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क्या होता है मांगलिक दोष, जानें वैवाहिक जीवन को कैसे करता हैं प्रभावित

क्या होता है मांगलिक दोष, जानें वैवाहिक जीवन को कैसे करता हैं प्रभावित

By: Rekha Kalpdev | 07-Aug-2018
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जब किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल जन्मपत्री के प्रथम भाव, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव और द्वादश भाव में होता हैं तो व्यक्ति मांगलिक कहलाता है। मंगल दोष की गणना विशेष ज्योतिषीय योगों में की जाती हैं।

मंगल दोष व्यक्ति के जीवन, स्वभाव, वैवाहिक जीवन स्थिति और अनेक अन्य विषयों को प्रभावित करता हैं। सभी ग्रहों में मंगल ऊर्जा शक्ति, आवेश, जोश और उत्साह के कारक ग्रह हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह माना जाता है कि मंगल ग्रह की शुभता व्यक्ति में यह सभी गुण प्रदान करती हैं।

मांगलिक दोष गृहस्थ जीवन में तनाव और कष्ट देने वाला कहा गया है, परन्तु इस निर्णय पर पहुंचने के लिए मंगल के साथ अन्य ग्रहों की स्थिति का भी विचार किया जाता हैं। किसी व्यक्ति विशेष की कुंडली में मंगल योग कितना प्रभावी हैं, यह इस बात कर निर्भर करता है कि मंगल किस भाव में हैं और उसका अन्य ग्रहों से किस प्रकार की स्थिति बनी हुई हैं।

  • प्रथम भाव में मंगल हों तो व्यक्ति के स्वभाव में आक्रोश, क्रोध और तनाव देता है। प्रथम भाव से मंगल सप्तम भाव को दृष्टि देता हैं। इससे दोनों में आपसी तनाव, मतभेद और विवाद की स्थिति बनती हैं।

  • चतुर्थ भाव में मंगल की स्थिति होने पर धन, करियर और आर्थिक स्थिति प्रभावित होती हैं तथा जीवन साथी के आजीविका क्षेत्र में स्थायित्व आता है। मंगल की यह स्थिति पति-पत्नी में अनावश्यक संघर्ष कराती है। कई बार अनावश्यक शारीरिक हानि की स्थिति भी बन जाती है। इसके अतिरिक्त यह वैवाहिक जीवन के अलावा जीवन की अन्य गतिविधियों को भी प्रभावित करता है। पहले घर में मंगल की स्थिति व्यक्ति को क्रोध और आवेशी बनाती है। यहां से इसका सीधा प्रभाव सप्तम भाव पर पड़ता हैं जिसके फलस्वरुप वैवाहिक जीवन कष्टमय बनता है।

  • दक्षिण भारतीय मत के अनुसार मंगल का दूसरे भाव में होना भी मंगलिक योग बनाता है। जन्मपत्री का दूसरा भाव जीवन साथी की आयु का होता है, यहां मंगल की स्थिति व्यक्ति के ससुराल पक्ष से संबंध खराब करती हैं। जीवन साथी की आयु में इसकी वजह से प्रभावित होती है।

  • जन्मपत्री में मंगल का चतुर्थ भाव में होना व्यक्ति सुख और शांति में कमी करता है। चतुर्थ भाव क्योंकि घर और सुख का होता है अत: यहां से जीवन साथी अपने पेशेवर जीवन में नकारात्मक हो जाता है।

  • सप्तम भाव जीवन साथी का भाव होता है। इस भाव में मंगल होने पर वैवाहिक जीवन में वाद-विवाद, तनाव और आक्रोश की स्थिति देता है। ऐसे व्यक्ति का जीवन साथी जल्द क्रोध करने वाला होता है।

  • आठवें भाव में मंगल होना भी मांगलिक योग बनाता है। आठवां भाव ससुराल पक्ष और जीवन साथी की वाणी का होता है। वाणी में नियंत्रण ना होने के कारण वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण होता है। इससे एक ओर तो ससुराल से रिश्ते खराब होते हैं दूसरी ओर आयु पर भी प्रभाव पड़ता है।

  • जिन व्यक्तियों की कुंडली में मंगल बारहवें भाव में होता हैं उस व्यक्ति को वैवाहिक जीवन में शयन कक्ष में तनाव और विवाद का सामना करना पड़ता है। शयन सुख में कमी होने पर आपसी तालमेल कमजोर होता है। जिन व्यक्तियों की कुंडली में मंगल दोष बन रहा होता है उन व्यक्तियों को अपने जीवन साथी के साथ समझौता करने और समायोजन करने में कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।

मंगल योग से प्रभावित व्यक्ति को धन से जुड़ी परेशानियां होती हैं। मंगल दोष से व्यक्ति में क्रोध और आक्रोश अधिक होता है।

मंगल दोष निवारण के उपाय -

  • मंगलवार का व्रत पालन करने पर मांगलिक दोष का प्रभाव कम होता है।

  • वर-वधू दोनों मांगलिक हों तो इस दोष का परिहार स्वयं ही हो जाता है।

  • राम भक्त हनुमान जी का नित्य दर्शन पूजन करना वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाता है।

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