कुंडली मिलान के लिए क्यों काफी नहीं है गुणों का मिलान | Future Point

कुंडली मिलान के लिए क्यों काफी नहीं है गुणों का मिलान

By: Future Point | 28-Mar-2019
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कुंडली मिलान के लिए क्यों काफी नहीं है गुणों का मिलान

शादी के बाद का जीवन कैसा होगा ये कोई नहीं बता सकता है! भले ही लड़का-लड़की को लगे कि वे एक-दूसरे के लिए बने हैं। उनकी आपस में बहुत बनती है लेकिन विवाह के बाद उनका जीवन कैसा होगा वे खुद भी नहीं जानते! इसलिए शादी से पहले कुंडली मिलान करवाना बेहद ज़रूरी है। भारतीय संस्कृति में इसे एक अहम ज़िम्मेदारी के तौर पर देखा जाता है। इससे पता किया जा सकता है कि शादी के बाद उनका वैवाहिक जीवन कितना सुखमय होगा! कुंडली में कोई दोष होने पर समय रहते उसका उचित समाधान किया जा सकता है। वर-वधू को किसी बड़े संकट से बचाया जा सकता है। लेकिन अधिकतर लोग कुंडली मिलान का मतलब गुण मिलान समझते हैं। आमतौर पर माना जाता है कि 36 गुणों में से वर-वधू के यदि 18 गुण भी मिलते हों तो उनकी शादी सफल रहेगी। लेकिन ज्योतिषविद्या के अनुसार शादी के लिए सिर्फ़ गुणों का मिलना काफ़ी नहीं है। यदि किसी जोड़े के 36 गुण भी आपस में मिलते हों तो भी उनकी शादी टूट सकती है! कुंडली मिलान इतनी सरल चीज़ नहीं है जितना कि समझा जाता है! आइए जानते हैं कि वास्तव में कुंडली मिलान है क्या? गुण मिलान और कुंडली मिलान में क्या अंतर है? सही तरीके से कुंडली मिलान कैसे करवाया जाता है?

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क्या है कुंडली मिलान?

हमारे ऋषि-मुनियों ने प्राचीन ग्रंथों में शादी के लिए कुंडली मिलान को अहम शर्त बताया है। कुंडली मिलान वह ज्योतिषीय पद्धति है जिससे पता लगाया जा सकता है कि शादी के बाद वर-वधू का जीवन कैसा होगा? इससे दो लोगों के स्वभाव, उनके बीच संतुलन व सामंजस्य की गणना की जाती है। इसके अंतर्गत दो लोगों के गुण मिलाए जाते हैं। उनकी पसंद-नापसंद की जांच की जाती है। लेकिन यह सिर्फ़ गुणों का मिलान भर नहीं है। इससे दो लोगों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक हर पक्ष के बारे में पता किया जा सकता है। यह शादी के बाद आने वाली दिक्कतों के प्रति सचेत करता है। इसमें गुणों के मिलान के अलावा राशि, ग्रह, नक्षत्रों की स्थिति आदि कई पक्षों की जांच की जाती है। हालांकि इसका चलन अब कम हो गया है लेकिन आज भी कई लोग शादी से पहले कुंडली मिलान को ज़रूरी मानते हैं।

कुंडली मिलान और गुण मिलान में क्या फ़र्क है?

गुण मिलान, कुंडली मिलान का एक छोटा सा भाग है। यह संपूर्ण कुंडली मिलान नहीं है। सिर्फ़ गुणों के मिलान से ही यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई शादी सफल रहेगी या नहीं रहेगी? अक्सर जब भी मां बाप अपने बच्चों की कुंडली मिलवाने किसी पंडित या ज्योतिषी के पास जाते हैं तो कुंडली मिलान के नाम पर सिर्फ़ गुण मिलाए जाते हैं। 36 में से यदि 18 गुण भी मिल जाएं तो उसे शादी के लिए काफी माना जाता है। लेकिन अक्सर देखा गया है कि 36 के 36 गुण मिलने के बाद भी शादियां टूट जाती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि गुण मिलान करते समय सिर्फ राशि और गुणों का ध्यान रखा जाता है। उदाहरण के लिए सिंह राशि और वृश्चिक राशि एक दूसरे के लिए योग्य नहीं हैं क्योंकि सिंह राशि का संबंध अग्नि और वृश्चि

वहीं कुंडली मिलान में वैवाहिक जीवन की ज़्यादा विस्तृत तौर पर जांच की जाती है। इसमें गुणों के मिलान के साथ-साथ दोनों राशि में ग्रहों की दशा व दिशा, दांपत्य सुख, मंगल दोष, संतान सुख आदि की जांच की जाती है। इन सभी पक्षों को ध्यान में रखकर यह बताया जा सकता है कि यह शादी होनी चाहिए या नहीं!

