Holika Dahan 2024: होली क्यों जलाई जाती है? होलिका दहन रात्रि में क्या क्या किया जाता है?

By: Acharya Rekha Kalpdev | 26-Feb-2024
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Holika Dahan 2024: होली क्यों जलाई जाती है? होलिका दहन रात्रि में क्या क्या किया जाता है?

Holika Dahan 2024: प्रकृति के पंचतत्वों में अग्नि तत्व प्रधान है। अग्नि को देव स्थान दिया गया है। हवन, यज्ञ और शुभ कार्यों में अग्नि को समिधा और भोग अर्पित कर देवताओं को प्रसन्न किया जाता है। सनातन धर्म में रात्रि में अग्नि आधारित दो ही पर्व है। पहला पर्व मार्च में फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष कि पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन के रूप में मनाया जाता है और दूसरा कार्तिक मास की अमावस्या को दीपावली के रूप में मनाया जाता है। दीपावली की रात ऐश्वर्य, ऊर्जा और मन्त्र सिद्धि की रात्रि है। होलिका दहन की रात्रि भी ऊर्जा और मन्त्र सिद्धि कि रात्रि है। होलिका दहन की रात्रि पर नकारात्मक सोच और मन की अशुद्धता का दहन करने की रात्रि है। इस दिन मन को शुद्ध करने के लिए दूषित विचारधारा को अग्नि में स्वाह कर दिया जाता है। सृष्टि की सभी संस्कृतियों में अग्नि पूजन किया जाता है। अग्नि पूजन में खेती कि वस्तुओं का भोग दिया जाता है। यह सारा संसार पेट की अग्नि को शांत करने के लिए काम कर रहा है। यह सारा संसार अग्नि से ही चलायमान है। पेट की अग्नि को जठराग्नि के नाम से जाना जाता है। दूसरी अग्नि तप की अग्नि है। तीसरी अग्नि कर्म की अग्नि है और चौथी अग्नि सूर्य की अग्नि है। इन चार प्रकार की अग्नियों से यह संसार चल रहा है।

होलिका दहन के अलाव में व्यक्ति को अपनी कटु यादों को जलाना चाहिए, पुराने दुखों को भुलाकर एक नए जीवन की शुरुआत करनी चाहिए। होलिका दहन में दुःख, दरिद्रता, वासना और दोष सभी को स्वाहा करना चाहिए। होलिका दहन में साधक को अपने विकार, दुःख और क्लेश सभी को अग्नि में स्वाहा कर देना चाहिए। आज जीवन में तनाव का कारण कटु यादें और दुःख है। इन दोनों को होली की अग्नि में भस्म कर देना चाहिए। मन की दूषित वृत्तियों को मन के विकारों को अग्नि को समर्पित करने का पर्व है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने अवगुणों और दोषों को होली की अग्नि में स्वाहा करना चाहिए।

भौतिक माया के रंग से बाहर आकर, ज्ञान और भक्ति के रंग में रंग जाना चाहिए। ज्ञानरूपी रंग में डूबने पर व्यक्ति का एक नया रंग सामने आता है। परमात्मा के रंग में डूब जाना ही असली होली मनाना है। परमात्मा के रंग में डूब जाने वाला व्यक्ति ही असली योगी है। माया के रंग में जो रंगा वो भोगी बना। वास्तव में होली पर व्यक्ति को ज्ञान का रंग लगाना चाहिए। जो बीत गया उसे भूलकर जीवन में उत्साह और आनंद की एक नई शुरुआत करना ही होली मनाना है।

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अपने में धर्म और आध्यात्म की अग्नि जलाकर जीवन के हर दिन को होली जैसा शुभ बनाया जा सकता है। इस प्रकार जो जीवन शुरू होगा, उसका उत्साह होली के उत्साह से अधिक है। होलिका दहन में मन -मस्तिष्क, अवसाद और मन की अशांति को स्वाहा करना चाहिए।

होलिका दहन में किये जाने वाले उपयोगी उपाय -

अनिद्रा को दूर करने के उपाय

आधुनिक समय में तनाव और नेगेटिव ऊर्जा सभी के मन-मस्तिष्क में भरी पड़ी है। जिसके कारण तनाव इतना अधिक रहता है कि तनाव से नींद नहीं आती है। लोग रात रात भर जागते है। होली की राख का उपयोग कर अनेक चमत्कारी उपाय कर जीवन की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।

