असफलता और भय देता है। कुंडली में ग्रहण योग, जानिए उपाय
By : Future Point
Expert Review : Dr. Arun Bansal, Vedic Astrologer | 45+ Years Experience
Published : 02-Jun-2018
हम सभी के जीवन में आने वाले सभी घटनाएं ग्रह, राशि और नक्षत्रों से प्रभावित रहता है। ज्योतिष शास्त्र यह मानते हैं कि सुख और दुख, लाभ और हानि एवं यश-अपयश कुछ भी मिले सभी कुछ ग्रहों पर आधारित होता हैं। हमें जीवन में क्या मिलने वाला हैं, इसका निर्धारण हमारे जन्म के समय ही हो जाता हैं। जिसकी जानकारी हमारी जन्मपत्री में बन रहे योगों और ग्रहों की स्थिति से होती है। जन्म कुंडली के कुछ योग राजयोग, धनयोग कारक और उन्नति एवं सम्मान देने वाले होते हैं, वही कुछ योग स्वास्थ्य में कमी, भाग्य में कमी, तनाव और असफलता के परिचायक होते हैं।
यही वजह हैं कि कुछ लोगों को सफलता बैठे बिठाए मिल जाती हैं और कुछ लोगों को सफल होने में पूरा जीवन देना पड़ जाता है। ज्योतिष शास्त्र में अनेक अशुभ योगों का वर्णन किया गया है। इन्हीं में से एक अशुभ योग ग्रहण योग है। जिन व्यक्तियों की कुंड्ली में यह योग होता है, उनका जीवन तनावपूर्ण रहता है, सफलता प्राप्ति के लिए उन्हें विशेष संघर्ष करना पड़ता हैं और एक तरह का अनचाहा भय भी उनमें देखा गया है। यह भी माना जाता हैं कि इस योग के व्यक्ति का जीवन दुखों से भरा रहता हैं। प्रत्येक प्रकार की उपलब्धि पाने के लिए संघर्ष ही एक मात्र मार्ग बचता है।
तरक्की और सफलता की प्राप्ति सहज नहीं होती है। ऐसा व्यक्ति आर्थिक कष्टॊं से घिरा रहता है। जिन व्यक्तियों की कुंडली में यह योग बन रहा हों, उन व्यक्तियों के लिए बेहतर हैं कि अपनी कुंडली किसी योग्य ज्योतिषी से करायें और बताएं अनुसार उपाय करें- उपाय करने से काफी हद तक परेशानियां कम हो जाई हैं।
ग्रहण योग या ग्रहण दोष से अभिप्राय:
जन्मकुंडली में सूर्य के साथ राहु/केतु की युति ग्रहण योग अर्थात ग्रहण दोष का निर्माण करती हैं। ग्रहण योग दो प्रकार से बन सकता है। प्रथम प्रकार से सूर्य और राहु/केतु की युति होने पर, द्वितीय चंद्र का राहु या केतु के साथ होना। विशेष बात यह हैं कि बारह भावों में से यह योग किसी भी भाव में बन सकता है। ज्योतिष शास्त्र कहता हैं कि यह योग जिस भाव में बनता हैं उस भाव से संबंधित फल पाने के लिए व्यक्ति को संघर्ष की स्थिति का सामना करना पड़ता हैं। उदाहरण के लिए यदि यह योग यदि आय भाव में बन रहा हैं तो व्यक्ति को आय या लाभ पाने के लिए परेशानियों से जूझना पड़ता है।
व्यक्ति पर एक के बाद एक संकट आते रहते हैं। कार्यक्षेत्र और नौकरी में जल्दी जल्दी बदलाव करने पड़ते हैं। मेहनत की तुलना में फल का प्रतिशत कम रहता है। आर्थिक क्षेत्रों से अनुकूल परिणाम प्राप्त न होने के कारण यह तनाव का भी कारण बनता है। इसी प्रकार अन्य भावों में इस योग का निर्माण होने पर भावों से संबंधित फल पाने में परेशानी होती हैं।
ग्रहण दोष / ग्रहण योग का प्रभाव
ग्रहण योग क्योंकि सूर्य/चंद्र की राहु/केतु की युति होने पर बनता हैं इसलिए चंद्र मन का कारक ग्रह हैं और इस योग में चंद्र प्रभावित होता है, इसलिए मन का प्रभावित होना स्वाभाविक हैं। जैसा की सर्वविदित हैं कि सूर्य ग्रहण हों या चंद्र ग्रहण हो, दोनों ही प्रकार के ग्रहणों को ज्योतिष के अनुसार अच्छा नहीं माना जाता। जब किसी जातक का जन्म सूर्य ग्रहण में हुआ या चंद्र ग्रहण में हुआ हों तो व्यक्ति की उन्नति में व्यर्थ की बाधाएं आती हैं। अचानक से परेशानियों का आना और बनते बनते काम का रुक जाए तो यह समझ लेना चाहिए कि व्यक्ति की कुंडली में ग्रहण योग बना हुआ है।
ग्रहण दोष के उपाय
ग्रहण योग के उपाय करने से पूर्व यह जान लेना आवश्यक हैं कि कुंडली में यह योग बन भी रहा हैं या नहीं। यह जानकारी आप अपनी कुंडली किसी योग्य ज्योतिषी को दिखा कर ले सकते हैं। ज्योतिश शास्त्र जहां किसी अशुभ योग के होने का कारण और प्रभाव बताता है।
वही इस विद्या में प्रत्येक अशुभ योग के निवारण के लिए उपाय भी बताए गए हैं। ज्योतिषीय योग परेशानियों को दूर तो करते हैं साथ ही उपायों से सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति भी होती हैं। उपाय भी सभी प्रकार की जानकारी लेने के बाद ही शुरु करने चाहिए। ग्रहण दोष से बचने के उपाय निम्न हैं-
- अपने गुरु, वरिष्ठ या बुजुर्गों की सेवा करें। गुरु ग्रह मंत्र का नित्य जाप करने से भी ग्रहण दोष से राहत मिलती हैं।
- अपने बड़ों का आशीर्वाद लेना भी ग्रहण दोष में कमी करता है।
- सूर्य ग्रहण योग में प्रभावित हो रहा हो तो नियमित रुप से सूर्य को जल का अर्घ्य दें।
- सूर्य शांति के लिए सूर्य आदित्यह्रदय स्तोत्र का नियमित पाठ भी करें।
- प्रयास करें कि सप्ताह में एक दिन नमक का त्याग करें।
- 10 वर्ष से छॊटी कन्या को लाल रंग के वस्त्रों का दान करें।
- यदि इस योग के प्रभाव में चंद्र ग्रह आ रहा हों तो सोमवार के दिन श्वेत वस्त्रों का दान करना चाहिए।
- केसर डालकर चावलों की खीर बनाकर कन्याओं को खिलायें।
- महामृत्युंजय मंत्र के सवा लाख जाप करें।
- राहु और केतु की शांति के लिए शिव और हनुमान की आराधना करें।