ज्योतिष और अवसाद: हर आह का जवाब मिलेगा यहां

By: Future Point | 23-Dec-2019
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ज्योतिष और अवसाद: हर आह का जवाब मिलेगा यहां

"मैं झुका और दबा हुआ हूँ। मैं सारे दिन उदास रहता हूँ।"

बाइबल

हममें से सभी लोग किसी न किसी तरह अपने जीवन से नाखुश हैं। उदास हैं। तनाव महसूस करते हैं। लेकिन डिप्रेशन (Depression) यानी अवसाद इससे कहीं ज़्यादा गहरा, लंबा और उदासी भरा है।

यूं आम तनाव तो थोड़े समय में अपने आप चला जाता है। लेकिन अवसाद में रहने वाला व्यक्ति हमेशा उदासी में जीवन व्यतीत करता है। उसकी ज़िंदगी में चाहे सब कुछ ठीक लग चल रहा हो लेकिन फिर भी उसे कुछ भी ठीक नहीं लगता! किसी चीज़ से खुशी नहीं महसूस होती!

हममें से ज़्यादातर लोग इसके लक्षणों पर ध्यान नहीं देते। इसे रोज़मर्रा के आम तनाव की तरह झेलते रहते हैं। ऐसे में यह समस्या इतनी बड़ी हो जाती है कि रोगी के लिए रोज़मर्रा के आम काम करना भी मुश्किल हो जाता है। यहां तक कि उसमें खुदकुशी करने जैसी भावना भी उत्पन्न हो सकती है।

भारत में यह समस्या बेहद विकराल रूप धारण कर चुकी है। भारत दुनिया का सबसे उदास देश है। सबसे ज़्यादा यहीं के लोग खुदकुशी करते हैं।

अवसाद के लक्षण

अवसाद या डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति में आमतौर पर निम्न लक्षण देखने को मिलते हैं:

  • मूड या मिज़ाज: यह आम तनाव जैसा नहीं है। बहुत ज़्यादा गुस्सा आना, हमेशा बेचैनी महसूस करना, किसी चीज़ में मन न लगना, किसी चीज़ से खुश न होना यहां तक कि गम का अहसास न होना भी अवसाद का लक्षण है।
  • भावनात्मक लक्षण: जीवन में खालीपन महसूस होना, हिम्मत टूट जाना, उद्देश्यहीन हो जाना।
  • विचार: नकारात्मक सोच, मन में हमेशा बुरे बुरे ख्याल आना।
  • शारीरिक: हमेशा थकान महसूस होना, शरीर का सुस्त पड़ जाना, दर्द उठना, सिरदर्द, पाचन संबंधी दिक्कतें, अचानक वज़न बढ़ना या घटना।

अवसाद के कारण

अवसाद या डिप्रेशन क्या है? इसकी वजह क्या है? इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। लेकिन कुछ चीज़ों की इसमें अहम भूमिका होती है जिनकी वजह से कोई व्यक्ति अवसाद में जा सकता है:

  • सामाजिक कारण: जीवन के किसी पड़ाव पर कोई बड़ा हादसा हो जाना, जैसे कि शादी टूट जाना, नौकरी चली जाना, किसी करीबी की मौत हो जाना या समाज से बेदखल हो जाना।
  • पर्यावरणीय कारक: हमारे पर्यावरण में हो रहे नकारात्मक परिवर्तन भी डिप्रेशन की वजह हो सकते हैं। उदाहरण के लिए ध्वनि प्रदूषण की वजह से तनाव और बेचैनी महसूस हो सकती है। कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि वायु प्रदूषण गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है जिससे शिशु का दिमागी विकास बाधित हो सकता है।
  • जैविक कारक: कुछ जैविक स्थितियों जैसे कि ठीक से नींद न आना, वज़न घटना आदि को मेडिकल के माध्यम से समझाना मुश्किल होता है लेकिन यह आपके दिमाग पर बहुत बुरा असर करता है। कुछ अन्य मेडिकल स्थितियों जैसे कि थायरॉयड या दवाइयों के साइडिफेक्ट्स की वजह से भी डिप्रेशन हो सकता है।
  • आनुवांशिक कारक: कई बार अवसाद का पारिवारिक इतिहास होता है जो कि एक बेहद जटिल स्थिति है। परिवार के किसी सदस्य को यह समस्या है तो आगे की पीढ़ी में इसके होने का ख़तरा बढ़ जाता है।

