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प्रियंका गांधी - इंदिरा की फोटोकॉपी

By: Rekha Kalpdev | 09-Apr-2019
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प्रियंका गांधी - इंदिरा की फोटोकॉपी

इंदिरा के बाद राजीव अभी चुनावी दावपेंच ठीक से समझ भी नहीं पाए थे की एक भरी सभा में उनकी हत्या कर दी गयी। सोनिया गाँधी ने अपनी राजनैतिक जिम्मेदारियां पूरी करने की भरपूर कोशिश की परन्तु जो नाम, शोहरत और सफलता इंदिरा गांधी को मिली वह सोनिया गांधी को कभी ना मिल सकी। सोनिया गाँधी के खराब स्वास्थ्य और राहुल गांधी की नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी फिर से सत्ता का सुख नहीं पा सकी। एक लम्बे समय से कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता, अनुभवी नेता और प्रशंसक यह चाहते थे की कांग्रेस की कमान प्रियंका गांधी को सौंपी जाए।

कांग्रेस पार्टी की महासचिव बनने के साथ ही प्रियंका गाँधी एक बार फिर से चुनावी सुर्खियों में है। सक्रिय राजनीति में कदम रखते ही प्रियंका गाँधी को देश का सबसे प्रमुख राज्य उत्तर प्रदेश दिया गया है। जब-जब चुनावी बिगुल हुंकार भरता है तब-तब प्रियंका गाँधी के चुनावी मैदान में कूदने की अटकलें सामने आती रही है।

कहा जा रहा है की प्रियंका रायबरेली या बनारस दोनों या दोनों में से एक जगह से चुनाव लड़ सकती है। सोनिया गाँधी अपनी सेहत में कमी के चलते अपनी सीट से अपनी बेटी प्रियंका गाँधी को रायबरेली की बागडोर देना चाहती है। प्रियंका गांधी कहाँ से चुनाव लड़ेंगी यह अभी पूरी तरह से निश्चित नहीं है। समय के साथ चीजें सामने आने लगेंगी। लेकिन यह तय है की प्रियंका का उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ना यूपी की राजनीति को हिला कर रख देगा। दोनों एक दूसरे के पूरक के रूप में भी सामने आ सकते है।

परदादा जवाहर लाल नेहरु स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री, दादी इंदिरा गांधी भारतीय राजनैतिक इतिहास की सबसे सफल और चर्चित महिला प्रधानमंत्री, माता सोनिया गांधी वर्तमान में कांग्रेस पार्टी की कर्ताधर्ता इनकी दूसरी संतान प्रियंका गांधी वाड्रा। भारतीय राजनीति के सबसे बड़े घराने में जन्म लेने वाली प्रियंका गांधी के रक्त में जन्म से ही राजनीति विराजमान है। जिस परिवार में एक से एक नेता हों। उस परिवार की संतान का राजनीति में सक्रिय ना होना, सबको हैरान करता है। प्रियंका गांधी का जन्म ही एक ऐसे परिवार में हुआ है, जिसमें चारों ओर राजनीति का माहौल रचा बसा है। दादी इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी के दोनों बच्चों की शिक्षा का कार्य घर पर ही हुई। सुरक्षा व्यवस्था के चलते सामाजिक जीवन सीमित ही रहा। बहुत कम लोगों से संपर्क और बहुत कम लोगों से मित्रता।

दिल्ली के जीजस एंड मैरी महाविद्यालय से स्नातक की शिक्षा पूरी करने के बाद प्रियंका को तेजी बच्चन का साथ मिला, जिनके संपर्क में इनकी रुचि हिन्दी साहित्य में जाग्रत हुई। इससे एक ओर इनकी हिन्दी भाषा पर पकड़ मजबूत हुई, वहीं दूसरे ओर इससे इन्हें साहित्य, काव्य का ग्यान हुआ। प्रियंका गांधी का चेहरा मोहरा अपनी दादी इंदिरा गांधी से काफी हद तक मिलता जुलता है। यही वजह है कि इंदिरा जी की बात चले तो प्रियंका का जिक्र और प्रियंका की बात चले तो इंदिरा गांधी का जिक्र हो ही जाता है। ऐसे में इनकी तुलना इनकी दादी से होना भी लाजमी है।

