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रूद्राक्ष की महत्वपूर्ण जानकारियां

रूद्राक्ष की महत्वपूर्ण जानकारियां

By: Future Point | 23-Feb-2018
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रूद्राक्ष पहाड़ी क्षेत्रों में पाए जाने वाले एक पेड़ का फल है। मुख्यतया यह पेड़ नेपाल, इन्डोनेशिया व भारतवर्ष के कुछ भागों में पाया जाता है। इस पेड़ का कद मध्यम, पत्ते छोटे व गोल होते हैं। इस पेड़ पर छोटे-छोटे व मजबूत फल लगते हैं जिनके ऊपर आवरण चढ़ा होता है। इस आवरण को एक विषेश प्रक्रिया द्वारा उतारा जाता है। आवरण उतारने अथवा छीलने के बाद अन्दर से मजबूत गुठली के समान फल प्राप्त हाता है। इसे ही रूद्राक्ष कहा जाता है।

रूद्राक्ष का धार्मिक महत्व तो है ही, परन्तु इसका औषधीय महत्व भी कम नहीं है। विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों में इसका प्रयोग किया जाता है। यह वात तथा कफ नाशक होता है और रक्त विकारों को दूर करता है। दमा, टी.बी., अपच, गैस तथा उदर रोगों में यह बहुत लाभदायक है। ब्लडप्रेशर तथा हृदय रोगों में भी यह रामबाण के समान है। इसके अन्दर इतने अधिक चुम्बकीय गुण होते हैं कि असली रूद्राक्ष की माला धारण कर लेने से ही ब्लडप्रेशर तथा हृदय रोगों में लाभ मिलता है। रूद्राक्ष के पेड़ की छाल को पीसकर फोड़े-फुन्सियों आदि पर लगाने से त्वचा संबंधी विकार दूर होते हैं। पागलपन तथा स्नायु दौर्बल्य से संबंधित बीमारियों में दवा के रूप में इसका प्रयोग होता है। असली तथा पके हुए रूद्राक्ष में एक विद्युत शक्ति होती है तथा शरीर के साथ घर्षण में इसमें से जो ऊर्जा प्राप्त होती है उसे ग्रहण करने से मनुष्य मानसिक तथा शारीरिक रूप से बहुत मजबूत बनता है। चील आदि विभिन्न पक्षी पके हुए रूद्राक्ष को अपने घोंसले में रखते हैं।


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औषधीय उपयोग

  • रूद्राक्ष उष्ण व अम्ल होता है। यह वात, पित्त और कफ आदि रोगों का शमन करता है। यह रक्त शोधक होता है। रक्त विकार को दूर करने वाली विभिन्न औषधियों में इसका प्रयोग होता है। इसमें विटामिन सी काफी मात्रा में होता है।
  • रूद्राक्ष विष के प्रभाव को दूर करता है। किसी जहरीले जानवर द्वारा काट लिये जाने पर रूद्राक्ष को घिसकर उस पर लगाने से शांति मिलती है। फोड़े-फुंसियों पर भी रूद्राक्ष का लेप लगाने से वे ठीक हो जाते हैं।
  • रूद्राक्ष कब्ज तथा हृदय के रोगों को ठीक करता है। रूद्राक्ष के कुछ दाने तांबे के बर्तन में रात को डाल दें तथा उसमें पानी डालें ताकि रूद्राक्ष उसमें डूब जाएं। सुबह खाली पेट वह जल पीने से कब्ज आदि दूर होती है। इस कार्य के लिए बार-बार वही रूद्राक्ष प्रयोग किए जा सकते हैं।
  • रूद्राक्ष को दूध में उबालकर पीने से स्मरणशक्ति बढ़ती है। खांसी तथा दमा आदि रोगों में भी इससे लाभ मिलता है।
  • मानसिक शांति के लिए रूद्राक्ष बहुत लाभदायक है। उच्च रक्तचाप से बचाव के लिए रूद्राक्ष की माला गले में धारण करनी चाहिए। रूद्राक्ष की माला इतनी लम्बी हो कि वह हृदय तक पहुंचे। रूद्राक्ष में चुम्बकीय शक्ति होती है। अनावश्यक गर्मी को रूद्राक्ष अपनी ओर खींच लेता है तथा व्यक्ति को मानसिक शांति तथा प्रसन्नता मिलती है। इस प्रकार उच्च रक्तचाप नियंत्रण में रहता है।