क्या कहता है ज्योतिष शास्त्र?

ज्योतिष शास्त्र आपके रोज़मर्रा के आम जीवन के हर पहलू पर असर करता है इसलिए यह अवसाद का समाधान भी प्रस्तुत करता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली देखकर पता किया जा सकता है कि कोई व्यक्ति अवसाद का शिकार है या नहीं?

कुंडली का पहला घर या भाव मस्तिष्क का प्रतिनिधित्व करता है जबकि चंद्रमा मानसिक स्थिति और भावनाओं का स्वामी माना जाता है। कुंडली का चौथा भाव मानसिक शांति, खुशी और आराम का भाव है।

अगर आप भी लगातार तनाव महसूस करते हैं और जानना चाहते हैं कि कहीं आप अवसाद के शिकार तो नहीं तो हमारे ज्योतिष विशेषज्ञों से संपर्क करें और अपनी कुंडली दिखाएं।

किन लोगों को होता है अवसाद?

जातक की जन्म कुंडली में चंद्रमा की इन स्थितियों से पता चलता है कि वह अवसाद का शिकार है या नहीं:

  • जन्म कुंडली में चंद्रमा की दोषपूर्ण स्थिति, उदाहरण के लिए यदि चंद्रमा छठे, आठवे या बारहवे घर में बैठा हो।
  • यदि चंद्रमा पाप ग्रहों के साथ बैठा हो।
  • यदि चंद्रमा राहु, केतु या शनि जैसे ग्रहों के साथ हो।
  • अगर चंद्रमा दो विघातक या पाप ग्रहों के बीच में बैठा हो।
  • यदि चंद्रमा बिना किसी ग्रह के अकेले किसी भाव में बैठा हो।
  • अगर चंद्रमा सूर्य के साथ विराजमान है। इस स्थिति में सूर्य के आगे चंद्रमा का प्रभाव फीका पड़ जाता है और ऐच्छिक परिणाम नहीं मिलते।
  • यदि चंद्रमा लग्न या नवमांश में नीच राशि में हो।

चंद्रमा की ये स्थितियां तनाव और अवसाद को दर्शाती हैं। लेकिन अगर समय पर उचित समाधान कर लिया जाए तो इस स्थिति से छुटकारा पाया जा सकता है।

अवसाद के ज्योतिषीय उपाय

इन ज्योतिषीय उपायों से आप चंद्रमा की खराब स्थिति से होने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकते हैं:

