राहुकाल क्या है, इसमें कौन से कार्य हैं वर्जित

By: Future Point | 23-Mar-2020
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राहुकाल क्या है, इसमें कौन से कार्य हैं वर्जित

ज्योतिष शास्त्र में राहु काल का समय प्रत्येक शुभ कार्य की दृष्टि से अनुचित माना गया है, राहु राक्षस प्रवृति का छाया ग्रह है, राहुकाल स्थान और तिथि के अनुसार अलग-अलग होता है अर्थात प्रत्येक वार को अलग समय में शुरू होता है, यह काल कभी सुबह, कभी दोपहर तो कभी शाम के समय आता है, लेकिन सूर्यास्त से पूर्व ही पड़ता है, राहुकाल की अवधि सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय के 8वें भाग के बराबर होती है, यानी राहुकाल का समय डेढ़ घंटा होता है, राहु काल का विशेष विचार रविवार, मंगलवार तथा शनिवार को आवश्यक माना गया हैं, वैदिक शास्त्रों के अनुसार इस समय अवधि में शुभ कार्य आरंभ नहीं करने चाहिए, और राहुकाल में घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए, कोई महत्वपूर्ण या मांगलिक कार्य भी नहीं करना चाहिए, राहु को पाप ग्रह माना गया है, यह ग्रह अशुभ फल प्रदान करता है, इसलिए इसके आधिपत्य का जो समय रहता है, उस दौरान शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है, सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक के समय में से आठवें भागका स्वामी राहु होता है, इसे ही राहुकाल कहते हैं, यह प्रत्येक दिन 90 मिनट का एक निश्चित समय होता है, जो राहुकाल कहलाता है, राहु काल दिनमान के आठवें भाग का नाम है, राहुकाल का समय किसी स्थान के सूर्योदय व वार पर निर्भर करता है, दिन के किसी वक्त किसी शादी व्याह को लेकर किसी रिश्तेदार से मिलने जा रहे हैं या कहीं नौकरी के सिल-सिल में किसी अधिकारी से मिलने जा रहे हैं ज्योतिष के अनुसार इस समय अवधि में शुरु किया गया कोई भी शुभ कार्य या खरीदी-बिक्री को शुभ नहीं माना जाता।


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राहुकाल में शुरु किये गये किसी भी शुभ कार्य में हमेशा कोई न कोई विघ्न आता है, अगर इस समय में कोई भी व्यापार प्रारंभ किया गया हो तो वह घाटे में आकर बंद हो जाता है। इस काल में खरीदा गया कोई भी वाहन, मकान, जेवरात, अन्य कोई भी वस्तु शुभ फलकारी नहीं होती। दक्षिण भारत के लोग राहुकाल को अत्यधिक महत्व देते हैं। राहुकाल में विवाह, सगाई, धार्मिक कार्य, गृह प्रवेश, शेयर, सोना, घर खरीदना अथवा किसी नये व्यवसाय का शुभारंभ करना, ये सभी शुभ कार्य राहुकाल में पूर्ण रूपेण वर्जित माने जाते हैं। राहुकाल का विचार किसी नये कार्य का सूत्रपात करने हेतु नहीं किया जाता है, परंतु जो कार्य पहले से प्रारंभ किये जा चुके हैं वे जारी रखे जा सकते हैं। तो एक बार राहुकाल के समय को जरूर देख लें। माना जाता है कि राहुकाल में किया गया कोई भी शुभ कार्य सफल नहीं होता।

राहु काल दिन व समय-

राहु काल ज्ञात करने के लिए ज्योतिष शास्त्र में एक नियम बनाया गया है। इस नियम के अनुसार सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूरे दिन को आठ बराबर भागों में बांटा जाता है। इसमें सूर्योदय का एक स्टैंडर्ड समय प्रात: 6 बजे माना गया है और सूर्यास्त का समय शाम को 6 बजे। इसलिए सुबह 6 से शाम 6 बजे तक का समय 12 घंटे का हुआ। इस 12 घंटे को 8 बराबर भागों में विभाजित करेंगे तो एक भाग करीब डेढ़ घंटे का होगा। अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय-सूर्यास्त का समय अलग होने से इस समय में कुछ मिनटों का अंतर हो जाता है। राहु काल कभी भी दिन के पहले भाग में नहीं आता है। यह कभी दोपहर तो कभी शाम को आता है और सूर्यास्त से पूर्व ही पड़ता है।

