Chandra Grahan 2024: ज्योतिषीय दृष्टि से जानें इस घटना के रहस्य

By: Acharya Rekha Kalpdev | 29-Feb-2024
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Chandra Grahan 2024: ज्योतिषीय दृष्टि से जानें इस घटना के रहस्य

Lunar Eclipse 2024: सौरमंडल के नौ ग्रह हम सब से बहुत दूर है, फिर भी उनके प्रभाव से मनुष्य जीवन प्रभावित होता है। हम सभी के जीवन में होने वाली घटनाओं का मुख्य कारण नवग्रह है। नवग्रहों में से जब भी कोई ग्रह अपनी राशि बदलता है, अस्त, वक्री होता है या गति बदलता है तो उसी के साथ हम सभी के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव आते है।

ग्रह ही हमारा जीवन चला रहे होते है, और इन ग्रहों के सिरे, जिन्हें धागे या तार भी कहा जा सकता है, ईश्वर के हाथ होते है। हम सब को लग रहा होता है कि सब काम हम कर रहे है, परन्तु हम सिर्फ दृष्टा है, प्रारब्ध के आधार पर हमें इस जीवन के कार्य और घटनाएं मिली है। अगर इस जीवन को प्रसन्नता के साथ जीना है तो हमें स्वयं को कर्ता न समझ कर दृष्टा समझना चाहिए।

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आकाश में घटित होने वाली अन्य घटनाएँ की तरह ग्रहण भी एक घटना है। हमारी पृथ्वी भी नवग्रहों में से एक ग्रह है। चन्द्रमा पृथ्वी के चक्कर लगाता है, इसलिए यह पृथ्वी का उपग्रह है, जैसे पृथ्वी सूर्य के चक्र लगाती है, ठीक वैसे ही चन्द्रमा पृथ्वी के चक्कर लगाता है। चंद्र के इसी प्रकार चक्कर लगाने के फलस्वरूप चंद्र ग्रहण लगता है। सूर्य, चंद्र, और पृथ्वी की गतियों में अन्तर होने से ग्रहण का निर्माण होता है। जब पृथ्वी सूर्य और चंद्र के मध्य आ जाती है तो चंद्र का कुछ भाग पृथ्वी पर दिखाई देना बंद हो जाता है। इसके कारण प्रकाशित ग्रह का प्रकाश पृथ्वी पर नहीं आ पाता है, और एक काली छाया पृथ्वी पर छा जाती है। इसे ही चंद्र ग्रहण का नाम दिया गया है। यहाँ हमें यह याद रखना चाहिए कि चन्द्रमा का स्वयं का कोई अपना प्रकाश नहीं होता है, वह सूर्य के प्रकाश से ही प्रकाशित होता है।

चंद्र प्रत्येक दिन एक कला घटता और एक कला बढ़ता है। चंद्र की कलाओं में कमी और वृद्धि भी सूर्य की रोशनी के कारण होती है। प्रतिदिन चंद्र कितना दिखाई देगा यह उसकी स्थिति पर निर्भर करता है।

चन्द्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, इस घटना में चन्द्रमा पृथ्वी के पीछे आ जाता है। ऐसा तब होता है जब सूर्य, चंद्र, और पृथ्वी तीनों एक सीढ़ी रेखा में होते है। चंद्र ग्रह केवल पूर्णिमा तिथि के दिन ही घटित होता है और सूर्य ग्रहण केवल अमावस्या तिथि पर ही घटित होता है। चंद्र ग्रहण का आकार और अवधि उसकी स्थिति पर निर्भर करती है। चंद्र ग्रहण की स्थिति को रक्त चंद्र का नाम भी कई बार दिया जाता है। प्रारम्भ में चंद्र ग्रहण काले रंग का और बाद में रक्त के रंग का हो जाता है, उसके इसी रंग के कारण उसे ब्लड मून का नाम दिया गया है।

वर्ष 2024 का पहला चंद्रग्रहण

सौरमंडल के नौ ग्रह हम सब से बहुत दूर है, फिर भी उनके प्रभाव से मनुष्य जीवन प्रभावित होता है। हम सभी के जीवन में होने वाली घटनाओं का मुख्य कारण नवग्रह है। नवग्रहों में से जब भी कोई ग्रह अपनी राशि बदलता है, अस्त, वक्री होता है या गति बदलता है तो उसी के साथ हम सभी के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव आते है। ग्रह ही हमारा जीवन चला रहे होते है, और इन ग्रहों के सिरे, जिन्हें धागे या तार भी कहा जा सकता है, ईश्वर के हाथ होते है। हम सब को लग रहा होता है कि सब काम हम कर रहे है, परन्तु हम सिर्फ दृष्टा है, प्रारब्ध के आधार पर हमें इस जीवन के कार्य और घटनाएं मिली है। अगर इस जीवन को प्रसन्नता के साथ जीना है तो हमें स्वयं को कर्ता न समझ कर दृष्टा समझना चाहिए।

