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धनिष्ठा नक्षत्र का फल

नक्षत्र मंडल में धनिष्ठा नक्षत्र तेईसवें स्थान पर आता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार धनिष्ठानक्षत्र का स्वामी मंगल ग्रह है। यह ढपली की तरह दिखायी देता है। इस नक्षत्र का देवता वसुस और लिंग स्री है। यह नक्षत्र चार तारों से मिलकर बना होता है। इसकी आकृति मण्डल, मुरज या मृदंग के समान दिखाई देती है। प्राचीन मतान्तर अनुसार इसमें 114 ताराओं का समूह और सात पंक्तियां होती हैं। धनिष्ठा नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता अष्ट वसवास हैं। धनिष्ठा नक्षत्र धन एवं वैभव की स्थिति को दर्शाता है। धनिष्ठा नक्षत्र का जातक धन संपन्न होता है, जातक परोपकार के कामों में धन खर्च करता है। धनिष्ठा का प्राचीन नाम श्रविष्ठा रहा है, श्रविष्ठा का अर्थ है जिसके बारे में बहुत कुछ सुनने को मिले या बहुचर्चित एवं सुप्रसिद्ध।

धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल है, वहीं राशि स्वामी शनि है। मंगल का नक्षत्र होने से ऐसे जातक ऊर्जावान, तेजस्वी, पराक्रमी, परिश्रम के द्वारा सफलता पाने वाला होता है। धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम दो चरणों में जन्मा जातक गू, गे नाम से जाना जा सकता है। कुंभ राशि में जन्मा होने से ऐसे जातक स्थिर स्वभाव के होते हैं। यह नक्षत्र एक संगीतमय ढ़ोल व स्वर समता से संबंधित है। इस नक्षत्र में उत्पन्न हुए लोगों में संगीत के प्रति प्राकृतिक योग्यता होती है तथा जीवन के समस्त पहलुओं से उनका उत्तम तालमेल होता है।

व्यक्तित्व -

यदि आपका जन्म नक्षत्र धनिष्ठा है तो आप लम्बी कद-काठी के सुंदर होते हैं, आप तेज दिमाग के बुद्धिमान हैं और अपने काम को दक्षता के साथ करते हैं, आप महत्वाकांक्षी हैं और संगीत भी पसंद करते हैं, आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं और अपने हर एक काम में दक्ष हैं। परिस्थिति के अनुसार स्वयं को ढालने में आप कुशल हैं। मन, कर्म व वचन से आप किसी को कष्ट नहीं देते। आपका दिमाग़ काफ़ी तेज़ है और आप ज्ञान प्राप्त करने के लिए सदैव तैयार रहते हैं। आपकी मोहक मुस्कान आपके व्यक्तित्व को आकर्षित करने की शक्ति प्रदान करती है। आप धर्मात्मा प्रवृत्ति के हैं और अपनी योग्यता, चरित्र व प्रयत्नों से सदैव शुभ आचरण करने का प्रयास करते हैं। बातचीत करने में कुशल होने के कारण आप दूसरों का स्नेह और समर्थन आसानी से प्राप्त कर लेते हैं। दूसरों को उचित आदर व सम्मान देना आपको भली-भांति आता है। सभी लोग आपके समीप रहकर प्रसन्नता व संतोष पाते हैं। आप हँसमुख, मिलनसार व सामाजिक हैं, इसलिए अकेले रहना आपको पसंद नहीं है। लोगों के साथ घुलना मिलना आपको अच्छा लगता है।

