2019 शारदीय नवरात्री विशेष- मान्यता, कथा एवं पूजा विधि।

By: Future Point | 28-Aug-2019
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2019 शारदीय नवरात्री विशेष- मान्यता, कथा एवं पूजा विधि।

हमारे हिन्दू शास्त्र में नवरात्रि का पर्व देवी शक्ति मां दुर्गा की उपासना का उत्सव होता है, नवरात्रि के नौ दिनों में देवी शक्ति के नौ अलग-अलग रूप की पूजा-आराधना की जाती है. क्या आप जानते हैं कि एक वर्ष में पांच बार नवरात्र आते हैं, चैत्र, आषाढ़, अश्विन, पौष और माघ नवरात्र. इनमें चैत्र और अश्विन यानि शारदीय नवरात्रि को ही मुख्य माना गया है. इसके अलावा आषाढ़, पौष और माघ गुप्त नवरात्रि होती है. शारदीय नवरात्रि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनायी जाती है। शरद ऋतु में आगमन के कारण ही इसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है. इस वर्ष 2019 में शारदीय नवरात्री 29 सितम्बर से प्रारंभ हो रही है।

नवरात्री की पौराणिक मान्यता-

शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि में ही भगवान श्रीराम ने देवी शक्ति की आराधना कर दुष्ट राक्षस रावण का वध किया था और समाज को यह संदेश दिया था कि बुराई पर हमेशा अच्छाई की जीत होती है।


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नवरात्रि से संबंधित पौराणिक कथा-

  • पौराणिक कथा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि महिषासुर नामक राक्षस ब्रह्मा जी का बड़ा भक्त था, उसकी भक्ति को देखकर शृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी प्रसन्न हो गए और उसे यह वरदान दे दिया कि कोई देव, दानव या पुरुष उसे मार नहीं पाएगा, इस वरदान को पाकर महिषासुर के अंदर अहंकार की ज्वाला भड़क उठी, वह तीनों लोकों में अपना आतंक मचाने लगा, इस बात से तंग आकर ब्रह्मा, विष्णु, महेश के साथ सभी देवताओं ने मिलकर माँ शक्ति के रूप में दुर्गा को जन्म दिया, कहते हैं कि माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक भयंकर युद्ध हुआ और दसवें दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया, अतः इस दिन को अच्छाई पर बुराई की जीत के रूप में भी मनाया जाता है।
  • एक दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार त्रेता युग में भगवान राम ने लंका पर आक्रमण करने से पहले शक्ति की देवी माँ भगवती की आराधना की थी, उन्होंने नौ दिनों तक माता की पूजा की, उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माँ स्वयं उनके सामने प्रकट हो गईं, उन्होंने श्रीराम को विजय प्राप्ति का आशीर्वाद दिया, और दसवें दिन भगवान राम ने अधर्मी रावण को परास्त कर उसका वध कर लंका पर विजय प्राप्त की इसलिए इस दिन को विजय दशमी के रूप में भी जाना जाता है।

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नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का विधान-

  • दिन 1 – माँ शैलपुत्री पूजा – यह देवी दुर्गा के नौ रूपों में से प्रथम रूप है, मां शैलपुत्री चंद्रमा को दर्शाती हैं और इनकी पूजा से चंद्रमा से संबंधित दोष समाप्त हो जाते हैं।
  • दिन 2 – माँ ब्रह्मचारिणी पूजा – ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार देवी ब्रह्मचारिणी मंगल ग्रह को नियंत्रित करती हैं, अतः ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा से मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
  • दिन 3 – माँ चंद्रघंटा पूजा – देवी चंद्रघण्टा शुक्र ग्रह को नियंत्रित करती हैं, अतः चन्द्रघण्टा देवी की पूजा से शुक्र ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
  • दिन 4 – माँ कूष्मांडा पूजा – माँ कूष्माण्डा सूर्य का मार्गदर्शन करती हैं अतः इनकी पूजा से सूर्य के कुप्रभावों से बचा जा सकता है।
  • दिन 5 – माँ स्कंदमाता पूजा – देवी स्कंदमाता बुध ग्रह को नियंत्रित करती हैं, अतः स्कन्दमाता देवी की पूजा से बुध ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
  • दिन 6 – माँ कात्यायनी पूजा – देवी कात्यायनी बृहस्पति ग्रह को नियंत्रित करती हैं, अतः कात्यायनी देवी की पूजा से बृहस्पति के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
  • दिन 7 – माँ कालरात्रि पूजा – देवी कालरात्रि शनि ग्रह को नियंत्रित करती हैं, अतः कालरात्रि देवी की पूजा से शनि के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
  • दिन 8 – माँ महागौरी पूजा – देवी महागौरी राहु ग्रह को नियंत्रित करती हैं, अतः महागौरी देवी की पूजा से राहु के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
  • दिन 9 – माँ सिद्धिदात्री पूजा – देवी सिद्धिदात्री केतु ग्रह को नियंत्रित करती हैं, अतः सिद्धिदात्री देवी की पूजा से केतु के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

नवरात्रि की पूजा विधि-

  • सर्वप्रथम सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें।
  • इसके पश्चात पूजा की थाल सजाएँ।
  • माँ दुर्गा जी की प्रतिमा को लाल रंग के वस्त्र में रखें।
  • मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज बोयें और नवमी तक प्रति दिन पानी का छिड़काव करें।
  • पूर्ण विधि के अनुसार शुभ मुहूर्त में कलश को स्थापित करें, इसमें पहले कलश को गंगा जल से भरें, उसके मुख पर आम की पत्तियाँ लगाएं और उपर नारियल रखें।
  • कलश को लाल कपड़े से लपेंटे और कलावा के माध्यम से उसे बाँधें, अब इसे मिट्टी के बर्तन के पास रख दें।
  • फूल, कपूर, अगरबत्ती, ज्योत के साथ पंचोपचार पूजा करें।
  • नौ दिनों तक माँ दुर्गा से संबंधित मंत्र का जाप करें और माता का स्वागत कर उनसे सुख-समृद्धि की कामना करें।
  • अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों (पूड़ी, चना, हलवा) का भोग लगाएं।
  • आखिरी दिन दुर्गा के पूजा के बाद घट विसर्जन करें इसमें माँ की आरती गाएं, उन्हें फूल, चावल चढ़ाएं और बेदी से कलश को उठाएं।

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नवरात्रि में नौ रंगों का महत्व-

नवरात्रि के समय हर दिन का एक रंग तय होता है ऐसी मान्यता है कि इन रंगों का उपयोग करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

  1. प्रतिपदा- पीला
  2. द्वितीया- हरा
  3. तृतीया- भूरा
  4. चतुर्थी- नारंगी
  5. पंचमी- सफेद
  6. षष्टी- लाल
  7. सप्तमी- नीला
  8. अष्टमी- गुलाबी
  9. नवमी- बैंगनी

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