अश्विन अमावस्या 2022- पितरों व जीवन के कष्टों की शान्ति का अनूठा अवसर

By: Future Point | 17-Sep-2022
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अश्विन अमावस्या 2022- पितरों व जीवन के कष्टों की शान्ति का अनूठा अवसर

अश्विन माह को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माह माना गया है। इसका कारण अश्विन मास में पड़ने वाले श्राद्ध पक्ष हैं।  श्राद्ध पक्ष के तुरंत बाद दुर्गा माता के नवरात्री भी अश्विन मास में ही पड़ते हैं जिसके लिए इस मास को अत्यधिक महत्व दिया गया है। अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रत्येक तिथि महत्वपूर्ण है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण तिथि अमावस्या की मानी गयी है। 

अश्विन मास की अमावस्या के दिन सभी पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान व ब्राह्मण को भोजन करवाना अत्यंत श्रेष्ठकर होता है। अश्विन मास में वैसे तो श्राद्ध कर्म के लिए तिथियां निश्चित है पर अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या कहा जाता है। यह दिन सभी पितरों की मुक्ति हेतु तर्पण व पिंडदान करना श्रेयस्कर माना गया है। 

यदि हम अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि से अनभिज्ञ हो तो ऐसे में सर्व पितृ अमावस्या पर पिंडदान आदि श्राद्ध कर्म से हम उनकी आत्मा को मुक्ति प्रदान कर सकते हैं। शास्त्रों में यह कहा गया है कि एक सुपुत्र का दायित्व है कि वह जीते जी माता-पिता की सेवा करे और उनकी मृत्यु उपरान्त उनका श्राद्ध कर्म करे।  आइयें जानते है अश्विन अमावस्या या सर्व पितृ अमावस्या को क्यों इतना अभिक महत्व दिया गया है और इससे जुड़ी सभी ज़रूरी बातें।

अश्विन अमावस्या या सर्व पितृ अमावस्या तिथि 2022

हिंदू पंचांग के अनुसार, अश्विन माह में अमावस्या तिथि रविवार, 25 सितंबर को सुबह 03 बजकर 12 मिनट से शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन अगले दिन 26 सितंबर को सोमवार प्रातः 03 बजकर 23 मिनट पर हो जायेगा। श्राद्ध पक्ष में स्नान और दान के लिए उदयातिथि को  मान्यता दी गयी है, इसलिए अश्विन अमावस्या या सर्व पितृ अमावस्या 25 सितंबर को ही मानी जाएगी। पितरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इस दिन पर पवित्र नदियों में स्नान व गरीबों को दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। 

अश्विन अमावस्या क्यों है इतनी महत्वपूर्ण ?

अश्विन अमावस्या के दिन पितरों की शान्ति व मुक्ति के लिए विभिन्न श्राद्ध कर्म जैसे पिंडदान, तर्पण व ब्राह्मण भोज करवाना श्रेष्ठ माना गया है। ऐसा करने से कुंडली में बना पितृ दोष दूर होता है और अपने पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पितरों के आशीर्वाद से घर में सुख समृद्धि व आरोग्यता का वास बना रहता है। इस दिन नदी में स्नान, दान और पेड़-पौधे लगाने का अत्यंत महत्व है।  यदि आप अपने जीवन में आ रही कठनाइयों से छुटकारा पाना चाहते हैं तो इस दिन अपने पूर्वजों को याद कर उनका आभार प्रकट करें। ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और साथ ही साथ पितर भी प्रसन्न होते हैं।

ज्योतिष में पितृ दोष और इसका निवारण 

यहां एक बात समझना आवश्यक है कि हमारा अस्तित्व हमारे पूर्वजों के कारण ही है।  यदि वे हमें जन्म न देते तो हमारा अस्तित्व ही न होता, हम उनके वंशज उनके आभारी हैं। हमारे जीवन की सुविधाओं व हमारे समाज में नाम के लिए कही न कही हम उनके कृतज्ञ हैं। आज की आधुनिक दौड़ में हम अपनी परम्पराओं को पीछे छोड़ बस आगे भागे जा रहे है जो कही न कही हमारे पतन का कारण बन जाता है।  कुंडली में एक बहुत ही नकरात्मक दोष होता है जिसे कहा जाता है पितृ दोष। चाहे आपकी कुंडली में ग्रह कितने भी अच्छे बैठे हो पर अगर आपकी कुंडली में पितृ दोष है तो आप कहीं न कहीं जीवन में कठिनाइयों का सामना करेंगें। ये कठिनाइयां कुछ भी हो सकती हैं जैसे-

