इस तिथि में यह खाना दे सकता है कलंक | Future Point

इस तिथि में यह खाना दे सकता है कलंक

By : Future Point
Expert Review : Dr. Arun Bansal, Vedic Astrologer | 45+ Years Experience
Published : 19-Dec-2017इस तिथि में यह खाना दे सकता है कलंक

खाना हम सभी के जीवन का अभिन्न अंग है। खाना एक ओर हमें ऊर्जा प्रदान करता है वहीं दूसरी ओर इससे हमें सेहत को बनाए रखने में भी सहायता मिलती है। आपको यह जानकर अवश्य हैरानी होगी, परन्तु यह सत्य है कि वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुछ तिथियां ऐसी होती है जिनमें कुछ निर्धारित चीजें खाना, हमारे लिए कष्ट का कारण बन सकता है। यदि हम तिथि को ध्यान में रखकर खाते है तो निश्चित रुप से वह हमारे लिए विशेष लाभप्रद साबित हो सकता है। इसी की जानकारी आज हम आपको इस आलेख में देने जा रहे हैं -


  • प्रतिपदा तिथि को पेठा न खायें, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है।
  • द्विताया तिथि को छोटा बैंगन खाना निषिद्ध है।
  • तृतिया तिथि को परवल खाने से शत्रुओं की वृद्धि होती है।
  • चतुर्थी तिथि को मूली खाने से धन का नाश होता है।
  • पंचमी तिथि को बेल खाने से कलंक लगता है।
  • षष्ठी तिथि को नीम की पत्ती मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है।
  • सप्तमी तिथि को ताड़ का फल खाने से रोग होते हैं तथा शरीर का नाश होता है।
  • अष्टमी तिथि को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है।
  • नवमी तिथि को लौकी गोमांस के समान त्याज्य है।
  • एकादशी तिथि को सेम खाने से बचना चाहिए।
  • द्वादशी को पूतिका(पोई) (मालाबार पालक) नहीं खाना चाहिए।
  • त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है।
  • अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रान्ति, चतुर्दशी और अष्टमी तिथि, रविवार, श्राद्ध और व्रत के दिन वैवाहिक जीवन का सुख, तिल का तेल, लाल रंग का साग व काँसे के पात्र में भोजन करना निषिद्ध है।
  • रविवार के दिन अदरक भी नहीं खाना चाहिए।
  • कार्तिक मास में बैंगन और माघ मास में मूली का त्याग कर देना चाहिए।
  • सूर्यास्त के बाद कोई भी तिलयुक्त पदार्थ नहीं खाना चाहिए।
  • लक्ष्मी की इच्छा रखने वाले को रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए। यह नरक की प्राप्ति कराने वाला है।
  • बायें हाथ से लाया गया अथवा परोसा गया अन्न, बासी भात, शराब मिला हुआ, जूठा और घरवालों को न देकर अपने लिए बचाया हुआ अन्न खाने योग्य नहीं है।
  • गाय, भैंस और बकरी के दूध के सिवाय अन्य पशुओं के दूध का त्याग करना चाहिए।
  • लक्ष्मी चाहने वाला मनुष्य भोजन और दूध को बिना ढके नहीं छोड़े।
  • जूठे हाथ से मस्तक का स्पर्श न करे क्योंकि समस्त प्राण मस्तक के अधीन हैं।
  • बैठना, भोजन करना, सोना, गुरुजनों का अभिवादन करना और (अन्य श्रेष्ठ पुरुषों को) प्रणाम करना – ये सब कार्य जूते पहन कर न करें।
  • जो मैले वस्त्र धारण करता है, दाँतों को स्वच्छ नहीं रखता, अधिक भोजन करता है, कठोर वचन बोलता है और सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सोता है, वह यदि साक्षात् भगवान विष्णु भी हो उसे भी लक्ष्मी छोड़ देती है।
  • उगते हुए सूर्य की किरणें, चिता का धुआँ, वृद्धा स्त्री, झाडू की धूल और पूरी तरह न जमा हुआ दही – इनका सेवन व कटे हुए आसन का उपयोग दीर्घायु चाहने वाले पुरुष को नहीं करना चाहिए।
  • उगते हुए सूर्य की किरणें, चिता का धुआँ, वृद्धा स्त्री, झाडू की धूल और पूरी तरह न जमा हुआ दही – इनका सेवन व कटे हुए आसन का उपयोग दीर्घायु चाहने वाले पुरुष को नहीं करना चाहिए।
  • अग्निशाला, गौशाला, देवता और ब्राह्मण के समीप तथा जप, स्वाध्याय और भोजन व जल ग्रहण करते समय जूते उतार देने चाहिए।
  • दोनों संध्या, जप, भोजन, दंतधावन, पितृकार्य, देवकार्य, मल-मूत्र का त्याग, गुरु के समीप, दान तथा यज्ञ – इन अवसरों पर जो मौन रहता है, वह स्वर्ग में जाता है।