जानिए लाल किताब के अनुसार मंगल ग्रह के 12 भावों में प्रभाव व उपाय | Future Point

जानिए लाल किताब के अनुसार मंगल ग्रह के 12 भावों में प्रभाव व उपाय

By: Future Point | 03-Mar-2020
Views : 18452
जानिए लाल किताब के अनुसार मंगल ग्रह के 12 भावों में प्रभाव व उपाय

लाल किताब के अनुसार मंगल एक ऐसा ग्रह है जो अपने नाम की तरह ही मंगलकारी है। हालांकि ज्योतिषविद्या में मंगल को एक क्रूर ग्रह कहा गया है लेकिन इसके अच्छे प्रभाव भी होते हैं। मंगल आपके जीवन को सुखमय भी बना सकता है और कष्टदायक भी! लाल किताब में राहू, सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति को मंगल का मित्र और बुध और केतू को मंगल का शत्रु बताया गया है। मंगल मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी है। यह  मकर राशि में उच्च का जबकि कर्क राशि में नीच का होता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार मंगल का गोचर करीब डेढ़ महीने का होता है। मंगल की उपस्थिति अगर पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में हो तो वह मंगल दोष (मांगलिक दोष) बनाता है जिससे विवाह में विलंब होता है और वैवाहिक जीवन में अनेक समस्याएं आती हैं। इसलिए अगर कुंडली में मंगल दोष हो तो उसका उचित समाधान करना ज़रूरी है।

मांगलिक जांच और उसके निवारण के लिए हमारे विशेषज्ञ ज्योतिषियों से परामर्श लें। 

 मंगल ग्रह के कारक तत्व

लाल किताब के अनुसार मंगल साहस, ऊर्जा, पराक्रम और शौर्य का कारक होता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल की स्थिति शुभ हो तो इनमें वृद्धि होती है। यह पताशे, मिठाई, सोना, मूंगा, लाल मसूर की दाल, अख़रोट, गुड़ की रेवड़ी जैसी वस्तुओं व लाल गुलाब, लाल रंग, मनुष्य का उपरी होंठ, रक्त आदि का प्रतिनिधित्व करता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल की स्थिति अशुभ हो तो उसे रक्त या खोपड़ी संबंधी  बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे व्यक्ति के करियर व दाम्पत्य जीवन में भी अनेक समस्याएं आती हैं। मंगल ग्रह के दुष्प्रभाव से बचने के लिए आप अनंत मूल स्थापित या धारण कर सकते हैं। इसके अलावा आप तीन मुखी रुद्राक्ष (Three Faced Rudraksha) और मूंगा रत्न (Red Coral) भी धारण कर सकते हैं।       

मंगल ग्रह का संबंध

लाल किताब के अनुसार मंगल ग्रह का संबंध निम्न चीज़ों से है:

  • व्यवसाय (Profession): पुलिस, सेना, मेकेनिकल, कैमिस्ट, नाई, लोहार, राजमिस्त्री, खिलाड़ी, मशीन या इलेक्ट्रॉनिक्स संबंधी व्यवसाय और इंजीनियर।
  • रोग (Disease): विषजनित, रक्त, खोपड़ी व प्रजनन संबंधी रोग, चोट लगना, अंग का कट जाना, अण्डकोष, कुष्ठ, खुजली, रक्तचाप, अल्सर, ट्यूमर, कैंसर, बवासीर और फोड़-फुंसी।
  • पशु-पक्षी (Animals and Birds): मेमना, बंदर, भेड़, शेर, भेड़िया, सुअर, कुत्ता, चमगादड़ व सभी लाल पक्षी।
  • शुभ रंग (Color): शौर्यता, वीरता और रक्त का प्रतीक होने के कारण लाल (Red) इसका शुभ रंग है।
  • संबंधित रिश्तेदार (Relatives): भाई, साले या मित्र  
  • मित्र ग्रह (Friendly Planets): राहु, सूर्य, चंद्र और बृहस्पति
  • शत्रु ग्रह (Enemy Planets): बुध और केतु  

