facebook गंगा दशहरा 2022 - केवल इसी दिन धुल सकते हैं आपके पाप! | Future Point

गंगा दशहरा 2022 - केवल इसी दिन धुल सकते हैं आपके पाप!

By: Future Point | 06-Jun-2022
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गंगा दशहरा 2022 - केवल इसी दिन धुल सकते हैं आपके पाप!

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार गंगा दशहरा एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। प्रत्येक वर्ष, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली दशमी को गंगा दशहरा मनाया जाता है।  ऐसा माना जाता है की सभी पापों को हरने वाली गंगा का अवतरण इसी दिन धरती पर हुआ था। इसीलिए इसे महापुण्यकारी पर्व माना गया है।  इस दिन देवी गंगा को अपनी जटाओं में धारण करने वाले भगवान् शिव की भी पूजा-अर्चना की जाती है। आठ इस दिन मोक्षप्रदायक गंगा जी व भगवान् शिव की आराधना से समस्त पापों का नाश होता है।  आइयें जाने कब है गंगा दशहरा और हमें इस दिन क्या करना चाहिए?  

कब है गंगा दशहरा?

हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास में पड़ने वाली शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है। गंगा नदी के धरती पर अवतरण के कारण इसे गंगावतरण भी कहा जाता है। साल २०२२ में गंगा दशहरा 9 जून को है। 9 जून को दशमी तिथि सुबह 8.21 से आरम्भ होगी और अगले दिन 10 जून शाम को 7:25 बजे इसका समापन होगा। गंगा को हिंदू धर्म की सबसे पवित्र नदी कहा गया है अतः यह दिन भी अत्यंत पवित्र है। पौराणिक कथाओं के अनुसार गंगा का जन्म जगद्गुरु ब्रह्मा के कमंडल से हुआ और इक्ष्वाकी वंश के राजा भागीरथ इन्हें कठोर तपस्या कर धरती पर बुला लाये।

क्या है गंगा दशहरा?

गंगा दशहरा एक ऐसा पावन दिन है जब जीवन दायिनी व मोक्षदायिनी गंगा जी का अवतरण इस धरती पर हुआ।  ऐसा माना जाता है की भगीरथ नाम के व्यक्ति ने अपनी घोर साधना से गंगा जी को प्रसन्न किया और अपने पूर्वजों की आत्माओं के कल्याण हेतु उन्हें धरती पर अवतरित होने के लिए सहमत किया।  गंगा जी का आग्रह था की उनका वेग इतना अधिक है की उनके धरती पर अवतरित होते ही पूरी धरती धंस कर पाताल में समां जाएगी।  अतः उन्होनें भगीरथ को भगवान् शिव की आराधना करने के लिए कहा क्यूंकि उनके अनुसार केवल वे ही उनका वेग अपनी जटाओं में संभल सकते थे और फिर उनकी जटाओं से वे शांत रूप में धरती पर बह सकती थी।  भगीरथ ने ऐसा ही किया और गंगा जी का अवतरण धरती पर हो गया।

ऐसा माना जाता है लगभग 32 दिनों तक गंगा नदी शिव की जटाओं में ही विचरण करती रहीं। फिर ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी पर शिव जी ने अपनी एक जटा खोली और गंगा नदी का अवतरण धरती पर हो गया। राजा भागीरथ ने हिमालय के दुर्गम रास्तों से होते हुए मैदानी इलाके तक गंगा जी के लिए रास्ता बनाया। इसके बाद राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों का गंगाजल से तर्पण कर उन्हें मुक्ति दिलाई। भगीरथ के पूर्वजों को मुक्ति प्राप्त हुई और तभी से गंगा जी पृथ्वी पर अविरल बह रही हैं। 

क्या करें गंगा दशहरा पर

गंगा दशहरा पर गंगा या अन्य किसी नदी में स्नान करने से दस प्रकार के कर्मों या पापों का नाश होता है इसी कारण से इसे गंगा दशहरा कहा गया है। साल 2022 में गंगा दशहरा पर हस्त नक्षत्र और व्यतीपात योग भी रहेगा। इस दिन दान पुण्य का बहुत महत्व माना जाता है। 

  • इस दिन सत्तू, पानी से भरा घड़ा, शर्बत, जल, मटका, पंखा, फल, चीनी व ऐसी सभी चीज़ें जिनसे गर्मी में राहत मिले दान की जाती हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन किया जाने वाला दान हमेशा 10 की संख्या में होना चाहिए।
  • इस दिन गंगा का मंत्र जप करना चाहिए। मां गंगा मंत्र-ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः
  • इस दिन भगवान् शिव व भगवान् विष्णु की भी अर्चना की जाती है। 
  • इस दिन ग्यारस एकाशी की कथा भी सुननी चाहिए। 
  • कई लोग इस दिन व्रत भी करते है जिसमे केवल फलाहार किया जाता है।   


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