आकाश में घटित होने वाली अन्य घटनाएँ की तरह ग्रहण भी एक घटना है। हमारी पृथ्वी भी नवग्रहों में से एक ग्रह है। चन्द्रमा पृथ्वी के चक्कर लगाता है, इसलिए यह पृथ्वी का उपग्रह है, जैसे पृथ्वी सूर्य के चक्र लगाती है, ठीक वैसे ही चन्द्रमा पृथ्वी के चक्कर लगाता है। चंद्र के इसी प्रकार चक्कर लगाने के फलस्वरूप चंद्र ग्रहण लगता है। सूर्य, चंद्र, और पृथ्वी की गतियों में अन्तर होने से ग्रहण का निर्माण होता है। जब पृथ्वी सूर्य और चंद्र के मध्य आ जाती है तो चंद्र का कुछ भाग पृथ्वी पर दिखाई देना बंद हो जाता है। इसके कारण प्रकाशित ग्रह का प्रकाश पृथ्वी पर नहीं आ पाता है, और एक काली छाया पृथ्वी पर छा जाती है। इसे ही चंद्र ग्रहण का नाम दिया गया है। यहाँ हमें यह याद रखना चाहिए कि चन्द्रमा का स्वयं का कोई अपना प्रकाश नहीं होता है, वह सूर्य के प्रकाश से ही प्रकाशित होता है।

चंद्र प्रत्येक दिन एक कला घटता और एक कला बढ़ता है। चंद्र की कलाओं में कमी और वृद्धि भी सूर्य की रोशनी के कारण होती है। प्रतिदिन चंद्र कितना दिखाई देगा यह उसकी स्थिति पर निर्भर करता है। चन्द्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, इस घटना में चन्द्रमा पृथ्वी के पीछे आ जाता है। ऐसा तब होता है जब सूर्य, चंद्र, और पृथ्वी तीनों एक सीढ़ी रेखा में होते है। चंद्र ग्रह केवल पूर्णिमा तिथि के दिन ही घटित होता है और सूर्य ग्रहण केवल अमावस्या तिथि पर ही घटित होता है। चंद्र ग्रहण का आकार और अवधि उसकी स्थिति पर निर्भर करती है। चंद्र ग्रहण की स्थिति को रक्त चंद्र का नाम भी कई बार दिया जाता है। प्रारम्भ में चंद्र ग्रहण काले रंग का और बाद में रक्त के रंग का हो जाता है, उसके इसी रंग के कारण उसे ब्लड मून का नाम दिया गया है।

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वर्ष 2024 का पहला चंद्र ग्रहण 25 मार्च

वर्ष 2024 का पहला चंद्र ग्रहण 25 मार्च, संवत 2080, फाल्गुन पूर्णिमा, सोमवार के दिन का रहेगा। यह चंद्र ग्रहण छाया चंद्र ग्रहण होगा। वर्ष 2024 में 2 सूर्य ग्रहण और 2 चंद्र ग्रहण होंगे, इस प्रकार कुल 4 ग्रहण इस साल में रहने वाले है।

ग्रहणकाल : उपच्छाया : 10:23 से शुरू होकर 15:02 के मध्य की रहेगी। इस प्रकार ग्रहण की कुल अवधि 04 घंटे 39 मिनट की रहेगी। ग्रहण का मध्य काल 12:43 बजे का रहेगा।

यह चंद्र ग्रहण दक्षिण पश्चिम, यूरोप, पूर्वी एशिया, आस्ट्रेलिया, अफ्रीका, उतरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, उत्तरी ध्रुव, और दक्षिण ध्रुव में देखा जा सकता है। इस वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण भारत में दृश्य न होने के कारण इसका प्रभाव भारत में नहीं होगा।

सूर्य ग्रहण को पृथ्वी के बहुत छोटे भाग में देखा जा सकता है, जबकि इसके विपरीत चंद्र ग्रहण को पृथ्वी के बहुत बड़े भाग में देखा जा सकता है। ग्रहण के समय चंद्र की छाया बहुत लघु होती है, इसलिए चंद्र ग्रहण कुछ घंटों का होता है और सूर्यग्रहण कुछ मिनटों का होता है। चंद्र ग्रहण को रात्रि के समय खुली आँखों से देखा जा सकता है, जबकि सूर्य ग्रहण को खुली आँखों से देखना आँखों के लिए हानिकारक हो सकता है। चंद्र ग्रहण का प्रकाश पूर्ण प्रकाश से कम होता है। यह सही है कि चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा तिथि के दिन ही पड़ता है, परन्तु प्रत्येक पूर्णिमा तिथि के दिन चंद्र ग्रहण नहीं होता है। इसका मूल कारण पृथ्वी की कक्षा पर चन्द्रमा की कक्षा का झुके होना है। इसके कारण प्रत्येक बारे चंद्र पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश नहीं करता है और इसके कारण प्रत्येक माह चंद्र ग्रहण घटित नहीं होता है, ऐसे में चंद्र पृथ्वी के ऊपर या नीचे से निकल जाता है।

