रिकेट खेलते थे और बालिंग व फील्डिग छोटे तबके के लोगों का काम होता था।

1928 में भारत में क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की स्थापना होने के साथ ही इस खेल के प्रति लोगों का उत्साह पैदा हुआ। 1928 से लेकर 2019 तक भारत में क्रिकेट का खेल इतना फला-फूला और विकसित हुआ कि आज इस खेल के अतिरिक्त अन्य दूसरों खेलों को अधिक तवोज्जों ही नहीं दी जाती है। भारत में खेल की बात हो और क्रिकेट की बात ना हो, यह संभव ही नहीं है। दोनों एक दूसरे के पूरक बन चुके है।

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भारतीय क्रिकेट की कहानी

एक राजनेता का बेटा राजनेता ही बनेगा, इसमें लगभग पूर्ण संभावनाएं है, अभिनेता का बेटा भी अभिनेता ही बनेगा यह भी संभव है। परन्तु एक क्रिकेटर का बेटा क्रिकेटर ही बनेगा, यह आवश्यक नहीं है। किसी खेल को खेलने का गुण बालक में जन्मजात अधिक देखा गया है, यह बालक की रुचि, जूनुन और पसंद पर बहुत हद तक निर्भर करता है। भारतीय क्रिकेटरों के व्यक्तिगत बातों से यह स्पष्ट होता है कि आज जो लोग क्रिकेट जगत में वाह वाही लूट रहे हैं, उनमें से कईयों ने बचपन में कभी सोचा भी नहीं था कि वो बड़े होकर क्रिकेट को अपना करियर बनाएगें। भारत में अन्य खेलों में युवाओं का भविष्य बहुत सुखद और उत्तम नहीं रहा है, इसी के चलते अक्सर अपने बच्चों को क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों में अधिक रुचि लेने या खेलों को एज ऐ करियर चुनने पर खुश नहीं रहते है।

इस खेल में बहुत अधिक प्रतिस्पर्धा है। परन्तु सब से अच्छी बात यह है कि भारत में क्रिकेट एकमात्र ऐसा खेल है जिसमें जात-पात, धर्म विशेष जैसी बातों के लिए कोई स्थान नहीं है। जाति और धर्म इस खेल में रुकावट का कार्य नहीं करते है। यही वजह है कि क्रिकेट आज यहां हर समाज के लोगों के द्वारा खेला और पसंद किया जाता है। क्रिकेट खेल एक ऐसे समाज का निर्माण करता है जिसमें हर वर्ग की भागीदारी देखी जा सकती है। समय के साथ क्रिकेट आज बस जुनून भर नहीं रह गया है, यह अच्छी कमाई का एक जरिया भी बन गया है।

दुनिया में मात्र क्रिकेट ही ऐसा खेल है जहां सचिन तेंदुलकर एक ऐसी कहानी लिख सकते हैं, जिसमें अपने पिता की मौत के बाद कोई खिलाड़ी वर्ल्ड कप खेलने के लिए वापस पहुंचे और अगले ही मैच में सेंचुरी लगा दे। विराट कोहली एक ऐसी कहानी लिख सकते है, जिसमें एक बालक ने अपने पिता को बचपन में खो दिया हो और वो दिल्ली के लिए एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह खेलते हुए, विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की क्रिकेट टीम का कप्तान बनें। विराट ने अपने पिता को मुखाग्नि देने से पूर्व पूर्ण विश्वास के साथ खेलें। पिता के खोने के गम को भूलकर उन्हें निराश और हताश हुए बिना 90 रन बनाये। क्रिकेट जगत ऐसी अनेक हैरान कर देने वाली कहानियों से भरा पड़ा है, तब तो भारतीयों के खून में क्रिकेट रक्त बनकर दौड़्ता है।

ऐसी ही कुछ हैरान कर देने वाली बातें हम आज आपको क्रिकेट जगत के विषय में बताने जा रहे हैं- जो रोचक होने के साथ साथ क्रिकेट के विषय में आपकी जानकारियों को पहले से बेहतर करेगी।

  • शाहिद अफरीदी ने सचिन तेंदुलकर के बल्ले का इस्तेमाल करते हुए सबसे तेज वनडे शतक लगाया

1996 में पाकिस्तानी टीम के शाहिद अफरीदी वेस्टइंडीज में श्रीलंका के खिलाफ खेल रहे थे। उस समय अफरीदी अपने बैट से ठीक से नहीं खेल पा रहे थे, उस समय वकार ने सचिन तेंदुलकर जिसे यंग अफरीदी के नाम से जाना जाता था, का बल्ला लाकर दिया। अफरीदी ने इस बल्ले से खेलते हुए 11 छक्के और 6 चौके लगाए जो की उनका उस समय का सबसे तेज वनडे शतक था।

  • क्रिस गेल टेस्ट मैच की पहली गेंद पर छक्का मारने वाले एकमात्र बल्लेबाज हैं

टेस्ट क्रिकेट के 137 वर्षों में किसी भी क्रिकेटर ने टेस्ट मैच की पहली गेंद पर छक्का नहीं मारा। दुस्साहसिक क्रिस गेल ने 2012 में बांग्लादेश के खिलाफ यह मुश्किल कार्य पूरा किया।

  • विनोद कांबली का टेस्ट मैच का औसत उनके बचपन के दोस्त सचिन तेंदुलकर से बेहतर है

विनोद कांबली ने केवल 17 टेस्ट मैच खेले जिसमें दो बैक टू बैक डबल 100 शामिल थे। कांबली का टेस्ट औसत 54।20 है, जबकि उनके बचपन के दोस्त सचिन तेंदुलकर का औसत 200 टेस्ट के बाद 53।78 है।

