डॉक्टर बनने के योग (Doctor Yoga in Astrology) ज्योतिषीय विश्लेषण | Future Point

डॉक्टर बनने के योग (Doctor Yoga in Astrology) ज्योतिषीय विश्लेषण

By: Future Point | 22-Dec-2021
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डॉक्टर बनने के योग (Doctor Yoga in Astrology) ज्योतिषीय विश्लेषण

एक सही करियर का चुनाव करना वास्तव में मुश्किल काम है। प्रत्येक व्यक्ति के अन्दर एक मौलिक प्रतिभा होती है। उस मौलिक प्रतिभा को पहचान कर करियर का चुनाव किया जाये तो सफलता की शतप्रतिशत सम्भावना रहती है। ये बात चरितार्थ है कि क्लास में सबसे टॉप पर रहने वाले बच्चे ही डॉक्टर तथा इंजीनियर बनते हैं।

डॉक्टर बनने के योग में एजुकेशन की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। क्योंकि डॉक्टर को अपनी मेडिकल डिग्री के लिए 5 वर्ष MBBS तथा फिर पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए 3 वर्ष MS/MD की पढ़ाई करनी होती है। उसके बाद पुनः DM तथा MCh का 3 वर्ष का पाठ्क्रम करके सुपर स्पेशलिस्ट बनने के लिए अध्ययन करना होता है।

आइये जानते हैं एक डॉक्टर (surgen) बनने के लिए कुंडली में क्या क्या आवश्यक योग अनिवार्य रूप से होने चाहिए। व्यक्ति में डॉक्टरी की शिक्षा लेने की कितनी सम्भावना है ? क्या व्यक्ति चिकित्सा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करेगा ? चिकित्सा के क्षेत्र में व्यक्ति फिजीशियन बनेगा, सजर्न बनेगा या किसी रोग का विशेषज्ञ बनेगा ?

जब हम डॉक्टर करियर की बात करते हैं तो बहुत सारे योग और संयोग एक साथ हमारे एजुकेशन फील्ड में तथा हमारे प्रोफेशन फील्ड में होने पर ही व्यक्ति का करियर चिकित्सा के क्षेत्र में बनता है। वहीं एक डॉक्टर को अपने कार्य में हमेशा तकनीकी ज्ञान और नये शोधों तथा अनुसंधान से अपडेट रहना होता है अतः अपनी सम्पूर्ण प्रोफेशन लाइफ में भी अध्ययन और अनुसंधान से जुड़े रहना होता है।

अतः बच्चे के एक डॉक्टर बनने और मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए बच्चे की जन्मकुंडली मे महत्वपूर्ण ग्रह अच्छी स्थिति में तथा इनका सम्बन्ध बेहतरीन उच्च शिक्षा से होने चाहिए। कुंडली में एजुकेशन के सबसे बेहतरीन योग के लिए 4, 5, 9,11वें भाव में कुंडली के योगकारक ग्रह होने चाहिए या इन भावों के स्वामी प्रबल होकर केंद्र या त्रिकोण में होने चाहिए।

वहीं मेडिकल फील्ड में सफलता पाने की चाह रखने वालों के लिए शनि मंगल काफी हेल्पफुल प्लेनेट होते हैं। शनि अंग्रेजी शिक्षा का कारक है। मंगल मेडिकल की शिक्षा और फील्ड में सफलता दिलवाने का कार्य करता है।

ज्योतिष शास्त्र में जन्मकुंडली/Janam Kundali का छठा भाव रोग का माना जाता है।

आठवां भाव स्थाई रोग का या सर्जरी का होता है। तथा 12वां भाव अस्पताल को दर्शाता है।

एक डॉक्टर की जन्मकुंडली में शिक्षा क्षेत्र के महत्वपूर्ण भावों और ग्रहों का सम्बन्ध 6, 8, 12 भावों के साथ होना आवश्यक है। क्योंकि इन भावों का सम्बन्ध ही बच्चे की एजुकेशन को मेडिकल फील्ड से जोड़ता है।

