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जन्मसमय समान फिर भी भाग्य अलग

By: Rekha Kalpdev | 01-Jan-2019
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जन्मसमय समान फिर भी भाग्य अलग

एक दिन में एक ही अस्पताल में बहुत सारे बच्चों का जन्म होता है। एक स्थान और एक ही समय पर जन्में बच्चों में से कुछ बच्चे बड़े होकर डाक्टर, शिक्षक, इंजीनियर और कुछ बालक कोई छोटा मोटा रोजगार कर अपनी आजीविका का वहन करते हैं। ऐसे बालकों में से कुछ के भाग्य में सफलता आती है और कुछ के हिस्से में असफलता हाथ लगती हैं। अब सवाल उठता है कि ऐसा क्यों होता है? एक ही समय और स्थान पर जन्में बालकों का भविष्य एक समान क्यों नहीं होता है? यही स्थिति एक ही माता-पिता की जुड़वा संतानों के साथ भी देखने में आती है।

ज्योतिष शास्त्रों में इस समस्या का समाधान देश, काल और परिस्थिति पर छोड़ दिया गया है। जिसका सामान्य शब्दों में अर्थ देश, काल और परिस्थितियों से प्रभावित होने के कारण भाग्य में भिन्नता देखने में आती है। परन्तु जब हम बात जुड़वां बच्चों की करते हैं तो उनके जीवन की परिस्थितियां तो एक समान होती है, फिर जुड़वां बच्चों का भाग्य एक समान क्यों नहीं होता। यह सही है कि उनके जन्म समय में कुछ समय का अंतर होता है। बहुत कम समय अंतराल होने पर जीवन में मिलने वाली सफलता और परिस्थितियों में इतना बड़ा अंतर आना स्वीकार्य नहीं लगता। क्या कुछ मिनट का जन्म अंतराल संपूर्ण भाग्य को बदल कर रख सकता है। कुछ इसी तरह के प्रश्न हमारी जिग्यासा में वृद्धि करते हैं और समस्या सुलझने की जगह उलझने लगती हैं-

वैदिक ज्योतिष शास्त्र सदैव से कर्म सिद्धांत का पालन करता आया है। कर्म सिद्धांत यह कहता है कि व्यक्ति को कुंडली में बनने वाले योग और फल सभी पूर्वजन्मों के कर्मों के द्वारा निर्धारित होते हैं। जन्म के साथ लाए गए संचित कर्मों के आधार पर ही व्यक्ति को भाग्य प्राप्त होता है। यही वजह है कि प्रत्येक व्यक्ति के साथ आए संचित कर्म अलग अलग होते हैं। अत: इसी के फलस्वरुप प्रत्येक व्यक्ति का भाग्य, जीवन परिस्थितियां, उतार-चढ़ाव और सफलता का स्तर अलग-अलग होता है।


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यहां परेशानी यह सामने आती है कि जब प्रत्येक व्यक्ति का भाग्य अलग है तो एक समय और स्थान पर जन्में बालकों की कुंडलियों के योग कैसे अलग-अलग हो सकते हैं। जब कुंडली का लग्न, राशि और योग एक समान होते हैं तो फिर जीवन चक्र में असमानत क्यों पाई जाती है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र यह भी मानता है कि वर्तमान जन्म में हमें जो कुछ भी प्राप्त हुआ है। वह सभी पूर्व जन्मों के संचित कर्मों के कारण है। कुंडलियों में स्थिति ग्रह स्थिति और योग सभी संचित कर्मों के फलस्वरुप तय होती है। जिसके बाद भाग्य का निर्धारण होता है।

फिर यह कैसे हो सकता है कि दो जुड़वां बच्चों के पूर्व संचित कर्म एक समान कैसे हो सकते हैं, और कर्मों से मिलने वाले फल भी कैसे एक समान हो सकते हैं। और यदि मान भी लिया जाए तो संचित कर्म एक समान थे और भाग्य भी एक जैसा है, फिर दोनों का जीवन अलग अलग क्यों होता है। एक समय और स्थान पर जन्में बालकों की कुंडलियां एक समान होती हैं फिर सभी का भाग्य एक जैसा क्यों नहीं हो पाता है।

कुछ इसी तरह के प्रश्नों के जवाब आज हम अपने इस आलेख में तलाशने की कोशिश करेंगे-

इस विषय को हम इस प्रकार समझने का प्रयास करते हैं। एक योग्य ज्योतिषी कुंडली, दशा और योग देख कर जातक के भाग्य की भविष्यवाणी करता है।