घर के छोटे बच्चों को नजर से बचने का उपाय

आपके घर में यदि बच्चों को बार बार नजर दोष परेशान करता रहता है तो यह उपाय आपको एक बार करके अवश्य देखना चाहिए। नजर दोष से पीड़ित होने पर बच्चा दूध पचाता नहीं है, उसकी पसली चलने लगती है, स्वभाव चिड़चिड़ा रहता है। आयु के अनुसार शरीर का विकास नहीं होता है इन सब समस्याओं में बालक को होलिका दहन में बची हुई राख का प्रयोग किया जा सकता है। होली दहन के अगली सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जाकर होली की भस्म ले जाए और उसे एक डब्बे में संभल कर रख लें। इस राख कि एक चुटकी बच्चे की जीभ पर चटाये और इसका एक टीका बच्चे के माथे और गले पर लगाएं।

होली की राख को एक साफ़ कपडे में छानकर शुद्ध कर लें। राख में गंगाजल, कपूर, चन्दन लकड़ी या चंदन लेप बनाकर रख लें। इसे एक बॉक्स में रख लें। स्नान से पूर्व इसका लेप माथे पर लगाए, कुछ समय रख कर धो दें। लगातार इसका प्रयोग करने से मानसिक रोगों में कमी होगी और निद्रा रोग ठीक होंगे।


होलिका दहन पर्व साल 2024 में 24 मार्च, रविवार के दिन मनाया जाएगा।

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होलिका दहन पूजन मुहूर्त |  Holika Dahan Pujan Muhurat

24 मार्च को होलिका दहन के दिन भद्रा 09:55 से लेकर 23:13 तक लग रही है। इस दिन भद्रा पूँछ काल समय सांयकाल में 06:33 बजे से लेकर 07:53 तक का रहेगा। भद्रा तिथि का मुख का समय इस दिन 07:53 से शुरू होकर रात्रि में 10:06 बजे तक का रहेगा। ऐसे में होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त भद्रा पूंछ का समय रहेगा। भद्रा पूँछ काल 06:33 बजे से लेकर 07:53 तक के समय में होलिका दहन करना शुभ रहेगा।

होलिका दहन की विधि | Holika Dahan Ki Vidhi

  • होलिका दहन के दिन स्नानादि कार्यों से मुक्त होकर परिवार के सभी व्यक्ति नए वस्त्र धारण करें।
  • पूजा मुहूर्त से पहले पूजा की साड़ी सामग्री एक स्थान पर एकत्रित कर लें। सामग्री में (रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत, गुड़, बताशे, गुलाल, जट्टा नारियल, सात तरह के धान्य- जौ, तिल, चावल, मूंग, कंगनी, चना, और गेहूं) रख लें। साथ में गेंहूं की बालियां या हरे चने की बालियां साथ में रख लें और एक लोटे में पानी रख लें।
  • होलिका दहन की लकड़ियां जला दें।
  • होलिका दहन से कुछ दिन पूर्व ही होलिका और प्रह्लाद की गाय के गोबर से प्रतिमा बनाकर सूखा लें। इसी प्रतिमा को होलिका दहन में रखना है।
  • होली में अग्नि देने के बाद अग्नि देव को सारे धान्य अर्पित करें, मिठाईया और फल भी होली की अग्नि में चढ़ाएं।
  • होलिका देवी कि धूप, दीप और फूल से पूजा करें।
  • होलिका जी का पूजन करने के बाद होलिका के चारों ओर 7 बार परिक्रमा करें।
  • भगवान नरसिंह देव भगवान् जी की भी पूजा करें।

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होलिका दहन के दिन उपाय | Holika Dahan Ke Din Upay

