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शनि-गुरु ने बदली चाल - बदलेगा जीवन

शनि-गुरु ने बदली चाल - बदलेगा जीवन

By: Rekha Kalpdev | 17-Mar-2018
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शनि 18 अप्रैल 2018 से 06 सितम्बर 2018 के मध्य वक्री अवस्था में रहेंगे, शनि का वक्री होना एक बड़ा बद्लाव हैं। इससे पूर्व देव गुरु बृहस्पति भी 09 मार्च 2018 से वक्री अवस्था प्राप्त कर चुके हैं। गुरु ग्रह की यह स्थिति 10 जुलाई 2018 तक रहेगी। नौ ग्रहों में न्यायकारक ग्रह शनि और धर्मकारक गुरु दोनों ही विशेष स्थान रखते हैं। दोनों का इस समय वक्री अवस्था में रहना नि:संदेह न्याय और धर्म से जुड़े विषयों के लिए निर्णायक रहेगा। धार्मिक आड़ंबर युक्त बाबाओं और धर्म का दुरुपयोग करने वालों को सलाखों के पीछे जाना पड़ सकता हैं। राममंदिर बाबरी मस्जिद जैसे- धर्म और न्याय से जुड़े मसलों का हल निकलेगा। इस प्रकार के बड़े राष्ट्रीय विवाद अपने अंतिम चरण में होंगे। ग्रह बदलते है तो जीवन की दिशा और दशा दोनों में अवश्य बदलाव आता हैं। हम सभी का जीवन ग्रहों के द्वारा ही संचालित हैं। ग्रहों का राशि परिवर्तन हों या फिर ग्रहों का मार्गी से वक्री गति में गोचर करना बड़ी घटनाओं के घटित होने के कारण बनता हैं।

किसी ग्रह के वक्री होने का अर्थ अपनी गति से वक्र (उल्टी) गति में होना है। जब कोई ग्रह अपनी सामान्य गति अर्थात मार्गी न होकर उल्टी गति में भ्रमण करता हुआ प्रतीत होता है तो इस अवस्था को वक्री अवस्था कहा जाता है। उदाहरण के लिए शनि 18 अप्रैल 2018 को 15 - 02 अंश पर गोचर कर रहें होंगे, इस दिन वक्री गति में जाने के बाद शनि के अंशों में वृद्धि न होकर कमी होगी और अंशों की यह गिरावट 06 सितम्बर तक रहेगी। तब तक की शनि फिर से मार्गी होकर गोचर नहीं करने लग जाते हैं। यह स्थिति ठीक उसी प्रकार हैं जिस प्रकार कोई गाड़ी पहले सीधी गति में आगे बढ़ रही थी, वही गाड़ी रिवर्स गेयर में पीछॆ की ओर चलने लगे हैं।


Shani Guru

वर्तमान में शनि धनु राशि में विचरण कर रहे हैं, कन्या एवं वृषभ राशि वाले जातकों की शनि ढ़ैय्या चल रही हैं तो वृश्चिक राशि वालों का शनि साढ़ेसाती का अंतिम चरण, धनु राशि वालों का दूसरा चरण और मकर राशि वालों पर शनि साढ़ेसाती का अंतिम चरण प्रभावी हैं। साढ़ेसाती और शनि साढ़ेसाती का यह प्रभाव 2020 जनवरी तक रहेगा। इसके अतिरिक्त गुरु ग्रह इस समय तुला राशि में गोचरस्थ हैं।

शनि एवं गुरु के राशि परिवर्तन के साथ-साथ इनके मार्गी या वक्री होने का भी प्रत्येक जातक पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। आज इस आलेख के माध्यम से हम आपको बताने जा रहे हैं कि विभिन्न राशियों के लिए शनि और गुरु का वक्री होना, कैसा रहने वाला -

मेष राशि

दशमेश और एकादशेश शनि का गोचर नवम भाव पर वक्री अवस्था में हो रहा हैं। ऐसे में नौकरी में बदलाव के विचारों का त्याग करें। कार्यक्षेत्र के सिलसिले में कई यात्राएं होंगी। यात्राओं करने से पूर्व नियोजन अवश्य करें। कार्यक्षेत्र में परेशानियां बढ़ सकती हैं। धन निवेश करने से बचें, अन्यथा धन हानि हो सकती हैं। स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें। कार्यभार में कमी होगी, ऋणों में कमी होगीं।

