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गुरु पूर्णिमा विशेष – महत्व एवं तिथि व मुहूर्त ।

By: Future Point | 15-Jul-2019
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गुरु पूर्णिमा विशेष – महत्व एवं तिथि व मुहूर्त ।

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का दिवस मनाया जाता है, इस दिन गुरु की पूजा की जाती है, साधारण भाषा में कहें तो गुरु वह व्यक्ति हैं जो ज्ञान की गंगा बहाते हैं और हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं, पूरे भारत में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. इस वर्ष 2019 में गुरू पूर्णिमा 16 जुलाई को मनाई जाएगी. गुरू पूर्णिमा अर्थात गुरू के ज्ञान एवं उनके स्नेह का स्वरुप है. हिंदु परंपरा में गुरू को ईश्वर से भी आगे का स्थान प्राप्त है तभी तो कहा गया है कि हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर. इस दिन के शुभ अवसर पर गुरु पूजा का विधान है. गुरु के सानिध्य में पहुंचकर साधक को ज्ञान, शांति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त होती है. गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी होता है. वेद व्यास जी प्रकांड विद्वान थे उन्होंने वेदों की भी रचना की थी इस कारण उन्हें वेद व्यास के नाम से पुकारा जाने लगा.

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गुरु पूर्णिमा पर पूजन विधि -

  • गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल स्नान पूजा आदि नित्यकर्मों को करने के पश्चात् उत्तम और शुद्ध वस्त्र धारण करना चाहिए।
  • इसके पश्चात् व्यास जी के चित्र को सुगन्धित फूल या माला चढ़ाकर अपने गुरु के पास जाना चाहिए, उन्हें ऊँचे सुसज्जित आसन पर बैठाकर पुष्पमाला पहनानी चाहिए।
  • इसके पश्चात् वस्त्र, फल, फूल व माला अर्पण कर कुछ दक्षिणा यथासामर्थ्य धन के रूप में भेंट करके उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।

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गुरु पूर्णिमा पर विशेष एक कथा -

पौराणिक काल के महान व्यक्तित्व, ब्रह्मसूत्र, महाभारत, श्रीमद्भागवत और अट्ठारह पुराण जैसे अद्भुत साहित्यों की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास जी का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को हुआ था, ऐसी मान्यता है कि वेदव्यास ऋषि पराशर के पुत्र थे. हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार महर्षि व्यास तीनों कालों के ज्ञाता थे और उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से देख कर यह जान लिया था कि कलियुग में धर्म के प्रति लोगों की रुचि कम हो जाएगी और धर्म में रुचि कम होने के कारण मनुष्य ईश्वर में विश्वास न रखने वाला, कर्तव्य से विमुख और कम आयु वाला हो जाएगा. एक बड़े और सम्पूर्ण वेद का अध्ययन करना उसके बस की बात नहीं होगी इसीलिये महर्षि व्यास ने वेद को चार भागों में बाँट दिया जिससे कि अल्प बुद्धि और अल्प स्मरण शक्ति रखने वाले लोग भी वेदों का अध्ययन करके लाभ उठा सकें, व्यास जी ने वेदों को अलग-अलग खण्डों में बाँटने के बाद उनका नाम ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद रखा. वेदों का इस प्रकार विभाजन करने के कारण ही वह वेद व्यास के नाम से प्रसिद्ध हुए. उन्होंने ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का ज्ञान अपने प्रिय शिष्यों वैशम्पायन, सुमन्तुमुनि, पैल और जैमिन को दिया. वेदों में मौजूद ज्ञान अत्यंत रहस्यमयी और मुश्किल होने के कारण ही वेद व्यास जी ने पुराणों की रचना पाँचवे वेद के रूप में की, जिनमें वेद के ज्ञान को रोचक किस्से-कहानियों के रूप में समझाया गया है. पुराणों का ज्ञान उन्होंने अपने शिष्य रोम हर्षण को दिया. व्यास जी के शिष्यों ने अपनी बुद्धि बल के अनुसार उन वेदों को अनेक शाखाओं और उप-शाखाओं में बाँट दिया. महर्षि व्यास ने महाभारत की रचना भी की थी. वे हमारे आदि-गुरु माने जाते हैं।

गुरु पूर्णिमा का महत्व -

गुरु पूर्णिमा का यह प्रसिद्ध त्यौहार व्यास जी की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है इसलिए इस पर्व को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं. हमें अपने गुरुओं को व्यास जी का अंश मानकर उनकी पूजा करनी चाहिए।

  • इस दिन केवल गुरु की ही नहीं अपितु परिवार में जो भी बड़ा है अर्थात माता-पिता, भाई-बहन, आदि को भी गुरु तुल्य समझना चाहिए।
  • गुरु की कृपा से ही विद्यार्थी को विद्या आती है और उसके ह्रदय का अज्ञान व अन्धकार दूर होता है।
  • गुरु का आशीर्वाद ही प्राणी मात्र के लिए कल्याणकारी, ज्ञानवर्धक और मंगल करने वाला होता है. संसार की सम्पूर्ण विद्याएं गुरु की कृपा से ही प्राप्त होती है।
  • गुरु से मन्त्र प्राप्त करने के लिए भी यह दिन श्रेष्ठ होता है।
  • इस दिन गुरुजनों की यथा संभव सेवा करने का बहुत महत्व है इसलिए इस पर्व को श्रद्धापूर्वक अवश्य करें।

This Puja can be dedicated to Teachers and Mentors in life; along with parents and grandparents.

2019 में गुरु पूर्णिमा का पर्व की तिथि व मुहूर्त -

  • गुरु पूर्णिमा 2019 – 16 जुलाई
  • गुरु पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 01:48 बजे (16 जुलाई 2019)
  • गुरु पूर्णिमा तिथि समाप्त – 03:07 बजे (17 जुलाई 2019)

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