मंगल ग्रह का प्रभाव: मंगल नेक और मंगल बद  

लाल किताब के अनुसार मंगल के नकारात्मक और सकारात्मक दोनों तरह के प्रभाव हो सकते हैं। लाल किताब में दो तरह के मंगल की चर्चा की गई है। एक मंगल नेक यानी अच्छा मंगल (जिसके स्वामी हनुमान जी हैं) और दूसरा मंगल बद यानी बुरा मंगल (जिसका स्वामी जिन्न है)। जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल शुभ स्थिति में हो उस पर मंगल नेक का प्रभाव पड़ता है और जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल अशुभ स्थिति में हो उस पर मंगल बद का प्रभाव पड़ता है। मंगल यदि अपने मित्र ग्रहों के साथ हो तो बली होता है जबकि शत्रु ग्रहों के साथ होने पर मंगल अशुभ होता है और जातक पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

  • मंगल नेक: सूर्य और बुध मिलकर मंगल को शुभ बनाते हैं। मंगल का 10वें भाव में होना शुभ माना जाता है। मंगल नेक वाला व्यक्ति साहसी, बुद्धिमान और पराक्रमी होता है। वह पुलिस, सेना या सुरक्षाकर्मी जैसा व्यवहार रखता है। किसी बड़ी कंपनी में उच्च पद पर आसीन होता है। वह चुनौतियों से घबराता नहीं है। उनका डटकर सामना करता है। वह अपने जीवन में बहुत तरक्की करता है। इसका असर न केवल उस पर बल्कि उसके पूरे परिवार पर भी दिखता है। मंगल नेक वाले वक्ति के भाई-बहन भी अपने जीवन में बहुत तरक्की करते हैं।
  • मंगल बद: सूर्य और शनि मिलकर मंगल बद बनाते हैं। मंगल यदि बुध या केतु के साथ हो तो अशुभ माना जाता है। चौथे व आठवें भाव में भी मंगल अशुभ माना जाता है। यदि किसी भाव में मंगल अकेला हो तो वह भूखे शेर की तरह होता है जिसका आप पर बुरा प्रभाव पड़ता है। मंगल बद वाले व्यक्ति को अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उसे बड़े भाई और परिवार का सुख नहीं मिलता। शादी में रुकावट आती है। शादी हो जाए तो भी अनेक समस्याएं आती हैं। उसे संतान सुख नहीं मिलता। यदि संतान हो भी जाए तो उसकी सेहत अच्छी नहीं रहती। मंगल बद वाले व्यक्ति को शिक्षा, करियर, प्रेम, विवाह, वित्त, स्वास्थ्य आदि हर क्षेत्र में संघर्ष करना पड़ता है।

 मंगल ग्रह के शांति के उपाय  

लाल किताब का ज्योतिष विद्या में विशेष स्थान है। इसमें मंगल को एक क्रूर ग्रह बताया गया है। उसे शांत करने के लिए इसमें अनेक उपाय बताए गए हैं। आज के दौर में हमें ये उपाय बेहद अटपटे लग सकते हैं। लेकिन लाल किताब के सभी उपाय बेहद सरल और उपयोगी हैं। कोई भी व्यक्ति जिसे ज्योतिष का ज़रा भी ज्ञान नहीं है इन उपायों का आसानी से पालन कर सकता है और मंगल के दुष्प्रभाव से बच सकता है। लाल किताब में मंगल को शांत करने के निम्न उपाय हैं:

  • घर आई बहन को कुछ मीठा खिलाकर विदा करें।
  • बड़ वृक्ष (बरगद) की जड़ में मीठा दूध-पानी डालकर उसकी गीली मिट्टी को नाभि पर लगाएं।
  • धार्मिक स्थल पर गुड़, चना व दाल चढ़ाएं।
  • दूसरों को मीठा खिलाएं और खुद भी मीठा खाएं।
  • घर में ठोस चांदी रखें।
  • पिता व गुरुओं का सम्मान करें।
  • भाई-बहनों से अच्छे संबंध बनाए रखें।
  • क्रोध व वाचालता से दूर रहें।
  • मंगल बद की स्थिति में हनुमान जी की पूजा करें।
  • मंगल की स्थिति अशुभ होने पर आंखों में सफेद सूरमा लगाएं।
  • तीन मुखी रुद्राक्ष (Three Faced Rudraksha) और मूंगा रत्न (Red Coral) धारण करें।