युवावस्था की इंदिरा गांधी और प्रियंका गांधी दोनों की तस्वीरें लगभग एक जैसी है। इंदिरा की छाप या फोटो कापी प्रियंका गांधी को कहा जा सकता है। इंदिरा और प्रियंका गांधी का हेयर स्टाईल, रुप-रंग, आकर्षक व्यक्तित्व, सुंदर नैन नक्श, कद-काठी, हाव-भाव, बात करने का तरीका, चेहरा मोहरा और वस्त्रों का चयन एक दूसरे से काफी हद तक मिलता है। प्रियंका गांधी को देख कर इनकी दादी की बरबस याद आ ही जाती है। इनके व्यक्तित्व में वही दम और आवेश दिखाई देता है जो एक समय में इंदिरा गांधी में था।

प्रियंका गांधी का विवाह राबर्ड वाडेरा एक प्रसिद्ध उद्योगपति के साथ हुआ। एक बेटा और एक बेटी को जन्म देने के बाद प्रियंका का जीवन अपने पति और बच्चों तक ही सिमट गया। प्रियंका अपने परिवार को तवोज्जो देना चाहती थी, इसलिए लम्बे समय तक राजनीति में आने से बचती रही। हालांकि प्रियंका अपनी माता और अपने भाई राहुल गांधी को राजनीति में सहयोग करती रही है। राजनैतिक सलाहकार की भूमिका कुशलता से निभाती रही है। प्रियंका का अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को महत्व देना और वर्तमान में सक्रिय रुप में राजनीति में कदम रखना भारत की महिलाओं के लिए विशेष रुप से प्रेरणादायक साबित हो सकता है। हर कोई यह जानना चाहता है कि क्या प्रियंका अपनी दादी की तरह राजनीति में चमत्कार करने में सफल रहेंगी। सारी कांग्रेस उनमें अपना दमदार नेता तलाश रही है।

नेहरू गाँधी की बेटी इंदिरा गाँधी ने भारतीय राजनीति में अपना जो दबदबा और मुकाम हासिल दिया, वह राजनीती में फिर किसी व्यक्ति ने इस स्तर को नहीं छूआ। इंदिरा गाँधी के बाद गाँधी परिवार में अन्य किसी ने सफलता हासिल नहीं के, जो नेहरू जी और इंदिरा गाँधी को मिली। राजीव गाँधी और सोनिया गाँधी की बेटी प्रियंका का सिर्फ चेहरा मोहरा ही अपनी दादी से मिलता है, या फिर वो फिर से अपनी दादी की सफलता का परचम लहरा सकती है।

एक बार एक सभा में इंदिरा गाँधी ने कहा था की " मेरे यहां एक लड़की है उसका नाम प्रियंका है। उसका भविष्य बहुत अच्छा है। जब वह बड़ी हो जाएगी, राजनीति में आएगी, तब लोग मुझे भूल जाएंगे। उसको याद करेंगे। देश के भविष्य के लिए जो मैं आज हूं वह प्रियंका कल बनेगी।

लम्बे समय से चली अटकलों को विराम देते हुए प्रियंका गांधी ने राजनीति में पदार्पण कर ही लिया है। अब देखना यह है की क्या प्रियंका गांधी कांग्रेस के लिए तुरुप का इक्का साबित होंगी और अब तक खोयी कांग्रेस की प्रतिष्ठा एक बार फिर दिला पाएगी। यह तो बात हुई राजनीतिक दांव की लेकिन क्या प्रियंका के सितारे भी इस बात पर मुहर लगाते हैं, जानने के लिए आइए करते हैं प्रियंका गांधी की कुंडली का विवेचन -

