Karwa Chauth 2023: करवा चौथ 2023 पर तारा डूबने या शुक्र अस्त का कोई असर नहीं - निसंकोच रखें व्रत और करें उद्यापन | Future Point

Karwa Chauth 2023: करवा चौथ 2023 पर तारा डूबने या शुक्र अस्त का कोई असर नहीं - निसंकोच रखें व्रत और करें उद्यापन

By: Future Point | 10-Oct-2022
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Karwa Chauth 2023: करवा चौथ 2023 पर तारा डूबने या शुक्र अस्त का कोई असर नहीं - निसंकोच रखें व्रत और करें उद्यापन

Karwa Chauth 2022: इस साल 2023 में करवा चौथ 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस बार करवा चौथ को लेकर ज्योतिषविदों व पंडितों के बीच एक अजीब सी खींचातानी चल रही है। साल 2023 में करवा चौथ पर शुक्र ग्रह अस्त हैं।

करवा चौथ का व्रत सुहागनों द्वारा रखा जाने वाला एक अत्यंत प्रचलित व्रत है। करवा चौथ का त्यौहार शादीशुदा जोड़ों के मांगल्य सुख से जुड़ा त्यौहार है। इस दिन सुहागनें अपने पति की लम्बी आयु के लिए कामना करती हैं और व्रत रखती हैं।

करवा चौथ पर पूरे दिन निर्जला व्रत रख, सुहागनें चंद्रोदय उपरान्त व्रत खोलती हैं और अन्न जल ग्रहण करती हैं। शुक्र ग्रह को वैवाहिक जीवन के लिए एक अत्यंत शुभ ग्रह माना गया है।

अब जब वैवाहिक सुख को सुनिश्चित करने वाले ग्रह शुक्र ही अस्त हैं तो इसका करवा चौथ के व्रत व इसकी महत्वता पर क्या असर होगा ? क्या इस बार व्रत अन्य वर्षों से भिन्न होगा ? क्या आपको करवा चौथ 2023 में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना होगा। 

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आइयें जानते हैं शुक्र अस्त की स्थिति में साल 2023 के करवाचौथ व इसके उद्यापन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों के के बारे में-

करवा चौथ पर बन रहे शुभ संयोग

शुक्र ग्रह के अस्त होने को यदि हम एक पल के लिए थोड़ा पीछे रख दें तो साल 2023 की करवा चौथ पर अत्यंत शुभ संयोग बन रहे हैं। करवा चौथ पर चन्द्रमा रोहिणी तथा कृतिका नक्षत्र व वृषभ राशि में गोचर करेगा।

वृषभ चन्द्रमा की उच्च राशि है जहां ये अत्यंत प्रबल व शुभ फलप्रदायी होते हैं। रोहिणी नक्षत्र चन्द्रमा का पसंदीदा नक्षत्र है और ज्योतिष में 27 नक्षत्रों को चन्द्रमा की पत्नियां कहा गया है। इन सभी 27 पत्नियों में चन्द्रमा सबसे अधिक समय रोहिणी नक्षत्र में ही रहते हैं जिसके कारण रोहिणी को उनकी सर्वप्रिय पत्नी कहा गया। 

अब ऐसे पावन दिन पर जब वैवाहिक युगल एक दूसरे के प्रति प्रेम से ओत-प्रोत होंगें, चन्द्रमा का अपनी सर्वप्रिय पत्नी के पास होना संबंधों में मधुरता को सुनिश्चित करता है। इसके अतिरिक्त इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। 

चंद्रोदय का समय 

करवा चौथ 2023 में चांद निकलने का समय रात्रि 9 बजकर 30 मिनट पर है। करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त 1 नवंबर को शाम 5 बजकर 45 मिनट से 07 बजकर 32 मिनट तक है। करवा चौथ पर सूर्योदय से पहले सरगी खाने का रिवाज़ है। उसके पश्चात केवल चन्द्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है।

करवा चौथ पर शुक्र अस्त या तारा डूबना 

हिन्दू पंचांग के अनुसार इस वर्ष करवा चौथ पर तारा डूबा रहेगा यानि शुक्र ग्रह सूर्य से निकटता के कारण अस्त रहेंगें। अब ऐसी स्थिति में करवा चौथ के व्रत पर क्या असर होगा ? इस आकाशीय स्थिति ने जनसाधारण को असमंजस में डाल दिया है।

कई ज्योतिषविद इसके समर्थन में हैं तो कई इसे करवा चौथ के दृष्टिकोण से उतना महत्व नहीं दे रहे हैं। आपको बता दे कि जब गुरु या शुक्र अस्त होते हैं तो शादी ब्याह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किये जाते हैं। पर करवा चौथ एक व्रत है और इसके निभाने में तारा डूबने से कोई व्यवधान नहीं होना चाहिए।

इतने विशिष्ट संयोगों के होते हुए भी कई विद्वान बिना विचारे अटकलें लगा रहे हैं। शुक्र अस्त होने पर ज्योतिषीय दृष्टि से मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं न कि सभी त्योहार।