मंगल ग्रह का 12 भाव या खानों में फल व उपाय

ज्योतिष विद्या के अनुसार व्यक्ति की कुंडली के 12 भाव या खाने मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक कि घटनाओं का बोध कराते हैं। लाल किताब में मंगल के शुभ व अशुभ दोनों प्रभावों की चर्चा है। इसमें प्रत्येक खाने में मंगल के प्रभाव का वर्णन विस्तार से किया गया है। साथ ही उसके उपाय भी बताए गए हैं। आइए, खाने के अनुसार जानते हैं मंगल को मंज़बूत करने के उपाय…

 मंगल खाना नंबर 1

मंगल यदि खाना नंबर 1 में शुभ हो तो उसे मंगल के सभी सुख प्राप्त होते हैं। उसकी ज़िंदगी में समझो सब मंगल ही मंगल होता है। वह व्यक्ति साहसी, पराक्रमी, बुद्धिमान व अच्छे स्वभाव वाला होता है। उसे मकान, जायदाद और आर्थिक लाभ मिलता है। वह शनि से संबंधित व्यवसाय जैसे कि लोहा, लकड़ी, मशीनरी, इंजीनियरिंग आदि के द्वारा खूब धनार्जन करता है। लेकिन शनि और मंगल की युति जातक को शारीरिक कष्ट देती है। यदि मंगल कन्या राशि में हो तो व्यक्ति पराक्रमी होता है और उसे छोटे भाई-बहन का सुख प्राप्त होता है। यदि मंगल मकर राशि में हो तो जातक बहुत तरक्की करता है और उसे बड़े भाई-बहनों का भी सुख प्राप्त होता है।

पहले खाने में मंगल यदि अशुभ हो तो जातक अधिक क्रोधी, आलसी और सुस्त स्वभाव का होता है। मंगल यदि मेष राशि में हो तो माता के लिए हानिकारक होता है। यदि कर्क राशि में हो तो शिक्षा में रुकावट आती है और पिता के लिए हानिकारक होता है। बड़े भाई बहन के वैवाहिक जीवन में समस्याएं आती हैं। संतान सुख में भी कमी आती है।

उपाय

  • 4 किलोग्राम गुड़ किसी नदी या चलते पानी में बहाएं।
  • पताशे लगातार 43 दिन, 43 हफ्ते या 43 महीने तक प्रत्येक मंगलवार को किसी मंदिर में चढ़ाएं या गरीबों में बांटे।
  • किसी सरकारी या सार्वजनिक स्थल पर सौंफ दबाएं।
  • किसी से मुफ्त का कोई सामान न लें।
  • हाथी दांत की बनी कोई वस्तु घर में न रखें।

 मंगल खाना नंबर 2 

मंगल यदि खाना नंबर 2 में शुभ हो तो जातक के घर मेहमानों का तांता लगा रहता है। यानी समाज में उसका मान सम्मान होता है। उसे विवाह, गृहस्थ व संतान सुख की प्राप्ति होती है। मंगल यदि वृष राशि में हो तो जातक अच्छी सेहत वाला और धनी परिवार में जन्म लेता है। उसके पिता के पास ज़मीन-जायदाद और खुद का वाहन होता है। यदि मंगल कन्या राशि में है तो जातक के पास खुद की ज़मीन-जायदाद होती है। वह धार्मिक प्रवृत्ति का होता है और उसे माता का सुख मिलता है। मकर राशि में होने पर वह बहुत बुद्धिमान होता है और उच्च शिक्षा प्राप्त करता है। साथ ही उसे गृहस्थ और संतान सुख भी मिलता है।