गुरु - सेहत में कमी रहेगी। संतान संबधी चिंता रहेगी। महत्वाकांक्षाओं में बढ़ोतरी होगी। दुर्घटना का भय रहेगा। पक विवादों के बढ़ने की संभावना। भाग्य साथ नहीं देगा। व्यय पर नियंत्रण रखना होगा।

वृष राशि

शनि आपके लिए नवमेश व दशमेश होकर योगकारक ग्रह हैं। वर्तमान में शनि की स्थिति आपके अष्टम भाव पर हैं। कार्यक्षेत्र में व्यर्थ की बाधाओं में कमी होगी, अप्रत्याशित घट्नाओं से भी राहत मिलेगी, इससे पूर्व जो कार्यभार आप पर बढ़ रहा था, उसमें कमी होगी। निराशा और तनाव की स्थिति बन सकती हैं। पैतॄक विवाद फिर से खड़े हो सकते हैं। वाणी पर संयम रखें। छात्र तनाव और दबाव महसूस करेंगे।

गुरु - इससे पूर्व चले आ रहे रोगों में कमी होगी, कार्यक्षेत्र में अपनी योग्यता दिखाने के अवसर बनेंगे। धर्म विषयों पर व्यय बढ़ सकते हैं। परिवार में कोई शुभ कार्य निश्चित हों, स्थगित हो सकता हैं। व्ययों पर नियंत्रण बनाए रखें। व्यवसाय की अपेक्षा नौकरी में अधिक लाभ होगा।

मिथुन राशि

शनि आपके लिए अष्टमेश और नवमेश हैं तथा अभी शनि आपके सप्तम भाव पर गोचर कर रहे हैं। इससे आपके वैवाहिक जीवन की सुख-शांति में बढ़ोतरी होगी। कोई नया व्यवसाय शुरु कर सकते हैं। धन कमाने के लिए समय अनुकूल, अविवाहितों का विवाह तय हो सकता हैं। धर्म-कर्म कार्यों में अधिक से अधिक हिस्सा लेंगे। छात्रवर्ग की पढ़ाई में उन्नति और पढ़ाई के क्षेत्र में नई दिशाएं प्राप्त होंगी।

गुरु - शिक्षा और संतान से जुड़े विषय सिर उठायेंगे। संतान सुख में बधाएं रहेंगी, गर्भवती स्त्रियां विशेष सावधानी बरतें। आय क्षेत्रों में उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती हैं। स्वभाव में विनम्रता बनाए रखें। इसके प्रभाव से स्वास्थ्य में कुछ विपरीत परिणाम रहेंगे, अत: स्वास्थ्य का ध्यान रखें। विद्यार्थियों की पढ़ाई में रुकावटें, विवाह का विलंब दूर होगा। पेट संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

कर्क राशि

शनि - सप्तमेश व अष्टमेश शनि का गोचर इस समय आपके छ्ठे भाव पर हैं। यह समय देश विदेश की यात्राओं के लिए सर्वोत्तम है। रुका हुआ धन वापस आएगा। नौकरी के अलावा कुछ पार्ट टाइम काम भी शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा संतान की तरफ से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है। परंतु आपको अपने व्यर्थ के खर्चों पर नियंत्रण रखना होगा अन्यथा धनाभाव की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

गुरु - माता के साथ रिश्ते मजबूत होंगे। भूमि या जायदाद से संबंधित लेन-देन में सफलता दिलाएगा और आय के नए स्रोत बनेंगे। आपके जीवनसाथी के कारोबार में वृद्धि होगी। विद्यार्थियों के लिए यह समय किसी भी प्रतियोगिता में सफलता के लिए उत्तम है। अगर आप विद्यार्थी हैं तो आपको किसी भी प्रकार की प्रतियोगिता में सफलता प्राप्त होगी। माता की सेहत के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है।


