विवाह में देरी या विलम्ब से हैं परेशान, तो जानें कारण और समाधान

By: Future Point | 25-Dec-2021
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विवाह में देरी या विलम्ब से हैं परेशान, तो जानें कारण और समाधान

Vivah Yog in Kundli delay in marriage: धर्मशास्त्र के अनुसार षोडश संस्कारों में विवाह संस्कार सबसे प्रमुख माना गया है। प्रत्येक माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता उनके बच्चों का समय पर विवाह करने की होती है। कई युवक-युवतियों की उम्र बीतती जाती है लेकिन उन्हें योग्य जीवनसाथी नहीं मिल पाता और यदि कोई पसंद आता भी है तो किसी न किसी कारण बात विवाह तक नहीं पहुँच पाती।

सही आयु में और सही समय पर सही व्यक्ति के साथ विवाह हो जाना अपने आप मे एक सौभाग्य की बात है। यदि विवाह समय पर न हो रहा हो तो पहले उसके कारण को समझें, यहाँ कुछ ज्योतिष सम्बन्धी तथ्य दिए जा रहे हैं, जिनसे आप ज्योतिष के प्रति आस्थावान होकर इन उपायों को करें और शीघ्र लाभ प्राप्त कर सके, ज्योतिष में ऎसे अनेक कारण बनते हैं जो विवाह में विलम्ब की स्थिति को दर्शाते हैं।

वैदिक ज्योतिष में विवाह के लिए सातवां भाव मुख्य माना गया है और इस भाव पर ग्रहों के प्रभाव स्वरूप ऎसी अनेक स्थितियां उत्पन्न होती हैं जिनके चलते शादी में देरी या बार-बार बनते रिश्तों का टूटना सहना पड़ता है। 

ज्योतिषविदों के अनुसार कुंडली / Kundli में स्थित सातवाँ घर बताता है कि आपकी शादी किस उम्र में होगी। लेकिन क्या आप जानते है कि जातक की कुंडली में मौजूद ग्रहों की दशा, और गोचर की स्थिति से व्यक्ति के विवाह को लेकर पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। शादी के लिए दशा,और गोचर कौन से उपयुक्त रहेंगे जहाँ प्रयास करने पर जल्दी शादी हो सके।

कई बार शादी नहीं होती और कई बार शादी के बाद सम्बन्ध खराब होकर अलगाव उत्पन्न हो जाता है, यह सब ग्रहों की अशुभ दृष्टि तथा ग्रहों के निर्बलता के कारण होता है। कुल मिलाकर जब एक से अधिक अशुभ ग्रहों का प्रभाव सातवें घर पर हो तो विवाह में विलम्ब होता है।

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अशुभ ग्रहों के कारण विवाह में बाधा -

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कुंडली में सप्तम भाव की दशा या फिर अन्तर्दशा, सातवें भाव में स्थित ग्रहों की दशा या अन्तर्दशा या सातवें भाव को देखने वाले ग्रहों की दशा तथा अन्तर्दशा हो, या फिर छठे भाव से सम्बंधित दशा या अन्तर्दशा चल रही हो तो विवाह में निश्चित रूप से विलम्ब होता है या फिर रुकावटें उत्पन्न होती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार छठा तथा दसवां घर विवाह में रूकावटे उत्पन्न करता है।

सुखी वैवाहिक जीवन के लिए 12 वां तथा 11 वां भाव शुभ होना जरुरी होता है अन्यथा शादी में रूकावटे आती है।

शुक्र, बुध, गुरु और चन्द्र ये शुभ ग्रह हैं, इनमे से कोई एक भी यदि सातवें घर में बैठा हो तो शादी में आने वाली रुकावटें समाप्त हो जाती हैं।

यदि शुक्र, गुरु या चन्द्र आपकी कुंडली के सातवें घर में हैं तो 24-25 की उम्र में शादी होने की सम्भावना रहती है, अन्यथा शादी में विलम्ब होता है।

गुरु सातवें घर में हो तो शादी 25 की उम्र तक हो जाती है। गुरु पर सूर्य या मंगल का प्रभाव हो तो एक साल या डेढ़ साल का विलम्ब हो सकता है और यदि राहू या शनि का प्रभाव हो तो 2 से 3 साल तक का विलम्ब होता है।

चन्द्र सातवें घर में हो और उस पर मंगल, सूर्य में से किसी एक का प्रभाव हो तो शादी 26 -27 साल की उम्र में होने के योग बनते हैं।

शुक्र सप्तम हो और उस पर मंगल, सूर्य का प्रभाव हो तो शादी में दो तीन साल का विलम्ब होता है, इसी तरह शुक्र पर शनि का प्रभाव होने पर एक साल और राहू का प्रभाव होने पर शादी में दो साल का विलम्ब होता है।

विवाह में बाधाएं जरुर आती है। इसी तरह अगर केतु सातवें घर में हो तो शादी में अडचने पैदा होती हैं।

शनि मंगल, शनि राहू, मंगल राहू, या शनि सूर्य या सूर्य मंगल, सूर्य राहू, एकसाथ सातवें घर या आठवें घर में हो तो विवाह में विलम्ब की सम्भावना बनी रहती है।

शनि सातवें घर में हो तब भी विवाह में विलंब होता है।

मांगलिक होना भी विवाह में विलम्ब का कारण होता है। आमतौर पर देखा गया है जो लोग मांगलिक होते है उनका विवाह आयु के 27, 29, 31, 33 तथा 37वें वर्ष में होता है।