असली रूद्राक्ष की पहचान

रूद्राक्ष एक पेड़ का पका हुआ फल है। इसे किसी फैक्ट्री में तैयार नहीं किया जाता। अतः रूद्राक्ष के नकली होने का प्रश्न ही नहीं उठता। रूद्राक्ष कच्चा हो सकता है परन्तु नकली नहीं। रूद्राक्ष की कुछ किस्में काफी कम मात्रा में उपलब्ध होती हैं जिस कारण काफी महंगी होती हैं जबकि कुछ किस्में बहुतायत से मिलती हैं और इस कारण काफी सस्ती होती हैं। रूद्राक्ष की कीमत इसकी मांग तथा आपूर्ति के सिद्धांत पर निर्भर है। रूद्राक्ष के पेड़ों पर पांच मुखी रूद्राक्ष सर्वाधिक लगता है इस कारण यह बहुत ही सस्ता है परन्तु यदि पांच मुखी रूद्राक्ष के पेड़ कम हो जाएं अथवा यह बहुत कम मात्रा में उपलब्ध होने लगे और अधिक मुखों वाले या एक मुखी रूद्राक्ष बहुतायत से मिलने लगें तो ये ही सर्वाधिक सस्ते हो जाएंगे। यह तो प्रकृति की देन है। मनुष्य अपनी आवश्यकता के अनुसार चलता है। वैज्ञानिक खोजों के साथ कारीगरी के अद्भुत नमूने हमें देखने को मिलते हैं। ये सभी क्षेत्रों में हैं तथा रूद्राक्ष भी इनसे अछूते नहीं हैं। रूद्राक्ष के एक मुखी गोल दाने की मांग सर्वाधिक है जबकि इसकी उपलब्धता काफी कम है। कारीगरी का नमूना देखें तो आप पाएंगे कि सामान्य पांच मुखी रूद्राक्ष के चार मुख सोल्यूशन तथा रूद्राक्ष के बुरादे से बंद कर दिए जाते हैं तथा वह एक मुखी बना दिया जाता है। पारखी व्यक्ति तो पहचान जाता है जबकि भोला-भोला धार्मिक आस्था वाला व्यक्ति उसे सही समझ कर खरीद लेता है। इसी प्रकार आरी की सहायता से, ब्लेड से या मशीन से कुशल कारीगर पांच मुखी रूद्राक्ष को चैदह मुखी रूद्राक्ष बना देते हैं। दस या ग्यारह मुखी रूद्राक्ष को तेरह या चैदह मुखी रूद्राक्ष में परिवर्तित करना तो साधारण सी बात है। इसी प्रकार के रूद्राक्ष ही बहुतायत से बिक रहे हैं। अतः कोई बडे़ संस्थान या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से ही रूद्राक्ष खरीदें।


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  • प्रायः यह माना जाता है कि पानी में डूबने वाला रूद्राक्ष असली होता है तथा जो रूद्राक्ष पानी में तैर जाए वह नकली होता है। यह बात सत्य नहीं है। जो रूद्राक्ष पका हुआ होता है वह पानी में डूब जाता है तथा जो रूद्राक्ष कच्चा होता है वह पानी में तैरता है। यदि पके हुए पांच मुखी रूद्राक्ष में लाइनें बनाकर उसके मुख बढ़ा दिये जाएं अथवा लाइनें मिटाकर उसके मुख कम कर दिए जाएं तो भी वह पानी में डूब जाएगा। अतः पानी में डूबने या तैरने से रूद्राक्ष के असली व नकली होने की पहचान नहीं हो सकती। केवल उसके पके होने अथवा कच्चे होने की पहचान हो सकती है।
  • प्रायः अधिक गहरे रंग का रूद्राक्ष अच्छा माना जाता है तथा हल्के रंग का रूद्राक्ष अच्छा नहीं माना जाता। वास्तव में रूद्राक्ष का छिलका उतारने के बाद उस पर रंग चढ़ाया जाता है। रूद्राक्ष की जो मालाएं बाजार में उपलबध हैं, उन्हें रूद्राक्षों में छेद करके माला पिरोने के उपरान्त गहरे पीले रंग में डुबोया जाता है। कभी-कभी रंग कम होने के कारण उनका रंग हल्का रह जाता है। गहरे भूरे या काले दिखने वाले रूद्राक्ष प्रायः कुछ समय इस्तेमाल किए हुए होते हैं। रूद्राक्ष को तेल में डालने पर अथवा पसीने के साथ लगने पर उसका रंग काला पड़ जाता है।
  • कुछ रूद्राक्षों में प्राकृतिक तौर पर छेद होते हैं। ऐसे रूद्राक्ष बहुत शुभ माने जाते हैं। जबकि अधिकांष रूद्राक्षों में छेद करना पड़ता है।
  • रूद्राक्ष के संबंध में एक भ्रम यह भी फैलाया गया है कि दो अंगूठों के नाखूनों के मध्य रूद्राक्ष को रखने से यह किसी भी दिशा में घूमे तो असली अन्यथा नकली है। इसे भी सत्य स्वीकार नहीं किया जा सकता। अगर किसी भी गोल वस्तु को इस प्रकार दो अंगूठों के मध्य में रखेंगे तो वह किसी-न-किसी दिषा में अवश्य ही घूमेगी।
  • रूद्राक्ष के असली या नकली होने की पहचान करने के लिए सुई से कुरेदें। कुरेदने पर अगर रेशा निकले तो वह असली अन्यथा वह केमिकल का बना हुआ होगा। अगर वह नकली होगा तो रूद्राक्ष के दाने के ऊपर उभरे हुए पठारों में एकरूपता दिखेगी। असली रूद्राक्ष में ऊपर उठे हुए पठारों में एकरूपता नहीं हो सकती। जिस प्रकार दो व्यक्तियों के फिंगर प्रिंट्स एक समान नहीं होते उसी प्रकार दो रूद्राक्षों के ऊपरी पठार एक समान नहीं हो सकते। परन्तु दो अथवा कितने भी नकली रूद्राक्षों के ऊपरी पठार एक जैसे हो सकते हैं।
  • कुछ रूद्राक्षों पर शिवलिंग, त्रिशूल अथवा सांप आदि बना हुआ मिलता है। ये प्राकृतिक रूप से बने हुए नहीं होते। ये केवल कुशल कारीगरी का एक नमूना मात्र होते हैं। रूद्राक्ष को बारीक पीस कर उसके मसाले से ये आकृतियां बनाई जाती हैं तथा उन्हें किसी भी रूद्राक्ष के ऊपर चिपका दिया जाता है।
  • कभी-कभी दो अथवा तीन रूद्राक्ष प्राकृतिक रूप से जुड़े हुए होते हैं। इन्हें गौरी-शंकर रूद्राक्ष अथवा गौरी पाठ रूद्राक्ष कहा जाता है। कभी-कभी रूद्राक्ष में गणेश जी की सूंड की तरह एक धारी अलग से उठी होती है। इसे गणेश रूद्राक्ष कहा जाता है। गौरी शंकर अथवा गौरीपाठ रूद्राक्ष काफी महंगे होते हैं तथा इनके नकली होने की संभावना भी काफी होती है। कुशल कारीगर दो रूद्राक्षों को काटकर मसाले से इस प्रकार चिपका देते हैं कि वे पूर्णतया जुड़े हुए दिखाई देते हैं।
  • प्रायः पांच मुखी रूद्राक्ष के चार मुख बंद करके उसे एक मुखी रूद्राक्ष का रूप दे दिया जाता है। ये मुख रूद्राक्ष के मसाले से बंद किए जाते हैं। गौर से देखने पर मसाला भरा हुआ दिखाई दे जाता है।
  • कभी-कभी बेर की गुठली पर रंग चढ़ाकर उसे असली रूद्राक्ष के रूप में बेच दिया जाता है। सस्ते दामों में बिकने वाली रूद्राक्ष की मालायें प्रायः रूद्राक्ष से न बनी होकर बेर की गुठली से ही बनाई जाती हैं। वजन में ये प्रायः रूद्राक्ष से हल्की होती हैं। इनका आकार प्रायः मध्यम या छोटा ही होता है।

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रूद्राक्ष पहचान की सही विधि

नकली गौरीशंकर रूद्राक्ष, मुंह बंद किए गए रूद्राक्ष अथवा शिवलिंग, त्रिशूल और सांप आदि से युक्त नकली रूद्राक्षों की असली पहचान का तरीका निम्न प्रकार है:-

एक कटोरे में पानी को उबालें। उबलते हुए पानी में रूद्राक्ष को एक-दो मिनट के लिए रखें तथा कटोरे को चूल्हे से उतार कर ढक दें। दो-चार मिनट के बाद ढक्कन उतार कर रूद्राक्ष का दाना निकाल लें। उसे गौर से देखें। यदि रूद्राक्ष में जोड़ लगाया गया होगा तो वह फट जाएगा। यदि दो रूद्राक्षों को जोड़ कर गौरी शंकर बनाया गया होगा तो वह अलग-अलग हो जाएंगे। जिन रूद्राक्षों में सोल्यूशन भरकर मुख बंद किया गया होगा, वे बंद किए गए मुख स्पष्ट दिखाई देने लगेंगे। ऐसे में यदि रूद्राक्ष प्राकृतिक तौर पर कुछ फटा हुआ होगा तो वह थोड़ा और फट जाएगा। यदि बेर की गुठली को रूद्राक्ष बताकर दिया जा रहा है तो यह क्रिया करने से वह गुठली काफी मुलायम पड़ जाएगी जबकि असली रूद्राक्ष में अधिक अन्तर नहीं पड़ेगा।

यदि रूद्राक्ष की माला से रंग उतारना है तो थोड़े पानी में नमक डालकर उसमें माला डाल दें तथा उसे थोड़ा गर्म करें। तत्पश्चात् वह माला निकाल कर सुखा लें। रंग काफी हल्का हो जाएगा। सामान्यतया रंग करने से रूद्राक्ष में कोई हानि नहीं होती।

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