पति-पत्नी करें ये उपाय, यदि वैवाहिक जीवन में आ रहीं हैं परेशानियां

By: Future Point | 17-Mar-2020
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पति-पत्नी करें ये उपाय, यदि वैवाहिक जीवन में आ रहीं हैं परेशानियां

विवाह दो दिलों का मेल है, विवाह करना और ख़ुशी-ख़ुशी जीवन यापन करना प्रत्येक व्यक्ति का यही सपना होता है, दुनिया का हर व्यक्ति अपने वैवाहिक जीवन को खुशियों से भरना चाहता है, वह यही चाहता है कि उसका वैवाहिक जीवन अच्छा बीते, लेकिन कुछ कारणों से ऐसा नहीं हो पाता, और रिश्ते कमजोर पड़ने लगते हैं, जीवन में समस्याओं का आना तो लाज़मी है हर व्यक्ति के जीवन में समस्या आती और जाती रहती है, हर समस्या अलग-अलग होती है जिनमें से कुछ समस्या वैवाहिक जीवन से जुड़ी होती है, वैवाहिक जीवन में आपसी सूझ-बूझ की कमी के कारण समस्याएं उत्पन्न होती हैं, और अगर इनका जल्दी समाधान नहीं निकाला जाये तो यह धीरे-धीरे बड़ी होने लगती है और एक दिन इतनी बड़ी हो जाती हैं कि इनका समाधान हो पाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है, वैवाहिक जीवन की सफलता के लिए आवश्यक है कि परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, पति-पत्‍नी के मध्य प्रेम हमेशा बना रहना चाहिए।

पति-पत्‍नी एक सिक्के के दो पहलू होते हैं, इसलिए दोनों को ही एक-दूसरे की भावनाओं को समझना चाहिए और प्रेम व सेवा भाव रखना चाहिए, क्योंकि वैवाहिक जीवन अगर सहज नहीं है, तो पारिवारिक जीवन भी परेशानियों का केन्द्र बन जाता है। पति-पत्नी को अपने बीच की बातों को ध्यान लगाकर सुनना चाहिए। यदि कोई बात हो गई हो तो उसे प्यार से निबटाना चाहिए न कि लड़ाई-झगड़े से, क्योंकि लड़ाई-झगड़े से किसी भी समस्या का समाधान नहीं निकलता है। पति-पत्नी दोनों को एक-दूसरे पर विश्वास करना चाहिए। पति को हमेशा अपनी पत्नी को विश्वास में लेकर महत्वपूर्ण कार्यों में उसका सहयोग देना चाहिए।

पति और पत्नी में प्रेम बना रहे, इसके लिए दोनों को कुछ खास उपाय हमेशा करते रहना चाहिए, पति-पत्नी को एक दूसरे की इच्छाओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए, एक ही समय पर दोनो को क्रोध नहीं करना चाहिए, विपरीत परिस्थितियों में एक दूसरे की मदद करनी चाहिए, इससे पति और पत्नी के संबंधों में मिठास और मजबूती आती है, और व्यक्ति को अपनी जन्मकुंडली दिखवाकर ज्योतिषीय उपाय अवश्य करने चाहिए, क्योंकि ग्रहों की विपरीत स्थितियां वैवाहिक जीवन को तोड़ने का ही काम करती हैं|

वैवाहिक जीवन में गुरु की भूमिका-

गुरु की शुभ दृष्टि सप्तम भाव पर हों तो वैवाहिक जीवन में परेशानियों व दिक्कतों के बाद भी अलगाव की स्थिति नहीं बनती है, अर्थात गुरु की शुभता वैवाहिक जीवन को मधुर बनाये रखती है, गुरु वैवाहिक जीवन की बाधाओं को दूर करने के साथ-साथ, संतान का कारक ग्रह भी है, विवाह के बाद सर्वप्रथम संतान का ही विचार किया जाता है. अगर गुरु किसी पापी ग्रह के प्रभाव से दूषित हों तो संतान प्राप्ति में बाधाएं आती है. जब गुरु पर पाप प्रभाव हों तथा गुरु पापी ग्रह की राशि में भी स्थित हों तो निश्चित रुप से वैवाहिक जीवन में अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है|

वैवाहिक जीवन में शुक्र की भूमिका-

शुक्र को वैवाहिक संबन्धों का कारक ग्रह कहा जाता है, शुक्र का शुभ अवस्था में होना दाम्पत्य जीवन को सुखी बनाने का काम करता है| लेकिन कुण्डली में शुक्र का किसी भी अशुभ स्थिति में होना पति अथवा पत्नी के आलावा अन्यत्र संबन्धों की ओर झुकाव होने की संभावनाएं बनाता है, इसलिए शुक्र की शुभ स्थिति दाम्पत्य जीवन के सुख को विशेष रूप से प्रभावित करती है| कुण्डली में शुक्र की शुभाशुभ स्थिति के आधार पर ही दाम्पत्य जीवन में आने वाले सुख का आकलन किया जा सकता है, इसलिये जब शुक्र बली हों, पाप प्रभाव से मुक्त हों, शुभ भाव में बैठा हों, शुभ अवस्था में हो अथवा शुभ ग्रह से दृष्ट हों तो दाम्पत्य सुख में कमी नहीं होती है,

