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इस साल दशहरे के अवसर पर इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा

By: Future Point | 17-Oct-2018
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इस साल दशहरे के अवसर पर इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा

भारत में अनेक त्‍योहार और पर्व मनाए जाते हैं जोकि बुराई पर अच्‍छाई की जीत का संदेश देते हैं और हिंदू धर्म में जो त्‍योहार ये संदेश देता है वो है दशहरे का पर्व। दीपावली के पर्व से ठीक 20 दिन पूर्व दशहरा मनाया जाता है।

कब आता है दशहरा

हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की शुक्‍ल पक्ष की दशमी को विजयादशमी और दशहरे के रूप में मनाया जाता है। हिंदुओं के प्रमुख त्‍योहारों में से एक दशहरे का पर्व भी है। हर साल इस पर्व को बुराई पर अच्‍छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

दशहरे की कथा

दशहरे पर्व का संबंध भगवान राम से है। किवंदती है कि लंका में 9 दिनों तक लगातार लंका के राजा रावण से चले युद्ध के बाद श्रीराम ने माता सीता को उसकी कैद से मुक्‍त करवाया था। अहंकारी और पापी लंकेश के वध के बाद श्रीराम ने धर्म और सत्‍य की स्‍थापना की थी। इसी उपलक्ष्‍य में दशहरे का पर्व मनाया जाता है।



मां दुर्गा की कथा

मान्‍यता है कि इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का संहार किया था। इस कारण इस दिन को विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है और मां दुर्गा की पूजा की जाती है। स्‍वयं भगवान राम ने लंका पर आक्रमण करने से पूर्व मां दुर्गा की आराधना की थी और उन्‍हीं के आशीर्वाद से श्रीराम को युद्ध में विजय मिली थी।

मां दुर्गा ने भगवान राम की परीक्षा लेते हुए पूजा के लिए रखे गए कमल के फूलों में से एक फूल गायब कर दिया। श्रीराम को कमल नेत्रों वाला भी कहा जाता था इसलिए उन्‍हें कमल के फूल के स्‍थान पर अपने नेत्रों को अर्पित करने का निर्णय किया। भगवान राम की इस भक्‍ति से मां दुर्गा प्रसन्‍न हुईं और उन्‍हें युद्ध में विजयी होने का आशीर्वाद दिया।

दशहरा 2018 शुभ मुहूर्त

दशहरा की तिथि : 19 अक्‍टूबर, 2018

विजय मुहूर्त : 13.58 से 14.43 तक

अपराह्न पूजन समय : 13.13 से 15.28 तक

दशमी तिथि आरंभ : 15.28 (18 अक्‍टूबर)

दशमी तिथि समाप्‍त : 17.57 (19 अक्‍टूबर)

दशहरा 2018 पूजन विधि

दशहरे के दिन शस्‍त्र पूजन किया जाता है। इस दिन ब्राह्मण शास्‍त्रों का पूजन करते हैं। व्‍यापार से जुड़े लोग अपने प्रतिष्‍ठान का पूजन करते हैं। मान्‍यता है कि इस दिन कोई काम शुरु किया जाए तो जीवनभर उसमें निराशा नहीं मिलती है।

प्राचीन समय में क्षत्रिय युद्ध पर जाने के लिए इसी दिन को चुनते थे। उनका मानना था कि दशहरे पर युद्ध शुरु करने से विजयी होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं ब्राह्मण विद्या ग्रहण करने के लिए इसी दिन घर से निकलते हैं।



दशहरे के शुभ अवसर पर शमी के पूजन का भी बहुत महत्‍व है। नवरात्र के दिनों में रोज़ शाम के समय शमी के वृक्ष की पूजा करने से आरोग्‍यता और संपन्‍नता मिलती है। स्‍वयं भगवान राम ने लंका पर आक्रमण से पूर्व शमी के वृक्ष के आगे शीष झुकाकर अपने विजय होने की प्रार्थना की थी।

इस बार दशहरे के शुभ अवसर पर आप भी अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए मां दुर्गा से प्रार्थना कर सकते हैं।

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