नवरात्र की छठी देवी - कात्यायनी देवी, अविवाहितों के लिए विशेष लाभकारी, कथा और मंत्र | Future Point

नवरात्र की छठी देवी - कात्यायनी देवी, अविवाहितों के लिए विशेष लाभकारी, कथा और मंत्र

By: Acharya Rekha Kalpdev | 30-Mar-2024
Views : 336नवरात्र की छठी देवी - कात्यायनी देवी, अविवाहितों के लिए विशेष लाभकारी, कथा और मंत्र

नवरात्र का छठा दिन देवी कात्यायनी को समर्पित है। सनातन हिन्दू धर्म में नवरात्र साल भर में चार बार आते है, दो नवरात्र गुप्त नवरात्र के नाम से जानें जाते है। अन्य दो नवरात्र चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्री होते है। चारों नवरात्र में देवी के नौ रूपों का दर्शन, पूजन और आराधना की जाती है। नवरात्र देवी आराधना का दिव्य और भव्य पर्व होता है। नवरात्री के नौ दिनों में देवी के नौ रूपों का पूजन कर साधक अपनी कामनाएं माता से पूरी कराते है। नवरात्रि navratri के छठे दिन की देवी कात्यायनी kaatyayani हैं। इस साल चैत्र छठा नवरात्र 14 अप्रैल, 2024 का रहेगा। माता कात्यायनी अपने भक्तों को चारों परमार्थ देने वाली है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने का कार्य करती है। माता को लाल रंग के फूल पसंद है, इसलिए उनकी पूजा लाल रंग के फूलों से की जाती है। देवी कात्यायनी को भोग में शहद की मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।

देवी कात्यायनी का दर्शन पूजन मोक्ष के मार्ग खोलता है। माता कात्यायनी का स्वरुप भव्य, चमकीला और तेजपूर्ण है। माता की चार भुजाएं है, माता के हाथों में तलवार है, माता के एक हाथ में कमल का फूल है। माता कात्यायनी का दर्शन पूजन परम पद देने वाला कहा गया है।

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देवी kaatyayani का नाम ऋषि कात्यायन के नाम पर पड़ा। ऋषि कात्यायन ने एक बार शक्ति आराधना से देवी भगवती को प्रसन्न किया। देवी भगवती ने उनकी साधना से प्रसन्न होकर, उन्हें आशीर्वाद मांगने के लिए कहा। ऋषि ने देवी भगवती से आशीर्वाद में देवी भगवती को पुत्री के रूप में माँगा। देवी ने उनकी विनती स्वीकार की और ऋषि कात्यायन के घर में देवी कात्ययानी का जन्म हुआ।

देवी कात्यायनी जन्म से ही बहुत सुन्दर और गुणवान कन्या थी। उनके ज्ञान, रूप और गुणों की चर्चा सम्पूर्ण सृष्टि में होने लगी। देवी कात्यायनी की पूजा करने से साधक का आज्ञा चक्र सक्रिय होता है। देवी कात्यायनी का दर्शन-पूजन करने से साधक के सब काम सिद्ध होते है। देवी कात्यायनी चतुर्भुज रूपी है। चार भुजाओं के कारण उनका नाम चतुर्भुज भी है। देवी कात्यायनी असुर, दानव और पापियों का नाश करने वाली है। देवी कात्यायनी का वाहन सिंह है।

देवी कात्यायनी के जन्म से जुडी एक अन्य कथा

पौराणिक कथा के अनुसार एक समय में महिषासुर नाम के राक्षस का आतंक चारों और छाने लगा। सभी देवी दवता महिषासुर के अत्याचार से भयभीत होने लगे। देवताओं की विनती पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश त्रिदेवों ने मिलकर एक शक्ति को उत्पन्न किया। कात्यायन ऋषि ने इस शक्ति की सर्वप्रथम पूजा की, जिसके कारण इसका नाम कात्यायनी पड़ा। देवी कात्यायनी का जन्म आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुआ था। तथा देवी ने आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को असुर महिषासुर का वध किया।