पंचम एवं दशम भाव का सम्बन्ध / Relationship of Fifth and Tenth House-

जन्मकुण्डली के पांचवें भाव को शि़क्षा का भाव कहा जाता है, किसी भी तकनीकी शिक्षा का आजीविका के रुप में परिवर्तित होना तभी संभव है जब पंचम भाव व पंचमेश का सीधा संबध दशम भाव या दशमेश से बन जाये, अत: इनका सम्बन्ध होना पहली आवश्यकता है, इस सम्बन्ध के माध्यम से यह मालूम होता है की व्यक्ति जिस क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त करेगा, उसे उसी क्षेत्र में आजीविका की प्राप्ति भी होगी।

पांचवें भाव के स्वामी का दशम भाव या दशमेश से जितना अच्छा संबध होगा, आजीविका के पक्ष से यह उतना ही अच्छा होगा। दोनों में स्थान परिवर्तन होना, दृष्टि संबध अथवा युति होना भी बहुत अच्छा समझा जाता है। यह योग अस्पताल के भाव छ्ठे/बारहवें घर में बनने से डॉक्टर बनने की संभावनाएं और भी प्रबल हो जाती हैं।

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छ्ठे एवं बारहवें भावों का संबध / Relationship of Sixth and Twelfth House -

छठा भाव रोग का है तथा बारहवें घर से अस्पताल का विचार किया जाता है। बारहवें भाव से मरीज के अस्पताल अथवा घर में पडे रहने या बाहर निकल सकने की असमर्थता आदि भी पता लगती है, और मुख्यतः डॉक्टर का सम्बन्ध मरीज और अस्पताल से ही रहता है। इसलिये छठे घर व बारहवें घर का सम्बध जितना प्रगाढ बनेगा, डॉक्टर बनने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

डॉक्टर का जीवन घर में कम व अस्पताल में अधिक बीतता है, इसलिए छठे व बारहवें घर में रहना उसे जितना अधिक रुचिकर लगेगा व्यवसाय में मन लगाना उतना ही आसान होगा। छठे भाव से ऐसे रोग देखे जाते है, जिनके ठीक होने की अवधि एक साल की होती है।

तथा आठवें भाव से लम्बी अवधि के रोग, सर्जरी आदि का विचार किया जाता है। दशम/दशमेश का संबध दोनों में से जिस भाव से अधिक आयेगा, व्यक्ति उस प्रकार की बीमारियों का चिकित्सक बनेगा।

दूसरा, नवमां व ग्यारहवां भाव का सम्बन्ध / Relationship of Second, Ninth and Eleventh House-

भावों की श्रंखला में दूसरे व ग्यारहवें भाव भी देखे जाते है, दूसरा भाव धन का है व ग्यारहवें भाव से लाभ या आय देखी जाती है। इन दोनों भावों का विश्लेषण करने से यह पता चलता है कि व्यक्ति को डॉक्टरी पेशे में आय की प्राप्ति किस स्तर तक होगी, इसका अनुमान लग जाता है।

किसी भी व्यवसाय में आय सबसे बडे प्रेरणा स्त्रोत का काम करती है। डॉक्टर बनने के लिए हाई लेवल की एजुकेशन की जरूरत होती है तो इसके लिए नवम भाव का Analysis करना जरूरी होता है। वहीं नवमें भाव से एक डॉक्टर की ख्याति और प्रसिद्धि पाने की संभावनाए भी देखी जाती है।

व्यक्ति को अगर अच्छी शिक्षा के साथ-साथ आय, मान-सम्मान और प्रसिद्धि भी मिले तो फिर कहना ही क्या, इससे व्यक्ति के व्यवसाय में स्थिरता रहती है। दशम/दशमेश का सम्बन्ध समाज व जनता के भाव चौथे से अधिक आने पर व्यक्ति अपने पेशे का उपयोग जनकल्याण सेवाकार्य के लिए करता है।    

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डॉक्टर बनने में गुरु की भूमिका / Role of Guru in becoming a Doctor -

डॉक्टर बनने की इच्छा रखने वाले व्यक्तियों की कुण्डली में गुरु विशेष स्थान रखते है। गुरु की कृपा से ही कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति का उपचार करके उसे स्वस्थ बना सकने की योग्यता प्राप्त कर पाता है। गुरु सभी ग्रहों में सबसे शुभ ग्रह है। उनका आशीर्वाद प्राप्त होना अत्यन्त शुभ होता है अर्थात गुरु के प्रभाव से डॉक्टर में मरीज को ठीक करने की कला आती है।