वैवाहिक जीवन में मंगल की भूमिका-

मंगल कुंण्डली के लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम व द्वादश भाव में स्थित होता है तो व्यक्ति मांगलिक होता है, परन्तु मंगल का इन भावों में स्थित होने के अलावा भी मंगल के कारण वैवाहिक जीवन के सुख में कमी आने की अनेक संभावनाएं बनती है| अनेक बार ऐसा होता है कि कुण्डली में मांगलिक योग बनता है, परन्तु कुण्डली के अन्य अन्य शुभ योगों से इस योग की अशुभता में कमी हो रही होती है, ऐसे में अपूर्ण जानकारी के कारण वर-वधू अपने मन में मांगलिक योग से प्राप्त होने वाले अशुभ प्रभाव को लेकर भयभीत होते रहते है, तथा बेवजह की बातों को लेकर अनेक प्रकार के भ्रम भी बनाये रखते हैं जो सही नहीं है, विवाह के बाद एक नये जीवन में प्रवेश करते समय मन में दाम्पत्य जीवन को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम नहीं रखना चाहिए|

वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियों को दूर करने के उपाय-

  • जन्मकुंडली में मंगल राहु, मंगल शनि या मंगल सूर्य का प्रभाव हो तो पति पत्नी में झगड़ें होने की स्थिति बनती है, मांगलिक कुंडलियों में ऐसा दोष सबसे ज्यादा खतरनाक होता है ऐसी स्थिति में पति पत्नी एक साथ रुद्राभिषेक करवाएं, और नियमित रूप से "ॐ नमः शिवाय" का जाप करें, लाल और काले रंग के वस्त्रों का कम से कम प्रयोग करें|
  • यदि कुंडली में गुरु ग्रह पीड़ित हो या कमजोर हो तो भी वैवाहिक जीवन में परेशानियां आती हैं, इस दोष को दूर करने के लिए हर गुरुवार हल्दी की गांठ का दान करें या गुरुवार के दिन व्रत करें, ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में सुख की प्राप्ति होती है|
  • घर में सुख बना रहे इसके लिए दान-पुण्य करते रहना चाहिए, गरीबों की मदद करने से बड़ी बड़ी परेशानियां दूर हो जाती हैं, हर रोज सुबह गाय को घास या फिर रोटी जरूर खिलानी चाहिए, अगर संभव हो सके तो गाय की सेवा जरूर करें, किसी गौशाला में धन का दान करें|
  • पति-पत्नी को नियमित रूप से शिव जी की उपासना करनी चाहिए, हर सोमवार को सफ़ेद वस्तुओं का दान करना चाहिए|
  • यदि शनि और राहु की ख़राब स्थिति के कारण पति-पत्नी में झगड़ें हो रहे हो तो नियमित रूप से मधुराष्टक का पाठ करना चाहिए, हर शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए और हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए|
  • घर में हर मंगलवार और शनिवार को सुन्दरकाण्ड का पाठ करें, पूजा के स्थान पर शिव पार्वती की स्थापना करें, पत्नी नियमित रूप से तुलसी के पौधे की पूजा करे, इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता आएगी,
  • यदि किसी पुरूष या महिला के जीवन में दाम्पत्य सुख की कमी हो तो दोमुखी रुद्राक्ष और गौरीशंकर रुद्राक्ष इन दोनों रूद्राक्षों को एक साथ धारण करने से वह कमी दूर हो जाती है, तथा दाम्पत्य जीवन में खुशहाली आ जाती है।
  • यदि किसी स्त्री को ऐसा लगता है, कि उसका दाम्पत्य जीवन छिन-भिन्न होने वाला है, तो वह ऐसी स्थिति में श्रावण मास में या किसी भी शुभ समय में 11 दिनों तक लगातार रूद्राष्टायायी द्वारा रुद्राभिषेक कराए।
  • घर में फालतू का सामान जमा न होने दें। बेकार पड़ी कीलें, बिना ताले की चाबियाँ , जंग लगा हुआ लोहा, खराब लकड़ी आदि - चीजें वास्तु दोष बढ़ाती हैं। इनकी वजह से नकारात्मकता बढ़ती है और घर में अशांति फैलती है।
  • घर की छत पर भी फालतू सामान नहीं रखना चाहिए। समय-समय पर छत की सफाई करते रहें। रात में जूठे बर्तन और गंदे कपड़े भिगोकर न सोएं। इसकी वजह से भी घर में वास्तु दोष बढ़ता है, जो कि नकारात्मकता को बढ़ाता है।
  • हर माह अमावस्या तिथि पर अपने पितरों के लिए धूप जलाएं।

यदि वैवाहिक जीवन में आ रहीं हैं परेशानियां तो फ्यूचर पॉइंट के माध्यम से अपनी कुंडली का विश्लेषण करवाएं और अपनी समस्याओं का सही सुझाव प्राप्त करें|


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