दूसरे खाने में अशुभ होने पर मंगल धन-हानि का कारक होता है। ऐसा व्यक्ति दूसरों के धन पर नजर रखता है और धोखा देने वाला होता है। यदि मंगल कर्क राशि में हो तो बड़े भाई बहन का सुख नहीं मिलता। यदि वृश्चिक राशि में हो तो व्यक्ति की अपनी शादी-शुदा ज़िंदगी अच्छी नहीं रहती। मंगल के मीन राशि में होने पर छोटे भाई बहन और पिता का सुख नहीं मिलता।

उपाय

  • लगातार 43 दिन तक प्रत्येक मंगलवार को बच्चों में बूंदी के लड्डू बांटे।
  • लगातार 43 मंगलवार मंदिर के बाहर बच्चों में पताशे बांटे।
  • घर में हिरण की खाल रखें या हिरण की खाल पर सोएं।
  • सुनिश्चित करें कि आपके ससुराल वाले आम लोगों के लिए पीने की पानी की सुविधा करें।

 मंगल खाना नंबर 3

मंगल खाना नंबर 3 में शुभ हो तो जातक साहसी और पराक्रमी होता है। सेना या पुलिस में भर्ती होता है। उसे छोटे भाई-बहनों, पड़ोसियों और अच्छे मित्रों का साथ मिलता है। वह अपने परिवार, मित्रों और पड़ोसियों का बेहद ख़्याल करने वाला और समाज की सेवा करने वाला होता है। अपने ससुराल के लिए वह बेहद भाग्यवान होता है। यदि मंगल वृष राशि में हो तो अधिक धन अर्जित करता है। कन्या राशि में हो तो जातक उच्च शिक्षा प्राप्त करता है। व्यापार में वृद्धि और लाभ होता है और संतान सुख मिलता है। यदि मंगल मकर राशि में हो तो जातक की सेहत अच्छी रहती है। पिता को भी सुख मिलता है। पिता के पास धन-संपत्ति की कमी नहीं होती।

मंगल यदि तीसरे खाने में अशुभ हो तो वह क्रोधी स्वभाव का और अपना ही नुकसान करने वाला होता है। हालांकि उसे अपने परिवार से प्रेम होता है लेकिन अपने ही सगे-संबंधियों का वह शिकार होता है। उसे अपने भाई बहनों का सुख नहीं मिलता। यदि मंगल मीन राशि में हो तो उसे वाहन और धन संपत्ति की कमी होती है। उसे बड़े भाई-बहनों और माता का सुख नहीं मिलता। यदि मंगल कर्क राशि में हो तो उसकी शादी-शुदा ज़िंदगी में अनेक समस्याएं आती हैं। यहां तक कि तलाक की भी नौबत आ सकती है।

प्रेम और वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने के लिए हमारे प्रेम विशेषज्ञ ज्योतिषी से परामर्श लें और सटीक समाधान पाएं।

उपाय

  • गरीब बच्चों में नित्य मिठाई बांटते रहें।
  • चांदी की अंगूठी (Silver Sriyantra Ring) पहनें।
  • बीमार होने पर जौ को दूध में धोकर नदी या चलते पानी में बहाएं।
  • अहंकार त्यागकर नरम दिल बनें।
  • भाई बहनों के साथ अच्छा व्यवहार करें।

 मंगल खाना नंबर 4 

यदि मंगल खाना नंबर 4 में शुभ हो तो जातक बड़े दिल वाला और दूसरों का हित चाहने वाला होता है। उसके पास वाहन और जायदाद होती है। मंगल के मेष राशि में होने पर जातक को छोटे भाई बहन और कन्या राशि में होने पर बड़े भाई-बहन का सुख प्राप्त होता है। यदि मंगल मकर राशि में हो तो धन संपत्ति और वैवाहिक सुख प्राप्त होता है।