आप अत्यधिक ज्ञान और तीक्ष्ण बुद्धि के कारण जीवन में नयी ऊचाईयों को छूते हैं। अधिकतर घनिष्ठा जातकों को इतिहास या विज्ञान के क्षेत्रों में कार्यरत देखा गया है। रिसर्च और वकालत के क्षेत्रों में आप तरक्की पाते हैं। आप धर्मपरायण व उत्साही हैं, इसलिए अपने कर्तव्यों व दायित्वों से मुँह मोड़ना आपको अच्छा नहीं लगता। सभी विघ्न-बाधाओं व मुश्किलों का मुक़ाबला करना आपका स्वभाव है। आपकी नृत्य व संगीत में रुचि है और आप एक कुशल गायक व नर्तक भी बन सकते हैं। वाद-विवाद करने में आप सर्वोपरि हैं इसलिए राजनीति व वकालत के क्षेत्रों में विशेष सफलता प्राप्त कर सकते हैं। आप में किसी भी बात को गुप्त रखने की जन्म-जात योग्यता होने के कारण आप ख़ुफ़िया विभाग या उच्चाधिकारियों के निजी सचिव के पद के लिए पूर्ण योग्य हैं। आपकी शिक्षा कुछ भी हो परंतु आप अपनी बुद्धिमानी के लिये जाने जाते हैं। हर समय कुछ-न-कुछ करते रहना आपकी आदत में शुमार है। अपनी लगन एवं क्रियाशीलता के कारण आप अपनी मंज़िल प्राप्त करने में सफल रहेंगे। आप काफ़ी महत्वाकांक्षी भी हैं और जो कुछ मन में ठान लेते हैं उसके प्रति निश्चय पूर्वक तब तक जुटे रहते हैं जब तक की वह कार्य सफल न हो जाए। अधिकार जमाने में भी आप काफ़ी आगे रहते हैं। लोगों पर अपना प्रभाव बनाये रखना आपको पसंद है इसलिए जो भी कार्य आप करते हैं उसमें सावधानी का ख़्याल रखते हैं और हमेशा सचेत रहते हैं। आपके अंदर स्वाभिमान की भावना भरी हुई है इसलिए आप अपने मान-सम्मान को जीवन में सबसे अधिक महत्व देते हैं। आपकी बौद्धिक क्षमता अच्छी है और आप किसी भी विषय में तुरंत निर्णय लेने में सक्षम हैं। इसमें आपको किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं महसूस होती है। अपनी निर्णयात्मक क्षमता से आप जीवन में अच्छी सफलता हासिल करते हैं। व्यवसाय की बजाय नौकरी को आप अधिक पसंद करते हैं। वैसे आप नौकरी में हों या व्यवसाय में दोनों में ही अच्छी सफलता पाते हैं।

धनिष्ठा नक्षत्र जातक का व्यवसाय -

यदि आपका जन्म नक्षत्र धनिष्ठा है तो आप व्यवसाय की तुलना में नौकरी को अधिक पसंद करते हैं। हालांकि, आप नौकरी और व्यापार दोनों में ही उच्च पद को प्राप्त करने की योग्यता रखते हैं। आप गीत संगीत से जुड़े काम करने में भी रुचि रखते हैं। मनोरंजन से जुड़े काम इनके लिए बेहतर होते हैं, मनोरंजन क्षेत्र से संबंधित काम, रेडियो और दूर-दर्शन में कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले काम, सेना में बैंड दल, आभूषण के व्यापारी, सुनार, एथलीट, बैंक अधिकारी, वित्त प्रबंधन के काम, भू संपदा का व्यापार, वाद्य यंत्र विक्रेता, कवि, गीतकार, गायक व संगीतकार, ज्योतिषी, तांत्रिक, अध्यात्मिक चिकित्सा करने वाले काम, शल्य चिकित्सा के कार्य, कारीगर एवं तकनीशियन. व्यवस्थापक अथवा प्रशासन अधिकारी, इतिहासकार, संगीतज्ञ, मंच कलाकार, खिलाड़ी, वैज्ञानिक या भौतिकी विशेषज्ञ, कंप्यूटर से जुड़े कार्य, सैनिक,,  इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने या बनाने वाले, प्रशासन अधिकारी आदि बनकर सफल हो सकते हैं। आपके लिए इंजीनियरिंग व हार्ड वेयर का क्षेत्र भी अधिक अनुकूल है। व्यवसाय की दृष्टि से आपके लिए प्रोपर्टी का काम अधिक लाभप्रद है।