प्रियंका गांधी का जन्म 12 जनवरी 1972 को साय: काल में 16 : 42 में दिल्ली में हुआ। जन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर मिथुन लग्न उदित होने के फलस्वरूप प्रियंका गाँधी का जन्म लग्न मिथुन है। यह लग्न प्रियंका को पढ़ने लिखने का विशेष शौक दे रहा है। इनकी लेखन क्षमता को मजबूत कर रहा है। वाक शक्ति का धनी बना रहा है। तीव्रबुद्धि देकर इन्हें कई भाषाओं का जानकार भी बना रहा है। बातचीत में मुहावरे, कहावत आदि का प्रयोग, गम्भीरता पूर्वक विचार करनी वाली, तर्क में चतुर, दूसरों पर अपना प्रभाव छोड़ने वाली, परिवर्तन पसंद, संगीत, नृत्य में आनंद लेने वाली, बिना रुके, बिना थके कार्य करने वाली बना रहा है। लकीर की फ़क़ीर न होकर अपनी राह खुद चुनने वाली है। द्विस्वभाव लग्न होने के कारण सदैव प्रसन्न रहना इनका स्वाभाविक गुण है। यह लग्न इन्हें दो दिमाग से काम करने का गुण भी दे रहा है, जब भी कोई काम करेंगी, तो 2 दिमाग से करेंगी अर्थात् एक स्वयं का और एक अन्य।

जन्म चंद्र रोग भाव में नीचस्थ राशि में है। चंद्र नक्षत्र अनुराधा है जिसके स्वामी शनि है। प्रसिद्द ज्योतिष शास्त्र जातक पारिजात के अनुसार इस नक्षत्र में जन्म लेने वाली जातिकाओं की वाणी में मिठास होती है। उन्हें यश मिलता है, उच्च पद मिलता है। इनकी कुंडली में केतु कर्क राशि में द्वितीय भाव में स्थित है। तृतीयेश सूर्य सप्तम भाव में लग्नेश बुध स्वराशिस्थ गुरु के साथ स्थित है। पंचमेश शुक्र नवम भाव में स्थित है। षष्ठेश मंगल दशम भाव में स्थित है। अष्ठम भाव में राहु और द्वादश भाव में शनि स्थित है।

कुंडली में सप्तम भाव में सूर्य और गुरु की युति है। कुंडली में सूर्य तेज का, राज्य पक्ष का कारक है और गुरु ज्ञान का, विद्या का कारक है। इन दोनों की युति, प्रतियुति बड़े ही शुभ फलदायक होते हैं। यह योग उच्च फलदाता होता है। ऐसे व्यक्ति सत्ता में अपनी योग्यता सिद्ध करते है। इस योग के जातक उदार मन, सहृदय, तेजस्वी व आदर्शवादी होते हैं। मन की बात स्पष्ट रूप से कहना इनकी खासियत होती है। 46 वें वर्ष में भाग्योदय होता है और मान-सम्मान, प्रतिष्ठा, कीर्ति सब कुछ मिलता है।

वहीं आर्थिक एवं पारिवारिक ताकत की बात करें, जो कि जन्म से ही उन्हें प्राप्त है, उसे दशमेश पराक्रमेश एवं लग्नेश की केंद्रवर्ती युति आगे बढ़ाने वाली होती है। वर्तमान में प्रियंका गांधी की शुक्र की महादशा में शनि की अंतरदशा चल रही है। जो बहुत उत्तम नहीं कहा जा सकती, परंतु शनि जन्मकुंडली भाग्याधिपति होने के कारण उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के खोए हुए जनाधार को निश्चित रूप से वापसी की ओर ले जायेगा अर्थात् यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि कांग्रेस के लिए प्रियंका गांधी का राजनीतिक प्रवेश अवश्य लाभकारी सिद्ध होगा। परंतु इन्हें गंभीर रूप से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का सामना भी करना पड़ेगा।

