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चंद्र ग्रहण राशिफल (27-28 जुलाई 2018)

चंद्र ग्रहण राशिफल (27-28 जुलाई 2018)

Rekha Kalpdev
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भारत में 27-28 जुलाई, 2018 की रात को पूर्ण चंद्रग्रहण देख सकेंगे। 27-28 जुलाई को रात 22:44 बजे से पूर्ण चंद्र ग्रहण शुरू होगा, जो मध्यरात्रि के बाद अगले दिन प्रात: 04:58 बजे तक देखा जा सकेगा। पूर्ण चंद्र ग्रहण करीब 6 घंटे 14 मिनट तक बना रहेगा। दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, एशिया, आस्ट्रेलिया, भारत में इस चंद्र ग्रहण को इसकी पूर्णता में देखा जा सकेगा। चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण हमेशा साथ-साथ होते हैं तथा सूर्य ग्रहण से दो सप्ताह पूर्व चंद्र ग्रहण होता है। 27-28 जुलाई को होने वाला चंद्र ग्रहण, 13 जुलाई 2018 को होने वाले सूर्य ग्रहण से संबद्ध है। वर्ष 2018 में पड़ने वाला यह दूसरा और अंतिम चंद्रग्रहण होगा।

ग्रहण का समय - 22:44 रात्रि से 04:58 मिनट तक रहेगा, कुल 6 घंटे 14 मिनट का ग्रहण रहेगा।

ग्रहण किन स्थानों में दिखाई देगा - दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, एशिया, आस्ट्रेलिया, भारत।

जिस भी राशि के जातक के लिए ग्रहण का अशुभ फल लिखा हुआ है उसे विशेष रुप से जाप, पाठ, ग्रहण शान्ति तथा दानादि द्वारा ग्रहण के अनिष्ट प्रभाव को दूर करना चाहिए। इसके अलावा ग्रहण के समय औषधि स्नान से भी अनिष्ट की शांति होती है। मेष से मीन तक बारह राशियों के लिए ग्रहण का निम्न फल रहेगा-

मेष राशि

आपके लिए यह ग्रहण लाभ दिलाने वाला तथा कार्यों को सिद्ध करने वाला हो सकता है। कार्यक्षेत्र में मेहनत और लगन में किसी प्रकार की कमी न करें।

वृष राशि

धन लाभ कराने वाला हो सकता है और जातक की उन्नति के द्वार भी खुल सकते हैं। भाग्य के सहयोग से रुके हुए कार्य पूरे होंगे।

मिथुन राशि

इन जातकों के लिए यह ग्रहण धन हानि कराने वाला हो सकता है। जातक यात्राएँ भी कर सकता है। अप्रत्याशित घटनाएं आपकी परेशानियां बढ़ाएंगी। आशा के विपरीत कुछ क्षेत्रॊं से लाभ प्राप्त हो सकता है।

कर्क राशि

शारीरिक कष्ट देने वाला हो सकता है। गुप्तरोग हो सकते हैं अथवा दुर्घटना आदि के योग भी बन सकते हैं इसलिए सतर्क रहने की आवश्यकता है। बुरे प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है।

सिंह राशि

यह ग्रहण धन हानि देने वाला हो सकता है और अन्य कुछ चिन्ताएँ भी व्यक्ति को घेरे रह सकती हैं। रोग और विरोधी कष्ट का कारण बनेंगे। एहतियात रखनी होगी।

कन्या राशि

यह ग्रहण धन लाभ देने वाला हो सकता है और सुख देने वाला भी हो सकता है। पारिवारिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

तुला राशि

यह ग्रहण स्वास्थ्य संबंधी विकार उत्पन्न करने वाला हो सकता है। किसी भी प्रकार से कष्ट या किसी से भय उत्पन्न हो सकता है। संघर्ष भी सामने आ सकते हैं जिनसे सावधानी से निपटना चाहिए।

वृश्चिक राशि

यह ग्रहण चिन्ताएँ पैदा करने वाला हो सकता है और संतान संबंधी कष्ट भी हो सकते हैं। शिक्षा और अध्ययन कार्यों में लगे जातकों को एकाग्रता की कमी का अनुभव होगा।

धनु राशि

यह ग्रहण साधारण सा लाभ देने वाला कहा जा सकता है लेकिन साथ ही खर्चे भी बरकरार रह सकते हैं। प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष शत्रुओं से भय बना रह सकता है।

