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हेल्दी और भाग्यशाली बच्चे के लिए प्रेग्नेंट महिलाओं को करना चाहिए इस मंत्र का जाप

By: Rekha Kalpdev | 30-Mar-2019
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हेल्दी और भाग्यशाली बच्चे के लिए प्रेग्नेंट महिलाओं को करना चाहिए इस मंत्र का जाप

संतान के आने की खुशी स्त्री के लिए कुछ ख़ास होती है। इसे एक स्त्री का दूसरा जीवन भी कहा जाता है। विवाह के पश्चात जब मां बनने की पूर्व सूचना प्राप्त होती है, तो उसकी ख़ुशी और उत्साह गर्भवती स्त्री के मुख पर सहज देखी जा सकती है। प्रत्येक गर्भवती स्त्री की यह कामना होती है की आने वाली संतान स्वस्थ हो। अपने गर्भ की रक्षा के लिए भावी माता यथासंभव हर कार्य भी करती है। बच्चे के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, अपनी सारी जीवन शैली बदल लेती है। जो खाना पीना बच्चे के लिए अनुकूल ना हो उन सभी वस्तुओं का त्याग करती है। भावी संतान स्वस्थ और सुन्दर हो इसके लिए अनेक प्रयोग के उपाय धर्म और ज्योतिष शास्त्रों में बताएं गए है। जिनका प्रयोग कर माता अपने और अपने बच्चे को हेल्थी रख सकती है।

पौराणिक काल में भी कुछ इस प्रकार के प्रमाण मिलते है कि स्त्रियां गर्भवती होने पर धार्मिक पुस्तकें पढ़ती थी या सुनती थी। इसके अतिरिक्त इस समय विशेष रुप से साहस और धर्म से संबंधित कथाएं सुनती थी। जिससे होने वाली संतान साहसी और धर्म परायण बनें। गर्भ ग्रहण करने वाली महिला की यह सर्व प्रथम कामना रहती है कि गर्भ में बालक सुरक्षित रहें और उसका समय के साथ विकास होता रहें। इस उद्देश्य से वह अधिक से अधिक धार्मिक क्रियाकलापों में रुचि लेती है, मंत्र जाप अधिक से अधिक करती हैं और सुनती भी है।

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इस समय में यह सबसे अधिक आवश्यक है कि संतान सुरक्षित हो, और उसके जीवन पर कोई परेशानी ना आए। जैसा की सर्वविदित है कि मंत्रों में अद्भुत शक्ति होती है जिसके प्रभाव से गर्भ में संतान का विकास होता है। यह आने वाले बालक को तेजस्वी भी बनाए रखती है। आज हम आपको इस आलेख के माध्यम से यह बताने जा रहे हैं कि संतान के स्वास्थ्य और जीवन को सुरक्षित रखने के लिए गर्भवती स्त्री को निम्न उपाय करने लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं। –

मंत्र व जाप विधि

माता गौरी के पुत्र भगवान श्री गणेश सबका कल्याण करते हैं। जीवन में किसी भी प्रकार की बाधा का निवारण करने के लिए भगवान श्री गणेश के मंत्रों का जाप करना चाहिए। इसके लिए गर्भवती स्त्री भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना करें। नित्य विधि-विधान से गणेश जी का पूजन करें। पूजन करने के पश्चात प्रतिमा के सम्मुख बैठ कर मंत्र जाप करें।

मंत्र जाप के साथ-साथ गणेश जी को दो मोदक का भोग लगाना चाहिए। यहां ध्यान रखना चाहिए कि यह मोदक गर्भवती स्त्री के द्वारा स्वयं तैयार किया गया हो। स्वास्थ्य कारणों से यदि यह संभव ना हो तो परिवार की अन्य कोई महिला भी यह भोग तैयार कर सकती है। गणेश जी को भोग लगाने के बाद इस प्रसाद का स्त्री को स्वयं ही सेवन करना चाहिए, अन्य किसी को यह प्रसाद नहीं देना चाहिए।

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मंत्र इस प्रकार हैं-

रक्ष रक्ष गणाध्यक्षः रक्ष त्रैलोक्य नायकः।

भक्त नाभयं कर्ता त्राताभव भवार्णवात्।।

उपरोक्त मंत्र का जाप यथासंभव करना चाहिए, 11, 21 या एक माला कम से कम करना चाहिए। मंत्र जाप नित्य करें, और इसमें किसी तरह का विघ्न ना डालें। संभव हो तो मंत्र जाप की संख्या अधिक भी की जा सकती है। यह माना जाता है कि प्रसव के समय मंत्र जाप करने से प्रसव क्रिया सहज होती है और बच्चा सुरक्षित जन्म लेता है।

  • गर्भधारण के बाद पति-पत्नी यदि दोनों दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोती हैं तो उत्तम रहता है, और गर्भ रक्षा होती है।
  • इसके अतिरिक्त घर की कोई भी महिला यदि गर्भवती है तो दक्षिण-पूर्व के स्थान पर एक सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ रहता है। गर्भ की शुभता के लिए अनुकूल माना जाता है।
  • घर में मोर पंख रखना वास्तुदोषों को दूर करता है। यह माना जाता है कि गर्भवती महिलाओं के गर्भ की रक्षा करने के लिए इसे विशेष रुप से घर में रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र यह कहता है कि इस घर में रखने से घर की नेगिटिव ऐनर्जी दूर होती है और आसपास का माहौल सकारात्मक बना रहता है।
  • यदि गर्भवती स्त्री पीले रंग के चावलों को अपने पास रखें तो यह माना जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा घर में बनी रहती है।
  • गर्भवती स्त्री के कमरे में भगवान श्री कृष्ण का बाल रुप का चित्र लगाना चाहिए, जिसमें कृष्ण जी माता के साथ खेल रहे हों। यह चित्र इस प्रकार लगाया जाना चाहिए कि प्रात: आंख खुलने पर स्त्री की नजर सर्वप्रथम चित्र पर ही पड़े। यह माना जाता है कि कृष्ण जी के बाल रुप के दर्शन करने पर बालक में अच्छे गुण विकसित होते है।
  • गर्भवती स्त्री के कमरे में कॄष्ण जी की प्रतिमा भी रखनी चाहिए, संभव हो तो उसका नित्य दर्शन पूजन भी करना चाहिए। ऐसा करना आने वाले बालक के स्वास्थ्य के पक्ष से शुभ रहता है।
  • तांबे का चौरस टुकड़ा पास रखना, गर्भवती स्त्री के गर्भ और स्त्री दोनों की रक्षा करता है।
  • सफेद रंग शांति और सौहार्द का प्रतीक है। इसलिए गर्भवती स्त्री के कमरे में सफेद रंग करवाये, और यथासंभव खिलौने इस कमरे में सजाएं। इससे स्त्री को मानसिक शांति मिलेगी और सेहत उत्तम रहेंगी।

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