कड़ा, ब्रेसलेट या लॉकेट पहनें सोच समझकर, ये हो सकता हैं नुकसान | Future Point

कड़ा, ब्रेसलेट या लॉकेट पहनें सोच समझकर, ये हो सकता हैं नुकसान

By : Future Point
Expert Review : Dr. Arun Bansal, Vedic Astrologer | 45+ Years Experience
Published : 15-Jun-2018कड़ा, ब्रेसलेट या लॉकेट पहनें सोच समझकर, ये हो सकता हैं नुकसान

संसार में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं जिसके जीवन में कोई समस्या न हों। हर व्यक्ति किसी न किसी परेशानी का सामना कर रहा हैं। सभी चाहते हैं कि उनके जीवन के सभी कष्टों का निवारण हो जाएं, इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति प्रयास भी करता हैं। ज्योतिष शास्त्र (Astrology) के अनुसार हमारे जीवन के सभी सुख-दुखों का ग्रहों से सीधा संबंध हैं। जिंदगी के संघर्षों को कम करने और मनोनूकुल इच्छा की पूर्ति करने में ज्योतिषीय उपाय कारगर सिद्ध होते हैं।

उपायों के रुप में व्यक्ति दान, मंत्र जाप, रुद्राक्ष, हवन, पूजा-पाठ, रत्न जड़ित अंगूठियां, कड़ा, ब्रेसलेट या लॉकेट धारण करना अथवा विभिन्न धातुओं से निर्मित कड़ा, ब्रेसलेट या लॉकेट पहनना। इस प्रकार के ज्योतिषीय उपाय ग्रहों के दोष तो दूर करते ही हैं साथ ही इन उपायों से धन, सुख-शांति की प्राप्ति भी होती हैं। परन्तु यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि यदि ज्योतिषीय उपाय बिना किसी ज्योतिषीय सलाह के किए जाएं तो ये लाभ के स्थान पर हानि / नुकसान का कारण बन सकते हैं।

इसका निर्धारण एक ज्योतिषी ही कर सकता हैं कि कौन से ग्रह की शांति के लिए वस्तु का दान करना सही रहेगा और किस ग्रह की शुभता प्राप्ति के लिए कड़ा, ब्रेसलेट या लॉकेट, किस रत्न और किस धातु में धारण करना चाहिए। स्वविवेक से निर्णय लेने से गलतियां होने की संभावना बढ़ जाती है। इस आलेख में हम आपको बतायेंगे कि कड़ा, ब्रेसलेट या लॉकेट धारण करते समय कौन सी सावधानियां बरतनी उपयोगी रहेंगी-

जब जन्मपत्री में सूर्य शुभ स्थिति में हों त्रिकोण या केंद्र का स्वामी होकर त्रिकोण या केंद्र में ही स्थित हों तो व्यक्ति को सूर्य की शुभता प्राप्ति के लिए तांबे का कड़ा पहनना चाहिए, चंद्र ग्रह की शुभता पाने के लिए चांदी का कड़ा, मंगल ग्रह के लिए तांबे या सोने का कड़ा पहने, बुध ग्रह को शुभ बनाए रखने के लिए कांसे का कड़ा, गुरु ग्रह के लिए सोने का, शुक्र ग्रह के लिए चांदी, शनि ग्रह के लिए लोहे, राहु के लिए पंचधातु और केतु के लिए अष्टधातु का कड़ा पहनना चाहिए। धातु का कड़ा धारण करने के साथ व्यक्ति को संबंधित ग्रहों का मंत्र भी जाप करना चाहिए। मंत्रों की जानकारी इस प्रकार हैं-

सूर्य ग्रह - ऊँ घृणिः सूर्याय नमः मंत्र का जप। धारण का दिन रविवार।

चंद्र ग्रह - ऊँ सों सोमाय नमः मंत्र। धारण का दिन सोमवार।

मंगल ग्रह - ऊँ अं अंगारकाय नमः मंत्र। धारण का दिन मंगलवार।

बुध ग्रह - ऊँ बुं बुधाय नमः मंत्र का जप। धारण का दिन बुधवार।

गुरु ग्रह - ऊं गुं गुरवे नम: मंत्र का जप। धारण का दिन गुरुवार।

शुक्र ग्रह - ऊँ शुं शुक्राय नमः मंत्र का जप। धारण का दिन शुक्रवार।

शनि ग्रह - ऊँ शं शनैराय नमः मंत्र का जप। धारण का दिन शनिवार।

राहु ग्रह - ऊँ रां राहवे नमः मंत्र का जप। धारण का दिन शनिवार।

केतु ग्रह - ऊँ कें केतवे नम: मंत्र का जप। धारण का दिन मंगलवार।

विशेष - किसी भी ग्रह की शांति पाने के लिए ग्रह से संबंधित धातु का कड़ा धारण करने के साथ साथ यदि कड़े में उसी ग्रह के रत्न भी लगवाएं जाएं तो इससे मिलने वाले फल दौगुने हो जाते हैं।

आईये अब बात करते हैं ब्रेसलेट या लॉकेट की-

ब्रेसलेट या लॉकेट जन्मराशि के अनुसार या जन्मलग्न के अनुसार धारण किए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त ग्रहों की स्थिति के अनुसार अभी ब्रेसलेट या लॉकेट धारण करना शुभ फलदायी रहता हैं।ब्रेसलेट या लॉकेट पहने समय इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि यह अनुकुल और बली ग्रह का हों साथ ही इसमें जडि़त रत्न त्वचा को छू रहें हों। इससे रत्न में निहित रश्मियां धारक को प्राप्त होती हैं और बली ग्रह की शुभता व्यक्ति को प्राप्त होती हैं। ब्रेसलेट या लॉकेट रत्नों के स्थान पर उपरत्नों का भी पहना जाता हैं।

इसमें एक से अधिक रत्न भी लगवाएं जा सकते हैं। परन्तु जो भी रत्न लगवाएं वह आपके लिए शुभ होने चाहिए। अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि का कारण बन सकते हैं। ब्रेसलेट या लॉकेट इस प्रकार बनवायें जाएं कि उसका नीचे का तला खुला हों, और रत्न का संपर्क त्वचा से हो रहा हों। यह सही रुप से जड़ा गया हों, और सहजता से इसके निकलने की संभावनाएं ना हों।

रत्नों के जड़ित हो जाने के बाद धारण करने से पूर्व इनका अभिमंत्रित होना आवश्यक हैं। अन्यथा ये ठीक उसी प्रकार हैं जिस प्रकार बिना प्राण के शरीर। जब तक रत्नों को अभिमंत्रित नहीं किया जाता हैं तब तक उनमें सम्माहित शक्तियां जागृत नहीं होती हैं। रत्नों को सक्रिय करने के लिए यह अभिमंत्रण की क्रिया की जाती हैं। इस क्रिया में रत्न को अभिमंत्रित, शुद्धिकरण और प्राण-प्रतिष्ठा भी की जाती हैं। इसके बाद रत्न सकारात्मक प्रभाव देने की स्थिति में आता हैं।