दो मुखी रुद्राक्ष से होती है मनोकामनाओं की पूर्ति और ऐश्वर्य की प्राप्ति
By : Future Point
Expert Review : Dr. Arun Bansal, Vedic Astrologer | 45+ Years Experience
Published : 01-Apr-2020
वैदिक ज्योतिष में रुद्राक्ष का विशेष महत्व है। माना जाता है कि रुद्राक्ष इंसान को हर तरह की हानिकारक ऊर्जा से बचाता है। इसका इस्तेमाल सिर्फ तपस्वियों के लिए ही नहीं, बल्कि सांसारिक जीवन में रह रहे लोगों के लिए भी किया जाता है।वेदों, पुराणों एवं उपनिषदों में रुद्राक्ष की महिमा का विस्तार पूर्वक वर्णन प्राप्त होता है। रुद्राक्ष दो शब्दों से मिलकर बना है रूद्र अर्थात भगवान शिव तथा अक्ष अर्थात नेत्र इन दोनों शब्दों का युग्म करें तो इसे भगवान शिव के नेत्र रूप में रूद्राक्ष कहा जाता है, । रूद्राक्ष की उत्पत्ति के संदर्भ में हमें पौराणिक आख्यानों से प्राप्त होता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के नेत्रों की जलबूंदों से हुई है।
दो मुखी रुद्राक्ष को अर्धनारीश्वर का स्वरुप कहा गया है। इस रुद्राक्ष को साक्षात भगवान शिव तथा माता पार्वती का रूप माना गया है। ''द्विवक्त्रो देवदेवेशो गोवधं नाशयेदध्रुवम'' भगवन शिव के मतानुसार इसे साक्षात् देवेश्वर भी कहा जाता है। यह गोवध जैसे पापों से छुड़ाने वाला है इसको धारण करने वाले व्यक्ति की अनेक व्याधियां स्वतः ही शांत हो जाता हैं| यह रुद्राक्ष भी चतुर्वर्ग सिद्धि प्रदाता है| इस रुद्राक्ष को मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए धारण किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि रुद्राक्ष शिव का वरदान है, जो संसार के सभी सुखों को हासिल करने के लिए भगवान शिव ने इस धरती पर प्रकट किया है। शिवपुराण के अनुसार ऐसा माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शंकर की आँखों के जलबिंदु से हुई है।
प्राचीन समय से ही दो मुखी रुद्राक्ष सबसे श्रेष्ठ माना गया है। लोगों में ऐसी धारणा है कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन को सुखद तथा पापमुक्त बनाने के लिए अर्धनारीश्वर स्वरुप शिव और शक्ति के आशीर्वाद के रूप में दो मुखी रुद्राक्ष को जरुर धारण करना चाहिए। इसके प्रभाव से जीवन में सकारात्मक बदलाव के साथ साथ ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। इसके उपयोग से धारक के सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं|कार्य तथा व्यापार में सफलता मिलती है,यह मोक्ष और वैभव का दाता है| आमले के फल के बराबर दो मुखी रुद्राक्ष समस्त अनिष्टों का नाश करने वाला तथा श्रेष्ठ माना गया है|दो मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से शिव भक्ति बढ़ती है और अनेक रोग नष्ट होते हैं| यह रुद्राक्ष कर्क लग्न वालों के लिए विशेष उपयोगी है| ज्योतिष में दो मुखी रुद्राक्ष चन्द्रमा का प्रतिनिधित्व करता है| अतः चन्द्रमा के कारन उत्पन्न रोगों से मुक्ति के लिए इसे धारण किया जाता है| इसे गुरु-शिष्य, पिता-पुत्र, पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका इत्यादि के संबंधों की मधुरता हेतु धारण किया जाता है|
दो मुखी रुद्राक्ष कब धारण करना चाहिए (When should one wear two faces of Rudraksha?)
भारतीय ज्योतिष के अनुसार दो मुखी रुद्राक्ष का स्वामी चन्द्रमा है। यदि कुंडली में चन्द्रमा बलवान होकर भी शुभ प्रभाव नहीं दे रहा हो या कमजोर स्थिति में हो अथवा अस्त हो तो दोमुखी रुद्राक्ष को धारण करना लाभदायक होता है। अगर किसी जातक की कुंडली में किसी क्रूर ग्रह की दशा या अन्तर्दशा चल रही है तो भी दो मुखी रुद्राक्ष को पहनना उचित होता है। कर्क राशि के लोगों के लिए यह रुदाक्ष किसी वरदान से कम नहीं होता, इसलिए कर्क राशि के लोगों को यह दो मुखी रुद्राक्ष को अवश्य धारण करना चाहिए।
दो मुखी रुद्राक्ष को धारण करने की विधि (Method of wearing two faced Rudraksh)