  • सुनील गावस्कर अपने करियर में तीन बार टेस्ट मैच की पहली गेंद पर आउट हुए

सुनील गावस्कर 10,000 टेस्ट रन तक पहुंचने वाले पहले बल्लेबाज थे और उन्होंने अपने करियर का अंत 34 टेस्ट शतक लगाकर किया। अपने क्रिकेट करियर में सुनील तीन बार टेस्ट मैच की पहली बार पर आउट हो चुके है। उन्हें आउट करने वाले गेंदबाज थे: ज्योफ अर्नाल्ड (एजबेस्टन, 1974), मैल्कम मार्शल (कोलकाता, 1984) और इमरान खान (जयपुर, 1987)।

  • एमएल जयसिम्हा और रवि शास्त्री टेस्ट मैच के पांचों दिन लगातार बल्लेबाजी करने वाले एकमात्र भारतीय क्रिकेटर है।

भारत और इंग्लैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले एकमात्र क्रिकेटर सैफ अली खान के दादा, इफ्तिखार अली खान पटौदी रहे।

  • टेस्ट क्रिकेट में डॉन ब्रैडमैन को हिट विकेट आउट करने वाले एकमात्र गेंदबाज लाला अमरनाथ हैं
  • 60-ओवर, 50-ओवर और 20-ओवर वर्ल्ड कप जीतने वाला भारत एकमात्र देश है
  • जिम लेकेर और अनिल कुंबले ने एक पारी में 10 विकेट लेने वाले अपनी तरह के दो बालर है।
  • भारत से पहले पाकिस्तान के लिए खेलते थे सचिन तेंदुलकर

क्या आप सचिन तेंदुलकर को भारत से पहले पाकिस्तान के लिए खेलने की कल्पना कर सकते हैं? यह 1987 में ब्रेबॉर्न स्टेडियम में भारत और पाकिस्तान के बीच एक अभ्यास मैच के दौरान हुआ था, जहां तेंदुलकर पाकिस्तान के लिए एक विकल्प क्षेत्ररक्षक के रूप में मैदान पर आए थे।

ज्योतिष और खेल में कैरियर

करियर के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन की महत्वपूर्ण दायित्वों को पूर्ण करता है। कैरियर योजना एक आजीवन प्रक्रिया है, जिसमें एक व्यवसाय चुनना, नौकरी प्राप्त करना, हमारी नौकरी में बढ़ाना, संभवतः करियर बदलना, और अंततः सेवानिवृत्त होना शामिल है। खेलों का करियर विकल्प के रुप में चयन करना एक साहसिक कदम है। एक अच्छा खिलाड़ी होने के लिए खेल में विशेषता का होना आवश्यक है। इसमें ऊर्जा शक्ति और शारीरिक शक्ति भी अपना खासा महत्व रखती है। जातक का स्वभाव, प्रतिद्वंद्वियों यानी जीतने के रवैये पर सफलता निर्भर करती है। चोटें लगने पर भी आत्मविश्वास ना खोना, विश्लेषणात्मक क्षमता आदि होना जातक को खेलों से जोड़ता है। इस विषय में ज्योतिष विद्या क्या कहती है आईये जानें-

  • मंगल - साहस और शौर्य का कारक ग्रह है
  • बुध - बुद्धि का कारक ग्रह है।
  • सूर्य - प्रसिद्धि, मान्यता और आत्मविश्वास का कारक ग्रह है।
  • तीसरा - घर-साहस और बहादुरी का भाव है।
  • 6 वां घर - प्रतिद्वंद्वियों और विरोधियों और चोटों का भाव है।
  • यदि आप खेल में करियर की तलाश कर रहे हैं, जिसका अर्थ है कि आपकी कुंडली में मंगल के गुण अधिक विद्यमान है। एक व्यक्ति के जन्मपत्री में तीसरे और छठवें भाव से शक्ति, साहस और जीतने के रवैये का अनुमान लगाया जा सकता है। साथ ही, कुंडली में मंगल, बुध और राहु का सुस्थित होना या कर्मेश होकर पंचम भाव से संबंध बनाना खेल में सफल कैरियर के लिए आवश्यक है। निम्नलिखित योग हैं जो किसी व्यक्ति को खेलों में सफल बनाते हैं-
  • कुंडली के तीसरे भाव में ताकत एक व्यक्ति को शारीरिक खेल गतिविधियों में कैरियर के लिए आवश्यक उपयुक्त शारीरिक शक्ति प्रदान करती है।
  • खेल से संबंधित कैरियर में जीत और सफलता सुनिश्चित करने के लिए कुंडली में मजबूत 6 वें भाव की आवश्यकता होती है।
  • कुंडली में 6 वां भाव बीमारियों और चोटों से सुरक्षा, दुश्मनों पर जीत से संबंधित सभी सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने में मदद करता है।
  • प्रतियोगियों पर विजयी होने के लिए, 6 वें भाव का बल सकारात्मक परिणाम देने योग्य होना चाहिए।
  • करियर के रूप में खेल को विश्लेषणात्मक क्षमताओं के स्तर को आंकने के लिए जन्म कुंडली में मंगल और बुध के मजबूत स्थान की आवश्यकता होती है।
  • खेलों में सफल करियर के लिए आवश्यक शारीरिक फिटनेस और सहनशक्ति मंगल और बुध के बली होकर सुस्थित होना चाहिए।
  • जीतने के लिए राहु का अनुकूल स्वभाव सकारात्मक और जीतने वाला रवैया सुनिश्चित करता है।
  • विशेष खेल में नाम और प्रसिद्धि पाने के लिए मजबूत सूर्य की आवश्यकता होती है।
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