शुभ योग में होगी गणेश चतुर्थी, जानिए- पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

By: Future Point | 24-Aug-2022
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शुभ योग में होगी गणेश चतुर्थी, जानिए- पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

भारतीय संस्कृति में गणेश जी को विद्या-बुद्धि का प्रदाता, विघ्न-विनाशक, मंगलकारी, सिद्धिदायक, समृद्धि, शक्ति और सम्मान प्रदायक माना गया है। वैसे तो प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को “संकष्टी गणेश चतुर्थी’’ व शुक्लपक्ष की चतुर्थी को “वैनायकी गणेश चतुर्थी’’ मनाई जाती है, लेकिन वार्षिक गणेश चतुर्थी को गणेश जी के प्रकट होने के कारण उनके भक्त इस तिथि के आने पर उनकी विशेष पूजा करके पुण्य अर्जित करते हैं।

मान्यता है कि गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को मध्याह्न काल में, सोमवार, स्वाति नक्षत्र एवं सिंह लग्न में हुआ था। इस साल गणेश चतुर्थी 31 अगस्त, बुधवार के दिन है। बुधवार के दिन होने के कारण गणेश चतुर्थी का महत्व और भी बढ़ जाता है। इसलिए यह चतुर्थी मुख्य गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी कहलाती है। यह दिन गणपति को समर्पित है। इस दिन चतुर्थी होने से व्रत का खास महत्व है। गणेश चतुर्थी के दिन घरों में लंबोदर की स्थापना की जाती है। उन्हें 10 दिन तक विराजमान किया जाता है। सुबह-शाम विधिपूर्वक गणेश जी की पूजा-अर्चना की जाती है। भक्तजन गणपति जी को प्रसन्न करने के लिए उनकी मनपसंद चीजों का भोग लगाते हैं। 10 दिनों तक गणेश जी की सेवा करने के बाद चतुर्दशी तिथि के दिन उन्हें पानी में विसर्जित करने का भी विधान है। तो आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी तिथि और शुभ मुहूर्त,  

गणेश चतुर्थी 2022 तिथि और शुभ मुहूर्त -

पंचांग के अनुसार इस बार गणेश चतुर्थी की शुरुआत 31 अगस्त से हो रही है। 30 अगस्त, मंगलवार दोपहर 03.33 मिनट पर चतुर्थी तिथि शुरू होगी। 31 अगस्त दोपहर 03.22 मिनट पर इसका समापन होगा। उदयातिथि के कारण गणेश चतुर्थी का व्रत 31 अगस्त को रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11.05 मिनट से दोपहर 01.38 मिनट तक है।

अवधि : 2 घंटे 33 मिनट

भगवान गणेश की स्थापना कैसे करें -

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणपति की प्रतिमा स्थापित की जाती है। बड़े धूमधाम से घर में भगवान गणेश को विराजित किया जाता है। उन्हें 10 दिनों तक घर में रखा जाता है। उनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है। गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान आदि के बाद साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें। भगवान का साफ जल से अभिषेक करें। फिर उन्हें अक्षत, दुर्वा, फूल, फल आदि अर्पित करना चाहिए। मोदक का भोग लगाएं और आरती करें। मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन पूजा करने से करते बप्पा भक्तों से प्रसन्न होते हैं। वहीं वे सब संकटों को दूर करते हैं।

गणेश विसर्जन की कथा -

दस दिनों तक चलने वाले गणेश महोत्सव के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा की मूर्ति का पानी में विसर्जन करने की परंपरा रही है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है। ऐसा कहा जाता है कि महर्षि वेद व्यास से सुन-सुनकर ही भगवान गणेश ने महाभारत ग्रंथ को लिखा था। तो जब महर्षि वेद व्यास ने गणेश जी को महाभारत की कथा सुनानी शुरू की तो वे लगातार 10 दिन तक आंख बंद करके सुनाते रहे। महाभारत कथा खत्म होने पर 10 दिन बाद जब वेद व्यास जी ने अपनी आंखे खोलीं तो उन्होंने पाया कि भगवान गणेश के शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ गया था। तब महर्षि वेद व्यास ने गणपति जी के शरीर के तापमान को कम करने के लिए उन्हें शीतल जल में डुबकी लगवाई। तभी से गणेश उत्सव के दसवें दिन गणेश जी की मूर्ति का शीतल जल में विसर्जन करने की परंपरा शुरू हुई।

गणेश चतुर्थी का महत्व -

माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण पर स्यमन्तक मणि चोरी करने का झूठा कलंक लगा था और वे अपमानित हुए थे। नारद जी ने उनकी यह दुर्दशा देखकर उन्हें बताया कि उन्होंने भाद्रपद शुक्लपक्ष की चतुर्थी को गलती से चंद्र दर्शन किया था। इसलिए वे तिरस्कृत हुए हैं। नारद मुनि ने उन्हें यह भी बताया कि इस दिन चंद्रमा को गणेश जी ने श्राप दिया था। इसलिए जो इस दिन चंद्र दर्शन करता है उसपर मिथ्या कलंक लगता है। नारद मुनि की सलाह पर श्रीकृष्ण जी ने गणेश चतुर्थी का व्रत किया और दोष मुक्त हुए। इसलिए इस दिन पूजा व व्रत करने से व्यक्ति को झूठे आरोपों से मुक्ति मिलती है।

विशेष :-

मान्यता है की इस दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए वरना कलंक का भागी होना पड़ता है। अगर भूल से चन्द्र दर्शन हो जाए तो इस दोष के निवारण के लिए नीचे लिखे मन्त्र का 28, 54 या 108 बार जाप करें। श्रीमद्भागवत के दसवें स्कन्द के 57वें अध्याय का पाठ करने से भी चन्द्र दर्शन का दोष समाप्त हो जाता है।

चन्द्र दर्शन दोष निवारण मन्त्र :-

सिंहःप्रसेनमवधीत् , सिंहो जाम्बवता हतः।

सुकुमारक मा रोदीस्तव, ह्येष स्यमन्तकः।।

ध्यान रहे कि तुलसी के पत्ते गणेश पूजा में इस्तेमाल नहीं हों। तुलसी को छोड़कर बाकी सब पत्र-पुष्प गणेश जी को प्रिय हैं।

गणेश पूजन में गणेश जी की एक परिक्रमा करने का विधान है। मतान्तर से गणेश जी की तीन परिक्रमा भी की जाती है।



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