मंगल यदि खाना नंबर 4 में अशुभ हो तो जातक कठोर स्वभाव का होता है। मंगल यदि मेष, सिंह या धनु राशि में हो तो सगाई टूटने की शंभावना होती है। मंगल के कर्क राशि में होने पर व्यक्ति की सेहत अच्छी नहीं रहती और पिता को धन-संपत्ति और वाहन का नुकसान उठाना पड़ता है। मंगल यदि वृश्चिक राशि में हो तो छोटे भाई-बहनों के वैवाहिक जीवन में अनेक समस्याएं आती हैं। जातक के जीवन साथी को छोटे भाई-बहनों का सुख नहीं मिलता। यदि मंगल मीन राशि में हो तो संतान सुख में कमी और शिक्षा प्राप्त करने में रुकावट आती है।

उपाय

  • 4 किलोग्राम गुड़ की रेवड़ियां किसी नदी या बहते पानी में डालें।
  • बंदरों की सेवा करें।
  • दांतों को हमेशा साफ़ रखें। कोई चीज़ खाएं या पीएं तो तो कुल्ली करना और दांतों को अच्छी तरह साफ करना न भूलें।
  • बीमारी में बड़ वृक्ष (बरगद) को मीठा दूध चढ़ाएं और गीली मिट्टी से तिलक करें।
  • मिट्टी के बर्तन में शहद डालकर शमशान में दबाएं।
  • चांदी की अंगूठी (Silver Sriyantra Ring) पहनें।

 मंगल खाना नंबर 5

मंगल यदि खाना नंबर 5 में शुभ हो तो जातक शांत स्वभाव का होता है। उसकी संतान सुखी रहती है। उसके पूर्वजों में से कोई डॉक्टर या दवाइयों का काम करने वाला होता है। यदि मंगल वृष राशि में हो तो व्यक्ति को धन-संपत्ति प्राप्त होती है। यदि मंगल कन्या राशि में हो तो जातक की पत्नी सुशील और सुंदर होती है। उसकी शादी-शुदा ज़िंदगी बहुत अच्छी होती है। यदि मंगल मकर राशि में हो तो छोट भाई-बहन का सुख मिलता है।

मंगल यदि पांचवें खाने में अशुभ हो तो व्यक्ति नासमझ, क्रोधी, कपटी और धन का नाश करने वाला होता है। मंगल यदि कर्क राशि में हो तो छोटे भाई-बहन का वैवाहिक जीवन सुखमय नहीं होता और जातक को मौसी और मामा का सुख प्राप्त नहीं होता। मंगल के वृश्चिक राशि में होने पर व्यक्ति पितृ सुख से वंचित रहता है। मीन राशि में होने पर व्यक्ति अस्वस्थ रहता है और पिता को धन-संपति व वाहन का नुकसान उठाना पड़ता है।

उपाय

  • छोटे-छोटे स्कूल जाने वाले बच्चों को मिठाई बांटे।
  • रात को सोते समय अपने सिरहाने एक पात्र में पानी रखें और अगले दिन सुबह वह पानी किसी गमले में डाल दें।
  • अपने पूर्वजों का सम्मान करें।
  • अपना व्यवहार अच्छा बनाए रखें।

 मंगल खाना नंबर 6

मंगल यदि खाना नंबर 6 में शुभ हो तो जातक बहुत भाग्यशाली होता है। वह निडर और अपने दुश्मनों पर विजय प्राप्त करने वाला होता है। समाज में उसका मान-सम्मान होता है। उसका वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। उसे संतान सुख की प्राप्ति होती है। उसकी तरक्की का प्रभाव उसके परिवार पर भी पड़ता है। जैसे-जैसे वह तरक्की करता है उसके छोटे-भाई बहन भी तरक्की करते जाते हैं।

खाना नंबर 6 में यदि मंगल अशुभ हो तो व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान नहीं मिलता। वह संतान सुख से वंचित और हमेशा अस्वस्थ रहता है। उसके छोटे भाई-बहन भी तरक्की नहीं करते। उसे परिवार का सुख नहीं मिलता।