मकर राशि

जीवनसाथी से संबंधित परेशानियाँ लाने वाला हो सकता है। आपको मानसिक कष्ट झेलना पड़ सकता है। सेहत पर ध्यान रखें साथ ही धन हानि की भी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। व्यर्थ का तनाव, चिंता और उलझनों से भरा समय रहेगा।

कुंभ राशि

यह ग्रहण रोगादि उत्पन्न करने वाला हो सकता है। गुप्त चिन्ताएँ बनी रह सकती है और जीवन में कुछ संघर्षों से भी सामना हो सकता है। दूरस्थ यात्राएं हानि और सेहत में कमी का कारण बन सकती हैं। विदेश में रहने वालों को अपना विशेष ध्यान रखना होगा।

मीन राशि

यह ग्रहण खर्चे बढ़ाने वाला हो सकता है और कार्यों में विलम्ब कराने वाला हो सकता है। मित्रों से संबंध प्रभावित हो सकते हैं। इस सप्ताह यात्राओं को स्थगित करना ही लाभकारी रहेगा।

सभी राशि के जातक ग्रहण काल में शुभ फल पाने के लिए चन्द्रधारी भगवान शिव की पूजा अर्चना करें, एवं चंद्र ग्रहण के दौरान ‘ॐ नम: शिवाय” मंत्र का जाप करें। ग्रहण के प्रभाव से इन राशि के जातकों का काम तो होगा लेकिन इसमें बाधाएं आने के संकेत हैं।

ग्रहण काल में करने वाले कार्य और निषिद्ध कार्य

  • ग्रहण के सूतक तथा ग्रहण के समय में स्नान, दान, जप-पाठ, मन्त्र, स्तोत्र-पाठ, मंत्र-सिद्धि, तीर्थ स्नान, ध्यान, हवनादि शुभ कामों का सम्पादन करना कल्याणकारी होता है। आस्थावान लोगों को 31 जनवरी को सूर्यास्त से पूर्व ही अपनी राशि अनुसार अन्न, जल, चावल, सफेद वस्त्र, फलों आदि दान योग्य वस्तुओं का संग्रह करके संकल्प कर लेना चाहिए। अगले दिन सुबह दुबारा स्नान करके ब्राह्मण को दान देना चाहिए।
  • सूतक तथा ग्रहण काल में मूर्त्ति स्पर्श, अनावश्यक खाना-पीना, मैथुन, सोना, तैलाभ्यंग वर्जित माना गया है। झूठ, कपटादि, व्यर्थ अलाप, मूत्र-पुरुषोत्सर्ग, नाखून काटने आदि से परहेज करना चाहिए। वृद्ध, रोगी, बालक तथा गर्भवती महिलाओं को आवश्यकतानुसार भोजन अथवा दवाई आदि लेने में किसी प्रकार का कोई दोष नहीं माना गया है।
  • ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को सब्जी काटना, पापड़ सेंकना आदि उत्तेजित कार्यों से परहेज करना चाहिए और धार्मिक ग्रंथ का पाठ करना चाहिए। इस समय गर्भवती महिलाओं को मन को प्रसन्न रखना चाहिए क्योंकि ऎसा करने से होने वाली संतान स्वस्थ तथा सद्गुणी होगी।
  • हरिद्वार, प्रयाग, वाराणसी आदि तीर्थों पर ग्रहण समय में स्नान का विशेष माहात्म्य माना गया है।
  • ग्रहण में स्पर्श के समय स्नान, मध्य में होम और देवपूजन और ग्रहण मोक्ष के समय श्राद्ध और अन्न, वस्त्र, धनादि का दान और सर्वमुक्त होने पर स्नान करें – यही क्रम है।
  • ग्रहण अथवा सूतक से पहले ही दूध, दही, अचार, चटनी, मुरब्बे आदि में कृशातृण रख देना चाहिए, ये श्रेयस्कर होता है क्योंकि ऎसा करने से ये दूषित नहीं होते। जो सूखे खाद्य पदार्थ हैं उनमें कुशा डालना आवश्यक नहीं है। रोग शान्ति के लिए ग्रहण काल में “श्रीमहामृत्युंजय मंत्र” का जाप करना शुभ होता है।
  • ग्रहण पर विशेष प्रयोग – चाँदी अथवा कांसे की कटोरी में घी भरकर उसमें चाँदी का सिक्का मंत्रपूर्वक डालकर अपना मुँह देखकर छायापात्र मंत्र पढ़ना चाहिए और ग्रहण की समाप्ति पर वस्त्र, फल और दक्षिणा सहित ब्राह्मण को दान करने से रोग से निवृति होती है।

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