कुंडली के वह योग जो व्यक्ति को बनाते हैं एक सफल बिजनेसमैन

By: Future Point | 28-May-2020
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कुंडली के वह योग जो व्यक्ति को बनाते हैं एक सफल बिजनेसमैन

बिजनेस शुरू करना आसान है परंतु उसे सफलतापूर्वक चलाने के लिए काफी चीजों की आवश्यकता पड़ती है। हमेशा उसी वस्तु का बिजनेस करना चाहिए जो किसी भी व्यक्ति का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने में समर्थ हो और कोई चाह कर भी जिसकी उपेक्षा न कर सके। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य चीज़ें जैसे कि क्रिएटिविटी और नेतृत्व क्षमता होना भी आवश्यक है। 

इसमे कोई शक नहीं है कि क्रिएटिविटी बिजनेसमैन की लाइफ लाइन होती है। काम करने वाले कर्मचारी बहुत मिल जाते हैं लेकिन उनसे काम करवाने के लिए नेतृत्व क्षमता का होना बहुत आवश्यक है। जब आप किसी नए बिजनेस में प्रवेश करते हैं तो उसमें आप कुछ समय बिताते हैं, धैर्य रखते हैं, अनुभव प्राप्त करते हैं। 

यही एक्सपीरियंस है। कुंडली का बारहवाँ घर समय की बर्बादी का है, परंतु यदि यह बारहवाँ भाव अनुकूल होने पर एक्सपीरियंस देता है। नेतृत्व की क्षमता हमें कई ग्रह देते हैं इनमें से सूर्य, मंगल और बृहस्पति प्रमुख हैं। इनमें से किसी एक ग्रह की कृपा यदि कुंडली में आपके जन्म लग्न या जन्मराशि पर हो जाए तो किससे कैसे काम लेना है यह आपके लिए बहुत आसान हो जाएगा अर्थात आप में जन्मजात नेतृत्व क्षमता होगी।

आज हर व्यक्ति चाहता है कि उसका अपना कोई व्यवसाय हो। बेशक वह छोटा हो किन्तु अपने किसी व्यवसाय की बात ही निराली होती है। कई बार हम बहुत चुनौतियों का सामना करते हुए कोई अपना काम शुरू भी कर देते हैं, लेकिन वहां हम सफल होंगे या असफल यह कोई नहीं जानता है। 

किन्तु व्यक्ति की जन्मकुंडली को देखकर यह बताया जा सकता है कि क्या आप अपना बिजनेस शुरू कर सकते हैं या वह उत्तम समय कब आयेगा जब आप अपना कोई काम प्रारंभ कर सकते हैं| यदि आप भी कोई बिजनेस करना चाहते हैं तो ज्योतिष आपकी मदद कर सकता है बिजनेस को सफलतापूर्वक चलाने के लिए कौन-कौन से ग्रह सहायक होते हैं, आइये जानते हैं|

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बिजनेसमैन की ग्रह स्थिति-

एक बिजनेसमैन बनने के लिए ग्रह स्थिति और व्यक्ति की सोच बहुत मायने रखती है। एक व्यक्ति ने 50 साल की उम्र तक नौकरी करने के बाद एक छोटा सा बिजनेस शुरू किया और वह बिजनेस चल रहा है। ऐसा आपने अनेक बार देखा होगा तो जो व्यक्ति नौकरी करता है, ऐसा बिलकुल जरूरी नहीं है कि वह कभी बिजनेस कर ही नहीं सकता। जरूरत और अनुभव जब दोनों मिलते हैं तो बिजनेस में सफलता अपने आप मिलने लगती हैं। 

फिर भी एक सफल बिजनेसमैन बनने के लिए बुध ग्रह की कृपा अवश्य होनी चाहिए क्योंकि बुध ग्रह बिजनेस का मूल कारक है, और एक सफल बिज़नेसमैन बनने के लिए बुध ग्रह की कृपा आवश्यक होती है, बुध ग्रह घोड़े को घास से दोस्ती नहीं करने देता। 

व्यक्ति किस तरह के व्यवसाय में अधिक सफलता प्राप्त करेगा इसका निर्धारण करने के लिए प्रथम, द्वितीय, सप्तम, दशम एवं एकादश भाव में विराजमान ग्रह या इन भावों पर दृष्टि डालने वाले ग्रहों से किया जाता है। 

जिसकी कुंडली में प्रथम, द्वितीय, सप्तम, नवम, दशम एवं एकादश भाव के स्वामी एवं बुध प्रबल रहतें हैं, ऐसे लोग समान्यतः स्वयं के व्यवसाय में सफल होते हैं।

जन्म कुंडली में कर्म (कार्य) का स्थान दसवां घर होता है। अगर किसी व्यक्ति का कर्म स्थान अच्छा है तो  उस व्यक्ति का व्यवसाय अच्छा चलने की संभावना ज्यादा रहती हैं। आइये एक नजर डालते हैं कुंडली के उन योगों पर जो व्यक्ति के व्यवसाय को सफल बनाने में मदद करते हैं।

