घर के मंदिर में भूलकर भी न रखें ये सामान, जिंदगी में आ सकती हैं नकारात्मक
By : Future Point
Expert Review : Dr. Arun Bansal, Vedic Astrologer | 45+ Years Experience
Published : 04-Jun-2018
घर छोटा हो या बड़ा हों, हर घर में एक निश्चित स्थान मंदिर के लिए अवश्य रखा जाता हैं। घर में पूजा घर होना और पूजा का हमारे पौराणिक और धार्मिक दोनों पक्षों से महत्व हैं। धर्म शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार घर में छॊटा सा मंदिर होना घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास बनाए रखता हैं। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती हैं और धन आगमन बना रहता हैं।
कई बार हम देखते हैं कि हम खूब मेहनत करते हैं, फिर भी परिवार का विकास और उन्नति सम्भव नहीं हो पाती हैं। इस स्थिति में संभव हैं कि हम हमारे पूजा-पाठ में कुछ गलतियां कर रहें हों। संभवत: घर में मंदिर होना चाहिए, यह हम सभी जानते हैं, परन्तु मंदिर में कौन सी वस्तुएं रखनी चाहिए और कौन सी वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। आज इस आलेख में हम आपको यह बताने जा रहें हैं कि घर के मंदिर से अनुकूल फल प्राप्त करने के लिए हमें कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
एक भगवान की दो तस्वीर ना रखें
अपनी पूजा पाठ का सही फल पाने के लिए इस बात का ध्यान रखें कि घर के मंदिर में कभी भी एक भगवान की दो प्रतिमाएं या दो फोटो ना रखें। इसके अलावा यह भी ध्यान रखें कि मंदिर में गणेश जी की तीन प्रतिमाएं नहीं होनी चाहिए। यह शुभ नहीं माना जाता हैं। जिसके फलस्वरुप कार्यों में व्यर्थ की बाधाएं आनी शुरु हो जाती हैं।
खंडित मूर्ति
मंदिर में खंडि़त मूर्ति का होना शुभ नहीं माना जाता हैं। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र दोनों में इसे अशुभ फल देने वाला कहा गया हैं। वास्तु शास्त्र कहता हैं कि ऐसी मूर्तियां घर में रखने से घर में नकारात्मक प्रभाव बढ़ता हैं और हमारे आराधक रुष्ट होकर घर से चले जाते हैं।
घर के मंदिर में देवताओं का वास बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि आप मंदिर में कभी भी खंडित मूर्तियां ना रखें। किसी कारणवश ऐसा हो भी जाता हैं तो उसे जल्द से जल्द नई मूर्ति से बदल दें। यहां भी यह ध्यान रखें कि नई मूर्ति की पूजा शुरु करने से पूर्व उसकी पूरे विधान से स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा अवश्य करायें।
मंदिर का सही स्थान
वास्तु शास्त्र कहता हैं कि घर में छोटे आकार का ही मंदिर बनवाएं। बड़ा मंदिर और मंदिर में बड़े आकार की प्रतिमाएं नहीं होनी चाहिए। मंदिर के लिए घर के पूर्व-उत्तर दिशा का स्थान सबसे अधिक शुभ माना गया हैं। जहां तक संभव हो दक्षिण या दक्षिण पश्चिम दिशा में पूजा करना शुभ नहीं माना गया हैं। इसके अतिरिक्त एक ही मंदिर में दो शंख रखना भी शुभ नहीं कहा गया हैं।
मूर्तियों का आकार
देव पूजन के लिए घर के मंदिर में बड़े आकार की मूर्तियां रखना वर्जित हैं। यदि शिवलिंग भी रखना हैं तो वह भी बहुत छोटे आकार का ही रखें, यह अंगूठे के आकार से बड़ा नहीं होना चाहिए। बड़े आकार के शिवलिंग शुभता में कमी करते हैं।
अन्य ध्यान रखने योग्य बातें-
- घर में मंदिर की स्थापना कराते समय इस बात का ध्यान रखें कि घर के जिस स्थान पर मंदिर हों उसके आस-पास शौचालय न बनवाएं। रसोई, मंदिर और शौचालय एक पंक्ति में ना बनवाएं।
- पूजा में देव को अंखड़ित चावल अर्पित नहीं करने चाहिए। चावलों को हल्दी से पीला करके अर्पित करना भी विशेष शुभता देता।
- गणपति पूजन में पान का पत्ता अर्पित करना शुभ माना जाता है।
- श्रीगणॆश को बना हुआ पान चढ़ाएं।
- पूजा में जलाया गया दीपक कभी बूझाना नहीं चाहिए।
- देवता को पूजा करते समय धूप, दीप और फूल चढ़ाएं, धोने से पूर्व साफ पानी से शुद्ध करके ही चढ़ाएं।
- पूजा घर में प्रतिदिन घी का दीपक जलना अतिशुभ माना गया हैं। इससे वास्तु दोष भी दूर होते हैं।
- पूजा-पाठ कभी भी भूमि पर बैठकर ना करें, इसके लिए आसन का प्रयोग करें। आसन को पैर से खिसकाना सही नहीं माना गया हैं। आवश्यक होने पर हाथों का ही प्रयोग करें।
- ११ दिन तक तुलसी के पत्तों को भगवान को अर्पित किया जा सकता हैं।
- दीपक जलाते समय इसे भगवान के ठीक सम्मुख रखें।
- पूजा-पाठ में किसी भी प्रकार की खंडित सामग्री का प्रयोग न करें। इससे अशुभता का प्रवेश होता हैं।
- निश्चल भाव से देव के सामने अपनी मनोकामना कहनी चाहिए और यथासंभव दक्षिणा भी देव को अर्पित करनी चाहिए।
- पूजा घर में साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए। किसी भी तरह का कबाड़ मंदिर या घर में नहीं रखना चाहिए।v
- भगवान शिव को हल्दी का जल और शंख से जल चढ़ाना शुभ नहीं माना गया हैं।