शनि ग्रह का प्रकोप शांत करने के लिए - शनि शांति उपाय

By: Acharya Rekha Kalpdev | 24-Feb-2024
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शनि ग्रह का प्रकोप शांत करने के लिए - शनि शांति उपाय

वैदिक ज्योतिष 09 ग्रहों, 12 भावों और 12 राशियों से मिलकर बनी दैवीय विद्या है। भविष्य को जानने के लिए वैदिक ज्योतिष का प्रयोग किया जाता है। नौ ग्रहों में से शनि सबसे मंद गति से चलने वाला ग्रह है। शनि एक राशि में ढाई साल रहता है। बारह राशियों में गोचर करने में यह लगभग तीस साल लेता है। शनि न्याय, आयु, कर्म और श्रम प्रधान है। न्याय प्रणाली के कारक ग्रह है। इसके अलावा शनि आपकी ईमानदारी की सीमाएं, आपकी निष्ठां की सीमायें और आपके दायित्वों की सीमाओं की व्याख्या करते है। इस जीवन में अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए आपको कौन सी सीमाएं दी गई है। यह शनि ग्रह बताता है। कर्म लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए शनि ग्रह एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता है। शनि आपका ध्यान अपने लक्ष्यों से भटकने नहीं देता है। शनि कुंडली में जातक का कर्म, दायित्वों और अपनी कर्तव्यों के प्रति समर्पण दर्शाता है।

कुंडली / Kundli में जिन भावों, और ग्रहों से शनि का सम्बन्ध बनता है, जातक उन रिश्तों, दायित्वों और जिम्मेदारियों के प्रति समर्पित रहता है। अपने कार्यों को पूरा करने के लिए आप कितने प्रतिबद्ध है, यह भी शनि से ही जाना जा सकता है। कुछ गलत अवधारणों के कारण शनि ग्रह का नाम सुनकर सब डर जाते है। शनि ग्रह को लेकर लोगों को इतना अधिक भयभीत कर दिया गया है कि शनि महादशा, शनि ढैय्या और शनि की साढेशाती शुरू होने का नाम सुनकर, लोग बहुत अधिक डर जाते है। जबकि शनि किसी को कष्ट नहीं देते, वो सिर्फ हमें हमारे कर्मों के अनुसार परिणाम देते है। हमारे अच्छे और बुरे कर्मों का लेखा जोखा देखकर, हमें अपनी दशा अवधियों में और शनि ढैय्या व् शनि साढ़ेसाती में फल देते है। शनि ग्रह से हमें जो भी कुछ मिलता है, वो हमारे ही किसी कर्म का परिणाम होता है।

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सही और गलत में निर्णय करने की शक्ति, इसे न्याय करने की शक्ति भी कहा जा सकता है, वह भी शनि ग्रह में है। सही को सही कहना और गलत को गलत कहना शनि ग्रह के अन्तर्गत आता है। शनि हमारी धैर्य शक्ति और सहनशक्ति को दर्शाता है। मेहनत करने की शक्ति भी शनि से जानी जा सकती है। जातक ने शुभ कार्य किये हो तो व्यक्ति को रंक से राजा बनाता है। राजा से रंक भी बनाने का सामर्थ्य रखता है।

Vedic Astrology में शनि ग्रह मंदगति ग्रह के नाम से जाना जाता है। ज्योतिष में शनि ग्रह मकर और कुम्भ दो राशियों का स्वामित्व रखता है। शनि मेष राशि में नीच स्थान प्राप्त करते है, और तुला शनि की उच्च राशि है। शनि कर्मवादी ग्रह है इसलिए आलसी लोगों को अधिक पसंद नहीं करते है, जबकि मेहनती लोगों को शनि जीभर कर देते है। शनि की महादशा 19 साल की होती है। शनि की साढ़ेसाती साढ़े सात साल की होती है। जिसमें शनि ढाई-ढाई साल तीन राशियों में गोचर करते है। शनि की ढैय्या भी ढाई साल की होती है। शनि की साढ़ेसाती जन्म चंद्र से द्वादश, जन्म शनि और जन्म शनि से द्वितीय भाव पर शनि का गोचर काल होता है। और शनि की ढैय्या दो प्रकार की होती है। जिसमें एक कंटक शनि और दूसरी अष्टम शनि ढैय्या के नाम से जानी जाती है। जन्म चंद्र से जब शनि चौथे भाव पर गोचर करते है, तो यह अवधि शनि की कंटक शनि ढैय्या कहलाती है। दूसरे जब शनि जन्म राशि से आठवें भाव पर गोचर करते है, तो यह गोचर अवधि अष्टम शनि ढैय्या से सम्बोधित की जाती है।