उपाय

  • मंगलवार को कन्याओं में अखरोट बांटे।
  • अपनी सुरक्षा व समृद्धि के लिए जातक के भाई जातक को खुश रखने का प्रयास करें। इसके लिए वे जातक को कोई चीज़ भेंट कर सकते हैं लेकिन यदि जातक वह वस्तु लेने से इनकार कर दे तो उसे अपने पास न रखें। उसे किसी नदी या बहते पानी में फेंक दें।
  • छोटी कन्याओं को दूध व मिश्री दें।
  • पारिवारिक सुख के लिए शनि को खुश रखें। इसके लिए घर में शनि यंत्र (Shani Yanta) स्थापित करें और शनि शांति पूजा (Shani Shanti Puja) करवाएं।
  • बहन के पति की सेवा करें।

 मंगल खाना नंबर 7

मंगल यदि सातवें भाव में शुभ हो तो व्यक्ति साफ़ दिल का और दूसरों का भला चाहने वाला होता है। उसमें सौनिकों की तरह सेवा की भावना होती है। उसकी पत्नी सुंदर व सुशील होती है। यदि मंगल कन्या राशि में हो तो जातक धनवान होता है। उसे बड़े भाई-बहन, मौसी और मामा का सुख मिलता है। उसके छोटे भाई-बहनों की शादी-शुदा ज़िंदगी अच्छी होती है। यदि मंगल मकर राशि में हो तो व्यक्ति को संतान और पिता का सुख मिलता है।

यदि खाना नंबर 7 (सातवें भाव) में मंगल अशुभ हो तो व्यक्ति के मन में बुरे-बुरे ख़्याल आते हैं। उसकी सोच नकारात्मक होती है। उसके वैवाहिक जीवन में अनेक समस्याएं आती हैं। मंगल यदि कर्क राशि में हो तो धन-संपत्ति में घाटा होता है। बड़े भाई का सुख नहीं मिलता। यदि मंगल मीन राशि में हो तो छोटे भाई का सुख नहीं मिलता। जातक को गले या हाथ में कोई रोग हो सकता है। यदि मंगल मकर राशि में है तो जातक का जीवनसाथी किसी और राज्य या देश से होता है।

उपाय

  • धन-समृद्धि के लिए घर में चांदी का यंत्र (Silver Sree Yantra) रखें।  
  • बेटी, बहन, भाभी और विधवाओं को मिठाई देते रहें।
  • एक छोटी सी दीवार बनाकर गिराएं।
  • तांबे के लोटे को बाहर से लाल रंग से रंगकर या लाल कपड़े में लपेटकर उसमें गर्दन तक चावल भरें। अब उसमें लाल गुलाब के फूल डालकर मंगलवार के दिन हनुमान जी को अर्पित करें। खुद भी लाल वस्त्र धारण करें।

 मंगल खाना नंबर 8 

खाना नंबर 8 में मंगल यदि शुभ हो तो जातक बेहद साहसी और हिम्मती होता है। वह शत्रुओं पर विजय पाने वाला होता है। वह मुसीबत आने पर पीछे नहीं हटता। उनका डटकर सामना करता है। अपने प्रियजनों और अपने जीवन साथी का बेहद ख़्याल रखता है। 

यदि मंगल खाना नंबर 8 में अशुभ हो तो गृह क्लेश होता है। ऐसे व्यक्ति की अपने भाई से नहीं बनती। पति-पत्नी में अनबन रहती है। ऐसे जातक की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं रहती। उसे बार-बार धन-हानि उठानी पड़ती है।

उपाय

  • तंदूर में बनी मीठी रोटी कुत्ते को खिलाएं।
  • गले में चांदी की चेन, लॉकेट या पेंडेंट पहनें।
  • गुड़ की रेवड़ियों को बहते पानी में बहाएं।   
  • तांबे के लोटे को बाहर से लाल रंग से रंगकर या उसे लाल कपड़े में लपेटकर उसमें गर्दन तक चावल डालें और उसे ऊपर से लाल गुलाब से ढक दें। मंगलवार के दिन पत्नी के साथ मंदिर जाकर इस कलश को हनुमान जी को अर्पित करें। पति-पत्नी दोनों इस दिन लाल वस्त्र धारण करें।

