Ram Navami 2024: साल 2024 में राम नवमी 16 अप्रैल की रहेगी या 17अप्रैल की?

By: Acharya Rekha Kalpdev | 07-Mar-2024
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Ram Navami 2024: साल 2024 में राम नवमी 16 अप्रैल की रहेगी या 17अप्रैल की?

Ram Navami 2024: राम शब्द रा और म दो वर्णों से मिलकर बना है। जिसमें योगियों का मन रमें, वही राम हैं इस धरा के कण-कण में राम समायें है, राम ही परब्रह्म है, हम सभी के अंतर्मन में जो चेतना विद्यमान है वही राम है। सनातन धर्म के मूल में राम है। राम में अन्नत गुण है, राम आदर्श पुत्र है, जो अपने पिता के वचन के लिए 14 वर्ष के लिए वनवास चले जाते है। राम आदर्श भाई है, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के लिए अपने प्राण तक न्योछावर करने के लिए तैयार रहते है। राम आदर्श पति है, राम आदर्श स्वामी है, हनुमान जी को अगाध स्नेह करते है। राम ने अपने सभी भक्तों का पूरा ख्याल रखा, फिर वह चाहे निषाद राज हो,सबरी हो, या हनुमान जी हों। राम अपने भक्तों पर अपनी कृपा बनायें रखते है, राम जी आदर्श राजा है, राम जी ने रामराज्य की स्थापना की। रामराज्य की परिकल्पना आज दस हजार वर्षों के बाद भी सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है। अपने भक्तों से मिलने उनकी एक पुकार पर दौड़े चले आते है।

अगर मित्रता की बात करें, तो राम श्रेष्ठ मित्र भी है। राम जी ने अपने मित्र सुग्रीव और विभीषण को जो वचन दिए, उन्हें राम जी ने मन से निभाया। राम जी एक देव अवतार थे, साहस, स्नेह और कोमल मन से युक्त थे, वो रावण को एक तीर से मारने में सक्षम थे, परन्तु उन्होंने कभी इस बात का अहंकार नहीं किया। राम जी का जीवन चरित्र दिव्य होकर भी एक आम व्यक्ति जैसा था। उदाहरण के लिए राम जी वन में सीता हरण होने के बाद एक आम व्यक्ति की तरह व्याकुल होकर रो रहे थे। भगवान् राम जी को सनातन हिन्दू धर्म से कदापि अलग नहीं किया जा सकता है। सम्पूर्ण सनातन धर्म राममय है। सनातन भावना में राम कण कण में व्याप्त है।

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रामनवमी 2024 में कब | When will Ram Navami be in 2024?

Ram Navami 2024 Date: सनातन धर्म में भगवान राम की जयंती का बहुत महत्व हैं। सभी सनातनियों के लिए यह दिन आशा और विश्वास का दिन हैं। राम नवमी पर्व साल 2024 में 17 अप्रैल, बुधवार के दिन मनाया जाएगा। इस वर्ष नवमी तिथि की शुरुआत 16 अप्रैल, 2024 समय 13:23 अपराह्न काल में हो रही हैं, तथा तिथि का समापन 17 अप्रैल, 2024, बुधवार, 15:27 मिनट पर होगी। इस दिन रामनवमी की पूजा शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए।

भगवान राम जी के जीवन से मिलने वाली शिक्षाएं

भगवान राम जी के जीवन से हमें यह सीख मिलती है, कि जीवन की हर परिस्थिति का सामना मुस्कुराते हुए करना चाहिए, जीवन की विपरीत परिस्थिति में हार नहीं माननी चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति चाहे वो छोटा हो या बड़ा हो, सबका अपना एक अलग महत्त्व है। सब महत्वपूर्ण है, निर्थक कोई नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने माता-पिता की बातों का मान रखना चाहिए। माता-पिता के वचन का पालन करने वाली संतान ही आदर्श संतान होती है। आदर्श संतान ही जीवन में सुख और सौभाग्य पाती है।

