जानिए कैसा रहेगा विक्रम संवत्सर 2077 अर्थात “प्रमादी” नामक संवत्सर का फल भारत देश के लिए,

By: Future Point | 16-Mar-2020
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जानिए कैसा रहेगा विक्रम संवत्सर 2077 अर्थात “प्रमादी” नामक संवत्सर का फल भारत देश के लिए,

विक्रम संवत् एक प्राचीन हिन्दू काल गणना प्रणाली है, जो भारतीय उपमहाद्वीप में प्राचीनकाल से प्रचलित रही है। यह भारत का सास्कृतिक आधिकारिक पञ्चांग है। भारत में यह अनेकों राज्यों में प्रचलित पारम्परिक पञ्चाङ्ग है। इसमें चान्द्र मास एवं सौर नाक्षत्र वर्ष का उपयोग किया जाता है। इसका प्रणेता सम्राट विक्रमादित्य को माना जाता है। कुछ आरम्भिक शिलालेखों में इसका वर्णन मिलता है। ८वीं एवं ९वीं शदी में विक्रम संवत का नाम विशिष्ट रूप से मिलता है। यह संवत 57 ई.पू. आरम्भ हुई थी। इस संवत का आरम्भ गुजरात में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से और उत्तरी भारत में चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से माना जाता है। बारह महीने का एक वर्ष और सात दिन का एक सप्ताह रखने का प्रचलन विक्रम संवत से ही शुरू हुआ। महीने का हिसाब सूर्य व चंद्रमा की गति पर रखा जाता है। यह बारह राशियाँ बारह सौर मास हैं। जिस दिन सूर्य जिस राशि में प्रवेश करता है उसी दिन की संक्रांति होती है। पूर्णिमा के दिन, चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उसी आधार पर महीनों का नामकरण हुआ है। चंद्र वर्ष, सौर वर्ष से 11 दिन 3 घटी 48 पल छोटा है, इसीलिए प्रत्येक 3 वर्ष में इसमें 1 महीना जोड़ दिया जाता है। जिस दिन नव संवत का आरम्भ होता है, उस दिन के वार के अनुसार वर्ष के राजा का निर्धारण होता है। उदाहरण के लिए, 06 अप्रैल 2019 को विक्रम संवत 2076 का प्रथम दिन था। 06 अप्रैल को शनिवार होने से वर्ष का राजा शनि ग्रह था।

हिंदू नव वर्ष नवसंवत्सर विक्रम संवत 2077 का आरंभ 25 मार्च 2020 को बुधवार के दिन चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को होने जा रहा है। हिंदू नव वर्ष को हिंदू नव संवत्सर या नव संवत कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। इसी दिन से विक्रम संवत के नए साल का आरंभ भी होता है। नव संवत्सर में नवग्रहों के बीच मंत्रिमंडल में इस बार राजा बुध और मंत्री चंद्रमा रहेंगे। पूरे वर्ष बुधदेव का आधिपत्य रहेगा। बुध कन्या राशि का स्वामी है। अंग्रेजी नववर्ष की शुरुआत भी कन्या लग्न में ही हुई है। इस लग्न पर भी बुध का आधिपत्य है| यह राशि महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती है। इसलिए पूरे वर्ष में महिलाओं का प्रभाव देखने को मिलेगा। इस नवसंवत्सर में बुध के राजा होने से लोगों की धर्म और अध्यात्म में रूचि जुड़ाव बढ़ेगा। और लोगों को बौद्धिक कार्यों में उन्नति और व्यापारिक कार्यों में सफलता मिलेगी| लेकिन राजनीतिक हालात अधिक संतोषजनक नहीं रहेंगे। रवि व सिद्धि योग भी इस दिन की शुभता में बढ़ोतरी करने वाले होंगे। इस संवत्सर का नाम ''प्रमादी'' है तथा वर्ष 2077 है, श्री शालीवाहन शकसंवत 1942 है और इस शक संवत का नाम शार्वरी है। भले ही आज अंग्रेजी कैलेंडर का प्रचलन कुछ बढ़ गया हो लेकिन उससे भारतीय कलैंडर की महता कम नहीं हुई है। आज भी हम अपने व्रत-त्यौहार, महापुरुषों की जयंती-पुण्यतिथि, विवाह व अन्य शुभ कार्यों को करने के मुहूर्त आदि भारतीय कलैंडर के अनुसार ही देखते हैं। इस दिन को महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा तो आंध्र प्रदेश में उगादी पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही वासंती नवरात्र की शुरुआत भी होती है। एक अहम बात और कि इसी दिन सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। अत: कुल मिलाकर कह सकते हैं कि हिंदू नव वर्ष हमें धूमधाम से मनाना चाहिये।