  • यदि चंद्रमा कमज़ोर होकर गलत घर में बैठा है तो हाथ में मूनस्टोन रिंग (Moonstone Ring) पहननी चाहिए।
  • यदि चौथा घर कमज़ोर है या उसका स्वामी किसी पाप ग्रह के प्रभाव में है तो चौथे घर या भाव को मजबूत करने के लिए कोई उपाय करना चाहिए। इसके लिए आप हमारे ज्योतिष विशेषज्ञों से बात कर सकते हैं।
  • जातक को किसी भी संकट से बचने के लिए विभिन्न रत्नों से बनी अंगूठी पहननी चाहिए।
  • चंद्रमा के कमज़ोर होने की स्थिति में जातक को चांदी के गिलास में बार- बार पानी पीना चाहिए।
  • डिप्रेशन से जूझ रहे जातक को सोमवार को व्रत रखना चाहिए और अधिक से अधिक चांदी के आभूषण पहनने चाहिए।
  • हिंदू शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को चंद्रमा का स्वामी माना जाता है। इसलिए चंद्रमा की खराब स्थिति में भगवान शिव की पूजा का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके लिए आप हमारे पंडितों से महा मृत्युंजय पूजा या रुद्राभिषेक पूजा करवा सकते हैं।
  • अवसाद से परेशान जातक को रोज़ाना 108 बार ऊँ नम: शिवाय का जाप करना चाहिए। अगर मंत्र का जाप करते वक्त ध्यान लगाने में दिक्कत आ रही हो तो आप चाहें तो शिव चालीसा भी पढ़ सकते हैं।
  • इसके अलावा रोज़ाना शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भी लाभ होगा।
  • भारतीय संस्कृति में मां को पूजनीय माना गया है। अगर आप डिप्रेशन के मरीज़ हैं तो मां की सेवा करें। उनके साथ अधिक से अधिक वक्त बिताएं। उनका ख्याल रखें। हर सोमवार उन्हें कोई सफेद चीज़ भेंट करें। जैसे कि सफेद मिठाई, सफेद वस्त्र, दूध आदि। यदि दुर्भाग्यवश आपकी मां नहीं है तो किसी अधेड़ उम्र की महिला, जिसके आप बेहद करीब हों उसके लिए ये सब कुछ कर सकते हैं।

अवसाद दूर करने के अन्य उपाय

ज्योतिषीय उपायों के साथ-साथ आपको अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना होगा। इसके लिए आप इन नियमों का पालन कर सकते हैं:

  • नियमित व्यायाम: रोज़ाना व्यायाम करने से आपका तनाव दूर होता है। अगर आप नियमित रूप से जिम या एरोबिक एक्सरसाइज़ करते हैं तो आपके शरीर में ऊर्जा आती है और वह चुस्त बना रहता है। इसके लिए बेहतर होगा अगर आप सुबह शुद्ध और स्वच्छ हवा में व्यायाम करें। इससे आपको भरपूर ऑक्सीजन मिलता है और आपका दिमाग शांत होता है।
  • योग तथा प्राणायाम: नियमित रूप से योग तथा प्राणायाम करने से आपका तनाव दूर होता है। विशेषकर अनुलोम विलोम प्राणायाम करने से आपके मस्तिष्क की क्रियाएं संतुलन में रहती हैं। ध्यान लगाने में आसानी होती है।
  • संतुलित आहार लें: संपूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए विटामिन्स और मिनरल से भरपूर संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए।
  • शराब और धूम्रपान से दूर रहें: डिप्रेशन से परेशान व्यक्ति तनाव से छुटकारा पाने के लिए अक्सर शराब और सिगरेट का सहारा लेता है। ये चीज़ें शुरु में तो उसे खुश कर सकती हैं लेकिन इनके दीर्घकालीन प्रभाव बेहद घातक होते हैं।
  • दोस्तों-रिश्तेदारों के साथ घूमने जाएं: अगर आप डिप्रेशन से जूझ रहे हैं तो दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ घूमने जाएं। इससे आपका तनाव कम होगा और आप तरोताज़ा महसूस करेंगे।

हालांकि अवसाद को लेकर आम समझ यही है कि यह किसी दिमागी खराबी की वजह से होता है लेकिन अधिकतर विद्वान इस मत से सहमत नहीं हैं। वे ऐसा नहीं मानते कि यह किसी तरह के मानसिक असंतुलन भर का परिणाम है।

इसका संबंध आपके संपूर्ण शीरीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से है जिसमें आपके आस पास के माहौल की भी अहम भूमिका होती है। यदि भविष्य में आप ऐसी किसी भी तरह की समस्या से बचना चाहते हैं तो आज ही अपने पूरे परिवार की हेल्थ रिपोर्ट (Health Report) प्राप्त करें।


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