Sorry, your browser does not support JavaScript!
ज्योतिष और कैंसर रोग

ज्योतिष और कैंसर रोग

By: Rekha Kalpdev | 03-May-2018
Views : 4160

आधुनिक काल में एक रोग जिसका प्रतिशत दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा, वह कैंसर हैं। यह आज भी लगभग असाध्य रोगों की श्रेणी में आता है। इसके विषय में कहा जाता है कि यह एक घातक ट्यूमर है जो एक बार जब बढ़ना शुरु होता है तो अनिश्चित काल तक बढ़ता ही जाता है। शरीर के रक्त और अन्य अंगों के विकास पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। ज्योतिष में इसका कारण राहु ग्रह को माना जाता है। यदि राहु कर्क राशि में पाप कर्तरी योग में स्थित हो। कैंसर को आज भी एक सबसे भयानक रोगों में शामिल किया जाता है। कैंसर रोग इतना भयावह है कि इससे हर कोई परिचित है। आधुनिक चिकित्सिय पद्वतियां होने के बावजूद आज भी कैंसर के ९०% मामलों में रोगी का जीवन बचाना संभव नहीं हो पाता है, जिसके कारण रोगी की मृत्यु हो जाई हैं। ऐसा नहीं है कि कैंसर रोग लाईलाज हैं। परन्तु यदि इसकी पहचान प्रारम्भिक अवस्था में ही हो जाए, तो समय रहते इसका ईलाज किया जा सकता हैं। किसी भी रोग के समय से पूर्व होने की जानकारी देने में ज्योतिष शास्त्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता हैं।

ज्योतिष शास्त्र में यह माना जाता है कि व्यक्ति की जन्म कुंडली एक सोनोग्राफी की तरह शरीर के बाहर और अंदर दोनों की सूक्ष्म जानकारी देने में समर्थ है। वैदिक शास्त्र कहते है कि शारीरिक, मानसिक और अन्य सभी रोगों की रोकथाम के लिए ग्रहों के मंत्र, यंत्र और जड़ी-बूड़ी सेवन और हवन कराना लाभप्रद सिद्ध हो सकता हैं। यहां ध्यान रखने योग्य बात यह है उपाय समय रहते करने चाहिए। रोग के गंभीर होने पर उपाय अपना पूरा फल नहीं दे पाते हैं। कैंसर को शरीर के कोशिकाओं के असामान्य या घातक वृद्धि के रूप में वर्णित किया जा सकता है। मानव शरीर के लगभग सभी अंगों में कैंसर हो सकता है कुछ सामान्य प्रकार के कैंसर हैं- कैंसर, महिलाओं में स्तन कैंसर, सरवाइकल कैंसर, ल्यूकेमिया, फेफड़े के कैंसर, और महिलाओं में गर्भाश्य का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर।


cancer tharepy

किसी भी शरीर में कैंसर के होने का कारण कोशिकाओं की अनियंत्रित वॄद्धि की भूमिका महत्वपूर्ण रहती हैं। हमारे शरीर की कोशिकाओं में श्वेत और लाल रक्त कणिकाएं होती हैं। शरीर में श्वेत रक्त कणिकाओं का सूचक चंद्र और लाल रक्त कणों का सूचक मंगल हैं। इस रोग का स्वामी ग्रह ज्योतिष में कर्क राशि को कहा गया है। इस राशि का चिन्ह केकड़ा हैं जिसकी प्रकृति पकड़ बहुत मजबूत होती हैं। कैंसर रोग की कोशिकाएं इतनी घातक होती हैं कि शरीर के जिस अंग में बढ़ोतरी करनी शुरु कर देती हैं, उस अंग से उस कोशिका को अलग ही करने पर इस रोग की रोकथाम की जा सकती हैं। सहज शब्दों में कहा जा सकता है कि कैंसर रोग को कुंडली से समझने में कर्क राशि, चंद्र और मंगल इन सभी की भूमिका अहम होती हैं। ज्योतिष शास्त्र यह बताने में भी सक्षम है कि शरीर के किस अंग में कैंसर रोग होने की संभावनाएं बनती हैं। आयु के किस भाग में कैंसर होगा और जीवन बचेगा या नहीं। इसकी भी जानकारी कुंडली से ली जा सकती हैं।