दो मुखी रुद्राक्ष को धारण करने के लिए सर्वप्रथम रुद्राक्ष को पंचामृत( दूध-दही-घी-शहद-शकर के मिश्रण) से स्नान कराएं| इसके पश्चात् शुद्ध जल से स्नान करवाएं| अब रुद्राक्ष को गंगाजल से स्नान करवा दें| इतना करने के उपरांत रुद्राक्ष को पूजास्थल पर लाल कपड़ा बिछाकर रख दें| अब दीपक प्रज्वल्लित करें व रुद्राक्ष की विधिवत पूजा करें| रुद्राक्ष को कुमकुम से तिलक करें, पुष्प अर्पित करें, अक्षत(चावल) अर्पित करें, मीठे का भोग लगाएं| रुद्राक्ष पूजन के पश्चात् हाथ में जल लेकर परमपिता परमेश्वर से इस प्रकार आग्रह करें :– हे परमपिता परमेश्वर मैं( अपना नाम बोलें) गोत्र (अपना गोत्र बोलें) दो मुखी को अभिमंत्रित करने हेतु ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप कर रहा हूं मुझे इस कार्य में सफलता प्रदान करें, मेरे कार्य में किसी प्रकार की कोई गलती हो गयी हो तो मुझे क्षमा करें| ऐसा कहते हुए जल को नीचे जमीन पर छोड़ दें| अब भगवान शिव का ध्यान करते हुए अधिक से अधिक संख्या में ॐ नमः शिवाय मन्त्र के जप करें| मंत्र जप के पश्चात् शिव मंदिर जाकर विधिवत शिवलिंग पूजा करें व रुद्राक्ष को शिवलिंग से स्पर्श कराकर शिवलिंग के समक्ष ही आप रुद्राक्ष को गले में धारण करें| इस प्रकार आप दो मुखी रुद्राक्ष को विधिवत धारण करके अपने वैवाहिक जीवन को सुखद बना सकते हैं और सभी पापों से मुक्ति पा सकते है|
दो मुखी रुद्राक्ष के लाभ (Benefits of Two Faced Rudraksha)
वैदिक ऋषियों का यह मत है कि धारण करने से मन को शांति मिलती है| उसका मुख्य कारण है कि यह शरीर की गर्मी को अपने में खिंचकर गर्मी को स्वतः बाहर फेंकता है| यह जीवन में मान-सम्मान व प्रसिद्धि दिलाने वाला होता है, शारीरिक बिमारियों में यह मोटापे और ह्रदय रोग को दूर करने में लाभकारी है|
नेतृत्व क्षमता का निर्माण
इस रुद्राक्ष के प्रभाव से जातक के अंदर आत्मविश्वास, साहस और धैर्य की वृद्धि होती है, जातक मानसिक तनाव से मुक्त होकर आत्मविश्वास प्राप्त करता है। दो मुखी रुद्राक्ष को धारण करने वाले व्यक्ति के अंदर शांति, धैर्य, चंचलता, शीतलता और नेतृत्व क्षमता का निर्माण होता है। इसे धारण करने के बाद व्यक्ति का भाग्योदय होता है, और समाज में मान-सम्मान व प्रसिद्धि की प्राप्ति होती है।
मानसिक शांति प्राप्ति के लिए
इस रुद्राक्ष के प्रभाव से मस्तिष्क में गलत विचार उत्पन्न नहीं होते, व्यक्ति मानसिक शांति हेतु ईश्वर की शरण में जाता है। धार्मिक कार्य में रूचि बढ़ती है, जीवन सुखमय और आध्यात्म की ओर अग्रसर होता है। दो मुखी रुद्राक्ष को धारण करने के बाद धारण करने वाले व्यक्ति को चन्द्रमा जनित दोषों से मुक्ति व मानसिक शांति की प्राप्ति होती है, और सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।
करियर की चिंता से मुक्ति
दो मुखी रुद्राक्ष व्यक्ति को एकाग्रता प्रदान करता है, करियर का निर्माण करने में यह हमारा मार्ग प्रशस्त करता है, हमें मार्गदर्शन देता है। इस रुद्राक्ष को धारण करने वाला व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। इसे धारण करने के पश्चात करियर की चिंता से मुक्ति मिलती है, दो मुखी रुद्राक्ष करियर तथा व्यवसाय में सफलता दिलाने में सहायक होता है। सरकारी कार्यों में किसी तरह की रूकावटे आ रही हो तो, दो मुखी रुद्राक्ष के प्रभाव से वो रुकावटें अपने आप समाप्त हो जाती है।
कर्ज से मुक्ति प्राप्ति के लिए
दो मुखी रुद्राक्ष के प्रभाव से व्यक्ति का मान-सम्मान बना रहता है, और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। जो लोग रुपए-पैसे की तंगी से जूझ रहे है तथा कर्ज जैसी स्थिति का सामना कर रहे है, उन्हें इस रुद्राक्ष के प्रभाव से कर्ज से निजात मिलती है, दो मुखी रुद्राक्ष में शिव तथा पार्वती की शक्ति समाहित होती है, जिनका लाभ मनुष्य को मिलता है। इसलिए बिना संकोच इस रुद्राक्ष को अवश्य धारण करना चाहिए। दो मुखी रुद्राक्ष को धारण करने के बाद आय के नवीन स्रोत प्राप्त होते है और कामकाज में अच्छे पैमाने पर लाभ होता है। व्यक्ति को कर्ज से मुक्ति मिलती है|
दाम्पत्य जीवन की मधुरता के लिए
दो मुखी रुद्राक्ष के प्रभाव से दाम्पत्य जीवन में आ रही बाधाओं से मुक्ति मिलती है, और दाम्पत्य जीवन मधुर बना रहता है| पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है। परस्पर रिश्तों में जो भी अनबन है या जो जातक अपने दाम्पत्य जीवन से नाखुश हैं, पति-पत्नी के बीच वैचारिक मतभेद उत्पन्न हो रहे हैं, अलगाव की स्थिति उत्पन्न हो रही है, तो ऐसे नाजुक समय का सामना करने से बचने के लिए तथा अपने दाम्पत्य जीवन में प्रेम रस भरने के लिए दो मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए।