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कालसर्प दोष निवारण पूजा – क्यों होता है कालसर्प दोष और कैसे होती है इसकी पूजा।

By: Future Point | 25-May-2019
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कालसर्प दोष निवारण पूजा – क्यों होता है कालसर्प दोष और कैसे होती है इसकी पूजा।

ऐसा माना जाता है कि कालसर्प योग एक ऐसा योग है जो जातक के पूर्व जन्म के घोर अपराध में फल स्वरूप् या फिर किसी श्राप के दंड के फल स्वरूप् उसकी कुंडली में प्रतिबंधित होता है।

कालसर्प दोष क्या है-

एक कुंडली में जब राहु और केतु के बीच में सभी ग्रह समा जाते हैं तो उसको ही कालसर्प दोष कहते है.

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मूल रूप से कालसर्प योग बारह किस्म के होते हैं-

  • अनंत कालसर्प योग
  • कुलिक कालसर्प योग
  • वासुकि कालसर्प योग
  • शंखपाल कालसर्प योग
  • पदम् कालसर्प योग
  • महा पदम् कालसर्प योग
  • तक्षक कालसर्प योग
  • कारकोटक कालसर्प योग
  • शंखचूड़ कालसर्प योग
  • घातक कालसर्प योग
  • विषधर कालसर्प योग
  • शेषनाग कालसर्प योग।

कालसर्प दोष के परिणाम-

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कालसर्प दोष एक व्यक्ति के जीवन में बड़ी रुकावटे पैदा करता है अतः इस दोष के कारण व्यक्ति के जीवन में बहुत सारी बाधाएँ आती हैं, इस दोष से पीड़ित व्यक्ति महत्वाकांक्षी होते हुए भी पूर्ण सफलता पाने से वंचित रह जाते हैं और शारीरिक रूप से कोई न कोई कष्ट से पीड़ित रहते हैं।

कालसर्प दोष निवारण हेतु उपाय –

  • कालसर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति को प्रति दिन भगवान शिव जी की पूजा अर्चना करनी चाहिए इससे सभी कार्य आसान हो जायेंगे।
  • कालसर्प दोष से पीड़ित विद्यार्थियों को माँ सरस्वती जी के बीज मन्त्र का प्रति दिन एक वर्ष तक जप करना चाहिए ।
  • किसी शुभ मुहूर्त में बहते हुए पानी में तीन बार कोयला को प्रवाहित करना चाहिए ।
  • प्रति दिन हनुमान चालीसा का एक सौ आठ बार जप करना चाहिए।
  • प्रति दिन महा मृत्युंजय मन्त्र का एक सौ आठ बार रुद्राक्ष की माला से जप करना चाहिए ऐसा करने से भी अनंत कालसर्प दोष शांत हो जाते हैं।
  • घर में मोर का पंख रखने से कालसर्प दोष का अधिक प्रभाव नही होता है।
  • कालसर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति को सवा महीने तक जौं के दाने पक्षियों को खिलाने चाहिए और इसके साथ ही प्रत्येक शनिवार के दिन चींटियों के बिल में मीठे सत्तू डालने चाहिए।
  • ऐसे शिवलिंग जिन पर धातु का नाग न हो उस पर सोमवार के दिन शिवलिंग की पूजा करने के पश्चात् धातु का नाग चढ़ाना चाहिए ऐसा करने से कालसर्प दोष का प्रभाव बहुत कम हो जाता है।
  • प्रत्येक शनिवार के दिन नव ग्रहों के राजा शनि की विशेष पूजा करनी चाहिए व शनि के मन्त्र का जाप करना चाहिए और इसके साथ ही काले कुत्ते को तेल से चुपड़ी हुई रोटी खिलाएं ।
  • घर में किसी शुभ मुहूर्त पर कालसर्प दोष निवारण यंत्र को स्थापित करके उसकी प्रति दिन पूजा करनी चाहिए, यह कालसर्प दोष निवारण का बहुत ही प्रभावी उपाय होता है।
  • नाग पंचमी के दिन पूजा आदि करने के पश्चात् किसी सपेरे द्वारा नाग को जंगल में मुक्त करवाएं, ऐसा करने से भी कालसर्प दोष का प्रभाव कम पड़ता है।

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कालसर्प दोष निवारण हेतु पूजा-

प्रत्येक सोमवार के दिन एक ही समय एक ही स्थान पर किसी शिवलिंग के ऊपर एक मुट्ठी साबुत गेंहू, एक श्रीफल व एक सिक्का 1, 2, 5, या 10 का अर्पण करें, ये सब अर्पण करते समय ‘श्री राम’ का जाप करते रहें, एक बात का ध्यान अवश्य रखें कि जो सिक्का प्रथम सोमवार को लिया है वही संख्या वाला सिक्का हर बार लेना है,

सर्व प्रथम गेंहू को अर्पण करें इसके पश्चात् श्रीफल एवं उस पर सिक्का रख कर अर्पण करें इस पूरी क्रिया के दौरान श्री राम का जप निरंतर करते रहें. यह एक चक्र 21 सोमवार तक करें। 21-21 के तीन चक्र संपन्न करें। इसमें 21 सोमवार के बाद एक सोमवार को नागा कर सोमवार से आरम्भ करें।

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