जन्मपत्री में शनि अशुभ भावों का स्वामी होकर, अशुभ भाव में स्थित हो तो शनि अशुभ फलकारी हो जाता है। ऐसे में शनि से शुभ फल पाने के लिए शनि उपायों का सहारा लिया जाता है। उपाय करने से शनि की शुभता में वृद्धि होती है और अशुभता में कमी होती है। आप भी अपनी कुंडली में शनि को शुभ करना चाहते है तो आप भी इन उपायों से शनि को शुभ कर अपने जीवन में चमत्कारिक बदलाव पा सकते है -

शनि ग्रह को उपायों से शांत कैसे करें | How to Pacify Planet Saturn with Remedies

शनि ग्रह को शांत करने के लिए शनिवार के दिन शनि मंत्र का जप करना बेहद लाभकारी उपाय माना गया है। प्रेतके व्यक्ति को शनि मंत्र का जाप नित्य करना चाहिए। शनि मंत्र जाप से शनि जनित दोष दूर होते है। शनि के इस मंत्र का जाप एक माला (108 बार) करें -ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनैं नम:

जीवनशैली में बदलाव से शनि की शांति | Peace of Saturn Through Change in Lifestyle

  • काला रंग शनि का रंग है, काले रंग के वस्त्र धारण करने से शनि ग्रह की शांति होती है।
  • शनि क्योंकि वृदावस्था और बुजुर्गों के कारक ग्रह है। इसलिए बुजुर्गों की सेवा और सम्मान से शनि देव प्रसन्न होते है और उनके फल शुभ रूप में प्राप्त होते है।
  • इसके अतिरिक्त जब हम अपने अधीन काम करने वाले और अपने सेवकों के अधिकारों का सम्मान करते है तो शनि ग्रह की शांति होती है।
  • शनि को प्रसन्न रखने के लिए तामसिक भोजन का त्याग करना चाहिए।
  • शनि शांति के लिए रात के समय सोने से पूर्व दूध का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • शनिवार के दिन शनि वस्तुएं, जिसमें लोहा, सरसों का तेल, चमड़ा, छतरी जैसी वस्तुएं नहीं खरीदनी चाहिए।

पूजन विधि से शनि शांति | Pujan Vidhi Se Shani Shanti

  • सूर्योदय काल में उठकर, स्नानादि क्रियाओं से मुक्त होने के बाद भगवान् शनि देव की पूजा करने से शनि ग्रह के फल शुभ होते है।
  • भगवान् श्री कृष्ण और राधा जी पूजा करने से भी शनि ग्रह कि शांति होती है।
  • हनुमान चालीसा पढ़ने और हनुमान जी के मंत्र का जाप करने से शनि ग्रह के फल शुभ रूप में प्राप्त होते है।
  • हनुमान जी पूजा और राम नाम के स्मरण से शनि ग्रह के दोष दूर होते है।
  • प्रात: काल में पीपल के पेड़ की जड़ों में जल देने से शनि शांति होती है।

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व्रत से शनि ग्रह की शांति | Vrat Se Shani Grah ki Shanti

  • शनि ग्रह की शांति के लिए जातक को शनिवार या मंगलवार के दिन का व्रत करना चाहिए। मंगलवार और शनिवार दोनों दिनों का व्रत भी किया जा सकता है। सबके कर्मों का हिसाब करने वाले शनि देव, अपने भक्तों पर अपनी कृपा जरूर करते है। इसके साथ ही शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाने से भी शनि देव प्रसन्न होते है।
  • शनि ग्रह की वस्तुओं का दान करने से शनि शांति
  • शनि ग्रह की वस्तुओं में काली उड़द कि दाल, काले वस्त्र, काला कम्बल, लोहा और कीलें, काली गाय आदि का दान शनिवार के दिन अपने सामर्थ्य अनुसार किया जा सकता है। इन वस्तुओं का दान करने से शनि दोष दूर होते है। सतनाजा का दान करना भी शनि के शुभ फल पाने का एक सरल और सहज उपाय है।

शनि का रत्न नीलम धारण करें | Shani Ka Ratna Neelam Dharan Karen

जन्म कुंडली / Janma Kundli में शनि ग्रह शुभ होकर स्थित हो, जैसे - शनि योगकारक हो, या त्रिकोण का स्वामी होकर केंद्र या त्रिकोण में स्थित हो तो जातक को शनि रत्न अवश्य धारण करना चाहिए। नीलम रत्न को जीवन पलटने वाला रत्न कहा गया है। ऐसा माना जाता है की शनि रत्न नीलम / Ratna Neelam यदि किसी को अपने पूर्ण फल दें तो, धारण करने वाले को राजा से रंक बना सकता है। रत्न के अलावा शनि की शुभता पाने के लिए माध्यम अंगुली में घोड़े की नाल से बना लोहे का छल्ला धारण करना चाहिए। केंद्र में स्थित शनि का यह बहुत ही बजट में आने वाला उपाय है। और इसके फल भी बहुत अचूक प्राप्त होते है।


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