करवा चौथ तो जीवन साथी के स्वास्थ्य, लम्बी आयु व आपसी वैवाहिक युगल के मध्य प्रेम को बढ़ाने वाला त्यौहार है जिसमें तारा डूबने के कारण इस पर कोई रोक लगाना बिलकुल भी तर्कसम्मत नहीं है।

विवाह के शुभ मुहूर्त के लिए गोचर में गुरु तथा शुक्र की स्थिति ठीक होनी चाहिए जो इस बार 1 अक्तूबर से 28 नवंबर 2022 तक ठीक नहीं है। इसीलिए इस समयावधि में विवाह का शुभ मुहूर्त नहीं हैं। पर अन्य बड़े त्यौहार जैसे नवरात्रि,दशहरा,भाई दूज, और यहां तक कि दिवाली भी तारा डूबने के समय मनाई जा रही है तो करवा चौथ के व्रत या उसके उद्यापन में क्या रोक-टोक? प्रत्येक ज्योतिषीय तथ्य के बारे में गहन सोच की आवश्यकता है। 

करवाचौथ के व्रत व उद्यापन करें बिना किसी संशय के 

सभी विवाहिता स्त्रियां निसंदेह करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं और इसका उद्यापन भी बिना किसी संदेह के किया जा सकता है। करवा चौथ का व्रत यूँ तो पूरी उम्र रखा जाता है पर यदि किसी स्त्री का स्वास्थ्य या अन्य किसी कारण से वह व्रत न रख पाए तो उस वर्ष उद्यापन किया जा सकता है।

ऐसी स्थिति में हिंदू धर्म में व्रत के उद्यापन का प्रावधान है। अगर कोई विवाहिता स्त्री एक बार उद्यापन कर ले तो उसके बाद के वर्षों में वह व्रत के दौरान एक बार पानी अथवा चाय ले सकती है अथवा व्रत नहीं भी रख सकती है। कोरोना काल ने सभी के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव डाला है तो ऐसी स्थिति में पंडित जी से विधि-विधान जानकर करवा चौथ के व्रत का यथा-विधि सुगमता से उद्यापन किया जा सकता है।

इसके पश्चात् आने वाले वर्षों में व्रत रखना ज़रूरी नहीं रह जाता। ऐसे में आप 13 अक्तूबर,गुरुवार को बिना किसी संदेह के करवा चौथ मनाएं व उद्यापन करें किसी प्रकार का कोई दोष नहीं लगेगा।

साल 2022 में कब मनाएं करवा चौथ ? 13 अक्तूबर या 14 अक्तूबर !

हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष करवा चौथ का व्रत कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाया जाता है। वर्ष 2022 में कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि 13 अक्तूबर को रात्रि 01 बजकर 59 मिनट से शुरू होगी और 14 अक्तूबर को रात 03 बजकर 08 मिनट तक समाप्त हो जाएगी। हिंदू मान्यताओं क अनुसार कोई भी व्रत-त्योहार उदया तिथि के आधार पर ही मनाये जाते हैं। इस कारण से इस साल करवा चौथ का व्रत 13 अक्तूबर 2022 को ही रखा जायेगा।

करवा चौथ चतुर्थी तिथि 2022

चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - 13 अक्तूबर 2022 , रात्रि 01 बजकर 59 मिनट पर 

चतुर्थी तिथि समाप्त - 14 अक्तूबर 2022 को प्रातः 03 बजकर 08 मिनट पर

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करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त 2022

हिंदू पंचांग के अनुसार 13 अक्तूबर 2022 को करवा चौथ पर पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त शाम 04 बजकर 08 मिनट से लेकर 05 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। यह अमृतकाल मुहूर्त है।

इसके अलावा करवा चौथ की पूजा दिन के अभिजीत मुहूर्त काल में करना भी अत्यंत शुभ है। मुहूर्त शास्त्र के अनुसार कोई भी शुभ कार्य या पूजा बिना सोचे या बिना किसी संदेह के उस दिन के अभिजीत मुहू्र्त में की जा सकती है।

अमृतकाल मुहूर्त- सांय 04 बजकर 08 मिनट से शाम 05 बजकर 50 मिनट तक

अभिजीत मुहूर्त- प्रातः 11 बजकर 21 मिनट से दोपहर 12 बजकर 07 मिनट तक

शुक्र ग्रह के अस्त होने का किसी भी प्रकार का प्रभाव करवा चौथ या उसके उद्यापन पर नहीं पड़ेगा। इसका कारण इस दिन बने अन्य अत्यंत शुभ संयोगों का बनना है।

तो सभी सुहागिन महिलाएं अत्यंत हर्ष उल्लास से इस बेहद ही खास त्यौहार को मन सकती हैं। यह व्रत, शादीशुदा जीवन में सुख और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति करवाने वाला त्यौहार है अतः इसे बिना किसी विघ्न-बाधा के मनाएं।


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