नरसिंह जयंती विशेष- कथा एवं पूजा विधि।

By: Future Point | 14-May-2019
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नरसिंह जयंती विशेष- कथा एवं पूजा विधि।

वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के दिन नरसिंह जयंती मनाई जाती है, शास्त्रों के अनुसार नरसिंह जयंती के दिन भगवान श्री नरसिंह की पूजा सच्चे मन से करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और प्रभु श्री नरसिंह अपने भक्तों के सभी कष्ट हर लेते हैं, इस वर्ष 2020 में नरसिंह जयंती 06 मई बुधवार के दिन मनाई जायेगी।

नरसिंह जयंती का महत्व-

नरसिंह जयंती का हिन्दू धर्म शास्त्र में बहुत बड़ा महत्व है, भगवान् श्री नरसिंह को शक्ति और पराक्रम के देवता माने जाते हैं, बहुत से लोग वैसाख मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के दिन भगवान नरसिंह जी का व्रत रखते हैं, मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्री नरसिंह ने खम्भे को चीर कर अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए अवतार लिया था इसी कारण उस दिन को उनकी जयंती उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

This Puja holds special importance when performed on the special occasion of Narasimha Jayanti.


नरसिंह जयंती कथा-

पौराणिक कथा के अनुसार कश्यप नामक ऋषि थे उनकी पत्नी का नाम दिति था. उनके दो पुत्र हुए, जिनमें से एक का नाम हरिण्याक्ष तथा दूसरे का हिरण्यकशिपु था. हिरण्याक्ष के आतंक से पृथ्वी वासियों को बचाने के लिए भगवान श्री विष्णु जी ने वाराह रूप में अवतरित होकर उसका वध कर दिया था. अपने भाई कि मृत्यु से दुखी और क्रोधित हिरण्यकशिपु ने भाई की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए अजेय होने का संकल्प किया. सहस्त्रों वर्षों तक उसने कठोर तप किया, उसकी तपस्या से प्रसन्न हो ब्रह्माजी ने उसे ‘अजेय’ होने का वरदान दिया. वरदान प्राप्त करके उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, लोकपालों को मार भगा दिया और स्वत: सम्पूर्ण लोकों का अधिपति हो गया.

ऐसे में देवता गण निरूपाय हो गए थे वह असुर को किसी प्रकार वे पराजित नहीं कर सकते थे अहंकार से युक्त वह प्रजा पर अत्याचार करने लगा. इसी दौरान हिरण्यकशिपु कि पत्नी कयाधु ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम प्रह्लाद रखा गया एक राक्षस कुल में जन्म लेने पर भी प्रह्लाद में राक्षसों जैसे कोई भी दुर्गुण मौजूद नहीं थे तथा वह भगवान नारायण का भक्त था तथा अपने पिता के अत्याचारों का विरोध करता था. भगवान-भक्ति से प्रह्लाद का मन हटाने और उसमें अपने जैसे दुर्गुण भरने के लिए हिरण्यकशिपु ने बहुत प्रयास किए, नीति-अनीति सभी का प्रयोग किया किंतु प्रह्लाद अपने मार्ग से विचलित न हुआ तब उसने प्रह्लाद को मारने के षड्यंत्र रचे मगर वह सभी में असफल रहा. भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद हर संकट से उबर आता और बच जाता था.

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अतः इस बातों से क्षुब्ध हिरण्यकशिपु ने उसे अपनी बहन होलिका की गोद में बैठाकर जिन्दा ही जलाने का प्रयास किया. होलिका को वरदान था कि अग्नि उसे नहीं जला सकती परंतु जब प्रल्हाद को होलिका की गोद में बिठा कर अग्नि में डाला गया तो उसमें होलिका तो जलकर राख हो गई किंतु प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ. ये देखकर हिरण्यकशिपु क्रोध से भर गया उसकी प्रजा भी अब भगवान विष्णु को पूजने लगी, तब एक दिन हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद से पूछा कि बता, तेरा भगवान कहाँ है? इस पर प्रह्लाद ने विनम्र भाव से कहा कि प्रभु तो सर्वत्र हैं, हर जगह व्याप्त हैं. क्रोधित हिरण्यकशिपु ने कहा कि ‘क्या तेरा भगवान इस स्तम्भ (खंभे) में भी है? प्रह्लाद ने हाँ, में उत्तर दिया.

यह सुनकर क्रोध में आकर हिरण्यकशिपु ने खंभे पर प्रहार कर दिया तभी खंभे को चीरकर श्री नरसिंह भगवान प्रकट हो गए और हिरण्यकशिपु को पकड़कर अपनी जाँघों पर रखकर उसकी छाती को नखों से फाड़ डाला और उसका वध कर दिया. श्री नरसिंह ने प्रह्लाद की भक्ति से प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया कि आज के दिन जो भी मेरा व्रत करेगा वह समस्त सुखों का भागी होगा एवं पापों से मुक्त होकर परमधाम को प्राप्त होगा अत: इस कारण से दिन को नरसिंह जयंती-उत्सव के रूप में मनाया जाता है.

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नरसिंह जयंती पूजा विधि –

  • नरसिंह जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर सभी कामों से निवर्त होकर स्नान करें
  • इसके पश्चात् व्रत के लिए संकल्प लें
  • दोपहर को नदी, तालाब या घर पर ही वैदिक मन्त्रों के साथ मिट्टी, गोबर, आंवले का फल और तिल लेकर उनसे सब पापों की शांति के लिए विधि पूर्वक स्नान करें
  • इसके पश्चात् स्वच्छ कपड़े पहन कर संध्या तर्पण करें
  • इसके पश्चात् पूजा स्थल को गाय के गोबर से लीप कर उस पर अष्ट दल (आठ पंखुड़ियों) वाला कमल बना लें
  • कमल के ऊपर पंच रत्न सहित तांबे का कलश स्थापित करें
  • कलश के ऊपर चावलों से भरा हुआ बर्तन रखें
  • बर्तन में अपनी इच्छा अनुसार सोने या चांदी की लक्ष्मी सहित भगवान नरसिंह की प्रतिमा रखें
  • इसके पश्चात् दोनों मूर्तियों को पंचामृत से स्नान कराएं
  • योग्य ब्राह्मण (आचार्य) को बुलाकर उनके हाथों से फूल व षदशोपचार सामग्रियों से विधि पूर्वक भगवान नरसिंह का पूजन करवाएं
  • भगवान् नरसिंह को चंदन, कपूर, रोली व तुलसी दल भेंट करें और धूप दीप करें
  • इसके पश्चात् घंटी बजा कर भगवान् नरसिंह की आरती करें
  • इसके पश्चात् भोग लगाते हुए इस मन्त्र का जाप करें नैवैद्य शर्करा चापि भक्ष्यभोज्यसमन्वितम् । ददामि ते रमाकांत सर्वपापक्षय कुरु।।
  • इसके पश्चात् भगवान् नरसिंह से सुख की कामना करें
  • रात्रि में जागरण करना चाहिए और भगवान नरसिंह की कथा सुनें।

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