वर्ष 2024 में पड़ने वाले ग्रहण इस प्रकार के रहेंगे-

सन् 2024 में 2 सूर्य ग्रहण और 2 चंद्र ग्रहण होंगे, कुल 4 ग्रहण होंगे।

1: 25 मार्च 2024 (सं। 2080, फाल्गुन पूर्णिमा, सोमवार) - छाया चंद्र ग्रहण

ग्रहणकाल: उपछाया: 10:23 से 15:02 तक (कुल अवधि- 04 घंटे 39 मि।)
ग्रहण मध्य: 12:43 बजे
दृश्य स्थान: दक्षिण पश्चिम यूरोप, पूर्वी एशिया, आस्ट्रेलिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, उत्तरी ध्रुव, दक्षिणी ध्रुव। भारत में अदृश्य।

2: 8-9 अप्रैल 2024 (सं। 2080, चैत्र अमावस्या, सोम-मंगलवार) - पूर्ण सूर्य ग्रहण

ग्रहणकाल: आंशिक ग्रहण: 21:12 से 26:22 तक (कुल अवधि- 05 घंटे 10 मि।)
पूर्ण ग्रहण: 22:09 से 25:25 तक (कुल अवधि- 03 घंटे 16 मि।)
ग्रहण मध्य: 23:47 बजे
दृश्य स्थान: पश्चिमी यूरोप, उत्तरी अमेरिका, उत्तरी दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, उत्तरी ध्रुव। भारत में अदृश्य

3: 18 सितंबर 2024 (सं। 2081, भाद्र पूर्णिमा, बुधवार) - आंशिक चंद्र ग्रहण

ग्रहणकाल: उपछाया: 06:11 से 10:17 तक (कुल अवधि- 04 घंटे 6 मि।)
आंशिक ग्रहण: 07:43 से 08:46 तक (कुल अवधि- 01 घंटा 3 मि।)
ग्रहण मध्य: 08:14 बजे
दृश्य स्थान: यूरोप, आंशिक एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, हिन्द महासागर, उत्तरी व दक्षिणी ध्रुव। पश्चिमी भारत में दृश्य

4: 2-3 अक्तूबर 2024 (सं। 2081, आश्विन अमावस्या, बुधवार) - पूर्ण सूर्य ग्रहण

ग्रहणकाल: आंशिक ग्रहण: 21:13 से 27:17 तक (कुल अवधि- 06 घंटे 4 मि।)
पूर्ण ग्रहण: 22:21 से 26:09 तक (कुल अवधि- 03 घंटे 48 मि।)
ग्रहण मध्य: 24:15 बजे
दृश्य स्थान: दक्षिणी उत्तरी अमेरिका, आंशिक दक्षिण अमेरिका, प्रशांत एवं अटलांटिक महासागर, दक्षिणी ध्रुव। भारत में अदृश्य।

सन् 2025 में जनवरी से अप्रैल माह तक एक चंद्र ग्रहण एवं एक सूर्य ग्रहण होगा।

5: 14 मार्च 2025 (सं। 2081, फाल्गुन पूर्णिमा, शुक्रवार) - पूर्ण चन्द्र ग्रहण

ग्रहणकाल: उपछाया: 09:27 से 15:30 तक (कुल अवधि- 06 घंटे 3 मि।)
आंशिक ग्रहण: 10:40 से 14:18 तक (कुल अवधि- 03 घंटे 38 मि।)
पूर्ण ग्रहण: 11:56 से 13:01 तक (कुल अवधि- 01 घंटा 5 मि।)
ग्रहण मध्य: 12:29 बजे
दृश्य स्थान: यूरोप, आंशिक एशिया, आंशिक आस्ट्रेलिया, आंशिक अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, उत्तरी व दक्षिणी ध्रुव। भारत में अदृश्य

6: 29 मार्च 2025 (सं। 2081, चैत्र अमावस्या, शनिवार) - आंशिक सूर्य ग्रहण

ग्रहणकाल: 14:21 से 18:14 तक (कुल अवधि- 03 घंटे 53 मि।)
ग्रहण मध्य: 16:17 बजे
दृश्य स्थान: यूरोप, उत्तरी एशिया, उत्तर/पश्चिम अफ्रीका, आंशिक उत्तरी अमेरिका, अटलांटिक महासागर, उत्तरी ध्रुव। भारत में अदृश्य


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