अविवाहितों के लिए विशेष लाभकारी - देवी कात्ययानी

देवी कात्यायनी का दर्शन पूजन उन कन्याओं और युवाओं के लिए विशेष उपयोगी माना जाता है, जिनका आयु होने पर भी विवाह नहीं हो रहा हो। विवाह के मार्ग में आने वाली बाधाओं को भी देवी कात्यायनी की साधना, आराधना दूर करती है। देवी कात्यायनी की आराधना से अविवाहितों का विवाह होने के योग बनते है। अन्य कामनाओं के लिए भी देवी कात्यायनी का दर्शन पूजन किया जाता है।

देवी कात्यायनी की पूजा करने पर साधकों को विद्या, बुद्धि, धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। देवी अपने साधक को सभी सुख संसाधन देती है। देवी कात्यायनी के भक्त मनुष्य और देव सभी है। देवी आराधना से देवताओं के कष्ट भी दूर हुए है। देवी कात्यायनी दुःख दूर करती है और सुख समृद्धि प्रदान करती है। देवी कात्यायनी वास्तव में देवी पार्वती का ही दूसरा रूप है। देवी कात्यायनी के अनेक नाम है। जिनमें से कुछ - उमा, गौरी, काली, हेमावती और ईश्वरी के नाम से भी जानी जाती है।

देवी कात्यायिनी की पूजा करने की विधि

देवी कात्यायनी की पूजा छठे नवरात्र के दिन की जाती है। इस दिन सुबह प्रात: सूर्योदय से पहले उठकर, स्नान आदि से मुक्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इस दिन साधक को लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। लाल रंग के अतिरिक्त पीले के वस्त्र भी धारण कर सकते है। पूजा घर से एक दिन पहले के फूल और पूजन सामग्री को साफ़ कर, देवियों को नयी फूल मालाएं अर्पित करें। गंगाजल से आसपास के स्थान को शुद्ध करें। कात्यायनी मन्त्र का उच्चारण करें। मन्त्र - कंचनाभा वराभयं पद्मधरां मुकटोज्जवलां। स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनी नमोस्तुते मन्त्र जाप के बाद घी का दीपक जलाकर पूजा शुरू करें। देवी कात्यायनी को लाल रंग की चुनरी, रोली, धुप, द्वीप और फूल अर्पित करें। इसके साथ ही देवी कात्यायनी को लौंग और बताशे अर्पित करें। पान के पत्ते पर शहद लगाकर देवी को यह भी अर्पित करें। अंत में कपूर से देवी कात्यायनी की आरती करें।

देवी कात्यायनी को कौन सी मिठाइयों का भोग लगाएं?

देवी कात्यायनी को शहद से बनी मिठाइयों और पीले रंग की मिठाई का भाग लगाना चाहिए। शहद से बना हलवा भी देवी के मनपसंद भोग में से एक है। यह हलवा आप सूजी और शहद के साथ बना सकते है।

देवी कात्यायनी पाठ, मंत्र, स्तुति, प्रार्थना

देवी कात्यायनी मंत्र

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

देवी कात्यायनी प्रार्थना

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

देवी कात्यायनी स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

देवी कात्यायनी ध्यान

वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा आज्ञाचक्र स्थिताम् षष्ठम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम्॥

मां कात्यायनी कवच

कात्यायनौमुख पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।
ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥
कल्याणी हृदयम् पातु जया भगमालिनी॥

मां कात्यायनी आरती

जय जय अम्बे, जय कात्यायनी।
जय जगमाता, जग की महारानी।
बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा।
कई नाम हैं, कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है।
हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी।
हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते।
कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की।
झूठे मोह से छुड़ाने वाली।
अपना नाम जपाने वाली।
बृहस्पतिवार को पूजा करियो।
ध्यान कात्यायनी का धरियो।
हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी।
जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।