घर में रखें यह विशेष शंख, खिंची आएंगी लक्ष्मी जी

By: Future Point | 21-Mar-2018
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घर में रखें यह विशेष शंख, खिंची आएंगी लक्ष्मी जी

जिस घर में शंख होता है वहां लक्ष्मी जी स्थिर रूप से निवास करती है। चैदश रत्नों में शंख भी एक हैं। मां लक्ष्मी सागर की पुत्री है तथा शंख उनका सहोदर भाई है। अतः जहा शंख है वहां लक्ष्मी का वास है स्वार्गलोक में अष्टसिद्धियों एवं नव निधियों में शंख का स्थान महत्वपूर्ण है। शंख को विजय, समृद्धि, सुख, यश, र्कीति तथा साक्षात् लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। धार्मिक कृत्यों, अनुष्ठान साधना, तांत्रिक क्रियाओं आदि में शंख का प्रयोग सर्वविदित है। इसके अतिरिक्त आरती, हवन, धार्मिक उत्सव, गृहप्रवेश, वास्तुदोष शमन, पूजन आदि शुभ अवसरों पर शंखनाद किया जाता है। ऊपर वर्णित पूजा अनुष्ठानों के अतिरिक्त शंख का उपयोग अन्य लाभ के लिए भी किया जाता है। इसे दुकान मकान ऑफिस फैक्ट्री आदि में स्थापित करने से वहां के वास्तु दोष दूर होते हैं तथा लक्ष्मी का वास व व्यवसाय में उन्नति होती है। शंख देवताओं के चरणों में रखा जाता है। पूजा स्थान में दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना करने से चिरस्थायी लक्ष्मी का वास होता है। मनोकामना पूर्ति हेतु शंख की नर और मादा की जोड़ी स्थापना करनी चाहिए।

शंख ध्वनि से लाभ

शंखनाद से अनेक प्रकार के कीटाणुओं का नाश होता है। वराहपुराण में कहा गया है कि मंदिर के दरवाजे खुलने व कोई धार्मिक कार्य प्रारम्भ करने से पहले शंख अवश्य बजाना चाहिए। शंख बजाने से सात्विक स्पंदन का संचार होता है और तामसिक स्पन्दन समाप्त हो जाता है। रूद्राभिषेक या किसी देवता का जलाभिषेक करते समय शंख में जल या दूध भरकर डाला जाए तो समस्त पाप नष्ट होते हैं व सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। जिस घर में प्रतिदिन शंखनाद होता है उस घर में सुख-शान्ति व संपन्नता बना रहता है तथा वहां कभी भी दरिद्रता का प्रवेश नहीं होता।

 

शंख के प्रकार

दक्षिणावर्ती - जो शंख दाईं ओर खुलता हो उसे दक्षिणावर्ती शंख कहलाता है। यह बड़ा दुर्लभ होता है। इस शंख को देवस्वरुप माना गया है। इसके भी दो प्रकार होते हैं नर और मादा। जिसकी परत मोटी हो और भारी हो वह नर और जिसकी परत पतली और हल्की हो वह मादा शंख होती है।

वामावर्ती - जो शंख बाईं ओर खुलता हो उसे वामावर्ती शंख कहते हैं। सभी धार्मिक कार्यों में इसका प्रयोग करते हैं। इसका ध्वनि कई प्रकार के रोगों को दूर कर देती है। नियमित रूप से की गयी शंख ध्वनि हवा तथा वातावरण को शुद्ध रखती है।

अन्नपूर्णा शंख - अन्नपूर्णा शंख घर में धन्य-धान्य की वृद्धि करता है। जिस घर में अन्नपूर्णा शंख होता है वहां ऋद्धि-सिद्धि का भंडार भरा रहता है तथा दरिद्रता से मुक्ति मिलती है।

गोमुखी शंख - गोमुखी शंख से घर-परिवार में सुख-शान्ति का वातावारण बना रहता है। धन-संपत्ति की प्राप्ति तथा अन्य मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

पांच जन्य शंख - भारतीय संस्कृति में पांचजन्य शंख की अपार महिमा एवं उपयोगिता बताई गई है। सुख-समृद्धि के साथ आयु में वृद्धि होती है। इसको अपने घर में रखने से समस्त शत्रुओं पर विजय की प्राप्ति होती है। महाभारत में भगवान कृष्ण ने पांचजन्य शंख बजाकर युद्ध की शुरूआत की थी। जिसमें पांडवों को सफलता मिली।

गणेश शंख - शिक्षा में उन्नति, कुशाग्र बुद्धि, लेखन-संपादन एवं किसी भी कार्यों में शीघ्र सफलता के लिए गणेश शंख बहुत ही शुभ होता है।

 

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मोती शंख

माती शंख में मानसिक अशान्ति दुर करने की अद्भुत शक्ति है। इस शंख का जल रोजाना आचमन करने से हृदय और श्वास संबंधी रोगों का शमन होता है। इसे सौभग्य प्राप्ति के लिए माना जाता है।

पूजन विधि

शुभ मुहूर्त में प्रातः स्नान कर वस्त्र धारण करें। एक पात्र में सामने शंख रख लें। उसे दूध तथा जल से स्नान कराएं। साफ कपड़े से उसे पोंछ कर उस पर चांदी का वर्क लगाएं। रोली, चावल, कलावा एवं इत्र अर्पित करं। श्वेत पुष्प शंख पर चढ़ाएं, धूप-दीप दीखाकर नैवेद्य का भोग लगाएं और बीज मन्त्र का 108 बार जाप करें।

बीज मंत्र- ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ब्लू दक्षिण मुखाय शंखानिधये मसुद्रप्रभावय नमः।


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