राहुकाल दिन-

  • सोमवार के दिन राहुकाल दिन के दूसरे हिस्से में होता है|
  • शनिवार को दिन के तीसरे हिस्से में होता है|
  • शुक्रवार को दिन के चौथे हिस्से में
  • बुधवार को दिन के पांचवें हिस्से में
  • गुरुवार को दिन के छठे हिस्से में
  • मंगलवार को दिन के सातवें हिस्से में
  • रविवार को दिन के आठवें हिस्से में

राहुकाल समय-

  • रविवार के दिन शाम 4.30 से 6.00 बजे तक राहुकाल होता है,
  • सोमवार को दिन का दूसरा भाग यानी सुबह 7.30 से 9. 00 बजे तक राहुकाल माना जाता है,
  • मंगलवार को दोपहर 3.00 से 4.30 बजे तक राहुकाल होता है,
  • बुधवार को दोपहर 12.00 से 1.30 बजे तक राहुकाल माना गया है,
  • गुरुवार को दोपहर 1.30 से 3.00 बजे तक का समय राहुकाल माना जाता है,
  • शुक्रवार के दिन सुबह 10.30 बजे से 12.00 बजे तक का समय राहुकाल माना गया है,
  • शनिवार को सुबह 9.00 बजे से 10.30 बजे तक के समय को राहुकाल माना गया है,

राहु काल में क्या न करें-

  • किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए राहुकाल में घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए,
  • राहु काल में शुरु किया गया कोई भी शुभ कार्य बिना बाधा के पूरा नहीं होता है,
  • राहुकाल में यज्ञ अनुष्ठान आदि नहीं करना चाहिए,
  • इस काल में खरीदारी या बिक्री करने से प्रायः हानि ही होती है,
  • राहु काल में कोई भी शुभ कार्य प्रारम्भ नहीं करना चाहिए,
  • राहुकाल में विवाह, सगाई, धार्मिक कार्य या गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए,
  • यदि आप घूमने के लिए कहीं दूर जा रहे हैं तो राहु काल में यात्रा प्रारम्भ नहीं करनी चाहिए,
  • राहु काल में भूलकर भी वाहन, मकान, मोबाइल, कम्प्यूटर, टेलीविज़न,आभूषण या अन्य कोई भी बहुमूल्य वस्तु नहीं खरीदनी चाहिए,

उपाय –

  • यदि किसी जातक को राहु काल में कोई परेशानी हो तो वो इन उपायों को करके लाभ ले सकता है|
  • राहु काल में इक चौमुखा, चार बत्ती वाला दीपक जलाकर राहु को अर्पित करें| तथा कोई भी मीठा प्रसाद बनाकर चढ़ाएं|
  • राहुकाल में यात्रा करना जरूरी हो तो पान, दही या कुछ मीठा खाकर निकलें, घर से निकलने के पूर्व पहले 10 कदम उल्टे चलें और फिर यात्रा पर निकल जाएं,
  • सप्तधान्य का दान राहुकाल में करें, व पक्षियों को प्रतिदिन बाजरा खिलाएं।
  • एक नारियल ग्यारह साबुत बादाम काले वस्त्र में बांध कर बहते जल में प्रवाहित करें।
  • यदि कोई मंगलकार्य या शुभकार्य करना हो तो हनुमान चालीसा पढ़ने के बाद पंचामृत पीएं और फिर कार्य शुरू करें,
  • अपने घर के नैऋत्य कोण में पिले रंग के फूल अवश्य लगाएं|

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