प्रत्येक स्त्री का सम्मान करना चाहिए। दूसरों की स्त्री को बहन, बेटी या माता की दृष्टि से देखना चाहिए। इससे नैतिक और आदर्श समाज की स्थापना होती है। पुरुष प्रधान समाज में स्त्रियों के अधिकारों की पूर्ण रक्षा होनी चाहिए। जीवन साथी का मान-सम्मान करने से सारे समाज का मा- सम्मान होता है और अनैतिक रिश्तों पर रोक लगती है।

भगवान् राम अपने जीवन साथी को वापस पाने के लिए रावण जैसे राक्षस से भी नहीं डरे। व्यक्ति को अपनी शक्ति पर कभी अहंकार नहीं करना चाहिए और न ही कमजोर को कष्ट नहीं देना चाहिए। अपनी शक्ति का दुरूपयोग करने से बचना चाहिए। जो अपनी शक्ति पर अहंकार करते है, उनकी शक्ति का ह्राष होता है। शक्तिशाली व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वो अपनी शक्ति का प्रयोग लोगों की सेवा और उन्हें अधिकार दिलाने के लिए करें।

पारिवारिक धन संपत्ति के लिए भाई-भाई को आपस में लड़ना नहीं चाहिए। परिवार के साथ जुड़कर रहना चाहिए और परिवार की एकता के लिए अपने अधिकार का भी त्याग करना चाहिए। परिवार, समाज और राज्य हित को ही अपना जीवन लक्ष्य बनाना चाहिए। राम जी में ये सभी गुण कूट कूट कर भरे हुए थे। राम जी के अद्भुत और व्यावहारिक गुणों के कारण ही आज रामराज्य की मांग हो रही है। रामजी सनातन धर्म के आदर्श चरित्र है। धर्म और कर्तव्य पालन में राम जी से बेहतर कोई दूसरा नहीं हो सकता। कर्तव्य को धर्म से श्रेष्ठ कहा गया है। राष्ट्र को भी धर्म से श्रेष्ठ कहा गया है। धर्म व् कर्तव्य दोनों साथ साथ चलते है। किसी का एक दूसरे के बिना कोई अर्थ नहीं है। यही कारण है कि राम जी भारतीय सनातन धर्म और संस्कृति का आधार है, मूल है।

राम जयंती का महात्म्य | Importance of Ram Jayanti

राम जी भगवान विष्णु जी के 7वें अवतार है। राम नवमी जयंती भगवान राम के प्रति आस्था और स्नेह व्यक्त करने का एक साधन है। राम जयंती राम जी के जन्म का उत्सव है। विष्णु जी के सभी अवतारों में सबसे अधिक लोकप्रिय देव भगवान राम है। भगवान श्रीराम की जयंती चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन मनाई जाती है। इसलिए इसे रामनवमी के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है। रामनवमी का धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व है।

भगवान राम जी की जयंती पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ भारत के कोने कोने में मनाई जाती है। इस दिन राम जी, मईया सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी की झांकियां, शोभा यात्रा निकाली जाती है। राम नवमी चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि होती है, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को सनातन धर्म के हिन्दू पंचांग के अनुसार नववर्ष का प्रारम्भ होता है, इसी दिन से नवरात्र भी शुरू होते है। इस माह की नवमी तिथि को नवरात्र पर्व का समापन होता है, और इसी नवमी तिथि को भगवान राम का जन्म हुआ था। इस साल भगवान् राम जी की जयंती इस वर्ष 17 अप्रैल, 2024 की रहेगी। भगवान् राम के जन्मोत्सव को राम जी के भक्त हर्षोउल्लास के साथ मनाते है। देश के सभी प्रमुख मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा और आरती का आयोजन किया जाता है।

राम नवमी सनातन धर्म के लिए एक आध्यात्मिक उत्सव है। इस दिन भक्त विशेष रूप से तैयार होकर मंदिरोंमें भगवान राम जी के दर्शनों के लिए जाते है। इस दिन राम नाम जाप, सीताराम नाम पाठ, राम रक्षा स्त्रोत, राम चालीसा पाठ किया जाता है। भगवान राम के आदर्श बिंदुओं को अपनाकर सनातन धर्म का प्रत्येक हिन्दू राम हो जायगा। धर्म, आदर्श, न्याय, वचन और निष्ठां जैसे गुण राम जी से सीखे जा सकते है।

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भगवान राम को आदर्श पुरुष क्यों कहा जाता है?

भगवान श्रीराम इस सनातन धर्म की आत्मा है, विश्वास है, संस्कृति का मूल है, मानवीय गुणों का श्रेष्ठ उदाहरण है, आदर्शों के संस्थापक है, भारतीय सनातन धर्म के पूर्वज है, राम कण कण में है, देश की जड़ चेतना शक्ति और संस्कार है। वास्तव में देखा जाए तो राम सनातन धर्म ही नहीं इस सृष्टि की मानवता के आदर्श पुरुष है। राम जी का व्यक्तित्व हम सभी के रक्त में आस्था बनकर दौड़ रहा है। भगवान श्री राम का त्याग का उदाहरण अन्य कहीं नहीं देखा जा सकता, रामजी विनम्रता के प्रतीक है, उनमें सज्जनता और स्नेह अद्भुत है, असत्य पर सत्य, अनैतिकता पर नैतिकता की विजय के योद्धा है। इस संसार को दुःख में साहस के साथ मुस्कुराते हुए खड़े रहने का आदर्श प्रस्तुत करते है,इसलिए उन्हें पॉजिटिव ऊर्जा का नायक कहें, या आशा का सूर्य भी कहा जा सकता है। भगवान् राम जी सनातन के विराट स्तम्भ है, आदर्श पुरुष है, देव शक्ति है, परमात्मा है।

राम जी के संस्कार कैसे थे ?

भगवान् राम बाल समय में सुबह उठकर अपने बड़ों के चरणों को प्रणाम करते थे। एक विशाल साम्राज्य को अपने पिता के वचन पालन के लिए त्याग देना, राम जी अतिरिक्त कोई और नहीं कर सकता था। आज भी यह आदर्श स्थापित करना अन्य किसी की क्षमता से बाहर है। जन्म देने वाली माता का सम्मान तो आज के समय में भी कहीं कहीं देखा जा सकता है, परन्तु सौतेली माता को इतना सम्मान राम के अतिरिक्त कोई नहीं दे सकता। भगवान राम जी से श्रेष्ठ कोई नहीं हो सकता। इसलिए उन्हें पुरुषोत्तम राम कहा गया है।

भगवान राम जी अपने पिता के वचनों को निभाने के लिए अपने भाई भरत के लिए अपनी राजगद्दी त्याग कर वनों में चले गए। विशाल साम्राज्य का त्याग करना सभी के लिए सम्भव नहीं है। कलयुग में तो धन सम्पत्ति के लिए भाई भाई का गला तक काट देता है। सनातन में, रामायण में, एक बड़ा भाई, छोटे भाई के लिए साम्राज्य का त्याग करता है, छोटा भाई भी उस साम्राज्य को अपने बड़े भाई की धरोहर मानकर संभालता है, साम्राज्य मिलने से वो लालची नहीं होता, अपितु 14 वर्ष वन के जीवन का विचार कर दुखी होता है। यही सनातन धारण की खूबसूरती है, यहाँ गद्दी के लिए गले नहीं काटे जाते, स्नेह के लिए गद्दी का त्याग किया जाता है। भगवान राम का आदर्श इस संसार के लिए अनुकरणीय है।

भगवान श्री राम जब बाल काल में शिक्षा ग्रहण करने गुरु वशिष्ठ जी के पास गए तो गुरु आज्ञा से ऋषि आश्रम में आकर बार बार आतंक मचाने वाले राक्षसों का अपने पराक्रम से अंत कर दिया। ताड़का और सुबाहु जैसे राक्षसों को राम जी ने यमपुरी पहुँचाया। भगवान राम राक्षसों का वध करते थे और ऋषि मुनियों की रक्षा करते थे। राम जी की शक्ति, विनम्रता और आज्ञा परायणता इतनी अधिक थी कि जनकपुर धाम में सीता स्वयंवर के अवसर पर भगवान शिव का धनुष उठाने में सभा में उपस्थित सब राजा असफल रहते है तो भगवान राम अपने गुरु की आज्ञा मिलने तक शांत होकर, विनम्रता के साथ बैठे रहे है, गुरु की आज्ञा मिलने पर भी विनम्रता पूर्वक उठते है और गुरु आशीर्वाद लेकर, सभा में उपस्थित सभी बड़ों को प्रणाम करने के बाद धनुष को स्पर्श करते है, धनुष और भगवान शिव को प्रणाम करते है, उसके बाद धनुष तोड़ते है।

धनुष तोड़ने से पहले और धनुष तोड़ने के बाद दोनों ही समय भगवान राम अहंकार रहित रहते है। अपनी शक्ति, पराक्रम और साहस पर राम जी अहंकार नहीं करते है। भगवान राम को क्रोध बहुत अपरिहार्य परिस्थिति में ही आता है। भगवान् राम आदर्शों के भी आदर्श है। सुग्रीव और विभीषण दोनों को उनका राज्य देने का वचन निभाया। राम जी मित्रता का परम् आदर्श है। भगवान् राम एक अद्भुत, पराक्रमी, और अतिसाहसी योद्धा भी है। भगवान राम ने आदर्श जीवन साथी की एक मिशाल कायम की। भगवान राम ने एकपत्नी धर्म धारण किया हुआ था। उस काल में कई पत्नी रखने का प्रचलन था, तब भी अपने जीवन साथी के प्रति राम जी निष्ठावान रहे, शूर्पणखा के विवाह आमंत्रण पर भी राम जी अपने आदर्शों से नहीं डिगे। पराई स्त्री को उन्होंने बहन और माता कहकर ही सम्बोधित किया। अपने पत्नी के स्नेह की डोर से बंधे रहें, कभी अनैतिक मार्ग पर नहीं चले।

अपने पत्नी को वापस लाने के लिए रावण जैसे योद्धा से भी युद्ध किया। रावण का वंशनाश कर, रामजी लंका में विभीषण जी को राज्य की बागडोर सौंपी। भगवान राम ने राज्य आज्ञा का उल्लंघन करने पर अपने प्राणों से प्यारे लक्ष्मण जी को भी मृत्युदंड दिया। व्यक्तिगत रिश्तों से उठकर राम जी हमेशा राज्य नियमों का पालन करते थे। राम जी के राज्य में राजधर्म का पालन करना ही सर्वोपरि था। राम जी की महानता जैसा कोई अन्य उदाहरण चारों योगों में दृष्ट नहीं होता है। प्रजा की कुशलता के विचार के अतिरिक्त भगवान राम अन्य कोई विचार मन में लाते नहीं है।

भगवान राम आदर्शों, संस्कारों और मूल्यों का अद्भुत ग्रंथ थे। भगवान राम के आदर्शों पर चलकर भारत का प्रत्येक नागरिक उनके आदर्शों को अपनाकर राम बन सकता है। राम नवमी पर राम जी के चरित्र का पूजन करने के साथ साथ, उनके आदर्शों, नियमों पर चलने का संकल्प प्रत्येक भारतीय को लेना चाहिए। विश्व के लिए एक आदर्श स्थापित करने वाले एक मात्र देव भगवान राम जी ही थे, हैं और रहेंगे।

ऐसे राम जी को बारम्बार हमारा प्रणाम, जय श्री राम


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