 मंगल खाना नंबर 9

यदि मंगल खाना नंबर 9 में शुभ हो तो व्यक्ति बुद्धिमान, साहसी और पराक्रमी होता है। बिना किसी की सहायता के खुद ही अपने पैरों पर खड़ा होता है। यदि मंगल कन्या राशि में हो तो जातक का पिता एक अच्छा व्यापारी होता है। उसे भाई-बहन का सुख प्राप्त होता है। यदि मंगल मकर राशि में हो तो वैवाहिक जीवन सुखमय होता है।

मंगल खाना नंबर 9 में अशुभ हो तो जातक की किस्मत अच्छी नहीं होती। मंगल कर्क राशि में हो तो पिता को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। मंगल यदि वृश्चिक राशि में हो तो भी धन की हानि होती है और मामा मौसी का भी सुख नहीं मिलता। यदि मंगल मीन राशि में हो तो पिता को कष्ट होता है। पिता का सुख कम मिलता है। संतान सुख भी कम मिलता है और शिक्षा प्राप्त करने में भी रुकावट आती है।

उपाय

  • मसूर की दाल और 200 ग्राम सौफ मंदिर में दान करें।
  • अपने भाई की पत्नी यानी अपनी भाभी की सेवा करें।
  • पूजा-पाठ करें और अपने धार्मिक रीति-रिवाज़ों का पालन करें। 
  • शिक्षा प्राप्त करने में आ रही रुकावट दूर करने के लिए सरस्वती यंत्र (Saraswati Yantra) धारण या स्थापित करें।

 मंगल खाना नंबर 10

खाना नंबर 10 में मंगल यदि शुभ हो तो जातक बहुत भाग्यशाली होता है। उसके जन्म लेते ही घर में बरकत होने लगती है। वह अपने जीवन में बहुत तरक्की करता है और उच्च पद पर आसीन होता है। वह समाज सेवा के कार्य से जुड़ा हो सकता है। इस खाने में यदि मंगल वृष राशि में हो तो जातक को वाहन और ज़मीन-जायज़ाद प्राप्त होती है। छोटे भाई बहनों का वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। यदि मंगल कन्या राशि में हो तो जातक बुद्धिमान होता है और उच्च शिक्षा प्राप्त करता है। उसे संतान सुख प्राप्त होता है।

यदि खाना नंबर 10 में मंगल अशुभ हो तो जातक अभाग्यशाली होता है। मंगल के कर्क राशि में होने पर वैवाहिक जीवन सुखमय नहीं होता। पति-पत्नी में अनबन रहती है। यहां तक कि तलाक की भी नौबत आ सकती है। पिता के सुख में भी कमी रहती है। यदि मंगल वृश्चिक राशि में हो तो छोटे भाई-बहन का सुख कम होता है। जातक को गले संबंधी रोग जैसे कि सरवाईकल की समस्या हो सकती है। यदि मंगल मीन राशि में हो तो बड़े भाई-बहन का सुख कम होता है। जातक के बड़े भाई या बहन के किसी एक संतान का वैवाहिक जीवन सुखमय नहीं होता।

उपाय

  • मित्रों को गुलकंद वाला मीठा पान खिलाएं।
  • हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं।
  • दृष्टिहीन (Blind), असहाय और नि:संतान व्यक्तियों की मदद करें।
  • घर की संपत्ति व सोना न बेचें।  

 मंगल खाना नंबर 11

यदि मंगल खाना नंबर 11 में शुभ हो तो जातक बुद्धिमान होता है और तरक्की करता है। उसे अच्छे मित्र मिलते हैं। वह शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है। यदि मंगल वृष राशि में हो तो पिता का सुख प्राप्त होता है। लेकिन संतान सुख में कमी रहती है। मंगल यदि कन्या राशि में हो तो जातक सेहतमंद होता है। उसके पिता के पास ज़मीन-जायज़ाद और वाहन होता है। मंगल यदि मकर राशि में हो तो जातक को वित्तीय लाभ होता है। बड़े मामा-मौसी का सुख प्राप्त होता है।