गुण मिलान का वास्तविक अर्थ क्या है?

कुंडली मिलान में सबसे पहला कार्य गुणों का मिलान होता है जिसमें किसी भी व्यक्ति की कुंडली में आठ तरह के गुणों और अष्टकूट का मिलान किया जाता है। इनमें से कुछ गुणों का मिलना बेहद ज़रूरी होता है। ये गुण हैं: वर्ण, वश्य, तारा, योनि, गृह-मैत्री, गण-विचार, भकूट और नाड़ी। इनके आधार पर कुल 36 गुणों का मिलान किया जाता है। 36 में से यदि 18 गुण मिल जाएं तो माना जाता है कि शादी हो सकती है। ये 18 गुण स्वास्थ्य, स्वभाव, मानसिक स्थिति, दोष, संतान आदि से संबंधित हो सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार समझिए शादी के लिए कितने गुण मिलने चाहिए?

  • 18 से कम गुणों का मिलना: यदि लड़का और लड़की के 18 से कम गुण मिलें तो माना जाता है कि शादी सफल नहीं होगी।
  • 18 गुण मिलना: ज्योतिष शास्त्र में शादी के लिए कम से कम 18 गुणों का मिलना अनिवार्य बताया गया है। लेकिन सफल शादी के लिए यह हमेशा काफी नहीं रहता।
  • 18 से 24 गुण मिलना: कुंडली मिलान करने पर 18 से 24 गुण मिलें तो शादी हो तो सकती है लेकिन विवाह होने के बाद अनेक समस्याएं भी आती हैं।
  • 24 से 32 गुण मिलना: कुंडली मिलान करने पर यदि 24 से 32 गुण मिलें तो इसे एक अच्छा संकेत माना जाता है। माना जाता है कि शादी सफल रहेगी।
  • 32 से 36 गुण मिलना: वर-वधू के 32 से 36 गुण मिलना शुभ संकेत है। माना जाता है कि ऐसी शादियां बेहद सफल रहती हैं और उनमें कम समस्याएं आती हैं।

लेकिन सिर्फ गुणों का मिलना किसी शादी के सफल होने की गारंटी नहीं दे सकता। कई दफ़ा बहुत अधिक गुण मिलने पर भी शादियां टूट जाती हैं तो कई दफा बहुत कम गुण मिलने पर भी शादियां बेहद सफल रहती हैं। गुणों के मिलान भर से किसी शादी की सफलता का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए कुंडली मिलान करवाना बेहद ज़रूरी है।

विवाह पूर्व क्यों ज़रूरी है कुंडली मिलान?

हमारे ऋषि-मुनियों ने विवाह को सुखमय बनाने के लिए प्राचीन ग्रंथों में कुछ नियमों का पालन करने की सलाह दी है। इनमें विवाह और उससे जुड़े सभी महत्वपूर्ण अनुष्ठानों और नियमों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इनमें विवाह पूर्व कुंडली मिलान को एक अहम ज़िम्मेदारी माना गया है। हालांकि कई लोग ज्योतिष में विश्वास नहीं करते। लेकिन यदि ज्योतिष शास्त्र के नियमों का ठीक तरह से पालन किया जाए। किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से सलाह ली जाए तो आप अपने भविष्य के बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं। कुंडली मिलान ज्योतिष की ऐसी ही एक गणना है जिससे शादी के बाद के जीवन के बारे में जाना जा सकता है। कुंडली मिलान से दो व्यक्ति या दो राशियों के ग्रह, नक्षत्र की अनुकूलता का पता किया जाता है। यदि दो व्यक्ति के ग्रह-नक्षत्र एक दूसरे के अनुकूल हैं तो इसका अर्थ है कि उनका वैवाहिक जीवन सुखमय होगा। यदि उनके ग्रह-नक्षत्र एक दूसरे के अनुकूल नहीं हैं तो इसका अर्थ है कि उनके वैवाहिक जीवन में अनेक समस्याएं आएंगी। इसके लिए दो तरह के मेलापक पर ज़ोर दिया जाता है। एक, नक्षत्र मेलापक जिसमें वर-कन्या की जन्मपत्री और राशि में नक्षत्र के आधार पर अष्टकूट मिलान किया जाता है। दूसरा, ग्रह मेलापक जिसमें मंगल, सूर्य, शनि, राहु, केतु आदि ग्रहों की जन्म कुंडली में स्थिति देखी जाती है। साथ ही जन्मपत्री में मांगलिक दोष की भी जांच की जाती है। विवाह में जन्मपत्री के कुछ भावों का विशेष महत्व होता है। जैसे कि इसका सप्तम भाव बताता है कि आपका जीवन साथी कैसा होगा?

सप्तम भाव से जानें कैसा होगा आपका जीवन साथी?