आईये अब इसे एक उदाहरण के माध्यम से समझने का प्रयास करते हैं- आज के समय में हम सभी किसी न किसी प्रकार वाई फाई की सुविधा का प्रयोग कर रहे हैं। यह सुविधा इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराने का कार्य करती हैं। हम देखते है कि एक वाई फाई की सुविधा से अनेक मोबाईल एक साथ इंटरनेट प्राप्त कर रहे होते हैं। उस समय वाई-फाई और इंटरनेट सभी फोनों को एक समान सुविधा दे रहे होते हैं। परन्तु मोबाईल का माडल अलग अलग होने के कारण प्रत्येक व्यक्ति इस सुविधा का अपने ढ़ंग से प्रयोग कर रहा होता है।

सहज शब्दों में इसे मोबाईल की कार्यक्षमता में भिन्नता होना भी कहा जा सकता है। यदि मेरा फोन नई तकनीक से लैस है तो व्यक्ति को प्राप्त होने वाली वाई फाई की इंटरनेट सुविधा बेहतर रुप में प्राप्त होगी, और परिस्थिति इसके विपरीत होने पर संभव है कि फोन इंटरनेट को स्पोर्ट ही ना मिलें और फोन में नेट चले ही नहीं। इंटरनेट की सुविधा इस बात पर निर्भर करती है कि मोबाईल किस कंपनी और किस क्वालिटी का है।

कई बार मोबाईल कम्पनी समान होने पर भी, फोन अलग अलग होने के कारण मिलने वाली सुविधाओं में अंतर होता है। एक कंपनी अनेक प्रकार के माडल्स रखती है। इस उदाहरण के द्वारा हमने यह जाना कि किसी भी वाईफाई या इंटरनेट का प्रयोग करना मोबाईल फोन की क्षमता और क्वालिटी पर निर्भर करता है। अब इस उदाहरण को ज्योतिष से जोड़ने का प्रयास करते हैं। यहां वाईफाई की सुविधा को ग्रहों की स्थिति कहा जा सकता है। वाई फाई से चलने वाले मोबाईल को एक ही समय में जन्म लेने वाले बच्चों का रुप माना जा सकता है। मोबाईल का माडल और क्षमता जन्म देने वाले माता-पिता का कार्य कर रहा है।

अब हम इस पर देश, काल और पात्र लगाते हैं- यह सर्वविदित है कि व्यक्ति को अपने देश, काल और पात्र के अनुरुप भाग्य मिलता है। किसी बालक का जन्म किस देश, किस घर और किन परिस्थितियों में हुआ है , इससे ही जीवन तय होता है। उसे जीवन में कितनी सुख-सुविधाएं मिलेंगी यह सभी भाग्य बताता है। यहां हम मोबाइल को देश काल और पात्र कह सकते है। जिस स्तर का मोबाईल होगा जातक को इंटरनेट भी उसी स्तर का प्राप्त होगा। हम यह भी जानते है कि हमारा भाग्य हमारे पूर्व जन्मों के कर्मों के द्वारा तय होता है। यही वजह है कि दो व्यक्तियों का चेहरा मोहरा शतप्रतिशत एक समान नहीं होता। उनके स्वभाव और आदतों में अंतर होता ही है।

कर्म एक समान नहीं तो भाग्य असमान होगा ही। मोबाईल के माडल अनेक है, कम्पनियां भी अनेक है, वाई फाई के विकल्प भी अनेक है। ठीक इसी प्रकार प्रत्येक मनुष्य अलग है, उसका भाग्य अलग है, उसकी जीवन शैली भी अलग है। सभी विषयों में भिन्नता होने के कारण प्रत्येक व्यक्ति का भाग्य अलग होता है। मोबाईल माडल अलग और वाई फाई सेवाओं का अलग होने के कारण कोई भी ऐप डाउनलोड होने में अलग समय लेती है। ऐसे ही प्रत्येक व्यक्ति अपने साथ एक अलग भाग्य लेकर आया है।

पूर्व जन्म और इस जन्म की ग्रह स्थिति

जन्म लेने वाले हर व्यक्ति के पूर्व जन्मों की अनुभूतियाँ अलग होती हैं, उसकी यादें अलग होती हैं, संघर्ष अलग होते हैं, लग्न अलग होते हैं (भले इस जन्म में समान हों), जिनके आधार पर उनकी अवधारणा और व्यक्तित्व अलग होता है। उन व्यक्तित्वों के अनुसार उनके अवचेतन मन की यादें अलग होती हैं। जिसके फलस्वरुप अवचेतन की कार्यप्रणाली अलग होती हैं। हम सभी यह मानते है कि आत्मा अजर अमर है वह कभी नहीं मरती। केवल शरीर बदलता है।