वर्त्तमान में प्रियंका गाँधी की कुंडली में शुक्र में शनि की अन्तर्दशा प्रभावी है। शुक्र की महादशा 2024 तक रहेगी और शनि का अंतर जून 2020 तक रहेगा। शनि कुंडली में भाग्येश और अष्टमेश है, एवं द्वादश भाव में मित्र राशि वृषभ में स्थित है। अनुभव में देखने में आया है की शुक्र में शनि या शनि में शुक्र की दशा हो तो जातक को मनोवांछित फल प्राप्त नहीं हो पाते है। इसलिए इस समय में प्रियंका को मनोनुकूल सफलता प्राप्त नहीं हो पाएगी।

शनि का गोचर इस समय इनके सातवें भाव पर है। इसके अलावा मार्च माह में इनके सप्तम भाव पर केतु-शनि और गुरु एक साथ गोचर करने करने वाले है। सप्तम भाव विवाह के अलावा साझेदारी का भाव है। समझौतों और गठबंधन का भाव है। सप्तमेश, अष्टमेष और नवमेश का एक साथ साझेदारी भाव में होना मिला जुला फल देगा।

नवमांश कुंडली

जन्म के समय लग्नाधिपति बुध की केंद्रवर्ती अवस्था एवं बृहस्पति की युति इन्हें आमजन से सफलता दिलाएगी। प्रियंका गाँधी की जन्म कुंडली की अपेक्षा इनकी नवमांश कुंडली में ग्रह विशेष बली अवस्था में है। नवमांश में बुध की स्वग्रही अवस्था, इन्हें राजनीति की दुनिया में अत्यंत लोकप्रियता प्रदान करने वाली है। नवमांश कुंडली में भाग्येश शुक्र भाग्य भाव में अपनी स्वराशि तुला में है। लग्नस्थ शनि कुम्भ राशि में है। इस प्रकार नवमांश कुंडली के तीनों त्रिकोण अपने स्वामियों से युत होने के कारण विशेष बली हो गए है। नवमांश कुंडली में गुरु और राहु तीसरे भाव में युति सम्बन्ध में हैं। इस योग के बारे में ज्योतिष शास्त्रों में कहा गया है की गुरु जीव है और सूर्य आत्मा है अर्थात जीवात्मा होना है। यह बहुत सुन्दर योग है, इसमें कहा जाता है की जातक के रूप में परिवार का कोई पूर्वज ही वापिस आता है।

विश्लेषण सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मकालिक राशि भी वृश्चिक ही है जो कि प्रियंका गांधी की है। ऐसे में राजनीति के मैदान में पीएम मोदी को राहुल गांधी से अधिक चुनौती प्रियंका गांधी से मिलेगी। यद्यपि दोनों की ही साढ़ेसाती चल रही है, जिसके फलस्वरूप मोदी जी उत्तर प्रदेश में न केवल पूर्व से बहुत कम सफलता प्राप्त करेंगे, अपितु प्रियंका गांधी के शनि एवं बृहस्पति की उत्तम अवस्था के कारण भाजपा को एवं अन्य पार्टियों को गंभीर रूप से हानि होगी।

शनि नवमेश है और इस समय गोचर में सप्तम भाव से नवम भाव भाग्य भाव को तीसरी दृष्टि देकर सक्रिय कर रहे है। अत: भाग्य का साथ इन्हें इस समय प्राप्त होगा। यहाँ कुंडली में शुक्र शनि में राशि परिवर्तन योग निर्मित हो रहा है। शनि नवमेश है और द्वादश भाव में स्थित है एवं शुक्र द्वादशेश होकर नवम भाव में शनि राशि में स्थित है। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कई शनि इस कुंडली में अष्टमेश भी है। अष्टमेश का द्वादश भाव में होना विपरीत राजयोग का निर्माण भी कर रहा है। यह शनि की अंतरदशा इन्हें भारतीय राजनीति में अपना सफलता का खाता खोलने का अवसर देगी। जो आगे जाकर इन्हें ध्रुव तारे की तरह प्रकाशित करेगी।

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