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सिंह राशि

शनि आपके लिए छठे व सातवें भाव के स्वामी का पंचम भाव पर गोचर अवधि में आपको आय में नियमितता बनाए रखने के लिए सामान्य से अधिक प्रयास करने होंगे। दाम्पत्य जीवन में स्नेह और सहयोग बनाए रखने के लिए अपनी ओर से प्रयास करने होंगे। विवाह योग्य व्यक्तियों का विवाह निर्धारित हो सकता है। साझेदारों के साथ रिश्तें मधुर बनाए रखें। मेहनत और निष्ठा बनाए रखने पर आय संचय में परिवर्तित होगी।

गुरु - मिलाजुला प्रभाव रहेगा। स्वयं के प्रयासों से उच्च पद की प्राप्ति। भाग्यवादी बनने से बचें। पुरुषार्थी बने रहने पर ही, भाग्य साथ देगा। धन और उच्च पद की प्राप्ति के उपरांत अंहकार से बचें। दांपत्य जीवन में विनम्र बने रहेंगे। बड़े भाई-बहनों के साथ आय के विषय दिक्कतें दे सकते हैं।

कन्या राशि

आपके लिए शनि पंचमेश व षष्ठेश है। चतुर्थ भाव पर गोचरस्थ हैं। आपको अपनी माता के स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। मानसिक सुख-शांति की कमी का अनुभव होगा। नौकरी और कारोबार में सफलता बनाए रखना सहज नहीं होगा। अचानक से स्वास्थ्य में कमी की स्थिति बन सकती हैं, सावधानी बरतें। मानसिक असंतुष्टि की स्थिति बनी हुई हैं। भूमि-भवन से जुड़ी योजनाओं में व्यर्थ की बाधाएं आ सकती हैं।

गुरु - संचित धन में कमी संभावित हैं। ऋण लेन-देन के कार्यों को इस समय स्थगित करना ही समझदारी रहेगी। वाणी में उदारता, कुशलता और वाकपटुता रहेगी। ससुराल पक्ष से रिश्ते बिगड़ सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मिलित होने वाले छात्रों की अध्ययन में रुचि कम रहेगी।

तुला राशि

चतुर्थेश व पंचमेश शनि का विचरण आपके तीसरे भाव पर हैं, परन्तु इस समय शनि वक्री हैं। पराक्रम में वृद्धि होगी, वाहन चलाते सावधानी बरतें। सोचे गए काम अब सार्थक होंगे तथा इच्छा पूर्ति होगी। इस समय आप पर साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा हैं, अत: परिणाम मिले जुले रहेंगे। देश विदेश की यात्राएं भी हो सकती है। नकारात्मक विचारों से बचना होगा। स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं, धार्मिक प्रवृर्ति बनी रहेगी।

गुरु - स्वभाविक गुणों को बनाए रखें। सार्वजनिक जीवन में सम्मान की प्राप्ति होगी। लेकिन दूसरी ओर कई मामलों में सही न्याय करने से चुकने से बचें। अपने प्रिय के प्रति पक्षपाती न हों और दूसरों के प्रति ईमानदारी बरतें।

वृश्चिक राशि

शनि आपके लिए तृतीयेश और चतुर्थेश हैं और गोचर में वक्री होकर वाणी भाव पर गोचर कर रहे हैं। वाणी की अस्पष्टता के कारण परिवारिक मतभेद तथा संचित धन में हानि हो सकती है। इस अवधि में वाणी पर नियंत्रण रखने से लाभ होगा। कार्य क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी। तीसरी दृष्टि के कारण माता का सुख प्राप्त होगा। भूमि वाहन मकान आदि की योजनाओं पर कार्य बाधित होगा। आय में वृद्धि होगी।

गुरु - सार्वजनिक जीवन में आपको सम्मान प्राप्त होगा। अन्यों के मामलों में सही न्याय करने से चूक हो सकती है। आप अपने प्रिय के प्रति पक्षपाती हो सकते हैं और दूसरों के प्रति ईमानदारी नहीं बरत पायेंगे। नौकरी पेशा हैं तो कार्यक्षेत्र में सफलता तो मिलेगी कितु वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वाद-विवाद हो सकता है।