  • कर्क राशि, चंद्र और मंगल पर शनि, राहु व मंगल इनमें से किसी ग्रह का अशुभ प्रभाव होने पर कैंसर रोग होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। रोग के काल का निर्धारण करने के लिए रोगी की दशा का भी आकंलन किया जाता है। कई बार जन्मकुंडली में रोग होने की संभावनाएं रहती हैं परन्तु शुभ ग्रहों की दशा और अनुकूल ग्रहों की दशा होने पर रोग के प्रभावी होने की संभावनाएं रहती हैं।
  • यह सही है कि ज्योतिष के अनुसार उपरोक्त ग्रह और राशि इस रोग के कारण बनते हैं परन्तु राहु को भी कैंसर का कारक माना गया है। इसके साथ ही शनि और मंगल भी पीडि़त होने पर यह रोग दे सकते है।
  • ज्योतिष में राहु को कैंसर का कारक माना गया है लेकिन शनि व मंगल भी यह रोग देते हैं।

Consultancy

कैंसर रोग के ज्योतिषीय कारण

ज्योतिष शास्त्र में राहु को जहर का कारक ग्रह माना गया हैं। यदि जन्मकुंडली में राहु लग्न, लग्नेश से संबंध हो जाएं या राहु कर्क राशि में पीडि़त होकर शरीर में विष की बढ़ोतरी रहती हैं।

  • त्रिक भावों के स्वामी जिसमें 6वें, 8वें और 12वें भाव का स्वामी जब राहु से पीडि़त हों तो यह रोग होने के योग अधिक बनते हैं।
  • यदि बारहवें भाव में शनि और मंगल एक साथ हों या शनि व राहु की युति अथवा शनि के साथ केतु का योग बन रहा हों तो व्यक्ति को कैंसर रोग कष्ट दे सकता हैं।
  • जन्मकुंडली में राहु की स्थिति त्रिक भाव या त्रिक भावेशों के साथ हों, या दृष्टि हों तो यह रोग हो सकता हैं।
  • छ्ठा भाव और छ्ठ वें भाव का स्वामी पीडित हों या पापी ग्रहों के नक्षत्रों में हों तो कैंसर रोग स्वास्थ्य में कमी का कारण बनता हैं।
  • कुंडली में बुध पीडित होने पर त्वचा कैंसर देता हैं। इसीलिए बुध क्रूर ग्रहों के साथ हो, युत व दृष्ट हो तो व्यक्ति को कैंसर रोग परेशानी दे सकता हैं।
  • लग्न को ज्योतिष में शरीर और छ्ठे भाव के स्वामी को रोग का स्वामी कहा जाता हैं। इन दोनों का संबंध होने पर रोग अवश्य होता है।
  • लग्न और रोग भाव में जितने अधिक अशुभ ग्रह हों जैसे राहु व शनि हों तो जातक असाध्य रोग होने की संभावनाएं अधिक रहती हैं।
  • 12 लग्नों में से कैंसर रोग होने की संभावना सबसे अधिक कर्क लग्न और कर्क राशि के व्यक्तियों को ही रहती हैं।
  • जिन व्यक्तियों की कुंडली कर्क लग्न हों, उन व्यक्तियों को गुरु ग्रह कैंसर रोग देने वाला ग्रह होता हैं।

Subscribe Now

SIGN UP TO NEWSLETTER
for free daily, weekly & monthly horoscope

Download our Free Apps

astrology_app astrology_app

100% Secure Payment

100% Secure

100% Secure Payment (https)

High Quality Product

High Quality

100% Genuine Products & Services

Help / Support

Call: 91-9911185551, 011 - 40541000

Helpline

9911185551

Trust

Trust of 35 yrs

Trusted by million of users in past 35 years