किसी भी व्यक्ति के एक सफल डॉक्टर बनने के लिए गुरु का प्रभाव लग्न/पंचम/दशम भाव तथा संबन्धित भावेशों पर जन्मकुण्डली में, नवाशं कुण्डली में तथा दशमाशं कुण्डली में होना चाहिए। कुण्डली के लग्न भाव से स्वास्थ्य देखा जाता है। नवाशं कुण्डली जन्मकुण्डली की पूरक कुण्डली है तथा दशमाशं कुण्डली को व्यवसाय के सूक्ष्म अध्ययन के लिए देखा जाता है।

डॉक्टर बनने में मंगल की भूमिका / Role of Mars in becoming a Doctor-

चिकित्सक बनने में मंगल ग्रह का विशेष रोल होता है। मंगल साहस, चीड़-फार, ऑपरेशन आदि चीजों का कारक होता है। मंगल अचानक होने वाली घबराहट से बचाता है और त्वरित निर्णय लेने की शक्ति देता है। जन्मकुण्डली के लग्न, तृतीय, षष्ठ, दशम, एकादश या द्वादश भाव में मंगल स्वराशि या उच्च राशि में हो तो व्यक्ति में सर्जरी से संबन्धित डॉक्टर बनने की योग्यता आती है।

डॉक्टर बनने में सूर्य व चन्द्रमा की भूमिका / Role of Sun and Moon in becoming a Doctor-

सूर्य आत्म-विश्वास व ऊर्जा का कारक है। जब तक व्यक्ति में आत्म-विश्वास, साहस, टेकनिक व ऊर्जा नहीं होगी, तब तक वह एक सफल डॉक्टर नहीं बन पायेगा।

वहीं डॉक्टरों की कुण्डली में चन्द्रमा का भी विशेष स्थान होता है, इनकी कुण्डली में चन्द्रमा अन्य प्रोफेशन की कुण्डली के चन्द्रमा से भिन्न होता है क्योंकि चन्द्र को जडी-बूटी का कारक कहा जाता है व चिकित्सकों की कुण्डली में चन्द्रमा पर पाप प्रभाव होता है। चन्द्रमा पर पाप प्रभाव होने से डॉक्टर में मरीज को दर्द से तडपते देखते रहने की पीडा सहन करने की क्षमता होती है।

डॉक्टर की कुण्डली में चन्द्रमा पर पाप प्रभाव या चन्द्रमा का सम्बन्ध त्रिक भावों से होना सामान्य योग है। ऐसा ही योग सूर्य के साथ भी देखा जाता है अर्थात डॉक्टरों की कुण्डली में चन्द्र के साथ सूर्य भी पीड़ित होते है।

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सफल डॉक्टर (चिकित्सक) के योग (Medical profession in astrology)

एक बड़े और नेम, फेम, पोजीशन के साथ विस्तृत कार्यक्षेत्र और अच्छे आय के स्त्रोत एक डॉक्टर (चिकित्सक) की जन्मकुंडली मे हमेशा उपस्थित होते हैं। क्योंकि एक चिकित्सक को अपने कार्यक्षेत्र में अनुभव और आयु के साथ नाम, प्रसिद्धि तथा धन भी मिलता है। कुंडली में 2, 6, 10, 11वें भाव आमदनी के भाव होते हैं जो प्रबलता से अधिकांश ग्रहों के साथ दशा अंतर्दशा में होने आवश्यक है। सबसे मुख्य बात जो ग्रह बच्चे की कुंडली में शिक्षा, तथा आय के भावों को बताएंगे। आपका बच्चा उसी क्षेत्र विशेष का स्पेशलिस्ट डॉक्टर बनेगा।

सूर्य- ओर्थपेडीक, हार्ट स्पेशलिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट,