धनु राशि

शनि दूसरे व तीसरे भाव के स्वामी हैं। मन में अनावश्यक चिंता बनी रहेगी। कार्यक्षेत्र में उचित निर्णय लेने की शक्ति में कमी के कारण हानि होगी। अवसाद जैसे रोग से कष्ट हो सकता है। दांपत्य जीवन में कलह पूर्ण वातावरण रहेगा। दांपत्य जीवन सुख में नहीं रहेगा। कार्यक्षेत्र में आंशिक सफलता प्राप्त होगी। अधीनस्थ कर्मचारियों के कारण कार्य में हानि हो सकती है। शारीरिक ऊर्जा में कुछ कमी आ सकती है तथा छोटे भाई बहनों से अनबन भी हो सकती है।

गुरु - वक्री होने के दौरान बृहस्पति आपके ग्यारहवें भाव में होगा। इससे नौकरी-पेशा में आपको लाभ मिलेगा। घरेलू जीवन में भी शांति एवं सामंजस्य बना रहेगा। अगर नौकरी पेशा हैं तो कार्यक्षेत्र में सफलता तो मिलेगी कितु सीनियर्स के साथ बहसबाजी हो सकती है, जो नुकसानदेह सिद्ध होगी।


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मकर राशि

लग्नेश व द्वितीय शनि वक्री होने पर आपको आय के नवीन स्रोतों में वृद्धि करेंगे। स्वास्थ्य सुख में कमी। व्ययों की अधिकता रहेगी। लंबी यात्रा का योग बन रहा है। शत्रुओं के कारण धन की हानि हो सकती है। बाहरी स्थान से धन में वृद्धि होगी। संचित धन में वृद्धि होगी। कार्य की सिद्धि के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ेगा। बड़े धन निवेश के लिए समय अनुकूल नहीं हैं।

गुरु - नौकरी-पेशा हैं तो एक-एक करके आपके काम बनते चले जाएंगे। पदोन्नति की भी संभावना बनी हुई है। आपकी दीर्घकाल से रुकी हई इच्छा भी पूर्ण हो पाएगी। इस दौरान आपका मन दान-दक्षिणा में खूब लगेगा। आप किसी तीर्थ यात्रा पर भी जा सकते हैं।

कुंभ राशि

शनि लग्न व बारहवें भाव का स्वामी हैं, इस समय आपके दशम भाव में वक्री होंगे इसके प्रभाव से आप तरक्की पाने के लिए पूरी मेहनत करेंगे। विभिन्न आयाम से आय एवं धन की प्राप्ति होगी। समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होगी। प्रतिष्ठित व्यक्तियों से संबंध होंगे। शरीर स्वस्थ एवम आरोग्य रहेगा। भूमि भवन के क्रय-विक्रय के कार्य किए जा सकते हैं। पुराने मकान की मरम्मत का कार्य किया जा सकता हैं।

गुरु - छात्रों को पढ़ाई में सफलता मिलेगी और अध्यात्म में भी आपकी रुचि जागेगी। साझेदारी में व्यापार करना आपके लिए मुनाफा लाएगा, इसलिए अकेले व्यापार करने से पहले कई बार विचार करें।

मीन राशि

आय एवं व्यय दोनों भावों के स्वामी शनि हैं। अधिक परिश्रम के बावजूद कार्य में मनोनूकुल सफलता प्राप्त नहीं हो पाएगी। पिता को शारीरिक कष्ट हो सकता है। बाहरी स्थान से आय में वृद्धि होगी तथा बाहरी स्थान से संबंध हो सकते हैं। माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है तथा भूमि वाहन आदि सुख में कमी महसूस होगी।

गुरु - गुरु के दशम भाव पर वक्री होने पर आपको अपनी व्यवसायिक प्रतिष्ठा के प्रति चिंता रहेगी। वरिष्ठ अधिकारी आपके विकास में बाधक बनेंगे। लापरवाही और गैरजिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार भी आपकी परेशानियां बढ़ा सकता हैं। वित्तीय नीतियों में बदलाव करना पड़ सकता हैं। माता की सेहत के प्रति सचेत रहें। इस समय संचित धन में भी कमी हो सकती हैं।

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