यदि मंगल खाना नंबर 12 में अशुभ हो तो जातक को धन की हानि होती है। वह कर्ज़दार हो जाता है। मंगल यदि कर्क राशि में हो तो छोटे भाई-बहन का सुख कम होता है। यदि मंगल वृश्चिक राशि में हो तो माता का सुख कम होता है। यदि मंगल मीन राशि में हो तो वैवाहिक जीवन में अनेक समस्याएं आती हैं। पत्नी हमेशा बीमार रहती है।

उपाय

  • मिट्टी के बर्तन में शहद रखें।
  • भाई को कुछ मीठा खिलाते रहें।
  • संतान सुख के लिए संतान गोपाल यंत्र (Santan Gopal Yantra) स्थापित या धारण करें।
  • अपनी पत्नी का ध्यान रखें।  
  • तांबे के लोटे को बाहर से लाल रंग से रंगकर या उसे लाल कपड़े में लपेटकर उसमें गर्दन तक चावल डालें और उसे ऊपर से लाल गुलाब से ढक दें। मंगलवार के दिन पत्नी के साथ मंदिर जाकर इस कलश को हनुमान जी को अर्पित करें। पति-पत्नी दोनों इस दिन लाल वस्त्र धारण करें।

 मंगल खाना नंबर 12

खाना नंबर 12 में मंगल यदि शुभ हो तो जातक ख़ुशमिज़ाज और मिलनसार होता है। उसके अनेक मित्र होते हैं। वह बुजुर्गों की सेवा करने वाला होता है। मंगल अगर वृश्चिक राशि में हो तो जातक विदेश में शिक्षा प्राप्त करता है।

खाना नंबर 12 में मंगल यदि अशुभ स्थिति में हो तो जातक अभाग्यशाली होता है। उसके बने बनाए काम भी बिगड़ते रहते हैं। यदि सिंह राशि का मंगल हो तो छोटे भाई-बहन को नुकसान होता है। यदि मंगल मेष या धनु राशि में हो तो दांपत्य जीवन अच्छा नहीं रहता। सगाई या शादी टूट सकती है। 

उपाय

  • घर में जंग लगे औज़ार न रखें।
  • छोटे बच्चों को दूध में सूखे मेवे डालकर पिलाएं।
  • तांबे के लोटे को बाहर से लाल रंग से रंगकर या उसे लाल कपड़े में लपेटकर उसमें गर्दन तक चावल डालें और उसे ऊपर से लाल गुलाब से ढक दें। मंगलवार के दिन पत्नी के साथ मंदिर जाकर इस कलश को हनुमान जी को अर्पित करें। पति-पत्नी दोनों इस दिन लाल वस्त्र धारण करें।
  • हनुमान जी का चांदी के कवच, चमेली के फूल, लंगोट आदि से श्रृंगार करें। उन्हें केसर, मिठाई, आंवले का तेल अर्पित करें।
  • खाली पेट शहद का सेवन करें। 

 लाल किताब के नियम

लाल किताब का ज्योतिषविद्या में विशेष स्थान है। इसके उपायों को यदि ठीक से प्रयोग में लाया जाए तो वे काफ़ी कारगर होते हैं। लेकिन इस किताब के अपने कुछ नियम हैं और इन्हीं नियमों के तहत ये उपाय किए जाते हैं। इसलिए किसी भी उपाय को प्रयोग में लाने से पहले हमारे लाल किताब विशेषज्ञ ज्योतिषी से सलाह ज़रूर लें।


Previous
शुक्र का कर्क राशि में गोचर, जानें 12 राशियों पर क्या होगा प्रभाव

Next
गौरी शंकर रुद्राक्ष द्वारा सुखमय बनायें अपना वैवाहिक जीवन