  • विवाह में देरी या विवाह न होना
  • अत्यधिक पारिवारिक क्लेश
  • मंद-बुद्धि या विकलांग संतान का जन्म 
  • संतान का जन्म न होना
  • केवल कन्या संतान का होना
  • परिवार में अकालिक मृत्यु
  • परिवार में पीछे से चली आ रही कोई आपदा या बीमारी आदि

प्रभाव कुछ भी हो सकता है पर कारण केवल एक है - "पितृ दोष"। 

अब यदि आप इस कुंडली में बने पितृ दोष से छुटकारा पाना चाहते हैं तो अश्विन अमावस्या पर सर्व पितृ पूजा करें। हो सकता है इसी साल आपके पितृ आप पर प्रसन्न हो जाए और आपके जीवन की सभी समस्याओं से आपको मुक्ति मिल जाएं। 

ऐसा कहा जाता है कि पितृ पक्ष में पितृ अपने वंशजों के पास तृप्त होने आते हैं, जो वंशजों द्वारा अर्पित पिंडदान व तर्पण के रूप में होता है।  यदि वंशज उन्हें तृप्त नहीं करते अर्थात तर्पण, पूजा या पिंडदान नहीं करते तो वे रुष्ट होकर वापस चले जाते है और साथ ही साथ कुपित हो श्राप भी देते हैं। अतः इस भाग दौड़ के जीवन से कुछ पल निकाल कर श्राद्धकर्म अवश्य किया जाना चाहिए।

सर्व पितृ अमावस्या 2022 श्राद्ध का समय

शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध पक्ष की किसी भी तिथि पर श्राद्ध सुबह 11:30 बजे से लेकर 02:30 बजे के मध्य कर लेना चाहिए। पर फिर भी यदि कोई शुभ मुहूर्त जानना चाहे तो वह इस प्रकार है -

कुतुप मुहूर्त - सुबह 11 : 48 मिनट से दोपहर 12 : 37 मिनट तक

रोहिणी मुहूर्त - दोपहर 12 : 37 मिनट से दोपहर 01 : 25 मिनट तक

अपराह्न काल समय - दोपहर 01 : 25 मिनट से दोपहर 03 : 50 मिनट तक

पितरों के श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त और रोहिणी मुहूर्त को ही सुझाया जाता है।

सर्व पितृ अमावस्या की उपयोगिता 

सर्व पितृ अमावस्या के दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु तिथि, जातक को मालूम नहीं है। इसके अलावा आप अपने परिवार के किसी भी पूर्वज का श्राद्ध इस दिन कर सकते हैं, जिनके बारे में आपको जानकारी न हो।  यानी कि यदि कोई पूर्वज जो आपकी जानकारी में कही दूर दूर तक भी न हो और उनकी आत्मा मुक्ति के लिए प्रयासरत हो तो आप उनके अपने परिवारजनों के स्थान पर उनके लिए पूजा या पिंडदान कर उन्हें तृप्त कर सकते हैं।  यह एक अत्यंत पुण्य का काम है और इसे किया ही जाना चाहिए। सर्व पितृ अमावस्या को ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों का श्राद्ध कर उनकी आत्मा को तृप्त किया जा सकता है।

अश्विन अमावस्या पर बना सर्वार्थ सिद्धि योग

अश्विन अमावस्या पर पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बना हुआ है। शुभ योग प्रातःकाल से लेकर सुबह 09 बजकर 06 मिनट तक बना रहेगा और उसके बाद से शुक्ल पक्ष में बने योग का आरम्भ हो जाएगा, जो पूरे दिन बना रहेगा।  

हम आपके स्वस्थ व समृद्ध जीवन की कामना करते हैं और आप इस कामना को सर्व पितृ अमावस्या पूजा द्वारा यथार्थ में बदल सकते हैं।  



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