पारिवारिक जीवन -

आपको अपने भाई-बहनों से विशेष लगाव होता है और वैवाहिक जीवन सुखी रहता है। जीवनसाथी भाग्यशाली सिद्ध होगा। उत्तराधिकारी के रूप में आपको काफ़ी संपत्ति मिलेगी परंतु सुसराल पक्ष से कोई लाभ नहीं मिलेगा। आपका जीवनसाथी दयालु व परोपकारी प्रवृति का होगा और आय से अधिक ख़र्च करना उसका स्वभाव हो सकता है। विवाह के बाद ही आपकी आर्थिक उन्नति अधिक होती है।

स्वास्थ्य -

यह भचक्र का तेईसवाँ नक्षत्र है और मंगल इस नक्षत्र का स्वामी है। इस नक्षत्र में पीठ और गुदा भाग को स्थान प्राप्त है। इस नक्षत्र के पहले व दूसरे चरण में घुटने की ऊपर की हड्डी आती है जो टोपी के समान दिखती है, तीसरे व चतुर्थ चरण में टखने, टखने और घुटनों के बीच का भाग आता है। इस नक्षत्र को मंगल के कारण पित्त प्रधान नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र के पीड़ित होने पर नक्षत्र से संबंधित अंगों में परेशानी का अनुभव हो सकता है।

सकारात्मक पक्ष-

इस नक्षत्र में जन्मे लोग बहुमुखी प्रतिभा और बुद्धि के धनी होते हैं। ये कई.कई क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल किए हुए होते हैं। ये सामजिक योजनाकार, अच्छे शिक्षाविद और अच्छे व्यवस्थापक भी होते हैं। इनमें जमा करने और संसाधनों को इकट्ठा करने की शक्ति निहित होती है।

नकारात्मक पक्ष -

धनिष्ठा नक्षत्र में जन्मे जातक का मंगल यदि खराब है तो जातक अधिकतर अभिमानीए अड़ियल तथा जिद्दी स्वभाव का हो जाएगा। इसी स्वभाव के कारण अनेक तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। मंगल का शुभ प्रभाव खत्म हो जाता है।

धनिष्ठा नक्षत्र वैदिक मंत्र -

ॐ वसो:पवित्रमसि शतधारंवसो: पवित्रमसि सहत्रधारम।

देवस्त्वासविता पुनातुवसो: पवित्रेणशतधारेण सुप्वाकामधुक्ष:।

ॐ वसुभ्यो नम: ।

धनिष्ठा नक्षत्र उपाय -

धनिष्ठा नक्षत्र के जातक के लिए सिंह वाहिनी माँ दुर्गा की पूजा करना शुभफलदायक होता है। 

देवी मंत्र जाप भी इनके लिए लाभकारी होती है। 

देवी के पवित्र स्थानों की यात्रा करना एवं जागरण इत्यादि में भाग लेना भी शुभदायक माना जाता है। 

दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से जातक को सुख एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है। 

भगवान शिव की पूजा को भी इस नक्षत्र के लिए शुभफलदायक माना जाता है। 

विष्णु भगवान का स्मरण एवं विष्णु सहस्त्रनाम का जाप भी उत्तम होता है,

धनिष्ठा नक्षत्र के जातक के लिए लाल, नीले और सुनहरे पीले रंगों का उपयोग अच्छा माना जाता है।

अन्य तथ्य -

  • नक्षत्र - धनिष्ठा
  • राशि - मकर-2, कुम्भ-2
  • वश्य - जलचर-2, नर-2
  • योनी - सिंह
  • महावैर - गज
  • राशि स्वामी - शनि
  • गण - राक्षस
  • नाड़ी - मध्य
  • तत्व - पृथ्वी-2, वायु-2
  • स्वभाव(संज्ञा) - चर
  • नक्षत्र देवता - वसु
  • पंचशला वेध – विशाखा
  • प्रतीक - ड्रम, बांसुरी, ढोल या मृदंग
  • देवता - वासु
  • वृक्ष - शमी
  • रंग - हल्का ग्रे
  • अक्षर - गू, गे, ज
  • नक्षत्र स्वामी - मंगल
  • राशि स्वामी - शनि
  • शारीरिक गठन - प्रायः इस नक्षत्र के लोग दुबले शरीर वाले होते हैं।

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Dr. Arun Bansal

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