चन्द्रमा- मेडिसिन स्पेशलिस्ट, साइकेट्रिस्ट,

मंगल- सर्जन,

बुध- स्किन स्पेशलिस्ट (डर्मेटोलॉजिस्ट), ईएनटी स्पेशलिस्ट,

गुरु- न्यूट्रल path, आयुर्वेदा, कैंसर स्पेशलिस्ट, एंडोक्रिनोलोजिस्ट,

शुक्र- सेक्सोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, प्लास्टिक सर्जन,

शनि- डेंटिस्ट,

राहु केतु- अनेस्थेसिओलॉजिस्ट,

MD और MS ( सर्जरी अथवा मेडिसीन) के क्षेत्र में जाने के लिए सूर्य, चन्द्रमा तथा मंगल महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते है। सूर्य अथवा चन्द्रमा MD तथा मंगल MS के क्षेत्र में ले जाते हैं।

लग्नेश बलवान होकर नवम भाव में बैठा हो या नवमेश, दशम व दशमेश के साथ किसी भी प्रकार अच्छा सम्बन्ध हो तो व्यक्ति डॉक्टर बनकर विदेश में ख्याति प्राप्त करता है।

कुण्डली में लाभेश व रोगेश की युति लाभ भाव में हो तथा मंगल,चन्द्र, सूर्य भी शुभ होकर अच्छी स्थिति में हों तो व्यक्ति चिकित्सा क्षेत्र से जुडता है। इन सभी का सम्बन्ध अगर दशम/ दशमेश से आता है तो सोने पे सुहागे वाली बात होती है।    

लग्न में मगंल स्वराशि, उच्च राशि का हो साथ में सूर्य भी अच्छी स्थिति में हो तो व्यक्ति एक अर्थो सर्जन बनता है।

सूर्य व चन्द्रमा जड़ी-बूटियों का कारक होता है और गुरू एक अच्छा सलाहकार व मार्गदर्शक होता है। इन तीनों का सम्बन्ध छठें भाव, दशम भाव व दशमेश से होने से व्यक्ति आयुर्वेदिक चिकित्सक बनता है।

कुण्डली में गुरू व चन्द्रमा की स्थिति काफी मजबूज हो लेकिन मंगल पीडि़त हो या पाप ग्रहों द्वारा दृष्ट हो तो सफल फिजीशियन बनता है।

यदि सूर्य, मंगल,गुरु शनि एवं राहु कुंडली में बली हों और इनका दशम , एकादश, द्वितीय व सप्तम भाव से सम्बध हो तो जातक डॉक्टर बनता है। 

कुण्डली में मंगल की स्थिति मजबूत हो साथ में अपनी राशि या मित्र की राशि में होकर सूर्य चौथे भाव में बैठा हो और पाप ग्रहों से दृष्ट न हो तो जातक एक सफल हार्ट सर्जन बनता है।

दशम भाव में सूर्य-मंगल की युति जातक को शल्य चिकित्सक बनाती है। चतुर्थेश दशमस्थ हो तो जातक औषधि चिकित्सक होता है।

पंचम तथा षष्ठ भाव का परस्पर सम्बध भी जातक को रोग दूर करने की बुद्धि प्रदान करता है।

दशम भाव या दशमेश से मंगल या केतु का दृष्टि या युति राशि गत सम्बध हो तो जातक शल्य चिकित्सक होता है।

लग्न में मजबूत चन्द्रमा हो, गुरू बलवान होकर केतु के साथ बैठा हो तथा छठें भाव से किसी प्रकार अच्छा सम्बन्ध हो तो व्यक्ति होमोपैथिक डॉक्टर बनता है। 

कुंडली के पंचम भाव में यदि सूर्य-राहू या राहू-बुध की युति हो तथा दशमेश की इन पर दृष्टि हो, साथ ही मंगल, चंद्र ,गुरु भी अच्छी स्थिति में हो, तो जातक चिकित्सा क्षेत्र में अच्छी सफलता प्राप्त करता है।

यदि कर्क लग्न की कुंडली के छठे भाव में गुरु व केतू बैठे हों, तो जातक होम्योपैथिक चिकित्सक बन सकता है ।

दशम भाव में शनि तथा सूर्य की युति जातक को दंत चिकित्सक बनाती है।

यदि सूर्य और मंगल की पंचम भाव से युति हो और शनि अथवा राहू छठे भाव में हो, तो जातक सर्जन हो सकता है।



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