किसी जन्म की समाप्ति के समय जब शरीर से आत्मा अलग होती है तो वह अपने साथ इस जन्म की अनुभूतियां साथ लेकर जाती हैं। इन्हीं यादों के कारण कुछ व्यक्तियों को अपने पूर्व जन्म की यादें याद रह जाती हैं। हम सभी ने ऐसे अनेक उदाहरण देखें है जिनमें बालक को अपने पिछले जन्म की बातें याद होती है। ये वही यादें हैं जो आत्मा के साथ जुड़ी रह जाती हैं।

एक ही समय और स्थान पर जन्म लेने वाले बालकों की ग्रह स्थिति एक समान होती हैं, कुंडली का जन्म लग्न और ग्रह योग भी एक समान होते हैं किन्तु पूर्व जन्म के कर्म और पूर्व जन्म की यादों में अंतर होने के कारण ऐसे बालको का मिलने वाला भाग्य अलग होता है। यही संचित कर्म और यादें व्यक्ति के वर्तमान जन्म की सोच, निर्णय क्षमता, व्यक्तित्व और जीवन शैली का निर्माण करता है। रोचक बात यह है कि दो जुड़वां बच्चों का भाग्य अलग-अलग होता है।

इसी के आधार पर बालक के निर्णय और क्षमता प्रभावित हो्ती हैं फलतः उसका विकास अलग हो जाता है जिससे उसका भाग्य अलग होने लगता है। समान अवसर पर भी कोई अधिक विकास कर लेता है कोई कम क्योंकि उसकी पूर्व जन्म की संचित यादों में भिन्नता हैं। सबके गुण, रुचियाँ भी धीरे धीरे बदल जाती हैं, कार्यशैली बदल जाती है। अपनी अनुभूतियों के अनुसार कोई साहसी होता है और जोखिम लेने में नहीं हिचकता क्योंकि उसे उसका परिणाम और हल पता होता है। अनजाने में ही सही वह साहस भरे निर्णय लेता हैं, जबकि दूसरा असमंजस में होता है अथवा भययुक्त होता है, क्योंकि पिछले जन्मों में उसकी यादों में ऐसा कुछ नहीं, उसका अवचेतन जोखिम लेने की गवाही नहीं देता जिसका उसे परिणाम नहीं पता होता।

एक ही समान जन्म समय पर समान परिस्थिति में किन्तु अलग परिवारों में जन्मे व्यक्तियों का भाग्य निश्चित रूप से अलग होगा। इसमें कई विषय कार्य करते हैं जो भाग्य निश्चित रूप से बदल देते हैं। ऐसे लोगों में उपरोक्त अवचेतन की अनुभूतियाँ और यादें तो अलग होती ही हैं, घर-परिवार, माता-पिता पर कार्य कर रही शक्तियां और उर्जायें भी अलग होती हैं जो जन्म लेने वाले बच्चे के आनुवंशिक गुणों के साथ ही जन्म के बाद उसके विकास को भी प्रभावित करती हैं। माता-पिता, दादा-दादी, परिवारजनों के कर्मानुसार सकारात्मक अथवा नकारात्मक उर्जायें अथवा शक्तियाँ उनसे जुडी होती हैं। घर पर अलग उर्जाओं का प्रभाव हो सकता है, कुलदेवता-देवी की अलग प्रकृति हो सकती है, पितरों की अलग स्थिति और प्रभाव हो सकता है, अलग ईष्टों के अनुसार अलग प्रभाव हो सकता है।

यह सब मिलकर हर उस बच्चे पर अलग प्रभाव डालते हैं जो उसके विकास, सोच, अनुभव को प्रभावित कर देते हैं फलतः भिन्न वातावरण में विकास होता है और प्रतिक्रिया भिन्न हो जाती है जिससे उन्नति और भाग्य बदल जाते हैं। यहाँ तो लाखों वर्षों के संचित आनुवंशिक गुण अथवा उत्परिर्वन भी प्रभावी होते हैं फलतः बच्चा दुसरे समान समय के बच्चे से पूरी तरह अलग होता है और उसका भाग्य भी अलग होता है।

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