मोती रत्न से क्या फायदे

By: Future Point | 14-Apr-2018
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मोती रत्न से क्या फायदे

जीवनचक्र के उतार चढाव प्रत्यक्ष रुप से प्रभावित होते हैं। जन्मपत्री में सभी ग्रहों की स्थिति अनुकूल नहीं होती हैं। कुछ ग्रह प्रतिकूल भी होते हैं। जो ग्रह शुभ रुप में स्थित में स्थित होते हैं। उनके रत्न धारण किए जाते है और जो ग्रह शुभ फल देने की स्थिति में नहीं होते हैं उनसे संबंधित वस्तुओं का दान या मंत्र जाप किया जाता हैं। ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव के कारण व्यक्ति को जीवन में अनेकोनेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ता हैं। ग्रहों को शांत करने के लिए ज्योतिष शास्त्रों में अनेक विधियों की जानकारी दी गई हैं। जैसे- रुद्राक्ष, मंत्र, हवन, व्रत और पूजा इत्यादि। इन्ही उपायों में से एक रत्न धारण हैं। रत्न जन्म पत्री के अनुसार धारण किए जाते हैं। मुख्य रुप से नवग्रहों के नवरत्न धारण करने की सलाह दी जाती हैं। प्रत्येक रत्न किसी ने किसी ग्रह से संबंधित होता हैं। चंद्र ग्रह की शुभता प्राप्ति के लिए मोती रत्न धारण किया जाता हैं। मोती रत्न भी सभी धारण नहीं कर सकते हैं। इसके लिए किसी ज्योतिषी से सलाह लेने के बाद ही यह रत्न धारण करना चाहिए। किसी व्यक्ति विशेष के लिए मोती रत्न शुभ रहेगा, और किस राशि के व्यक्ति को इस रत्न को धारण करने से बचना चाहिए। इसकी जानकारी आज हम इस आलेख में दे रहे हैं।

मोती रत्न धारण करने से ज्योतिषीय लाभ

व्यक्ति के मन को समझने के लिए चंद्र ग्रह का विचार किया जाता हैं। मन से जुड़ी समस्याओं और मानसिक स्थिरता के लिए मोती रत्न धारण करना अत्यंत लाभदायक साबित होता हैं। इसे धारण करने से मानसिक सुख-शांति और तनाव में कमी होती हैं। माता से रिश्ते मजबूत होते हैं। साथ ही यह मनोबल को भी बेहतर करने का कार्य करता हैं। चिकित्सा शास्त्र के अनुसार चंद्र के पीडि़त होने पर ही पागलपन जैसे रोग होते हैं इसलिए मोती धारण करने से पूर्व उसकी शुभता की जानकारी लेना लाभदायक रहता हैं। मोती रत्न छॊटे बच्चों को भी पहनाया जा सकता हैं। दूध और दूध से बने पदार्थों से जुड़े कार्यक्षेत्रों तथा चंद्र ग्रह से संबंधित कार्यक्षॆत्रों से अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए भी मोती रत्न को धारण किया जा सकता हैं। ज्योतिष शास्त्र में यह माना जाता हैं कि जिन बालकों की कुंडली में बालारिष्ठ योग निर्मित हो रहा हों तो ऐसे बालकों को मोती रत्न पहनाना उपयोगी रहता हैं। मोती रत्न धारण करने से व्यक्ति में सादगी, पवित्रता और निश्चलता का वास बना रहता हैं।

 

मोती रत्न के अन्य नाम

  • मोती रत्न को मुक्ता, शीशा रत्न और पर्ल के नाम से भी जाना जाता हैं। इस रत्न के बारे में यह कहा जाता हैं कि यह रत्न केवल सफेद रंग में ही पाया जाता हैं जबकि यह गुलाबी, लाल और पीले रंग में भी उपलब्ध हैं।
  • मोती रत्न को कौन कौन सी राशि के व्यक्ति धारण कर सकते हैं।
  • विशेष रुप से मोती कर्क राशि के व्यक्तियों को धारण करना चाहिए।
  • यदि कोई व्यक्ति जल या जल के दूषित होने से होने वाले रोगों के कारण रोगजनित रहता हो, उन सभी व्यक्तियों को मोती रत्न धारण करना चाहिए।
  • इस रत्न को पहनने से मनोबल बेहतर होता हैं। मानसिक तनाव भी यह रत्न दूर करता हैं।
  • जो व्यक्ति अपना जन्म लग्न ना जानते हों, सिर्फ जन्मराशि जानते हों, उन व्यक्तियों को मोती रत्न पहनना चाहिए।

मोती रत्न धारण का चिकित्सा शास्त्र में उपयोग

  • मोती रत्न धारण करने से व्यक्ति को अनिद्रा रोग में राहत मिलती हैं। साथ ही यह रत्न मानसिक शांति भी देता हैं।
  • आंखों से जुड़े रोगों और गर्भाशय से जुड़े रोगों के निवारण के लिए भी मोती रत्न धारण किया जा सकता हैं।
  • मोती, हृदय संबंधित रोगों में मोती रत्न पहनना शुभ रहता हैं।

कैसे धारण करें मोती

मोती की अंगूठी शुक्ल पक्ष के सोमवार को चांदी धातु से निर्मित करायें। मोती धारण करने के लिए भी शुक्ल पक्ष के सोमवार के दिन का चयन करें। प्रात:काल में देव पूजन के पश्चात मोती जडि़त अंगूठी को कच्चे दूध में शुद्ध करें। चंद्र देव का ध्यान करें तथा चंद्र के मंत्रों का कम से कम एक माला जाप करते हुए अंगूठी धारण करें।

मोती के उपरत्न

मान्यता है कि मोती नहीं खरीद पाने की स्थिति में जातक मूनस्टोन, सफेद मूंगा या ओपल भी पहन सकते हैं।


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