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आइए जानते है विवाह के कारक ग्रह कौन से होते है।

सप्तम भाव विवाह का कारक भाव होता है, इस पर शुभ ग्रहों जैसे- गुरु शुक्र शुभ ग्रह युक्त बुध, पूर्ण चन्द्रमा की दृष्टि हो तो शादी जल्दी होती है।

सप्तम भाव का स्वामी केंद्र अथवा त्रिकोण में स्थित हो। सप्तमेश लग्न में या लग्नेश सप्तम में हो।

सप्तमेश ग्यारहवें भाव में हो या सप्तमेश उच्च होकर लग्नेश से युति बना रहा हो तो विवाह शीघ्र होता है।

नवमेश सप्तमेश हो और सप्तमेश नवम भाव में हो तो शादी जल्दी होती है। सप्तम भाव के कारक ग्रहों की शुक्र पर अशुभ दृष्टि या युति न हो तथा शुक्र ग्रह केंद्र या त्रिकोण भाव में स्थित हो तो विवाह जल्दी होता है।

शीघ्र विवाह के उपाय -

गुरू को विवाह का प्रमुख कारक माना गया है कुण्डली में इनकी शुभता द्वारा आपको दांपत्य जीवन का सुख प्राप्त होता है अत: गुरू से संबंधित उपाय बेहद शुभ माने जाते हैं, गुरू की शुभता हेतु आपको चाहिए की गुरूवार के दिन व्रत करें, पीला वस्त्र धारण करें तथा मंदिर में हल्दी का दान करें। 

जिन जातकों के विवाह में विलम्ब हो रहा है या जिनकी शादी में रुकावटें आ रही हो उनको पारद शिवलिंग की पूजा जरुर करनी चाहिए। शिवलिंग भगवान शिव और मां पार्वती का अवतार यानि एकल रूप है। शिवलिंग के इस स्वरूप को अत्यंत शुभ माना जाता है। पारद शिवलिंग की पूजा करने से व्यक्ति के विवाह में आने वाली बाधाएं शीघ्र ही समाप्त हो जाती हैं।

विवाह में यदि देरी हो रही हो तो ‘गौरी शंकर की पूजा’ नियमित रूप से करनी चाहिए साथ ही मां गौरी को सिंगार की वस्तुएं भेंट करें।

मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए और हनुमान जी को सिन्दूर व चोला चढ़ाएं।

21 दिन तक संकल्प लेकर ‘दुर्गासप्तशती’ के ‘अर्गलास्तोत्रम्’ का पाठ करें व साथ ही कन्यायें माँ कात्यायनी देवी की पूजा करें।

कन्याओं के विवाह में विलम्ब हो रहा हो तो कन्यायें सोमवार के दिन भगवान शिव की उपासना कर 5 नारियल लेकर भगवान शिव के मूर्ति के आगे रखकर “ॐ श्रीं वर प्रदाय श्री नमः” मंत्र की पांच माला का जप करें और सभी नारियल मंदिर में चढ़ा दें।

माँ दुर्गा के समक्ष सप्तशती स्त्रोत क पाठ करें व कन्याओं को भोजन कराएं।

यदि आपकी पत्रिका में शनि के कारण विवाह में बाधा या विवाह की बात नहीं बन रही है तो शनिवार को शिवलिंग पर काले तिल अर्पित करें व शनिवार के दिन साबुत उड़द, लोहा, काला तिल और साबुन काले कपड़े में बांधकर दान करें। ऐसा करने से शनि ग्रह से आ रही बाधा दूर होती है और शीघ्र विवाह के योग बनते हैं। 

यदि जन्म-कुंडली / Janam Kundali में मांगलिक दोष होने के कारण अगर विवाह में अड़चन आ रही हो तो लड़का या लड़की प्रत्येक मंगलवार श्री मंगल चंडिका स्त्रोत का पाठ करें। इस मंत्र का जप करे- ‘ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं सर्व पूज्य देवी मंगल चण्डिके हूँ फट स्वाहा।’

विवाह में आ रही रुकावट दूर करनी हो तो जातक को पीपल की जड़ में लगातार 13 दिन जल चढ़ाने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से विवाह में आ रही अड़चन दूर होती है।

नित्य प्रतिदिन पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करें व गुरुवार को गाय को दो आटे के पेड़े पर थोड़ी हल्दी लगाकर गुड़ तथा चने की गीली दाल के साथ देना चाहिए।

युवक -युवती की कुण्डली में कुण्डली में यदि मांगलिक दोष बन रहा हो तो मांगलिक दोष व ग्रह शांति की पूजा जरूर करवाएं।

कुंडली में मंगलिक दोष / Manglik Dosh in Kundali होने पर शादी में बाधा आ रही है तो मंगलवार के दिन व्रत रखकर हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। हनुमान जी को गेहूं के आटे एवं गुड़ से बने लड्डू का भोग लगाएँ। हनुमान जी को सिन्दूर चढ़ाएं।

11 सोमवार को 1200 ग्राम चने की दाल लेकर इसके साथ सवा लीटर कच्चा दूध का दान करें और भगवान विष्णु का ध्यान करें। ऐसा करने से बन रहे रिश्तों में अड़चन नहीं आती है।

शुद्ध व सात्विक रूप से किए गए उपायों द्वारा विवाह में विलम्ब की स्थिति से बचाव किया जा सकता है। साथ ही दांपत्य जीवन की शुरूआत भी प्रसन्नतापूर्वक व संतोषजनक आरंभ होती है। 


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