नवसंवत्सर राजा बुध–

इस नवसंवत्सर के राजा बुद्धि के स्वामी बुध होंगे, बुध के प्रभाव से शुभ एवं मांगलिक कार्यों का आयोजन बना रहेगा और लोग अधिक प्रसन्न रहेंगे| मानसिक रुप से उत्सुकता और उत्साह की स्थिति अधिक दिखाई देती है, गुरुजनों और बड़े बुजुर्गों के साथ विरोधाभास भी अधिक रह सकता है, मनोरंजन के क्षेत्र में लोगों का झुकाव अधिक रहने वाला है, धन धान्य और सुख सुविधाओं के प्रति भी लोगों का अधिक झुकाव रहेगा। अप्रत्याशित घटनाओं से देश की छवि धूमिल हो सकती है। इस वर्ष झूठ का बोलबाला रह सकता हैं। उच्च पदस्त और नामी लोगों के कारनामे प्रकट होना सम्भावित है।

नव संवत्सर के प्रवेश के समय कर्क लग्न का उदय हो रहा है। वर्ष लग्न बलवान होने से यह वर्ष विशेष परिवर्तनकारी सिद्ध हो रहा है। इस योग से देश को नई कार्य योजनाओं का लाभ प्राप्त होगा। धन-धान्य की सुख सुविधाएं प्राप्त होंगी। शासन तंत्र मजबूत होगा जनता जनार्दन का मनोबल बढ़ेगा। लग्न में चंद्रमा की राशि तथा नवम भाव में चंद्रमा एवं सूर्य की युति का होना, अंतरिक्ष विज्ञान में अद्भुत सफलता को दर्शाता है। तकनीकी और चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष उन्नति होगी। अष्टम भाव में बुध की शुभ दृष्टि होने से आर्थिक व्यवस्था मजबूत होगी और शेयर मार्केट में मंदी से तेजी का रुख रहेगा। तृतीय भाव में बुध की देव दृष्टि होने से औद्योगिक जगत कृषि जगत और व्यापार जगत में वृद्धि होगी द्वादश भाव में राहु की अवस्था खनिज तत्व और भूगर्भीय भंडार को प्राप्ति के योग भी बनता है। बाढ़ के कारण भारत के पूर्वी एवम उत्तरी क्षेत्र में जनधन की हानि के योग भी बनते हैं। यह योग अधिक वर्षा का कारक है शनि और मंगल ग्रहों की युति यान और रेल दुर्घटनाओं में वृद्धि को दर्शाता है।

बुध और शुक्र ग्रहों की कृपा से कृषक वर्ग पूर्णतया सुखी अनुभव करेगा पैदावार अच्छी होगी। चंद्रमा मंगल एवं शनि ग्रहों के प्रभाव से विदेश नीति में कामयाबी हासिल होगी लेकिन राहु ग्रह के कारण कुछ अड़चनें भी पैदा हो सकती है। भाग्य स्थान में चंद्रमा और सूर्य ग्रह होने से बड़े देशों से व्यापारिक संधियाँ और सहयोग प्राप्त होने की संभावना है। शुक्र ग्रह दशम भाव में होने से स्मार्ट सिटी के कार्य विशेष फलीभूत होंगें। सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटेंगें। संसद में विपक्ष का बोलबाला नहीं के बराबर होगा। सुख-सुविधाओं का विस्तार होगा। भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनेगी। बुध का प्रभाव लोगों के मध्य चालाकी से काम करने की प्रवृत्ति को बढ़ाने वाला होगा, एक दूसरे के साथ झूठ और छल करने की प्रवृत्ति भी बढ़ेगी, कला और संगीत के क्षेत्र में अधिक विकास होगा, व्यापारी वर्ग के लिए थोड़ा बेहतर समय होगा, साधु संतों का भी इस समय प्रभाव अधिक रहने वाला होगा, कानून विरोधी काम भी अधिक होंगे।