  • होलिका दहन के दिन सांयकाल में अपने सिर से लेकर पैर तक सफ़ेद के सूत के धागे से सात बार नाप कर रख लें। होलिका दहन के बाद इस सूत के धागे को जल्दी होली में डाल दें। ऐसा कारण से नजर दोष दूर होता है।
  • होलिका दहन के बाद होलिका की तीन बार परिक्रमा करने से नजर दोष दूर होता है।
  • अपने परिवार को एक साथ खड़ा करें, और एक मिटटी के बर्तन में 5 बताशे, 7 लौंग लेकर सबके सिर के चारों और ७ बार घुमा दें। घुमाने के बाद इसे जलती अग्नि में फेंक दें। इससे परिवार पर किसी भी तरह की कोई तंत्र दोष होगा, वह दूर होता है।
  • जल्दी हुई होलिका कि परिक्रमा करते हुए देवी लक्ष्मी जी का मंत्र ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ।। के मन्त्र का 108 बार जाप लगाएं। और देवी होलिका से धन स्थिति को बेहतर करने की विनती करें।
  • होलिका दहन के दिन पति पत्नी दोनों गोमती चक्र गले में धारण करें। इससे वैवाहिक जीवन में सौहार्द आता है।
  • होली की बूझी हुई राख को रोगी को चटाने और रोगी के माथे पर तिलक लगाने से रोगी जल्द ठीक होता है।
  • जल्दी होली में गेंहू की बालियां जलाने और उसका कुछ भाग घर लाने से घर में साल भर धन धान्य की कमी नहीं रहती है।
  • मिटटी के एक बर्तन में लाल मिर्च के 11 बीज लें। इस घर के सदस्यों के सिर से 7 बार उतारे, और फिर इसे जलती होलिका में डाल दें। ऐसा करें से घर परिवार के रोग, शोक दूर होते है और आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है ।
  • वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाये रखने के लिए यह आवश्यक है कि जिनकी नई नई शादी हुई हो, वह लड़की होलिका दहन के दिन अपने ससुराल में न रहे, अपने मायके में रहें। नए नए वर वधु का अपने ससुराल में होलिका दहन देखना शुभ नहीं माना जाता है। इससे गृहस्थ जीवन को नजर लगाती है और अशुभ होने के योग बनते है।
  • जिन विवाहित महिलाओं का वैवाहिक जीवन अच्छा नहीं चल रहा हो, वो होलिका दहन की अग्नि में अपनी सिन्दूर दानी से एक चुटकी सिन्दूर लेकर डाल दें। और देवी होलिका से कहे कि अपने दाम्पत्य जीवन के खुशहाल रखने की विनती करें।
  • यदि परिवार पर कोई न कोई समस्या आती ही रहती है, बाधाएं पीछा नहीं छोड़ती है तो व्यक्ति को होलिका दहन के दिन जलती होलिका के पास सरसों के तेल का दीपक जलाकर रखें। भगवान् से बाधाएं दूर करने की प्रार्थना करें।
  • जलती होली के सामने ऋण मुक्ति के लिए नरसिहं स्तोत्र का पाठ करें। इससे जल्द ही व्यक्ति ऋण मुक्त होता है।
  • ऑफिस या दूकान न चल रही हो तो दूकान या व्यवसायिक प्रतिष्ठान की नजर उतारकर जलती होली में डालने से प्रतिष्ठान की नजर उतर जाती है। जलती अग्नि में जट्टा वाला नारियल डालते हुए नौकरी की कामना करने से जल्द ही नौकरी के योग बनते है।
  • होली की राख को रोगी के बेड के पास छिड़कने से रोगी जल्द ठीक होने लगता है।
  • जीवन में सफलता प्राप्ति की कामना से जलती होली में नारियल, पान और सुपारी अर्पित करना चाहिए। इससे सफलता के मार्ग खुलते है।
  • यदि किसी घर में घर कलेश रहता हो, सुख शांति की कमी हो तो व्यक्ति को जलती होली में जौ का आटा अर्पित करना चाहिए।
  • होली की रख को किसी रुमाल में कुछ सिक्कों के साथ बांधकर अपने धन के बॉक्स में रखें, इससे घर में धन का आगमन बना रहता है।
  • होलिका दहन के दिन पान का एक पत्ता लेकर उस पर सुपारी और हल्दी की गाँठ रखकर शिवलिंग पर चढ़ाकर घर आ जाए, आते हुए वापस मुड़कर न देखें।
  • होलिका दहन की रात्रि में धन लक्ष्मी जी के लिए ॐ नमो धनदाय स्वाहा का सारी रात जाप करने से धन सम्बंधित समस्याएं दूर होती है।
  • होलिका दहन की रात्रि में पीपल के पेड़ नीचे मध्य रात्रि में सरसों के तेल का दीपक जलाने और सात परिक्रमा करने से जीवन में आई बाधाएं दूर होती है।
  • होलिका की बूझी राख को सुबह लेकर आये, राख का कुछ अंश घर के सारे कमरों और कोनों में फैल दें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास बना रहता है।
  • होलिका की राख को लेकर कुछ अंश एक मिटटी के लोटे में डालकर भगवान् शिवलिंग पर अभिषेक करें।
  • नजर दोष से बचने के लिए एक चांदी की छोटी डब्बी में होली की राख को रख कर गले में धारण करें। इसे ताबीज की तरह गले में धारण करें।

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