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बिजनेस में सफलता के योग-

सूर्य के साथ पंचमेश या नवमेश का संबंध बनता हो तो जातक अपने पिता या पारिवारिक काम को आगे बढ़ाने वाला होता है।

व्यवसाय क्षेत्र में चंद्रमा एक जलीय ग्रह है, अत: इसके कार्यों में जल से संबंधित वस्तुओं का व्यापार करना लाभप्रद होता है।

यदि कार्य क्षेत्र का स्वामी होते हुए मंगल केतु, सूर्य जैसे अग्नि कारक ग्रहों से संबंध बनाता है तो व्यक्ति अग्नि संबंधि कामों से धनोपार्जन करता है|

जब मंगल चतुर्थेश के साथ मिलकर संबंध बना रहा होता है तो व्यक्ति भूमि किराया आदि से आय या धन पाता है। मंगल के कारण व्यक्ति प्रोपर्टी से संबंधित कार्यों में सफलता पाता है और इस क्षेत्र में उसे अच्छा लाभ भी मिलता है|

बुध एक पूर्ण वैश्य रूप का ग्रह है। व्यापार से जुडे़ होने वाला एक ग्रह है जो जातक को उसके कारक तत्वों से पुष्ट करने में सहायक बनता है। इसी के साथ व्यक्ति को अपनी बौधिकता का बोध भी हो पाता है और उसे सभी दृष्टियों से कार्यक्षेत्र में व्यापार करने वाला बनाता है।

यदि कुण्डली में बुध ग्रह दूसरे, पांचवें और नवम भाव इत्यादि बुद्धि स्थानों का स्वामी बनता हुआ व्यवसाय का प्रतिनिधित्व करे, अर्थात लग्न-लग्नेश को चंद्रमा और सूर्य को प्रभावित करता हो तो व्यक्ति बुद्धिजीवी व्यापारी होता है।

अगर कुण्डली में बुध ग्रह शनि व शुक्र जैसे व्यापार से प्रभावित ग्रहों के साथ संबंध बनाता है तो जातक व्यापार के क्षेत्र में अच्छे मुकाम हासिल करता है|

बुध और शुक्र दोनों बलवान हों तो जातक को वस्त्र उद्योग में अच्छी सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

चंद्रमा को स्त्री ग्रह माना गया है अत: जब यह अपने ही जैसे दूसरे ग्रह के साथ संबंध बनाता है तो जातक स्त्री पक्ष के साथ मिलकर काम करने वाला बन सकता है।

अगर कुंडली के कर्म स्थान में बृहस्पति बैठा हो तो यह केंद्रादित्य योग बनता है। यदि किसी जातक की कुंडली में यह योग होता है तो उस व्यक्ति का व्यवसाय अन्य जातकों की तुलना में अच्छा चलता है।

जातक की जन्म कुंडली में यदि मंगल उच्च का होकर कर्म भाव में विराजमान है तो ऐसे व्यक्ति को व्यवसाय और विदेश यात्रा के अच्छे संयोग बन जाते हैं।

कुंडली के केंद्र में अगर कहीं भी गुरू और सूर्य या चंद्रमा और गुरु की युति हो तो इस योग का सीधा प्रवाह कर्म को जाता है। शास्त्रों में इसे वर्गोतम योग बोला जाता है। इस योग में व्यक्ति को सभी प्रकार की सुख-सुविधायें प्राप्त होती हैं।

सप्तम दृष्टि सभी ग्रहों की होती है। बृहस्पति, सूर्य या मंगल इन शुभ ग्रहों में से किसी की भी दृष्टि अगर दसवें घर पर हो तब भी कर्म भाव में अच्छा फल व्यक्ति को प्राप्त होता रहता है।

यदि कर्म स्थान पर बुध या सूर्य की दृष्टि हो या इन ग्रहों में से कोई ग्रह कर्म के स्थान में विराजमान हो तो यह लक्ष्मी नारायण योग बनता है। इस प्रकार के जातकों को व्यवसाय में लाभ प्राप्त होने के अवसर ज्यादा प्राप्त होते हैं।

राहू भी अगर कर्मभाव की तरफ देखता है या कर्म भाव में उच्च का होकर विराजमान हो तो यह भी योग व्यवसाय के लिए अच्छा माना जाता है। बेशक शनि, राहू और केतु अशुभ ग्रह माने जाते हैं किन्तु कई बार योग के कारण यह ग्रह अच्छे फल प्रदान कर देते हैं। यदि आपकी कुंडली में यह योग हैं तो आपके एक सफल उद्यमी, एक सफल व्यवसायी बनने की प्रबल संभावनाएं हैं। 

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