सम्वत मंत्री चंद्रमा–

नव संवत्सर का मंत्री चंद्रमा होने के कारण भौतिक सुख सुविधाओं का बोलबाला होगा, लोगों का ध्यान भी इस ओर अधिक रह सकता है, वर्षा अच्छी होने की उम्मिद भी की जा सकती है, दूध और सफेद वस्तुओं का उत्पादन भी अच्छा होगा, रस और अनाज में वृद्धि होगी, बाजार में मूल्यों में उतार-चढा़व जल्दी दिखाई देगा| असंतोष और दुविधा आम व्यक्ति के मन में बहुत अधिक रहने वाली है। अपराधों में कमी आएगी। अनाज, दूध,घी,दाल,धातुओं में मन्दी बनी रह सकती हैं। इस सम्वत का मंत्री चन्द्रमा होने से कर्मचारी वर्ग,महिला वर्ग के साथ साथ बुद्धिजीवी वर्ग की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

नवसंवत्सर में राहु और केतु-

२५ मार्च २०२० नवसंवत्सर के प्रारम्भिक समय में राहु और केतु क्रमशः मिथुन और धनु राशियों में होंगे, और सितंबर 2020 तक इन्ही राशियों में रहेंगे, और इसके पश्चात राहु वृषभ राशि में तथा केतु वृश्चिक राशि में होंगे, इन दोनों ग्रहों को अचानक लाभ और अचानक हानि के लिए जाना जाता है| राहु और केतु को विष्फोटक ग्रह भी माना जाता है, इनसे बुरी घटनाओं, और विद्रोहों आदि का भी विचार किया जाता है| इसलिए इस दौरान काफी उथल-पुथल होने के संकेत हैं।

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गुरु केतु का चांडाल योग-

२५ मार्च २०२० नवसंवत्सर के प्रारम्भिक समय से ही गुरु और केतु की युति धनु राशि में होने से चांडाल योग का निर्माण हो रहा है, लेकिन कुछ समय पश्चात गुरु मकर राशि में प्रवेश करेंगे, कुछ समय मकर राशि में रहने के पश्चात पुनः धनु राशि में आ जायेंगे, गुरु और केतु व्यक्ति को धर्म से जोड़ते हैं, लेकिन इनका सम्बन्ध इसलिए खराब माना जाता है, क्योंकि जब भी यह योग बनता है, तब राहु की दृष्टि इस योग पर अवश्य पड़ती है, इसलिए यह योग खराब प्रभाव देने वाला होता है| लेकिन इस दौरान यह योग गुरु की मूलत्रिकोण धनु राशि में बन रहा है, इसलिए गुरु तथा केतु का अशुभ प्रभाव कम होगा, अर्थात गुरु चांडाल योग का बुरा प्रभाव कम होगा, तो इस अवस्था में लोगों की सामजिक तथा आध्यात्मिक कार्यों में रूचि बढ़ेगी। समाज सेवा ही अपना धर्म समझकर कार्य करेंगे। लोगों में मानवीय गुणों का संचार होगा, लेकिन कुछ मामलों में इसके बुरे प्रभाव भी देखे जायेंगे| अचानक कुछ अशुभ घटनाएं जन जीवन को प्रभावित कर सकती हैं|

विक्रम नव संवत्सर 2077 किसानों के लिए रहेगा शुभ-

25 मार्च को विक्रम नव संवत्सर 2077 का शुभारंभ होने जा रहा है। यह किसानों के लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है, बुध का संबंध पर्यावरण से मन जाता है। इस कारण पर्यावरण के क्षेत्र में सुधार लाने के प्रयासों में तेजी आएगी। पहले दिन कुंभ का चंद्रमा होने से कृषक परिवारों में धन-धान्य की बढ़ोतरी होने की पूर्ण सम्भावना है।

युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर-

बुध का अधिपत्य रहने से विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं के सम्मान व प्रभाव में बढ़ोतरी होगी। बुध को नवग्रहों में राजकुमार का दर्जा है। युवाओं को इस साल रोजगार के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे। बिजनेस करने वालों को बिजनेस में उन्नति और सफलता प्राप्त होगी। पूरे साल बुधवार के दिन कई अहम फैसले होते भी दिखाई दे सकते हैं।

चैत्र नवरात्री 2020, पूजन विधि, और नियम-

चैत्र नवरात्री की शुरुआत 25 मार्च से होने जा रही है, और यह नवरात्रे 02 अप्रैल तक रहेंगे, इस बीच कई शुभ योगों का निर्माण भी हो रहा है| जिसमे सर्वार्थसिद्धि योग, रवियोग, अमृतसिद्धि योग शामिल हैं| इन विशेष योगों के कारण दुर्गा पूजा का विशेष लाभ प्राप्त होगा| चैत्र नवरात्री के नौ दिन दुर्गा माँ के नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है, और ऐसी भी मान्यता है कि चैत्र नवरात्री के पहले दिन मां दुर्गा का जन्म हुआ था, और मां दुर्गा के कहने पर ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया था, इस चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिन्दू नव वर्ष कि शुरुआत भी मानी जाती है| सूर्यदेव भी इसी दौरान द्वादश राशियों का भ्रमण करके पहली राशि मेष में प्रवेश करते हैं| और चैत्र नवरात्र से नव वर्ष के पंचांग कि गणना भी शुरू होती है| नवरात्र में देवी और नवग्रहों की पूजा का कारण यह भी है कि ग्रहों की स्थिति पुरे वर्ष अनुकूल रहे, जिससे जीवन में सुख-शांति और खुशहाली बनी रहे|

देवी दुर्गा का आशीर्वाद कैसे प्राप्त करें?

देवी दुर्गा अपने भक्तों के जीवन में प्रचुरता के लिए जानी जाती हैं और उनके जीवन से सभी समस्याओं और भय को दूर करती हैं। जिससे उसके भक्तों का जीवन आनंदमय और खुशहाल हो जाता है। कन्या पूजन के साथ नवरात्रि हवन एक अविश्वसनीय रूप से शक्तिशाली अनुष्ठान है जो देवी दुर्गा को प्रसन्न करता है, वह भक्त उनके शुभ आशीर्वाद को प्राप्त करता है, जो उनकी पूजा भक्ति करता है| जिससे जीवन में सफलता, खुशी और समृद्धि प्राप्त होती हैं। तो इस चैत्र नवरात्रि 2020 में कन्या पूजन के साथ मां दुर्गा का हवन पूजा करवाएं, और अपने जीवन में आ रही बाधाओं को समाप्त कर जीवन में आनंद और सफलता को प्राप्त करें!

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सस्येश (फसलों) का स्वामी गुरु–

इस समय सस्येश अर्थात फसलों पर गुरु का प्रभाव होने से दूध और फलों की वृद्धि अच्छी होगी। फसलों की पैदावार में बढ़ोत्तरी होगी। इस समय वेद और धर्म के मार्ग पर जीवन जीने से लोगों का कल्याण होगा। इस संवत्सर का सस्येश देवगुरु बृहस्पति है, इसलिए इस दौरान व्यर्थ के विवाद शान्त होंगें। षड्यंत्रकारी ताकते कमजोर रहेंगी। रोगों से मुक्ति मिलेगी। शासन द्वारा जनहित में कानून व्यवस्था में आपेक्षित सुधार सम्भव होंगें, और लोग प्रसन्न और अधिक उत्साहित होंगे,

नीरसेश गुरु का प्रभाव–

नीरसेश अर्थात ठोस धातुओं का स्वामी गुरु है, गुरु के प्रभाव से तांबा, सोना या अन्य पीले रंग की वस्तुओं के प्रति लोगों का झुकाव और अधिक बढ़ सकता है, इनकी मांग बढ़ सकती है, और कृषि के क्षेत्र में अच्छा रुख दिखाई दे सकता है, पशुओं से लाभ मिलने की उम्मीद भी दिखाई देती है, खेती से जुड़े व्यापारियों को भी लाभ मिलने की उम्मिद है।

