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कैसे छुटकारा पायें शनि के बुरे प्रभाव से

By: Rekha Kalpdev | 22-Jan-2019
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कैसे छुटकारा पायें शनि के बुरे प्रभाव से

वैदिक ज्योतिष शास्त्रों में शनि ग्रह को मंद गति ग्रह की संज्ञा दी गई है और शनि ग्रह को अशुभ ग्रहों की श्रेणी में रखा गया है। शनि एक राशि में लगभग ढ़ाई साल रहते हैं। मंद गति ग्रह होने के कारण शनि ग्रह से मिलने वाले फल अत्यंत प्रभावी होते है। इन्हें अशुभ, कष्टकारी और दुख देने वाला ग्रह माना गया है।

जिन जातकों की Kundli पर शनि साढ़ेसाती या शनि ढ़ैय्या प्रभावी होती हैं, वे जातक इस अवधि में सामान्य से अधिक मानसिक दबाव और कष्ट का अनुभव करते हैं। शनि ग्रह न्याय कारक ग्रह भी है। ग्रहों में इन्हें न्यायाधीश का पद प्राप्त है। यह माना जाता है कि शनि ग्रह सूर्य देव के पुत्र है। अधिकतर ज्योतिष शस्त्रों में इनकी बहुत अधिक आलोचना की गई है। इन्हें अंधकार, निराशा और निर्दयी ग्रह के रुप में स्वीकार किया गया है।

सामान्यत: सभी को जीवन में शनि साढ़ेसाती और शनि ढैय्या का सामना करना पड़ता है। मेहनती, निष्ठावान और कर्मठ व्यक्तियों के लिए shani sade sati का समय उन्नतिदायक रहता है। कुंडली में शनि शुभ फल देने की स्थिति में ना हों तो व्यक्ति को निम्न उपाय करने से राहत का अनुभव होता हैं-

शनि उपाय - Shani Upay

  • शनि दोषों से बचाव करने के लिए एक काले रंग का पक्षी लेकर शनिवार के दिन आजाद कर दें। आप पायेंगे कि पक्षी के साथ ही आपकी परेशानियां भी उड़ जायेंगी।
  • सोमवार के दिन भगवान शिव का अभिषेक करें।
  • भगवान भैरव जी के मंदिर में त्रिशूल अर्पित करें।
  • हनुमान जी को प्रसन्न रखने से शनि ग्रह के दोषों का शमन होता है।
  • शनि ग्रह की काली वस्तुओं का दान किसी गरीब व्यक्ति को करें। वस्तुओं में काले तिल, काली उड़द, काली वस्त्र, लोहे के बर्तन और सरसों के तेल का दान करें।
  • शनिवार के दिन काले कुत्ते को रोटी खिलायें।
  • यथासंभव जरुरतमंदों को खाना खिलायें।
  • शनिवार के व्रत का पालन करें।
  • घर के लिए आटा पिसवाते समय गेहूं में थोड़े से काले चने मिलाना ना भूलें।
  • शनिवार के दिन प्रात: स्नान के बाद पीपल के पेड़ को जल दें और सायंकाल में सरसों के तेल का दीपक जलायें।
  • शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की कम से कम ७ परिक्रमा करें।
  • गेहूं का आटा और काली उड़द को मिलाकर बनायें आटे से गोलियां बनवाकर मछलियों को खिलाये।
  • शमशान घाट में शनिवार के दिन सूखी लकड़ियों का दान करें।
  • रात्रि में सरसों का तेल नाखुनों में लगाकर सोयें।
  • शनिवार के दिन रोटी में सरसों का तेल लगाकर काले कुत्ते को खिलायें।
  • सोमवार के दिन माथे पर दही का तिलक लगायें।
  • तांबे के तारों के सांप बनवाकर चार सांप बहते जल में प्रवाहित करें।
  • हनुमान मंदिर में जाकर प्रार्थना - उपासना करें।
  • शनि यंत्र घर में स्थापित कर दर्शन-पूजन करें।
  • तामसिक भोजन के सेवन से बचें। विशेष रुप से मदिरा और मांस का।
  • शनि चालीसा का नित्य पाठ करें।
  • कौओं को दाने डालें।
  • शनि देव का नित्य पूजन करें।
  • बादाम बहती नदी में प्रवाहित करें।
  • चार नारियल बहते जल में प्रवाहित करें।
  • शनिवार के दिन लोहे का छल्ला मध्यमा अंगूली में धारण करें।
  • चांदी की चेन धारण करें।
  • एक काले वस्त्र में 8 किलो उड़द बांधकर शनिवार के दिन बहते जल में बहा दें।
  • सोमवार के दिन चावल का दान करे।
  • कुंडली में शनि सुस्थित हों तो शनिवार के दिन नीलम धारण करें।

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लाल किताब के अनुसार शनि शांति के उपाय | Lal Kitab ke anusar Shani Shanti ke Upay

  • बंदरों की सेवा करें।
  • दूध में चीनी मिलाकर बरगद की जड़ों में डालें।
  • असत्य बोलने से बचें।
  • मेहनत से कमाए गए धन से संतुष्ट रहें।
  • दूसरों के धन को लेकर चालच न करें।
  • शनिवार के दिन व्यवसायिक क्षेत्र के बाहर नींबू और हरी मिर्ची बांधें।
  • शनिवार के दिन तिल, केला और नींबू का दान करें।
  • घर में काला कुत्ता पालें।
  • बहते जल में शराब डालें।
  • जन्मपत्री में शनि शुभ स्थित हो तों व्यक्ति को काले रंग की वस्तुओं का सेवन करना चाहिए।
  • साथ ही हरी वस्तुओं को भी यथासंभव भोजन में स्थान देना चाहिए।
  • कार्यक्षेत्र में अधीनस्थों को सम्मान दें, उनके अधिकारों का हनन न करें।
  • मजदूरों की सहायता करें।
  • नाक व दातों की साफ-सफाई पर खास ध्यान देना चाहिए।
  • कुंडली में शनि अशुभ ग्रहों से पीडित हो तो व्यक्ति को लोहे व चमड़े की वस्तुओं का दान करना चाहिए।
  • चतुर्थ भाव में उच्चस्थ शनि हो तो व्यक्ति को ४९ साल के बाद ही गॄह निर्माण कार्य कराना चाहिए।
  • यदि संभव हो तो बना हुआ मकान ही क्रय करें, निर्माण कार्य ४९ साल के बाद ही करायें।
  • चांदी के चौरस के टुकड़े पर
  • पीपल के पेड़ पर गुरुवार एक दिन जल दें और व्रत करें।
  • पीली दाल और केले गुरुवार के दिन मंदिर में अर्पित करें।
  • दक्षिणामुखी घर में निवास करने से बचें।

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