जन्मपत्री का सातवां भाव आपके निजी जीवन से संबंधित है। यह आपके प्रेम और वैवाहिक जीवन के बारे में बताता है। किसी अनुभवी ज्योतिषी को अपनी जन्मपत्री (कुंडली) दिखाकर आप जान सकते हैं कि आपका जीवन साथी कैसा होगा? पुरुष और स्त्री की कुंडली में इसकी गणना अलग-अलग तरह से की जाती है। यदि आप भी अपने जीवन साथी के बारे में जानना चाहते हैं तो हमारे अनुभवी ज्योतिषाचार्यों से परामर्श लें। इसके लिए आप हमारी सेवा Talk to Astrologer का लाभ उठा सकते हैं।

जन्म कुंडली में इन षडाष्टक योग का करें त्याग

जन्म कुंडली में जब दो ग्रह 150 डिग्री या दो राशि 6/8 के अंतर पर होते हैं तो उसे षडाष्टक योग कहते हैं। यह एक तरह का भकूट दोष होता है। कुछ षडाष्टक योग बेहद कष्टदायी होते हैं, जबकि यदि षडाष्टक योग मित्र राशियों या मित्र ग्रहों के बीच बन रहे हों तो उसका बुरा प्रभाव कुछ कम हो जाता है। वर वधु की राशि यदि मेष/वृश्चिक, वृष/तुला, मिथुन/मकर, कर्क/धनु, सिंह/मीन या कन्या-कुंभ हो तो वे मित्र षडाष्टक होते हैं। यानी इन राशियों के ग्रह आपस में मित्र होते हैं। जबकि मेष/कन्या, वृष/धनु, मिथुन/वृश्चिक, कर्क/कुंभ, सिंह/मकर और तुला/मीन शत्रु षडाष्टक हैं। यानी इन राशियों के ग्रह आपस में शत्रु होते हैं इसलिए इनका पूर्णत: त्याग करना चाहिए।

कुंडली मिलान और मांगलिक दोष

कुंडली मिलान करवाते समय मंगल दोष (Manglik Dosha) की जांच करवाना बेहद ज़रूरी है। जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल ग्रह लग्न भाव से पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में कहीं पर भी स्थित हो तो वह व्यक्ति मांगलिक कहलाता है। यदि जातक की कुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में मंगल के साथ सूर्य और शनि, राहू, केतु जैसे पाप ग्रह हों तो पुरुष जातक गोलिया मंगल और स्त्री जातक चुनड़ी मंगल कहलाती है।

मांगलिक व्यक्ति अपने जीवन साथी के साथ पूरी तरह सहयोग नहीं करता जिसके कारण विवाह के टूटने का खतरा रहता है। दरअसल अपने जीवन साथी को लेकर मांगलिक व्यक्ति की जो अपेक्षाएं होती हैं उन्हें गैर-मांगलिक व्यक्ति पूरी नहीं कर पाता। इसलिए मांगलिक और गैर- मांगलिक का विवाह शुभ नहीं माना जाता। लेकिन मांगलिक और मांगलिक मिलकर मंगल के अशुभ प्रभाव को नष्ट कर देते हैं। इसलिए एक मांगलिक व्यक्ति की शादी मांगलिक से करवाना उचित माना जाता है।

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कैसे करवाएं कुंडली मिलान?

ज्योतिषविद्या के अंतर्गत जन्म से संबंधी डिटेल, जैसे कि जन्म तिथि, समय व स्थान के आधार पर जातक की कुंडली निकाली जाती है। आप किसी ज्योतिषी को वर-वधू की जन्म तिथि, समय और स्थान की जानकारी देकर कुंडली मिलान करवा सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे शादी जिंदगी भर का बंधन है। यह वर-वधू की पूरी ज़िंदगी का सवाल है। इसलिए ऐसे किसी भी ज्योतिषी से कुंडली मिलान न करवाएं। कुछ ज्योतिषी सिर्फ़ गुणों का मिलान कर कुंडली मिलान के नाम पर आपसे धोखा करते हैं। जबकि शादी के लिए सिर्फ गुणों का मिलना काफ़ी नहीं है।

कुंडली मिलान वर-वधू की जन्मपत्री का विस्तृत अध्ययन है इसलिए किसी योग्य और अनुभवी ज्योतिषी से ही कुंडली मिलान करवाएं। आप फ्यूचर पॉइंट के अनुभवी ज्योतिषाचार्यों से कुंडली मिलान (Kundali Milan) करवा सकते हैं। कुंडली में षडाष्टक योग, मांगलिक दोष, विवाह में देरी, प्रेम व वैवाहिक जीवन से जुड़ी अन्य समस्या के लिए आप हमारे ज्योतिषाचार्यों से परामर्श ले सकते हैं|


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