धान्येश मंगल का प्रभाव–

धान्येश अर्थात अनाज और धान्य जो हैं उनके स्वामी इस वर्ष मंगल होंगे, मंगल के प्रभाव से गेहूं, ज्वार, बाजरा, गन्ना, तिल्ली, अलसी, मसूर, मूंगफली, चना, सरसों आदि के मूल्य में वृद्धि देखने को मिल सकती है, तेल जैसे पदार्थों में तेजी आएगी ये वस्तुएं महंगी हो सकती है। धार्मिक एवम शुभ उत्सव जैसे आयोजनों में वृद्धि होगी।

मेघश (वर्षा का स्वामी) सूर्य का प्रभाव–

मेघेश अर्थात वर्षा का स्वामी, इस वर्ष का मेघेश सूर्य होने से वर्षा में कुछ कमी होना सम्भावित है। सूर्य के प्रभाव से गेहूं, जौ, चने, बाजरा की पैदावार अच्छी होगी| दूध, गुड़ आदि के उत्पादन में भी वृद्धि होगी, सूर्य का प्रभाव कई स्थानों पर वर्षा में कमी ला सकता है, नदी और तालाब जल्द सूख भी सकते हैं। अकाल की सम्भवना बनती हैं। आम लोगों में क्रोध की अधिकता बढ़ेगी। वहीं दुर्घटनाओं में वृद्धि के साथ साथ प्राकृतिक आपदाओं की सम्भवना बनती हैं। तथा मसालों के भाव में वृद्धि होने के आसार हैं। फलों, फूलों, सब्जियों और औषधियों की उपज अच्छी होंगी। व्यापारी वर्ग तथा जनता सुख का अनुभव करेगी।

फलेश सूर्य का प्रभाव–

फलेश अर्थात फलों का स्वामी. सूर्य के फलों का स्वामी होने के कारण इस समय वृक्षों पर फल बहुत अच्छी मात्रा में रहेंगे, फल और फूलों की अच्छी पैदावार भी होगी और उत्पादन भी बढ़ेगा पर कुछ स्थान पर इसमें विरोधाभास भी दिखाई देगा जैसे की कहीं अच्छा होना और कहीं अचानक से कम होना,

रसेश शनि का प्रभाव–

रसेश अर्थात रसों का स्वामी, रस का स्वामी शनि होने के कारण भूमि का जलस्तर कम हो सकता है, वर्षा होने पर भी जल का संचय भूमि पर नहीं हो पाए। प्रशासन बलवान होगा। जनता जनार्दन जागरूक बनेगी। बेमौसमी और प्रतिकूल वर्षा के कारण अनेक रोग उत्पन्न हो सकते हैं, कुछ ऐसे रोग भी बढ़ सकते हैं जो लम्बे चलें और आसानी से ठीक न हो पाएं। इस वर्ष का रसेश शनि होने से भौतिक सुख सुविधाओं का विस्तार होगा।

धनेश बुध का प्रभाव–

धनेश अर्थात धन का स्वामी बुध होने के कारण इस वर्ष वस्तुओं का संग्रह अच्छे से हो सकता है, व्यापार से भी लाभ मिलेगा और सरकारी खजाने में धन आएगा, धार्मिक कार्य-कलापों से भी धन की अच्छी प्राप्ति होगी, चीनी, चावल, गुड़, गेहूं ,चना, मूंग, उड़द, सरसों, बाजरा व तिल्ली की फसल अच्छी होगी।

दुर्गेश सूर्य का प्रभाव—

दुर्गेश अर्थात सेना का स्वामी, सूर्य होने से सैन्य कार्य बहुत अच्छे से होंगे, न्याय पालन करने में लोगों का सहयोग रहेगा, पर कई मामलों में कुछ लोग निड़र होकर कई प्रकार के खतरनाक हथियारों का निर्माण करने में भी लगे रह सकते हैं, सरकारी तंत्र से जुड़े लोग नियमों को अधिक न मानें और अपनी मन मर्जी ज्यादा कर सकते हैं।

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